Posted by: हरदीप कौर संधु | मई 27, 2020

2036

Posted by: हरदीप कौर संधु | मई 24, 2020

2035

Posted by: हरदीप कौर संधु | मई 22, 2020

2034

रमेश कुमार सोनी 

पेड़ कटे हैं

हल्ला-पानी पिलाओ 

लू मौत गिने । 

न्याय माँगते 

मोमबत्ती की रैली 

दरिंदे हँसे ! 

युवा गौरैया 

गोद भराती डरे 

भ्रूण की जाँच ।       

खेत लिखते 

बाज़ार ही जाँचेंगे 

भूख का पर्चा ।      

मक्के के खेत 

खो-खो खेलते तोते 

प्रेम पकता ।      

मत्स्य उमंग 

जलपरी तैरती 

आग लगाती    

जामुन फले 

पेड़ का काला टीका 

बुरी नज़र ।     

मेघ के छौने 

गगन नाप देते 

घमंड तोड़े ।  

9

सूर्य सुखाता 

उपले भित्ति टँगे 

गाँव की यात्रा ।

10 

जहाजी पक्षी 

वस्त्र बदल थका 

यात्रा एकाकी ।

11

सैन्य चयन 

शहीद की विधवा 

जौहर काँपे ।

-0-

रमेश कुमार सोनी ,जे पी रोड – बसना ,जिला – महासमुंद , छत्तीसगढ़ 

7049355476 

Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | मई 21, 2020

2033

1-चन्द्रमा- गौरव वाजपेयी ‘स्वप्निल’

1

झीना-सा पर्दा

रूप-राग झरता

मन हरता

2

नभ की बस्ती

यामिनी का छज्जा है

चंदा की हस्ती

3

रूप की राशि

मुक्तहस्त बाँट दे

तम छाँट दे

4

शशि का मुख

देख रही धरती

मर मिटती

5

विलक्षण है

सौन्दर्य अनुपम

क्षण-क्षण है

6

तुम हो कथा

प्रियतम की आस

नभ के पास

7

नभ के फूल

धरा पर सुगन्ध

मानो हो छंद

8

नभ की छन्नी

छानती उजियास

भेजती आस

9

चाँद हो तुम

हृदय में निकले

तम पिघले

10

दिखी हो तुम

टिमटिमाया चाँद

अब मैं गुम

11

रूप की छटा

विस्मित हो तकता

नहीं थकता

-0-

परिचय-
गौरव वाजपेयी ‘स्वप्निल’
जन्म:15 अगस्त 1977, शाहजहाँपुर (उत्तर प्रदेश)
शिक्षा-एम बी ए (मार्केटिंग इकोनॉमिक्स) (लखनऊ विश्वविद्यालय)
सम्पर्क-गौरव वाजपेयी ‘स्वप्निल’,(कर अधिकारी),जिला पंचायत परिसर
निकट-सन्तोषी माता मन्दिर,गोंडा रोड,बलरामपुर (उत्तर प्रदेश)
पिन कोड-271201
ई मेल-swapnil.gaurav@gmail.com

-0-

2-गिर्राज प्रसाद गौतम ‘कथित’

1

सीधी-सी बात

चाहता बदलाव

स्वयं से कर.

2

क्यों परेशान?

अभी भी जीवित है

दूर्वा की जिद.

 3

किया अंतर

कथनी करनी में

मनमुटाव.

4

बीता है कल

आने वाला है कल

हाथ में पल.

5

 अंत लड़ाई

लड़नी है अकेले

समझ भाई.

6

जितने फन

उतनी फुफकारें

किसे पुकारें?

— 0 —

2-जी पी गौतम ‘कथित’

hello@gpgautam.com

-0-

Posted by: हरदीप कौर संधु | मई 20, 2020

2032

मोहनलाल जाँगिड़

Posted by: हरदीप कौर संधु | मई 19, 2020

2031

1-माँ

डॉ. सुरंगमा यादव

1

माँ मानस -सी

माँ पूजा की थाली -सी

मंगलकारी।

2

संस्कार देती

भविष्य सँवारती

पूजनीय माँ।

3

माँ,महाकाव्य

वात्सल्य के इसमें

सर्ग अनेक।

4

बेटी सयानी

माँ ने सहेज रखी

छठी की फ्राक।

5

बेटे की याद

फोन की घण्टी पर

माँ रखे कान।

6

बच्चों ने खाई

माँ तो देख अघाई

रोटी थी कम।

7

हुई विदाई

वृद्धाश्रम में जाती

बुढ़िया माई।

8

माँ का डिठौना

ढाल बन लड़ता

बुरी बला से।

9

माँ के हाथ की

घी- चुपड़ी पनेथी

यादों में शेष।

10

वीडियो कॉल

फेरे कैसे ममता

बेटे पे हाथ।

-0-

2-

सविता अग्रवाल ‘सवि’ (कैनेडा)

email savita51@yahoo.co

1

माँ की ममता

गर्दिशों में धूप -सी

आस किरण ।

2

माँ का जीवन

लिख ना पाते शब्द

मैं हूँ निस्तब्ध ।

3

खिले अँगना

माँ के ही दुलार से

घर सजता ।

4

माँ अनमोल

ममत्व से सम्पूर्ण

तोल ना पाई ।

5

माँ की ममता

ढूँढती मैं रहती

यादें सतातीं ।

6

माँ की दुआएँ

कवच पहनातीं

हौसला लातीं ।

7

खिलाती रोटी

गूँथ प्यार का आटा

पेट भरती ।

8

माँ का आँचल

समेटे सब दुःख

पोंछता आँसू ।

9

ममतामयी

करती न्योछावर

सारा जीवन ।

10

मन दर्पण

करे स्व समर्पण

माँ सा ना कोई ।

11

करती चिंता

बच्चों के सुख की ही

आस लगाती ।

12

माँ अनमोल

कहे ना कभी व्यथा

करे सृजन ।

   email savita51@yahoo.co

-0-

3-अंजु गुप्ता

1

माथे बिंदिया,

बँधी पग पायल,

मुरीद पिया !

 2

बजे घुँघरू,

फिर सारी रतिया,

ढला यौवन !

-0-

4- राजेश कुमार कौशल

1

rajesh phtकोरोना काल             

अदृश्य वायरस 

प्राण घातक    

2

लक्ष्मण-रेखा 

ऐ ! मत कर पार

ड्रैगन बम .

3

कोरोना -पथ

जन-तन दूरियाँ

अवरोधक

4

लॉकडाउन

रामबाण औषधि

घर में  रहो

5

अभिनन्दन

चिकित्सक पुलिस                

कोरोना योद्धा ।

6

सब्र रखिए                

पटरी  पे जिंदगी

लौट आएगी।

-0-

 राजेश कुमार कौशल,ढोह कन्जयाण , जिला  हमीरपुर , हिमाचल प्रदेश !
email : rajesh9kaushal@gmail.com

Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | मई 11, 2020

2030

 डॉ. शैलजा सक्सेना [ कैनेडा ]

1

सूरज आजा

हिम को भगाने को,

रश्मि-दंड ला !

2

कूका बसंत

क्यारियाँ मुस्कुराईं

महकी हवा।

3

रोने भी दो न !

क्यों चिपकाऊँ व्यर्थ,

मुस्कान झूठी!

4

पहाड़ खड़ा

धरा- आकाश बीच

जैसे ठहाका!

5

भरी झील ज्यों

धरा की नम आँखें

ताकें आकाश!

6

भँवरे सुनाए

मधु-पत्र पिया का

हवा मुस्काए !

7

तुम्हारा प्यार

खोलता अनदिखे

ज्योति के द्वार!

8

याद- बारिश

भीगता मन हुआ

मन भर का।

9

झरने बच्चे,

पहाडों के कंधों से

उतर भागे।

10.

भाग्य- रेखा से

धरा की हथेली पे

पेड़ की जडें।

11

हज़ारों डर,

खँरोंचते मन को

घायल तन।

12

गोरी लजाए

फूलों का रंग तक

लाल हो जाए।

13

शब्द- मीनारें

छिपाती हैं चेहरे

है प्यार कहाँ?

14

क्षणिक मृत्यु

रोज़ चली आती है

नींद बनके!

-0-

Posted by: हरदीप कौर संधु | मई 9, 2020

2029-कृष्णा वर्मा

 

 

 

 

 

 

 

Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | मई 8, 2020

2028

Posted by: हरदीप कौर संधु | मई 6, 2020

2027

 डॉ.सुधा गुप्ता

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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