Posted by: डॉ. हरदीप संधु | अगस्त 25, 2016

1661

1-विभा रश्मि

MANJU GUPTA-MUMBAI

मंजु गुप्ता , मुम्बई द्वारा सज्जा

1
राधा छबीली
पथ निहारे गली
कान्हा से खेली ।
2
रूठे कन्हाई
यशोदा समझाए
उर लगाए  ।
3
तरु कद्म्ब
जमुना तीर झुका
नमन श्याम ।
4
रक्षा -कवच
बन के आजा कान्हा
बेटियाँ लुटीं ।
5
किशना प्यारी
गगरी वाली सारी
विरह मारी ।
6
बतियाँ सुन
राधा को लगी धुन
ठुनकीं , भुनी ।
7
गोधन ले के
चला गोधूलि बेला
वो अलबेला ।
8
श्याम पिय ने
सम्मोहित है किया
बँधी डोरी से ।
9
वृंदावन के
कुंजों में  छिपा फिरे
वो  चित्तचोर ।
10
वेणुगोपाल
धरा – ले अवतार
असुर बढ़े ।
11
नंद -नंदन
छटा भोरी बिखेर
भये चंदन ।
12
वेणु के स्वर
राधा आत्मविभोर
साँवरा उर ।

-0-

2-डॉ सरस्वती माथुर

1

बाट जोहती

कृष्णमय हो मीरा

होके बावरी ।

2

रास रचाए

जमना -तीरे आए

प्रेम निष्काम ।

3

जमुना तीर

सुन बाँसुरी राधा

 हुई अधीर ।

-0-

3-प्रदीप कुमार दाश ‘दीपक

1
सबसे अच्छी
वर्तमान की घड़ी
साथ चलती ।
2
वन के फूल
सेजों पे मुरझाए
काँटों में खिले ।
3
जीना न जीना
जो मर कर जिए
जीवन जीना ।
4
अहं के घेरे
भौतिक जगत में
दुःखों के डेरे ।
5
स्वार्थी संसार
भव के सागर में
पानी अपार ।
06
चाँदनी रात
चाँद चोर के लिए
देता पहरा ।
07.
कहाँ बरसें
गरजना जानते
सिंधु व मेघ ।
-0-
4-मधु त्रिवेदी

1

मनमोहन
मनभावन जन्म
घर – घर में ।

2

प्रीत की डोरि
बाँध राधा रानी के
पराया कान्हा।

3

हो गया अब
कैसे जिएँ जीवन
गोपियाँ अब

-0-

Posted by: डॉ. हरदीप संधु | अगस्त 21, 2016

1660

 भाई बहन का सम्बन्ध सार्वकालिक सम्बन्ध है।इस पर सदा लिखा जाए। रिश्तों को जोड़ने के दिन सभी दिन बन जाएँ। राखी पर ही हिन्दी हाइकु में प्रथम बार सीमा सिंघल सदाके हाइकु

 कलाई राखी सजेसीमा सिंघल 'सदा'

सीमा सिंघल सदा

1

अक्षत रोली

लगाकर भाई को

बाँधी है राखी !

2

पवित्र रिश्ता

विश्वास का बँधन

कायम रखे !

3

रेशम डोर

कलाई से बँधे तो

दुआ बनती

4

माथे तिलक

कलाई राखी सजे

खुश हो भाई !

5

दुआ की डोर

बाँधे पावन रिश्ता

सदा के लिए !

-0-

Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | अगस्त 18, 2016

1659

चहकती है राखी

1- जेन्नी शबनम 

1  

प्यारी बहना   

फूट-फूटके रोई   

भैया न आया !   

2 

4-राखीराखी है रोई   

सुने न अफ़साना   

कैसा ज़माना !   

3 

रिश्तों की क्यारी   

चहकती है राखी   

प्यार जो शेष !   

4

संदेशा भेजो   

आया राखी  त्योहार   

भैया के पास !   

5  

मन की पीड़ा   

भैया से कैसे कहें?   

राखी तू बता !   

6 

कह न पाई   

व्याकुल बहना,   

राखी निभाना !   

 7

संदेशा भेजो   

मचलती बहना   

आएगा भैया !   

8   

बहना रोए   

प्रेम का धागा लिये,   

रिश्ते दरके !   

9

सावन आया   

नैनों से नीर बहे   

नैहर छूटा !   

10  

मन में पीर   

मत होना अधीर   

आज है राखी !  

-0-

2-कमला निखुर्पा

15-राखी

पावस ऋतु

मगन है गगन

बदली संग ।

2

ढूँढे नभ को 

लिए हाथों में राखी

बिजली रानी।

3

पूजा की थाली

चम -चम चमके

भैया की राखी ।

4

नाजुक धागा

मजबूत बंधन

जुड़े दो मन।

-0-

3-डॉ ज्योत्स्ना शर्मा

1

मन -अम्बर

चमका ध्रुव तारा

स्नेह तुम्हारा !

2

सुहानी भोर

दुआओं के मोती हैं

नेह की डोर !

-0-

4-सुवना  डॉ अम्बुजा मलखेडक

1

भाई बहन

ड़ना झगड़ना

रिश्ते की शान

2

रक्षा बंधन

है पवित्र बंधन

भाई बहन

3

है खट्टा-मीठा

प्रेम स्नेह का नाता

खून का रिश्ता

4

हाँ मेरे भैया

सुख-दुःख बाँटते

आशिष देत

5

रक्षा का धागा

मुझसे बँधवाना

खुश रहना

6

है आकर्षित

भैया राखी के धागे

रंग बिरंगे

7

भैया मै रूठूँ,

देकर उपहार

मुझे मनाना

-0-

5-अनिता ललित

1

रिश्ता अमोल

बहना बस चाहे

दो मीठे बोल।

Posted by: डॉ. हरदीप संधु | अगस्त 18, 2016

1658

रक्षाबन्धन के पावन पर्व पर हिन्दी हाइकु की ओर से सबको हार्दिक बधाई ! भाई -बहन का यह नाता शाश्वत बना रहे ।

सम्पादक द्वय

डॉ हरदीप सन्धु और रामेश्वर काम्बोज

1-सुरेश जादव, बीनागंज

1
1-राखी
रेशम डोर
बाँ
धकर रखती
रिश्तों के छोर

2
राखी त्योहार
डाकिया भर लाया
झोले में प्यार

3
रो रही आँखें
देख सूनी कलाई
फौज में भाई

4
सजी कलाई
नेह बंधन बँधे
बहन-भाई

5
धागों से नेह
बाँध देती बहन
न्यारा जतन

-0-

2-डॉ सरस्वती माथुर
1
2-राखी
मीठे हैं बोल
पर्व है अनमोल
नेह है मोल।
2
बहना विभोर
भैया की कलाई पे
रेशमी डोर।
3
राखी का पर्व
सभी के मन भाया
उल्लास लाया।
4
रसपगे से।
राखी पे निखरते
रिश्ते मन के
5
भाई के भाल
लगा तिलक लाल
रखडी बाँधी ।
6
राखी उत्सव
घर अँगना आ

पल प्रीति के।
-0-

3-राजीव गोयल

1

3-राखीदिलों का प्यार
करे और प्रगाढ़
राखी त्योहार

2

लाई बहना
रेशम में लपेट
अपना प्यार

3

निश्छल प्यार
भाई बहन बीच
राखी त्योहार

4

करेगा भाई
बहना की परवा
राखी गवाह

Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | अगस्त 15, 2016

1657

तिरंगा

जय भारत !

 

1-डॉ  जेन्नी शबनम 

1  

तिरंगा झूमा   

देख आज़ादी का जश्न,   

जय भारत !

2  

मुट्ठी में झंडा   

पाई-पाई माँगता   

देश का लाल !   

3   

भारत माता  

सरेआम लुटती,   

देश आज़ाद !   

4  

जिन्हें सौंप के   

मर मिटे थे बापू,   

देश लूटते !   

5 

महज़ नारा   

हम सब आज़ाद,   

सोच गुलाम !   

6  

रंग भी बँटा   

हरा व केसरिया   

देश के साथ !   

7.   

मिटा न सका   

प्राचीर का तिरंगा   

मन का द्वेष !   

8 

सबकी चाह   

अखंड हो भारत,   

देकर प्राण !   

9  

लगाओ नारे   

आज़ाद है वतन   

अब न हारें !

10

कैसे मनाए 

आज़ादी का त्योहार

भूखे लाचार !

  

-0-

2-विभा रश्मि

1
क़दम ताल
बने फ़ौलादी ढाल
बढ़े बाँकुरे ।

2
अरि है छिपा
आस्तीन में ही  बैठा
छद्म है रूप ।

3
पुष्पित देश
समृद्धि – सुख -वेश
मिटेंगे क्लेश ।

4
लिख चिठिया
आज पुनः वीर तू
राष्ट्र प्रीत की ।
5
ध्वज फहरा
केसरियाक़ गहरा
शांत है श्वेत ।

6
बिसरा बैठे
प्राण- आहुति लोग
व्यस्त हैं भोग 

7
सींची लहू से
आज़ादी की वल्लरी
सँभालो तुम ।
8
खोया जो मान
लौटा लाओ युवाओ
कर  ह्वान ।

9
अस्मत बचे
ऐसा देश बनाओ
बेटी न लुटे ।

-0-

Posted by: डॉ. हरदीप संधु | अगस्त 15, 2016

1656

कारगिल-21-डॉ सरस्वती माथुर

1

वंदन गूँजे

हो ध्वनित दिशाएँ

जय भारत !

2

सत्य अहिंसा

भू का अभिनंदन

माटी चंदन।

3

वीर सेनानी

करते जयगान

देश महान।

4

तिरंगा न्यारा

शौर्य केसरिया,

शांति की धारा।

5

चक्र सितारा

त्रिवेणी रंग रूप

ध्वज है न्यारा।

6

विश्व भारती

जन गण मन की

करें आरती।

7

ध्वज हमारा

शांति की रसधार

आस्था के तार ।

-0-

2-कृष्णा वर्मा

1

देश आज़ाद

भूखप्यास तड़प

हुई बेआस।

2

थे जो ग़ुलाम

इक संग रहें थे

धर्म तमाम।

3

हो के आज़ाद

अपने ही घर को

लूटा है आप।

4

शहरगाँव

आज़ादी के पथ से

भटके पाँव।

5

हो के स्वतंत्र

विदेशी ग़ुलामी के

पढ़े क्यों मंत्र!

6

देश आज़ाद

ग़रीब किसान क्यों

फंदे को बाध्य।

7

यूँ तो आज़ाद

फिर बेटी क्यों होती

गर्भ में चाक।

8

स्वतंत्र प्राण

तो क्यों ना नारी फिर

भरे उड़ान।

9

देश स्वतंत्र

फिर भारत लाल

भूखे औ नंग।

10

मरी है हँसी

देशद्रोही के पंजे

जान जो फँसी।

11

होगा निर्माण

रखें इकदूजे पे

विश्वास मान।

-0-

Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | अगस्त 14, 2016

1655

1-पुष्पा मेहरा

1

हारा अँधेरा

आ छा ग रोशनी

हुआ सवेरा।

2

करें नमन

देश के शहीदों को

जो हैं अमर।

3

जागो! किशोरों

खटका रहा द्वार

विकास-जंत्र।

4

विनाश नहीं

सृजन ही सृजन

सभी का लक्ष्य।

5

बाँटो न तुम

बारूदों की कन्दुक

प्यार दान दो।

6

ईश है एक

रक्त का रंग एक

मनभेद क्यों !

7

आजाद हम

न होंगे उच्छृंखल

प्रण ये ले लो।

8

खोल लो गाँठें

सभी साथ मिलके

मन मिला लो!

9

जिस माता की

कृपा पे हम जीते

उसे ना मारो।

-0-

Posted by: डॉ. हरदीप संधु | अगस्त 7, 2016

1654

1-पुष्पा मेहरा

a blue sky with fluffy clouds

is(1)(1)(1)(1)(1)

 

 

 

 

 

 

robin_spring_nature_240273(9)(1) winter_sunset_o_266886 - Copy(4)(1) रंगीन परियाँ(2)

2-राजीव गोयल

1

मेघ शावक
हो हवा पे सवार
इतरा रहे

2

बातें करती
आपस मे पत्तियाँ
बैठ शाख पे

3

तैर रही हैं
हवा की लहरो पे
पत्तों की नाव

4

हाँक ले गया
पवन गड़रिया

मेघ- रेवड़ ।

5

फँसे बाँसों में
चिल्लाई रात भर
उत्पाती हवा ।

7

पत्ते दें ताल
हवा के सुर पर
नाचती डाल ।

7

हवा जो चली
बाँस के हृदय में
बजी बाँसुरी ।

8

चुरा के भागी
बगिया से खुशबू
चोरनी हवा

-0-

3रिंकी कुमारी
1

मैंने पकाया
उम्र के आँच पर
हुनर सच्चे।

2

फूल खिलाए
वक्त के राहों पर
मिले काँटे।

3

तोड़ा भरोसा
काँ
च के टुकड़ो सा
पाल के भ्रम
4

सुंदर रूप
क्यों उजाड़ा तूने
कुपित धरा

5

कम्पित धरा
विक्षत हुआ मानव
नही वो चेता

6

कहाँ बैठ के
चिड़ियाँ गाती गीत
मिला ना पेड़।

-0-

rinkik934@gmail.com

Posted by: डॉ. हरदीप संधु | अगस्त 3, 2016

1653

 

 1 डॉ.सरस्वती माथुर

1

खुल गया है

ख़ुशियों का झरोखा

स्वप्न समीर ।

2

शून्य क्षितिज

तैरी नीरदमाला

बूँदों का जाला।

3

साँवली साँझ

सूर्य को विदाकर

गई सँवर ।

4

आँसू नैनों में

तुम्हें धुँधलाकर

मन को धोते।

5

कोरें पन्ने पे

समय ने  लिखी जो,

मै  एक चिट्ठी ।

6

हवा उड़ा

सतरंगी घाघरे

खिले फूलों के।

 7

मीठी सी यादें

नयन- सागर में

मोती सी हुई।

8

खारे जो आँसू

यादों की धाराओं में

मीठे हो जाते।

 9

हरित दूर्वा

ओस की चुनरिया

ओढ़ के झूमी ।

10

चलते पाँव

दूर तक फैले हैं

यादों के गाँव ।

-0-

2-राजीव गोयल

1

घायल पड़ा
शब्दों के बाणों पर
रिश्तों का भीष्म

2

गिरी किताब
उठा के उसने दी
बनाए रिश्ते

3

बहा ले जो तू
दो अश्क पछतावा
जी उठें रिश्ते

4

रिश्तों के धागे
संभाल न पाएँगें
झूठ का भार

5

शब्दों की चोट
बिवाई से दुखते
रिश्तों के पाँव

6

बुने हैं रिश्तों
ले विश्वास का ताना
प्यार का बाना

7

जाकर दूर
आ गया और पास
अपनों के मैं

8

रिश्ते रेशम
पड़े गाँठ इनमें
फिर ना खुले

-0-

Posted by: डॉ. हरदीप संधु | जुलाई 24, 2016

1652

1-प्रेरणा शर्मा 

1

मन-गगन

इंद्रधनुषी रंग

झूमे पवन।

2

मेघ सजल

सावन बदरिया

राग मल्हार।

3

चाँदनी रातें

सितारे झिलमिल

नौका विहार।

4

खिले सुमन

चमन मुस्कराए

मीत-मिलन।

5

रंग-बहार

घरा की धरोहर

धानी चूनर।

6

जादू की झप्पी

अलसाई सुबह

जागे सपने।

7

 धारें बौछारें

 रिम-झिम सावन

 भीगा बदन ।

8

श्यामल मेघ

घटाएँ घनघोर

 वर्षा-फुहार ।

9

नील गगन

मन मस्त मगन

झूमें बहार।

10

चंपा गुलाब

महका उपवन

नाचे मयूर।

11

मीठी सी लोरी

निंदियारे लोचन

माँ का आँचल।

-0-

2-डॉ मधु त्रिवेदी 

1

हर बंधन
शुरू हुआ साँसों से
साँसों  पे खत्म

2

मजाल क्या है
भूल जा उसको
जिसने रचा

-0-

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