Posted by: हरदीप कौर संधु | मई 6, 2021

2159

अनिता मण्डा

डॉ.शैलजा सक्सेना

1

समय धर्म

रह घर अंदर,

यही सत्कर्म!

2

कालाबाज़ारी !

मृत आत्माओं वाले

भ्रष्ट व्यापारी!

3

अश्रु-सरिता

डगमग डोलती

जीवन-नैया!

4

घर में बंदी

चूल्हे सिसकते हैं

काम में मंदी!

5

दुनिया डरे

कब होगा ख़त्म ये

जिए ना मरे!

6

मौत का डर!

मास्क- मनौती बाँधे

रहना घर!

7

घने बादल

बिजली की स्याही से

लिखते हाल!

8

पैरों की थाप

पानी के चहबच्चे

कूदती हँसी!

9

याद बारात

सपनों की आँखों में

उतरी रात।

10

प्रेम बाँसुरी

मीड पे काँपे जिया

मुस्काए पिया!

-0-

Posted by: हरदीप कौर संधु | अप्रैल 30, 2021

2158

1-शोनाली श्रीवास्तव (कैलीफ़ोर्निया)

1

सिंदूरी माँग

सूर्य की किरणों से

जगमगाएशोनाली श्री्वास्तव

2

आँखों में नमी

चितकबरे पत्ते

गिरे लब पर

3

पाँव घुँघरू

बाँधकर चली मैं

मन की गली

4

धरा के फूल

किसान की दुनिया

उगले मोती

5

महामारी से

उजड़ते दामन

सिमटे आँसू

6

सुनी राह पे

लुढ़कती पत्तियाँ

भोर की बेला

7

रमता जोगी

अंग लगाए भस्म

चिलम भरे

8

लॉकडाउन

बंद शिक्षा दुकान

उड़े पखेरू

9

कड़क ठंड

लकड़ी से उड़ता

सफ़ेद धुआँ

10

कक्षा की ड्योढ़ी

हाथ कटोरा लिये

भीख माँगता

11

ऊँचे महल

शीशे चमका रहे

श्रमिक हाथ

12

भोर की बेला

बर्फ़ -चादर ओढ़े

घर की छत

13

ढलता सूर्य

दौड़ती गाड़ियों की

भागमभाग

14

पुष्प से पुष्प

मँडराए तितली

सूर्य उदय

-0-

मनीष श्रीवास्तव( (कैलीफ़ोर्निया)

1

गर्मी की छुट्टी-

मनीष श्रीवास्तवहुड़दंग हो रहा

नानी के घर

2

भोर का सूर्य-

वृक्षों पर जमी है

ओस की बूँदें

3

प्रेम दिवस-

चौखट पे खड़ी माँ

बाट-निहारे

4

सब्ज़ी का ठेला –

सूनी सड़क पर

तैनात फ़ौजी

5

सजल नैन –

चिड़िया उड़ गई

पंख पसारे

6

रसोई घर –

आँख में आँसू भरे

माँ धौंके चूल्हा

7

माता की चौकी –

ड्योढ़ी पर खड़ी माँ

भिक्षा माँगती।

8

सर्दी की भोर –

पानी के तसले में

पक्षी नहाए

9

शंख की ध्वनि-

नहाकर छिड़का

गंगा का जल

10

जाड़े की धूप-

झूले पर झगड़ें

भाई -बहन

11

सूर्यास्त बेला –

मास्क में तट पर

शान्ति से बैठे

-0-

-0-

Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | अप्रैल 29, 2021

2157

विनीता तिवारी (वर्जिनिया, यू एस ए)

1.

कहाँ सम्भव!

विनीता तिवारीदायरों में रहते

ऊँची उड़ान।

2.

मास्क दस्ताने

दो हज़ार बीस का

साज- शृंगार!

3.

रिश्तों की ज़मीं

बिना प्यार विश्वास

रही उजाड़!

4.

अहं ये मेरा

जागा रहा हमेशा

सोती रही मैं

5.

इंद्रधनुष!!

आकाश में बिखरा

होली का रंग

6.

दूसरी बार

कोरोना से लाचार

दरो- दीवार

7.

सत्ता कोई हो

ग़रीबों का शोषण

वैसा का वैसा

8.

हरियाली से

पुलकित धरती

मुदित मन

9.

तेज रफ़्तार

उलझनें हज़ार

जीवन सार!

10.

मन चंचल

विषयों से निर्मल

बैरागी कल!

–0-

 

Posted by: हरदीप कौर संधु | अप्रैल 24, 2021

2156-मैं नहीं हारा

रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

(राजस्थानी अनुवाद- अनिता मण्डा)

1.

आज इंसान

न पा सका धरती

न आसमान।

आज मिनख

न तो पाई धरणी

न मिल्यो आभो।

2.

मैं नहीं हारा

है साथ न सूरज

चाँद न तारा।

मैं कोनी हार्यो

साथ कोनी सूरज

चाँद न तारो।

3.

साँझ की बेला

पंछी ॠचा सुनाते

मैं हूँ अकेला।

सिंज्या बखत

पंखी ऋचा सुणावै

मैं हूँ एकलो।

4.

इस धरा का

सर्वोच्च सिंहासन

है बचपन

ईं धरणी को

सहूँ ऊँचो आसन

है बाळपन।

5.

आपकी बातें

खुशबू के झरने

चाँदनी रातें

ए थांकी बाताँ

महक रा झरना

चानणी राताँ।

6.

दर्द था मेरा

मिल शब्द तुम्हारे

गीत बने थे ।

म्हारी पीड़ ही

सबद थारा मिल्या

गीत बणग्या।

7.

मृग बावरा

है नाभि में कस्तूरी

कभी न जाने।

मृग बावळा

नाभि माथे किस्तूरी

कदै न जाणे।

8.

पैसे की भूख

बनी जो ज्वालामुखी

करेगी दुखी।

पिस्यां  की भूख

बणग्यी ज्वालामुखी

करस्यी दुखी।

9.

मन के दीप

जब- जब ज्योतित

मिटे अज्ञान।

मन-दिवला

जणा-जणा चासया

मिट्यो अज्ञान।

10.

धरती भीगी

घन घट ढो लाए

तरु नहाए।

धरती भीजी

बादळ घड़ा ल्याया

रुँख नहाया।

-0-

Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | अप्रैल 23, 2021

2155-हाइकु सम्मेलन 17 अप्रैल-2021

हाइकु सम्मेलन 17 अप्रैल-2021

सुनने के लिए उपर्युक्त  हरे लिंक को क्लिक कीजिए्।

17 अप्रैल  ‘हमारी भाषा हिन्दी’ और ‘हिन्दी हाइकु’ के संयुक्त तत्त्वावधान में एक हाइकु सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस हाइकु सम्मेलन में अमेरिका हाइकुकारों ने भाग लिया। मुख्य अतिथि के रूप में भारत से श्री रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’ जी उपस्थित थे। कार्यक्रम का प्रारम्भ करोना से पीड़ित सभी जनों के स्वास्थ्य लाभ की कामना तथा जो लोग हमको छोड़ कर चले गए हैं उनको प्रभु के श्रीचरणों में स्थान मिले ,इस प्रार्थना के साथ किया गया। कार्यक्रम में सर्वप्रथम माँ सरस्वती के चरणों में वन्दना के रूप में श्रद्धा सुमन अर्पित करने के लिए गायिका के साथ- साथ एक अच्छी तबला वादिका शोनाली श्रीवास्तव को आमंत्रित किया गया, जिन्होंने अपनी बिटिया आन्या श्रीवास्तव के साथ बहुत ही भावपूर्ण सरस्वती वन्दना गाई। नवरात्रि का समय है; इसलिए साहित्यकार /गायिका श्रीमती विनीता तिवारी जी को आमंत्रित किया गया और उनसे माता का भजन गाने का अनुरोध किया। इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए विनीता तिवारी जी ने भक्तिभाव से माता का भजन गाया, जो सभी को बहुत पसंद आया। 

तत्पश्चात् कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आदरणीय रामेश्वर काम्बोज हिमांशु जी को आमंत्रित किया गया। श्री हिमांशु जी ने बहुत से लोगों को हाइकु लिखने की प्रेरणा दी ,उनका उत्साह वर्धन किया। आज यदि हिमांशु जी को हाइकु का गुरु कहा जाए तो गलत न होगा। आपने हाइकु, सेदोका,चोका, ताँका इत्यादि पर बहुत कार्य किया है। ‘हिन्दी हाइकु’ और ‘त्रिवेणी’ नाम से दो अन्तरजाल की पत्रिकाएँ हरदीप सन्धु जी के साथ निकालते हैं। हिमांशु जी ने बहुत ही सारगर्भित रूप से उदाहरण दे कर हाइकु के बारे में बताया। जिसका सभी ने बहुत आनन्द लिया। 

           हाइकु सम्मेलन-17 अप्रैल   इस कार्यक्रम में अमेरिका के विभिन्न भागों से 12 हाइकुकारों ने भाग लिया।श्रीमती प्रीति गोविंदराज, श्रीमती विनीता तिवारी , श्रीमती सुषमा मल्होत्रा  श्रीमती शोनाली श्रीवास्तव , श्रीमती शशि पाधा ,श्रीमती रजनी भार्गव, श्री अनूप भार्गव ,श्रीमती नीलू गुप्ता ,श्रीमती मंजु मिश्रा ,श्री मनीष श्रीवास्तव, श्रीमती कविता वाचक्नवी,श्रीमती रचना श्रीवास्तव इन सभी ने कार्यक्रम में भाग ले कर इनकी शोभा बढ़ाई। सभी ने एक से बढ़ कर एक हाइकु सुनाए। कार्यक्रम का कुशल संचालन श्रीमती रचना श्रीवास्तव ने किया,इन्होंने सभी हाइकुकारों का परिचय हाइकु में दिया। जिसकी सभी ने बहुत सराहना की। 

    कार्यक्रम के मध्य में मंजु मिश्रा जी के आग्रह पर सभी ने स्वर्गीय डॉ कमलेश द्विवेदी जी और स्वर्गीय नरेन्द्र  कोहली जी की आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। 

 कार्यक्रम के अंत में मंजु जी ने सभी का धन्यवाद करते हुए कहा- मन भारी है , फिर भी आप सभी यहाँ आए, इसके लिए आपका बहुत बहुत आभार।  इस तरह अमेरिका  में प्रवासी भारतीयों का प्रथम हाइकु सम्मेलन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। 

प्रस्तुति- रचना श्रीवास्तव

Posted by: हरदीप कौर संधु | अप्रैल 22, 2021

2154

[ आज ‘विश्व पृथ्वी दिवस’ पर हाइकु ]

पृथ्वी हमारी!

डॉ. कुँवर दिनेश सिंह

1
पृथ्वी हमारी!
अनमोल संपदा-
साझी हमारी!

पृथ्वी दिवस2
जीवन पाएँ-
धरा है सबकी
इसे बचाएँ!

3
सृष्टि बचाएँ
आगामी पीढ़ी हेतु
पृथ्वी बचाएँ!

4
घर बनाएँ,
जीवन के निमित्त
वृक्ष लगाएँ!

5
पेड़ हैं खड़े
प्राणवायु के स्रोत
भू के फेफड़े!

6
सौगात हरी!
ग़लीचे से अच्छी है
दूब की दरी!

7
गगन रूठा
भौतिक जगत् में
मानव डूबा।

8
विषाक्त वायु-
क्यों न सोचे मानव?
आपन्न आयु!

9
आग वन में-
साँसें जीवजंतु की
हैं घुटन में!

10
जल-प्लावन
मानव से खिन्न है
नदी का मन!

11
ख़ाली है नभ-
संकट की आशंका
देखो मानव!
-0-

-चित्र गूगल से साभार

0-
संपादक: हाइफ़न,3, सिसिल क्वार्टर्स, चौड़ा मैदान,शिमला: 171004 हिमाचल प्रदेश।
ईमेल: kanwardineshsingh@gmail.com
मोबाइल: +91 94186 26090

Posted by: हरदीप कौर संधु | अप्रैल 22, 2021

2153

डॉ. कविता भट्ट

Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | अप्रैल 21, 2021

2152

भीकम सिंह 

1

ओले जो हँसे 

फसलों के बयान 

कंठ में फँसे ।

2

चाँदनी हवा 

ज्यों गन्ना अँखुआए 

खेत मुस्काए ।

3

खेत का नाम 

किसान ले के बोए 

ज्यों रिश्ता होए ।

4

थोड़ा– सा खेत 

नीम के नीचे बैठा 

सुखाए स्वेद ।

5

खेत उकेरे 

अनुबंध के खूड़ 

किसान स्वप्न ।

6

कटे खेतों को

बुहार कर बैठी 

पास में हवा ।

7

सूखा मौसम 

खेतों पे ढोने लगा 

गहरे ज़ुल्म ।

8

दुःख ठहरा 

खेतों के सीमान्तों पे

खुला पहरा ।

9

दूब ने देखे

बैठके सिरहाने 

कई ज़माने ।

10

सूखी मक्का के 

अंग -अंग फड़के 

पुर जड़ से ।

-0-

Posted by: हरदीप कौर संधु | अप्रैल 18, 2021

2151

प्रीति गोविन्दराज  [ यू एस ए]

1

धूप में खेलें

सतरंगी रस्सी से

प्रीति गोविन्दराजवर्षा के बच्चे।

2

कालीन बिके

मुँह छिपाए बैठी

कुँए में काई।

3

झूमती जाएँ

चले न सीधी राह

वर्षा की बूँदें।

4

गगन सोचे

किस आशा से उड़

आया पतंग!

5

पंछी घूमते

पासपोर्ट न वीज़ा

देश -विदेश

6

स्कूल बस्ते का

भार खूब जानता

श्रमिक पिता।

7

साँवला रंग

ताने सहती बेटी

रचे रंगोली।

8

कैसे उतरूँ

कोमल शिशु तन

सहमी सुई!

9

कीमो बोतल

कार्टून देख हँसा

कैंसर हारा।

10

पद चिह्न- से

बर्फ किताब पर

लिखते बच्चे।

11

पेड़ लजा

नभ ने टाँक दि

सफेद फूल।

12

हिलाए पूँछ

हैरान पिल्ला सूँघ

बर्फ से दोस्ती!

-0-

Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | अप्रैल 14, 2021

2150-हाइकु विधा पर वैश्विक विमर्श

‘हाइकु विधा पर चर्चा’ विषय पर 10 अप्रैल को   वैश्विक चर्चा मॉरिशस के उच्चायोग एवं विश्व हिन्दी सचिवालय के तत्त्वावधान में आयोजित की गई। साहित्य-संवाद और सृजन आस्ट्रेलिया ने इस आयोजन में  सहयोग किया।इस चर्चा को निमन्लिखित  लिंक पर देखा और सुना जा सकता  है –

  हाइकु विधा पर चर्चा

हाइकु चर्चा एवं प्रस्तुति क्रम-

विशेष उपस्थिति– उप उच्चायुक्त: महामहिम श्री जनेश केन

अध्यक्ष:   प्रो. विनोद कुमार मिश्र

  1. श्री रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’ (भारत)-चर्चा एवं हाइकु पाठ

  2. डॉ. कुँवर दिनेश सिंह(भारत)-चर्चा एवं हाइकु पाठ

  3. डॉ. कविता भट्ट (भारत)-हाइकु पाठ

  4. श्री कविराज बाबू (मॉरिशस)-हाइकु पाठ

  5. श्रीमती भावना सक्सैना (भारत)-हाइकु पाठ

  6. डॉ. पूर्वा शर्मा(भारत)-हाइकु पाठ

  7. श्रीमती कृष्ण वर्मा (कैनेडा)-हाइकु पाठ

  8. श्रीमती रचना श्रीवास्तव (केलिफोर्निया)-हाइकु पाठ

  9. डॉ. शैलेश गुप्त ‘वीर’  (भारत)-हाइकु पाठ

  10. डॉ.शैलेश शुक्ल (भारत)-हाइकु पाठ

  11. डॉ. शैलजा सक्सैना (कैनेडा)-हाइकु पाठ

  प्रो. विनोद कुमार मिश्र  (अध्यक्षीय  उद्बोधन)

  श्रीमती सुनीता पाहुजा (धन्यवाद ज्ञापन)

    संचालन: श्रीमती कल्पना लालजी, श्रीमती अंजू घरभरनल(मॉरिशस

 

प्रतिवेदन

भारतीय उच्चायोग, इंदिरा गांधी भारतीय सांस्कृतिक केंद्र, विश्व हिंदी सचिवालय,सृजन ऑस्ट्रेलिया अंतरराष्ट्रीय ई पत्रिका एवं साहित्य संवाद समिति के तत्त्वावधान में अमृत महोत्सव के अंतर्गत शनिवार10.04.2021 को मासिक साहित्य-संवाद गोष्ठी सफलता पूर्वक सम्पन्न हुई। इस गोष्ठी में हाइकु विधा पर चर्चा एवं प्रस्तुति निर्धारित थी, जिसमें उप उच्चायुक्त महामहिम श्री जनेश केन जी की विशेष उपस्थिति एवं सारगर्भित सन्देश से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।

भारत से श्री रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’जी ने हाइकु पर विस्तृत जानकारी दी। उसके लेखन में पाँच सात पाँच के वर्णक्रम  से सत्रह वर्णों की रचना ही हाइकु कहलाती है।  काम्बोज जी ने इस विधा में प्रकाशित विविध ग्रन्थों की सामग्री एवं हाइकु रचनाकारों की भी जानकारी दी। डॉ  कुँवर दिनेश सिंह जी ने हाइकु के अनुवाद और समीक्षा पर विस्तृत चर्चा की।दोनों  वक्ताओं ने क्रमशः अपने हाइकु भी प्रस्तुत किए। कैनेडा से श्रीमती कृष्णा वर्मा एवं डॉ शैलजा सक्सैना, केलिफोर्निया से श्रीमती रचना श्रीवास्तव ने भी स्वरचित रचनाओं से देश विदेश से जुड़े हिंदी प्रेमियों का मन जीत लिया।भारत से अन्य हाइकुकारों ने अपनी प्रस्तुति से समा बाँधे रखा। विश्वविख्यात डॉ.कविता भट्ट, राज भाषा विभाग दिल्ली से  भावना सक्सैना, डॉ. पूर्वा शर्मा, डॉ.शैलेश गुप्त, सृजन ऑस्ट्रेलिया अंतरराष्ट्रीय ई पत्रिका के संपादक डॉ.शैलेश शुक्ल ने अपने-अपने हाइकु प्रस्तुत कर इस विधा पर अधिकार सहित हिंदी, देशप्रेम एवं प्राकृतिक सौंदर्य का मानो सजीव चित्रण ही कर डाला।

स्थानीय साहित्यकार सम्मानीय डॉ इंद्रदेव भोला इंद्रनाथ द्वारा हाइकु संग्रह से चयनित हाइकु की प्रस्तुति  कविराज बाबू द्वारा प्रस्तुत की गई।

रश्मि विभा त्रिपाठी जी कार्यक्रम के प्रारंभ से जुड़ी हुई रहीं और हाइकु विधा में उनकी विशेष रुचि को ध्यान में रखकर उन्हें हाइकु प्रस्तुति के लिए प्रतिभागियों की सूची में जोड़ा गया। उन्होंने भी अपने हाइकु सुनाए।

मंच संचालन सहित हाइकु प्रस्तुतियाँ  कल्पना लालजी एवं समन्वयक अंजू घरबरन द्वारा की गईं।

अध्यक्ष महोदय प्रो. विनोद कुमार मिश्र जी के अत्यंत ही उत्कृष्ट उद्बोधन एवं स्वर्गीय सुषमा स्वराज पर श्रद्धांजलि स्वरूप रचे हाइकु प्रस्तुत किए।

कार्यक्रम की सभी प्रस्तुतियों पर अपनी प्रशंसनीय टिप्पणियों सहित द्वितीय सचिव सुनीता पाहुजा द्वारा धन्यवाद-ज्ञापन से औपचारिक कार्यक्रम समाप्त हुआ।

समाप्ति के उपरांत रोचक विधा हाइकु प्रस्तुति के साथ देश-विदेश के आभासी मंच से जुड़े हिंदी प्रेमियों के अन्य प्रस्ताव एवं विचार जुड़ते रहे।

यह कार्यक्रम विश्व हिंदी सचिवालय एवं भारतीय उच्चायोग मॉरिशस के फ़ेसबुक पर भी लाइव था।

हाइकु वेब संगोष्ठी के लिए श्री रामेश्वर काम्बोज जी ने सभी प्रतिभागियों से संपर्क करवाने में विशेष भूमिका का निर्वाह किया,इसके लिए हम उनके आभारी हैं।भारतीय उच्चायोग एवं विश्व हिंदी सचिवालय एवं सृजन ऑस्ट्रेलिया अंतरराष्ट्रीय ई पत्रिका के पूर्ण सहियोग से के लिए विशेष आभार एवं कोटिशः धन्यवाद।

अंजू घरभरन -साहित्य संवाद-समन्वयक

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