Posted by: डॉ. हरदीप संधु | सितम्बर 29, 2016

1674

1संजय त्रिवेदी अविनाश 

sanjay-trivedi1
मन सूना सा
कोई नहीं अपना
सब परा
3

दोस्ती हो जैसे
मधुर अहसास
हरे संताप
5

निकली गोली
सीने में है पैबस्त
जिंदगी अस्त

6
कस्तूरी देह
प्रणय- निमंत्रण
भटका मन ।
7
मृग तृष्णा सा
हृदय यायावर
उलझा मन
8
नीरव रैन
सरसर पवन
मुदित मन
-0-

द्वारा पुष्कर एजेन्सी

ए टी रोड , तिनसुकिया-786 125 (असम)

94350-35043

88222-35043

-0-

 2-रंजना त्रिखा

1
रंग पिया के
नई नवेली रची
लजीले नैन ।
2
रचे रंगोली
रंग मन भावन
पाहुन आए ।
3
सिन्दूरी नभ
अद्भुत है चितेरा 
मोहक चित्र ।
4
रंग छिटके
गुलनारी संध्या के
अदृश्य तूली ।
5
मन के रंग
पल पल बदलें
मनुज वृत्ति ।
6
प्रीत के रंग
आँखों से झलकते
छुप न पाएँ ।
7
तितली पंख
किसकी तूलिका यों
भरती रंग !

-0- 

Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | सितम्बर 27, 2016

1673

डॉ सरस्वती माथुर

1

कठिन रास्ता 
मिली जब मंज़िल

सुगम हुआ।
2
भूली है रस्ता
बाँस- झुरमुट में 
पगली हवा ।
3.
मंज़िल मिली 
आशाओं के अंकुर
फूटने लगे।
4
गाँवों का रास्ता 
शहर जो पहुँचा, 
कहाँ खो गया ?
5
मंज़िल दूर 
पथ मिल जाए तो 
लौटना नहीं।

5

आदि ना अंत 
समय गतिमान 
बहे अनंत ।
6
बेलगाम है 
समय का घोड़ा भी
रुकता कहाँ !
7
मन -सुमन 
समय की तितली 
हाथ ना आए । 

-0-

2-प्रदीप कुमार दाश ‘दीपक’
1
झरे निर्झर
गाते वे झर-झर
गिरि गौरव ।
2
लिखा माँ नाम
कलम बोल उठी
है चारों धाम ।
3
धान के फूल
खिले देख मुस्काए
खुश किसान ।
4
ऊषा सुंदरी
स्वच्छ जल में निज
देखती छवि ।
5
झरते पत्ते
गीत गाते विदा के
सच रो पड़े ।
-0-साँकरा, जिला- रायगढ़ (छ.ग.)
मोबा 7828104111

-0-

Posted by: डॉ. हरदीप संधु | सितम्बर 26, 2016

1672

1-डॉ योगेन्द्रनाथ शर्मा ‘अरुण’

छल

1

मुझको खला
भरोसा देके पूरा
बहुत   छला ।

2

आदमी ही है
नेक था कभी,अब
छलता भी है ।

3

छलो  कितना
विश्वास बना रहे
खलो इतना ।

4

जंगल  जले
बने कंक्रीट वन
आँखों के तले ।

5

रोएँगे  कल
तड़पेंगे प्यास से
ना होगा जल ।

-0-

2-सुशील शर्मा

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Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | सितम्बर 17, 2016

1671

1-सम्मान  ( हिन्दी हाइकु की चर्चित हस्ताक्षर दीदी पुष्पा मेहरा को ‘नारी अस्मिता, बडोदरा , गुजरात द्वारा सम्मानित किया गया है। हाइकु परिवार की ओर से बहुत सारी बधाई !!) सम्पादक द्वय

20160916123544_00001

2-ललित कर्मा

1

झिलमिलाती
अँधेरे आकाश मे
तारों की लड़ी ।
2
आज के तारें
भविष्य के सूरज
जतन करें ।
3
साँझ नायिका
माथ केसर- बिंदी
श्याम चुनर।
4
टूटता तारा
झट याद करके
मांगी मुराद ।
5
अरुणोदय
देख फूल मुस्काएँ
महकी धरा ।
6
श्याम ओढ़नी
टाँके चाँद-सितारे
झिलमिलाते ।
7
तारों की लड़ी
जलती फूलझड़ी
चमके बड़ी।
8
सूरज आया
नया सवेरा लाया
मन को भाया ।..
9

नैन निहारें

माता-पिता कहाँ रे?
नभ के तारे
-0-lalitkarma@gmail.com

-0-

3-महेन्द्र देवांगन माटी

1

माटी जीवन
माटी में मिल जाना
माटी ही माटी ।

2

माटी का घर
दरकते दीवारें
डरते बच्चे ।

3

माटी खातिर
देंगे अपनी जान
माटी न देंगे ।

महेन्द्र देवांगन ‘माटी
पंडरिया  (कवर्धा )

mahendradewanganmati@gmail.com

-0-

4-चाँद-डॉ मधु त्रिवेदी

1

चाँद पर मैं
बना के एक बस्ती
मधु त्रिवेदी
संग रहूँगी

2

कर सिंगार
झिलमिल तारों का

मुस्कराऊँ मै

3

प्रिय मुझसे

बसे हैं कोसों दूर
नभ की दूरी ।

4

बाहुपाश में
न बाँध पाऊँ चाँद
हो जाता दूर।

-0-

5-हाइगा- प्रदीप कुमार दाश

 001

 

 

+002

003

-0-

5-डॉ सरस्वती माथुर

 1

भाषा नभ पे

तारे सी चमकती

हिन्दी  की  बोली।

2

 सभी भाषाएँ

एक दूजे की होती

हैं हमजोली।

3

मंदिर हिन्दी

भाषा आँगन लगे

सजी रंगोली ।

4

ज्ञान-सागर 

कानों में रस घोले 

हिन्दी  की बोली ।

5

मीठी सी बोली

विश्व में दमकती 

हिन्दी   की रोली ।

6

हिन्दी  दिवस 

अमृत रस भरा 

ज्ञान कलश ।

-0-

6-सुशील शर्मा

 1

पूरा बाज़ार

अंग्रेजी के तलवे

हिन्दी  बेजार।

2

स्थानीय भाषा

सिकुड़ता साहित्य

जवाब मौन।

0-

Posted by: डॉ. हरदीप संधु | सितम्बर 14, 2016

1670

1-विभा रश्मि

1

हिन्दी – सौगात
है उद्गारों की बात
भाषा भी  ख्यात ।

2

देवनागरी
लिपि में सजे हिंदी
भाल ज्यों बिंदी ।

3

माता की बोली
बोल रे हमजोली
सजे – रंगोली ।

4

पुस्तकालय
देते  ताल – लय
हिन्दी की जय ।

5

समृद्ध -भाषा
समर्पित मनीषी
करें मनन ।

6

भारत माँ की
आराधना की भाषा
जाग्रत -आशा ।

7

विश्व में ध्वज
हिंदी ने फहराया
यश है पाया ।

-0-

2-बिटिया नेहा  के जन्म दिन पर
1

photogrid_1442209481074बिटिया हँसी
सितारों सी चमकी
आँखों में बसी।

2

नेह अपार
मेरी गोद समाया

उसे जो पाया।

3

नन्ही -सी कली
मेरी आँखों में पली
महकी गली।

4

पापा की परी
है सबकी दुलारी
जग से न्यारी।

5

माँ-माँ” कहती
पायल खनकाती
मन लुभाती।

6

हों जैसे मेघा
नेह से लबालब
नेहाके नेहा।

7

है मीलों दूर
पर दिल में बसी

वो- जैसे ख़ुशी !

8

उसकी दुआ 

ज्यों मन्नत के धागे 

घर को बाँधे !

9

घर-अँगना

बिटिया बिन सूना 

मन का कोना !

10

दिल की आस

वो घर का उजास 

सदा है पास ! 

-0-अनिता ललित

-0-

3-अनिता मण्डा

1
चाँद उतरा
छत मुँडेर पर
वो दबे पाँव ।
2
पुरवा दूर
शहनाई बजा
मन अकेला।
3.
सूर्यग्रहण
अपनों के बीच में
परायापन।
4.
सदियाँ बीती
पदचाप सुनते
आया न कोई।
5
हर्षित हुआ
लहरों पे थिरके
सूर्य सलोना।
6
किरणजाल
लहरों पर डाला
फँसा सूरज।
7
कातती भोर
उठ नित सवेरे
उजली डोर।
8
भावकलश
छलक गया रस
मीठा सरस।
9
पत्तों पे बैठी
चिलचिलाती धूप
काँपती छाँव।
—0—

4-डॉ जेन्नी शबनम

1

मन की बात

कह पाएँ सबसे

हिन्दी के साथ।

2

हिन्दी रूठी है

अंग्रेज़ी मातृभाषा

बन ऐंठी है।

3

सपना दिखा

हिन्दी अब भी रोती

आज़ादी बाद।

4

हिन्दी की बोली

मात खाती रहती

पढ़े लिखों से।

5

हिन्दी दिवस

एक दिन का जश्न

फिर अँधेरा।

6

हमारी हिन्दी

हमारा अभिमान

सब दो मान।

7

है इन्कलाब

सब जुट जाएँ तो

हिन्दी की शान।

8

हिन्दी हँसती

राजभाषा तो बनी,

कहने भर।

9

सुबह होगी

देश के ललाट पे

हिन्दी खिलेगी।

-0-

 

Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | सितम्बर 12, 2016

1669

1-सुदर्शन रत्नाकर

1

रिश्तों का बोझ

पड़ने लगा भारी

दुनिया न्यारी।

2

महके फूल

जीवन बगिया में

बेटी जो आई।

3

ऊँची दीवारें

खिंच गईं दिलों में

प्रेम विहीन।

4

आ मिल बोएँ

दिल की धरती में

बीज प्यार के।

5

झूठी है होती

सपनों की दुनिया

क्षितिज जैसी।

6

दुख पराया

बहें जो आँसू तेरे

चमकें -हीरे।

7

मन चंचल

भटके चहूँ ओर

नहीं है ठौर।

8

धरा है , नारी

सब कुछ सहती

पड़ती भारी।

9

मन चंचल

घूमता चहूँ ओर

नहीं है ठौर।

-0-

2-जीडॉ योगेन्द्र नाथ शर्मा  अरुण

1

%e0%a4%a1%e0%a5%89-%e0%a4%85%e0%a4%b0%e0%a5%81%e0%a4%a3जागृत आशा
अंकुरित जीवन
दूर निराशा

2

मन हर्षित
हरियाली है छाई
वन गर्वित

3

टूटे सपने
झरते हैं नयन
रूठे अपने

4

मीत बुलाए
हलचल मन में
जी ललचाए

5

नील गगन
लाल हुआ पल में
लगी अगन
-0-

3नीति राठौर
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अधूरी आस
बिन प्रिय उदास
आ जाओ पास ।

2
सावन ऋतु
बदरा नीर भरे
जियरा जले ।
-0-
neeti4268@gmail.com

Posted by: डॉ. हरदीप संधु | सितम्बर 11, 2016

1668

रमेशराज , अलीगढ़

1

नाम लिखा था

हमने जल पर

खोये अक्षर

2

कविता क्या है ?

शिशु-हित ममता

दुग्ध-कथा है।

3

कविता क्या है

इक विरदावली

राजनीति की ?

4

कविता क्या है

पायल छनछन  ?

भोले-ताण्डव  ?

5

कविता क्या है

हर विचार पर

छंदबद्धता  ?

6

अब की मीरा

धन पशु के पद

लिखे अधीरा ।

7

विष की वर्षा

अब रसना पर

बसी मन्थरा ।

8

खींचें  कॉलर

घर पर – बाहर

मित्रों से डर ।

9

दे देंगे जल

बस सागर पर

बोले बादल  ।

10

ठाठ झूठ के

पुजता अब छल

सोना पीतल ।

11

साँचा अक्सर

हर महफिल में

खूँ से हो तर ।

12

पोल खोल दे

डर मत इतना

सत्य बोल दे  ।

13

लाज बचाओ

कल न बन्धुवर

आज बचाओ।

14

पाप कहेंगे

छल को कल छल

आप कहेंगे।

15

आस किसे है

भग जा जलधर

प्यास किसे है?

16

यारो गति दो

थकें न मग पग

प्यारो गति दो।

17

लोग न माने

दिये बहुत दुःख

रोग न माने।

18

तीर हमेशा

हर अन्तर अब

पीर हमेशा।

19

चाल सियासी

लेकर मत चल

जाल सियासी।

20

तब भी होरी

पल-पल गलता

अब भी होरी

21

फाँस प्यार में

पल-पल सुबकें

साँस प्यार में।

-0-

 

Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | सितम्बर 5, 2016

1667

1-भावना सक्सैना

1

देकर ज्ञान

गुरु जीना सिखाए

शीश नवाएँ

2

सिखा के गुर

आशीष बरसाए

आगे ढ़ाए।

3

दुर्गम राहें

सुगम बन जाएँ,

पा गुरुमंत्र

4

ज्ञान की  ज्योति

सतगुरु जलाए

राह दिखाए।

5

स्नेह अपार

शिक्षा उपहार

ज्ञान के द्वार।

6

नित्य नमन

वंदन बार बार

गुरु उदार।

-0-

1

होती है गुरु

ये जीवनसंगीत 

माँ से ही शुरू !

2

गुरु सुधारें 

व्यक्तित्व को निखारें 

राह सँवारें !

3

ये सुखदुःख 

जीवन सफ़र के 

मीलपत्थर !

4

बातें ज्यों फूल !

संतमुख से झरे– 

बुहारें शूल

5

दुश्मनी भाई !-

तेरे दिए घावों ने 

दोस्ती सिखाई !

-0-

2-अनिता ललित 

 

Posted by: डॉ. हरदीप संधु | सितम्बर 5, 2016

1666

सड़क ४

मित्र

रँगोली

दीप कोश कागज़ी नाव अवरोध नं . २.

Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | अगस्त 31, 2016

1665

1-बग़ीचा मेरा-प्रेरणा शर्मा

बगीचा मेरा1

इतवार को

इंतज़ार करता

बग़ीचा मेरा।

2

प्रत्यूष-काल

सुनहली किरणें

स्वागतातुर।

3

ओस की बूँदें

मोती सी चमकती

हरी दूब पे।

4

प्राची-अरु

रक्ताभ मनोहर

प्रकृति हँसी।

5

बग़ीचे-बीच

तुलसी का बिरवा 

दादी सींचती।

6

गुलाब खिले

झरते हारसिंगार

बिखरी स्मित

7

तितली रानी

पूछती सुमनों से

क्या हाल है जी?

8

खिलती धूप

पत्तों से छनकर

धरा से मिले।

9

भ्रमर झूमें

मकरंद पीकर

कलियाँ खिलीं

10

मन उड़ता

नीलाभ गगन में

बिना पर के।

-0-

प्रेरणा शर्मा,228 प्रताप नगर, खातीपुरा रोड

वैशाली नगर ,जयपुर-राजस्थान ।

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