Posted by: हरदीप कौर संधु | अक्टूबर 21, 2019

2050

1-कृष्णा वर्मा

1

डाल के पंछी

बाँचते हवाओं से

पेड़ों की व्यथा।

2

रुत सावनी

बाहर बरसातें

भीगता मन।

3

जुलाहे बुन

सिरजन की धुन

मोहती मन!

4

छुएँ सपन

धड़के पलकों का

नाज़ुक दिल।

5

उतरा चाँद

पूनम की हवेली

प्रेम ले पाश।

6

कर्म निराले

अँधेरों में उजाले

वर्तिका पाले।

7

बंसवारियाँ

धरें अधरों पर

वेणु के स्वर।

8

मदिराए हैं

नख से शिख तक

प्रकृति अंग।

9

सूखे हैं धारे

मरे सरोवर औ

हंस बंजारे।

10

रिश्ते औ नाते

किश्तों में चलती हैं

अब तो साँसें।

11

उमर मरी

सुधियों की केतकी

हरी की हरी।

12

कंठ भर्राए

अतीत को समेटे

सुधि-चौराहे।

13

तेज़ जो चले

हवा बने तूफान

हौले ही भले।

14

होड़ के मारे

दौड़े ऐसी दौड़ कि

छूटे सहारे।

15

सुबह-शाम

अपनों की सोचते

हुई तमाम।

16

वक़्त की ढैया

दुर्दिन को ठेलते

टूटा पहिया।

17

कुतरें तोते

बाजों से मिल पंख

पखेरू रोते।

18

स्वजन खींचें

लक्ष्मन रेखाएँ क्यों

बाड़े बनाएँ।

19

गुपचुप -सी

दिल के पलने में

पलती पीर।

20

यादें तुम्हारी

तरल कर गईं

आँखें हमारी।

21

काँच के कंचे

दुनिया थी आबाद

बचपन की।

22

काठ के लट्टू

मन को थे नचाते

खुशी लुटाते।

23

टायर-हाँक

बटोरी थी खुशियाँ

हज़ारों लाख।

24

बिना काजल

चमकाएँ आँखें

बाल स्मृतियाँ।

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Posted by: हरदीप कौर संधु | अक्टूबर 18, 2019

2049-चाँद

डॉ जेन्नी शबनम
1.
बिछ जो गई
रोशनी की चादर
चाँद है खुश।
2.
सबका प्यारा
कई रिश्तों में दिखा
दुलारा चाँद।
3.
सह न सका
सूरज की तपिश
चाँद जा छुपा।
4.
धुँधला दिखा
प्रदूषण से हारा
पूर्णिमा चाँद।
5.
चंदा ओ चंदा
घर का संदेशा ला
याद सताती।
6.
रौशन जहाँ
शबाब पर चाँद
पूनम रात।
7.
चाँदनी गिरी
अमृत है बरसा
पूर्णिमा रात।
8.
पूनो की रात
चंदा ने खूब किया
अमृत वर्षा।
9.
मुख मलिन
प्रकाश प्रदूषण
तन्हा है चाँद।
10.
दिख न पाया
बिजली भरमार
चाँद का मुख।

Posted by: हरदीप कौर संधु | अक्टूबर 9, 2019

2048

1-सविता अग्रवाल ‘सवि’

1

नभ है खुला

पंखों में भी है जोश

आ उड़ चलें।

2

सुहाना दिन

मित्रों -संग ठहाके

मन प्रसन्न।

3

हाथ बढ़ाओ

सबको अपनाओ

करो ना देरी।

4

मार्गदर्शक

निज हित को भूल

राह दिखाए।

5

बालक मन

बेपरवाह-सा हो

खुशियाँ लाए।

6

चढ़े ऊँचाई

संकल्प जब साथ

पाँव न रुकें।

7

सवेरा लाए

सुनहरा-सा दिन

मन हर्षाए।

8

सक्षम करे

पथरीली राहें ही

बल बढ़ाएँ।

9

प्रेम का दीप

मकान में जला

तो घर बना।

10

जला दीपक

उजास भरे मन

तम मिटाए।

-0-

सविता अग्रवाल ‘सवि’ , कैनेडा

दूरभाष: (905) 671-8707

email: savita51@yahoo. Com

-0-

2-मनमोहन कृष्ण ‘भगत जी’

1

मन में वैर

असीमित अनन्त

पले रावण। 

2

राम अतृप्त

रावण ही पोषित

कैसे हो वध

3

राम की सीमा

रावण अगणित 

कैसे हो वध !

4

ममता माँ की

असीमित खजाना

सदा लुटाती

5

बेटों में वैर

माता माँगती खैर

वृदाश्रम में।

6

मन -मन्दिर

सब कुछ अंदर

यकीन कर।

7

प्यार से बोल

कानो में मिश्री घोल

कुछ ना मोल।

8

जीवन नैया

कौन ले जाता पार

कौन जानता !

9

देखो गौरैया

मिल गया दाना

अँगना नाचे।

10

हरित तोता

गावे,मन को भावे

कैदी बेचारा।

11

बूँद- बूँद  से

भरते हैं मटके

खाली झट से

12

तू नही साथ

ये तो गलत बात

एकला चलो।

13

रात की चीखें

सुबह बन्द हुई

मुन्नी सो गई!

-0-सम्पर्क-365 अग्रसेन नगर,श्री गंगानगर 335001 राजस्थान

mmkgoyal@gmail.com

मो- 77420-55464

Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | अक्टूबर 1, 2019

2047

1-डॉ शिवजी श्रीवास्तव

आज माँ के द्वितीय स्वरूप ब्रह्मचारिणी के पूजन का दिन है। सृष्टि कल्याण हित भगवान शिव को वरण करने हेतु माँ ने दीर्घ और कठिन तप किया इसी हेतु उन्हें तपश्चारिणी या ब्रह्मचारिणी कहा गया। माँ के ब्रह्मचारिणी रूप को नमन एक हाइकु के साथ-

1

बनीं तापसी,

सृष्टि हेत हित माँ,

ब्रह्मचारिणी

-0-

2-डॉ जेनी शबनम

रिश्ते

1.

कौन समझे

मन की संवेदना

रिश्ते जो टूटे।

2.

नहीं अपना

कौन किससे कहे

मन की व्यथा।

3.

दीमक लगी

अंदर से खोखले

सारे ही रिश्ते।

4.

कोई न सुने

कारुणिक पुकार

रिश्ते मृतक।

5.

मन है टूटा

रिश्तों के दाँव -पेंच

नहीं सुलझे।

6.

धोखे ही धोखे

रिश्तों के बाज़ार में

मुफ़्त में मिले।

7.

नसीब यही

आसमान से गिरे

धोखे थे रिश्ते।

8.

शिकस्त देते

अपनों की खाल में

फ़रेबी रिश्ते।

9.

जाल में फाँसे

बहेलिए-से रिश्ते

कत्ल ही करें।

10.

झूठ -फ़रेब

कैसे करें विश्वास

छलावा रिश्ते।

-0-

Posted by: हरदीप कौर संधु | सितम्बर 15, 2019

2046

रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

1
साथी सन्नाटा
जगा है रात दिन
मूक पहरा।
2
घोर अमा है
जीवन अघोरी सा-
अपना मन।
3
जलादो ग्रन्थ
जो कुचलें प्रेम को
घृणा ही बोएँ ।
4
नभ की स्मित
छिटकी रात भर
नन्हे शिशु -सी।
5
हाँफती आई
शत- शत उर्मियाँ
पग पखारें।
6
वासना- कीट
करता बदरंग
जीवन-रंग।
7
क्रूर का जाप
बनता अभिशाप
विष ही रोपे।

8
आग ही आग
उगलती है जीभ
पूजा के बाद।
9
शंका है सर्प
न सोए ,न सोने दे

नरक- द्वार।
10
दर्द न पूछो,
पाहन बन रहो
पूजे जाओगे।
11
प्रभु ने भेजे
अमृत घट भरे
पीते न बने।
12

विष में बुझी
भोंकी शब्द कटार
हँसे जीभर।
13
सोचा था कभी-
ज़माना बदलेंगे
मिटाया हमें।
14
झूठ का  तूल
बार बार उड़ाया
नापाआकाश।
15
अब तो चलें
तमाशा  खूब बने
रोना न कभी।

16

दुग्ध धवल
छिटकी है चंद्रिका,
भोली मुस्कान।
-0-

Posted by: हरदीप कौर संधु | सितम्बर 7, 2019

2045

 ज्योत्स्ना प्रदीप

1

तुम्हारा साथ

मन क्यों होता

जैसे अनाथ !

2

तूने छुआ था

पत्थर से मन में

कुछ न हुआ!

3

छल ही छल

‘अपने’ घूम रहे

भेस बदल !

4

कुछ नाते थे

तभी तक हम भी

इठलाते थे l

5

हँसी न आती

अधर -दहलीज

रोज़ बुलाती l

6

निर्मल -मन

तभी तो आँसू करें

रोज़ सिंचन !

7-

अपना कोई

जो हुआ न अपना,

अँखियाँ रोईं l

8

रहा मलाल

समझ नहीं पाये

लोगों की चाल!

9

एक ख़लिश

मन में सदा रही

कभी न बही !

10

दिल की सुनी

तभी तो तकलीफ़ें

हैं कई गुनी !

11

अपना कोई

होता कभी तो काश,

छूते आकाश !

12

मन अबोध

माँ नहीं ,पर बैठा

माँ की ही गोद l

-0-

 

Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | सितम्बर 5, 2019

2044

आज शिक्षक-दिवस (05/09/2019) पर कुछ हाइकु-सुमन अर्पित हैं! सबसे पहला श्रद्धा-सुमन ‘माँ’ को, जो हमारे जीवन की सर्वप्रथम शिक्षिका होती हैं। उसके बाद आदरणीय काम्बोज भैया जी को, जिन्होंने हमेशा हम सभी का निःस्वार्थ भाव से मार्ग-दर्शन किया!  आभारी हैं उन सभी व्यक्तियों के, जो जीवन के किसी न किसी मोड़ पर मिले और कुछ न कुछ सिखाकर गए!  शिक्षक-दिवस की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ!    अनिता ललित

1
माँ शिक्षा देती
दीपक-सी जलती
राह दिखाती।
2
गुरु सरीख़ा
सब जग में ढूँढ़ा
मिला न दूजा।
 3
गुरु की देन-
‘लड़ो चुनौतियों से
करो सामना!’
4
मंज़िल दूर
न थकन न हार-
गुरु जो संग!
5
आदर-भाव
संस्कारी मन ही है-
गुरु-दक्षिणा!

Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | सितम्बर 2, 2019

2043

1-डॉ.जेन्नी शबनम

साँझ पसरी

‘लौट आ मेरे चिड़े !’

अम्मा कहती।

2

साँझ की वेला

अपनों का संगम

रौशन नीड़।

3

क्षितिज पर

सूरज आँखें मींचे

साँझ निहारे।

4

साँझ उतरी

बेदम होके दौड़ी

रात के पास।

5

चाँद व तारे

साँझ की राह ताके

चमकने को।

6.

धुँधली साँझ

डूबता हुआ सूर्य

तप से जागा।

7

घर को चली

साँझ होने को आई

धूप बावरी।

8

नभ से आई

उतरकर साँझ

दीए जलाती।

9

गगन हँसा

बेपरवाह धूप

साँझ से हारी।

10

संध्या उदास

क्या करे दीया बाती

साथ न कोई।

-0-

2-परमजीतकौर ‘रीत’ (श्रीगंगानगर)

1

 नन्हे-से हाथ

सपनीली दुनिया

रँगती कूची

2

हरा सूरज

गुलाबी मोर-पंख

नन्ही कल्पन

3

नन्हे कुबेर

तृण-तृण आनंद

अमूल्य निधि

4

सभी परियाँ

सभी बाल गोपाल

मा-पिता हेतु

5

जंगली फूल

अभावों का आँगन

पलें बेफिक्र

-0-

मेल-kaurparamjeet611@gmail.com

Posted by: हरदीप कौर संधु | अगस्त 28, 2019

2042

1-मंजु मिश्रा

1

मानो गुलाल 

छायांकन- प्रीति अग्रवाल

उड़ा गया सूरज 

शर्मीली शाम।

2

लाली का टीका 

साँझ के माथे पर 

धरा सूर्य ने।

3

भेजी नभ ने 

सितारों की चुनरी 

शाम सजेगी।

4

आई है शाम 

बदली धरती ने 

नारंगी साड़ी।

5

लाल गगन 

शाम के सिंदूर में 

रंग रंगीला।

-0-Board Member @ UPMA (U.P. Mandal of America),Board Member @Narika

# 510-376-8175

www.manukavya.wordpress.com

-0-

2- ऋता शेखर मधु

1

बिटिया हँसी

बाग में खिल ग

जूही की कली

2

शहद रानी

असंख्य कोटरों में

भरे मिठास

3

चली पवन

पत्तियों ने दे दिया

दिशा -निर्देश

4

स्वागत करे

देहरी का तोरण

नम्र दोलन

5

अमा की रात

तिनके का सहारा

नन्हे जुगनू

6

नीला अम्बर

पिता ने तान दिया

नेह का छाता

7

जीवन-पथ

कहीं चले पैदल

कहीं है रथ

8

मन भँवर

बातें नाचती रहीं

सुनी -सुनाई

9

कूकी कोयल

सघन पीड़ा बनी

मीठी लगन

10

हवा पालकी

मोगरे की खुशबू

दुल्हन बनी

11

हल्की-सी बात

कपास बन उड़ी

छोर न कहीं

12

प्रीत बंधन

तितली और फूल

बागों में रचें

-0-

Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | अगस्त 23, 2019

2041-कुछ यादें भाई भूपाल सूद जी की

   मित्र , भाई और सच्चे सहयोगी श्री भूपाल सूद नहीं रहे। लघुकथा  हाइकु , ताँका , सेदोका , चोका , हाइबन , माहिया आदि  के एक मात्र बड़े प्रकाशक , कर्मठ व्यक्ति , बात के धनी और स्वाभिमानी , सबके प्रिय इस तरह चले जाएँगे कभी सोचा भी नहीं था । मैं और सुकेश साहनी जी तो पिछले 30 वर्षों से जुड़े थे हमारा लगभग पूरा साहित्य अयन प्रकाशन  द्वारा हुआ। काव्य की विभिन्न  विधाओं में अन्य साथियों की पुस्तक का प्रकाशन भी चर्चा में रहा, जिनमें प्रमुख हैं-डॉ सतीशराज पुष्करणा , सुदर्शन  रत्नाकर,डॉ भावना कुँअर, डॉ हरदीप सन्धु, रचना श्रीवास्तव, कृष्णा वर्मा ,  डॉ सुधा गुप्ता, उर्मिला अग्रवाल , शैलजा सक्सेना , पुष्पा मेहरा, अनिता ललित,डॉ ज्योत्स्ना शर्मा ,डॉ कविता भट्ट, रश्मि शर्मा, शशि पाधा,  श्याम  त्रिपाठी, प्रमुख हैं। सूद जी का सबके साथ अपनत्व का सम्बन्ध था। सभी साथियों की ओर से विनम्र श्रद्धांजलि ।

 

 

[‘महानगर की लघुकथाएँ’ और ‘ मेरी पसंद , भाग 3’ लघुकथा संग्रहों का विमोचन अयन प्रकाशन के स्टॉल पर कथादेश के सम्पादक हरिनारायण जी द्वारा दिनांक 12-01-2019 को किया गया।]

मेरी पसन्द भाग-3 का विमोचन हुआ।  इस अवसर पर श्री भूपाल सूद रामेश्वर काम्बोज , सुकेश साहनी, डॉ सुषमा गुप्ता और भावना सक्सैना उपस्थित रहे।

-0-

2019 के हाइकु-चोका -ताँका के  प्रमुख प्रकाशनों में स्वप्न शृंखला, गीले आखर और झरा प्यार निर्झर प्रमुख रहे।  

 

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