Posted by: हरदीप कौर संधु | सितम्बर 15, 2019

2046

रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

1
साथी सन्नाटा
जगा है रात दिन
मूक पहरा।
2
घोर अमा है
जीवन अघोरी सा-
अपना मन।
3
जलादो ग्रन्थ
जो कुचलें प्रेम को
घृणा ही बोएँ ।
4
नभ की स्मित
छिटकी रात भर
नन्हे शिशु -सी।
5
हाँफती आई
शत- शत उर्मियाँ
पग पखारें।
6
वासना- कीट
करता बदरंग
जीवन-रंग।
7
क्रूर का जाप
बनता अभिशाप
विष ही रोपे।

8
आग ही आग
उगलती है जीभ
पूजा के बाद।
9
शंका है सर्प
न सोए ,न सोने दे

नरक- द्वार।
10
दर्द न पूछो,
पाहन बन रहो
पूजे जाओगे।
11
प्रभु ने भेजे
अमृत घट भरे
पीते न बने।
12

विष में बुझी
भोंकी शब्द कटार
हँसे जीभर।
13
सोचा था कभी-
ज़माना बदलेंगे
मिटाया हमें।
14
झूठ का  तूल
बार बार उड़ाया
नापाआकाश।
15
अब तो चलें
तमाशा  खूब बने
रोना न कभी।

16

दुग्ध धवल
छिटकी है चंद्रिका,
भोली मुस्कान।
-0-

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Posted by: हरदीप कौर संधु | सितम्बर 7, 2019

2045

 ज्योत्स्ना प्रदीप

1

तुम्हारा साथ

मन क्यों होता

जैसे अनाथ !

2

तूने छुआ था

पत्थर से मन में

कुछ न हुआ!

3

छल ही छल

‘अपने’ घूम रहे

भेस बदल !

4

कुछ नाते थे

तभी तक हम भी

इठलाते थे l

5

हँसी न आती

अधर -दहलीज

रोज़ बुलाती l

6

निर्मल -मन

तभी तो आँसू करें

रोज़ सिंचन !

7-

अपना कोई

जो हुआ न अपना,

अँखियाँ रोईं l

8

रहा मलाल

समझ नहीं पाये

लोगों की चाल!

9

एक ख़लिश

मन में सदा रही

कभी न बही !

10

दिल की सुनी

तभी तो तकलीफ़ें

हैं कई गुनी !

11

अपना कोई

होता कभी तो काश,

छूते आकाश !

12

मन अबोध

माँ नहीं ,पर बैठा

माँ की ही गोद l

-0-

 

Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | सितम्बर 5, 2019

2044

आज शिक्षक-दिवस (05/09/2019) पर कुछ हाइकु-सुमन अर्पित हैं! सबसे पहला श्रद्धा-सुमन ‘माँ’ को, जो हमारे जीवन की सर्वप्रथम शिक्षिका होती हैं। उसके बाद आदरणीय काम्बोज भैया जी को, जिन्होंने हमेशा हम सभी का निःस्वार्थ भाव से मार्ग-दर्शन किया!  आभारी हैं उन सभी व्यक्तियों के, जो जीवन के किसी न किसी मोड़ पर मिले और कुछ न कुछ सिखाकर गए!  शिक्षक-दिवस की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ!    अनिता ललित

1
माँ शिक्षा देती
दीपक-सी जलती
राह दिखाती।
2
गुरु सरीख़ा
सब जग में ढूँढ़ा
मिला न दूजा।
 3
गुरु की देन-
‘लड़ो चुनौतियों से
करो सामना!’
4
मंज़िल दूर
न थकन न हार-
गुरु जो संग!
5
आदर-भाव
संस्कारी मन ही है-
गुरु-दक्षिणा!

Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | सितम्बर 2, 2019

2043

1-डॉ.जेन्नी शबनम

साँझ पसरी

‘लौट आ मेरे चिड़े !’

अम्मा कहती।

2

साँझ की वेला

अपनों का संगम

रौशन नीड़।

3

क्षितिज पर

सूरज आँखें मींचे

साँझ निहारे।

4

साँझ उतरी

बेदम होके दौड़ी

रात के पास।

5

चाँद व तारे

साँझ की राह ताके

चमकने को।

6.

धुँधली साँझ

डूबता हुआ सूर्य

तप से जागा।

7

घर को चली

साँझ होने को आई

धूप बावरी।

8

नभ से आई

उतरकर साँझ

दीए जलाती।

9

गगन हँसा

बेपरवाह धूप

साँझ से हारी।

10

संध्या उदास

क्या करे दीया बाती

साथ न कोई।

-0-

2-परमजीतकौर ‘रीत’ (श्रीगंगानगर)

1

 नन्हे-से हाथ

सपनीली दुनिया

रँगती कूची

2

हरा सूरज

गुलाबी मोर-पंख

नन्ही कल्पन

3

नन्हे कुबेर

तृण-तृण आनंद

अमूल्य निधि

4

सभी परियाँ

सभी बाल गोपाल

मा-पिता हेतु

5

जंगली फूल

अभावों का आँगन

पलें बेफिक्र

-0-

मेल-kaurparamjeet611@gmail.com

Posted by: हरदीप कौर संधु | अगस्त 28, 2019

2042

1-मंजु मिश्रा

1

मानो गुलाल 

छायांकन- प्रीति अग्रवाल

उड़ा गया सूरज 

शर्मीली शाम।

2

लाली का टीका 

साँझ के माथे पर 

धरा सूर्य ने।

3

भेजी नभ ने 

सितारों की चुनरी 

शाम सजेगी।

4

आई है शाम 

बदली धरती ने 

नारंगी साड़ी।

5

लाल गगन 

शाम के सिंदूर में 

रंग रंगीला।

-0-Board Member @ UPMA (U.P. Mandal of America),Board Member @Narika

# 510-376-8175

www.manukavya.wordpress.com

-0-

2- ऋता शेखर मधु

1

बिटिया हँसी

बाग में खिल ग

जूही की कली

2

शहद रानी

असंख्य कोटरों में

भरे मिठास

3

चली पवन

पत्तियों ने दे दिया

दिशा -निर्देश

4

स्वागत करे

देहरी का तोरण

नम्र दोलन

5

अमा की रात

तिनके का सहारा

नन्हे जुगनू

6

नीला अम्बर

पिता ने तान दिया

नेह का छाता

7

जीवन-पथ

कहीं चले पैदल

कहीं है रथ

8

मन भँवर

बातें नाचती रहीं

सुनी -सुनाई

9

कूकी कोयल

सघन पीड़ा बनी

मीठी लगन

10

हवा पालकी

मोगरे की खुशबू

दुल्हन बनी

11

हल्की-सी बात

कपास बन उड़ी

छोर न कहीं

12

प्रीत बंधन

तितली और फूल

बागों में रचें

-0-

Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | अगस्त 23, 2019

2041-कुछ यादें भाई भूपाल सूद जी की

   मित्र , भाई और सच्चे सहयोगी श्री भूपाल सूद नहीं रहे। लघुकथा  हाइकु , ताँका , सेदोका , चोका , हाइबन , माहिया आदि  के एक मात्र बड़े प्रकाशक , कर्मठ व्यक्ति , बात के धनी और स्वाभिमानी , सबके प्रिय इस तरह चले जाएँगे कभी सोचा भी नहीं था । मैं और सुकेश साहनी जी तो पिछले 30 वर्षों से जुड़े थे हमारा लगभग पूरा साहित्य अयन प्रकाशन  द्वारा हुआ। काव्य की विभिन्न  विधाओं में अन्य साथियों की पुस्तक का प्रकाशन भी चर्चा में रहा, जिनमें प्रमुख हैं-डॉ सतीशराज पुष्करणा , सुदर्शन  रत्नाकर,डॉ भावना कुँअर, डॉ हरदीप सन्धु, रचना श्रीवास्तव, कृष्णा वर्मा ,  डॉ सुधा गुप्ता, उर्मिला अग्रवाल , शैलजा सक्सेना , पुष्पा मेहरा, अनिता ललित,डॉ ज्योत्स्ना शर्मा ,डॉ कविता भट्ट, रश्मि शर्मा, शशि पाधा,  श्याम  त्रिपाठी, प्रमुख हैं। सूद जी का सबके साथ अपनत्व का सम्बन्ध था। सभी साथियों की ओर से विनम्र श्रद्धांजलि ।

 

 

[‘महानगर की लघुकथाएँ’ और ‘ मेरी पसंद , भाग 3’ लघुकथा संग्रहों का विमोचन अयन प्रकाशन के स्टॉल पर कथादेश के सम्पादक हरिनारायण जी द्वारा दिनांक 12-01-2019 को किया गया।]

मेरी पसन्द भाग-3 का विमोचन हुआ।  इस अवसर पर श्री भूपाल सूद रामेश्वर काम्बोज , सुकेश साहनी, डॉ सुषमा गुप्ता और भावना सक्सैना उपस्थित रहे।

-0-

2019 के हाइकु-चोका -ताँका के  प्रमुख प्रकाशनों में स्वप्न शृंखला, गीले आखर और झरा प्यार निर्झर प्रमुख रहे।  

 

Posted by: हरदीप कौर संधु | अगस्त 23, 2019

2040

रचना श्रीवास्तव 

 1

भाई बहन 

लहरों-से निश्छल 

रिश्ता जन्मो का ।

2

भाई है मान 

बहन की सोच का 

सदा के लिए 

3

राखी के धागे 

आशीष बहन का 

ईश्वर-कृपा।

4

बहन  बाँधे 

उम्मीदों का सूरज 

भाई के हाथ।

5

सूनी कलाई 

हाथ बंदूक लिये

सैनिक खड़ा ।

6

रक्षा-कवच 

बहन के लिए है 

राखी का धागा 

-0-

Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | अगस्त 21, 2019

2039

अकेले हम

डॉ.जेन्नी शबनम

1

रेखांकन ;रमेश गौतम

ज़िन्दगी यही

चलना होगा तन्हा

अकेले हम।

2

राहें ख़ामोश

सन्नाटा है पसरा

अकेले हम।

3

हज़ारों बाधा

थका व हारा मन

अकेले हम।

4

किरणें फूटीं

भले अकेले हम

नहीं संशय ।

5

उबर आए,

गुमराह अँधेरा

अकेले हम।

Posted by: हरदीप कौर संधु | अगस्त 19, 2019

2038-बेटियाँ

कृष्णा वर्मा

1

घर न पर

कैसे जिएँ बेटियाँ

बड़ा क़हर।

2

ज़मीं न ज़र

बंजारन ज़िन्दगी

आँसू से तर।

3

आँखों में ख़्वाब

लाख रस्म पहरे

कैसे हों पूरे।

4

बेटी का वास

हैं तय दहलीज़ें

औ परवाज़।

5

बेटी है दुआ

सुख का समंदर

बसे ,वीराना।

6

संदली रिश्ते

है बेटी ज़माना

हँसी– खज़ाना।

7

उम्मीदें, ख़्वाब

न चाहत -राहत

सिर्फ लानत।

8

सहमे खड़े

पलकों पर स्वप्न

आँसू निचोड़े।

9

भोर– सी बेटी

शाम -सी ढल जाती

भाग्य के नाम।

10

चाहे खुशियाँ

फिर कहे पराई

कैसी तू माई।

11

अपना ख़ून

फिर न बाँटे प्यार

क्यों शर्मसार।

12

बेटी न ख़ता

न तेरा अपराध

रब -सौग़ात।

13

माँ ले कसम

बिटिया के ख़्वाबों को

देगी तू पर।

-0-

Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | अगस्त 16, 2019

2037

1-डॉ0 सुरंगमा यादव

1

भावों का रेला

कंपित हैं अधर

बीते न बेला

2

आँख ज्यों खुली

उषा खड़ी थी पास

विहँसी कली

3

पीड़ा का सिन्धु

नैनों में बन मेघ

बरसा खूब

4

जग की लीला

जीवन का अस्तित्त्व

रेत का टीला

5

बड़ी लकीर

छोटी कर दूँ कैसे

सब उलझे

6

मन -हिरना

उलझनें शिकारी

जाल बिछातीं

 7

गिरा जो आँसू

तरु से टूटा पात

लौटा न पास

8

मन के छाले

मरहम का लेप

फिर भी हरे

9

चन्दा है दूर

सागर मजबूर

करे क्रन्दन!

-0-

2- हाइफन 2018 9 हाइकु विशेषांक -सम्पादक डॉ.कुँवर दिनेश सिंह , इस लिंक पर पढ़िएगा-

हाइफन-2018 हाइकु विशेषांक

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