Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | अगस्त 21, 2019

2039

अकेले हम

डॉ.जेन्नी शबनम

1

रेखांकन ;रमेश गौतम

ज़िन्दगी यही

चलना होगा तन्हा

अकेले हम।

2

राहें ख़ामोश

सन्नाटा है पसरा

अकेले हम।

3

हज़ारों बाधा

थका व हारा मन

अकेले हम।

4

किरणें फूटीं

भले अकेले हम

नहीं संशय ।

5

उबर आए,

गुमराह अँधेरा

अकेले हम।

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Posted by: हरदीप कौर संधु | अगस्त 19, 2019

2038-बेटियाँ

कृष्णा वर्मा

1

घर न पर

कैसे जिएँ बेटियाँ

बड़ा क़हर।

2

ज़मीं न ज़र

बंजारन ज़िन्दगी

आँसू से तर।

3

आँखों में ख़्वाब

लाख रस्म पहरे

कैसे हों पूरे।

4

बेटी का वास

हैं तय दहलीज़ें

औ परवाज़।

5

बेटी है दुआ

सुख का समंदर

बसे ,वीराना।

6

संदली रिश्ते

है बेटी ज़माना

हँसी– खज़ाना।

7

उम्मीदें, ख़्वाब

न चाहत -राहत

सिर्फ लानत।

8

सहमे खड़े

पलकों पर स्वप्न

आँसू निचोड़े।

9

भोर– सी बेटी

शाम -सी ढल जाती

भाग्य के नाम।

10

चाहे खुशियाँ

फिर कहे पराई

कैसी तू माई।

11

अपना ख़ून

फिर न बाँटे प्यार

क्यों शर्मसार।

12

बेटी न ख़ता

न तेरा अपराध

रब -सौग़ात।

13

माँ ले कसम

बिटिया के ख़्वाबों को

देगी तू पर।

-0-

Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | अगस्त 16, 2019

2037

1-डॉ0 सुरंगमा यादव

1

भावों का रेला

कंपित हैं अधर

बीते न बेला

2

आँख ज्यों खुली

उषा खड़ी थी पास

विहँसी कली

3

पीड़ा का सिन्धु

नैनों में बन मेघ

बरसा खूब

4

जग की लीला

जीवन का अस्तित्त्व

रेत का टीला

5

बड़ी लकीर

छोटी कर दूँ कैसे

सब उलझे

6

मन -हिरना

उलझनें शिकारी

जाल बिछातीं

 7

गिरा जो आँसू

तरु से टूटा पात

लौटा न पास

8

मन के छाले

मरहम का लेप

फिर भी हरे

9

चन्दा है दूर

सागर मजबूर

करे क्रन्दन!

-0-

2- हाइफन 2018 9 हाइकु विशेषांक -सम्पादक डॉ.कुँवर दिनेश सिंह , इस लिंक पर पढ़िएगा-

हाइफन-2018 हाइकु विशेषांक

Posted by: हरदीप कौर संधु | अगस्त 15, 2019

2036

डॉ. पूर्वा शर्मा
1.
रेशमी धागा
बचपन की यादें
करता ताज़ा ।
2.

पूरब भाई

बहन भेजे
ऑनलाइन राखी
भाई को पाती ।
3.
नेट निभाता
बचपन का प्यार
राखी -त्योहार ।
4.
पल में उड़े
विदेश जा पहुँचे
मन की राखी ।
5.
रिक्त ही रही
बचपन में जेब
आज कलाई ।
6.
राखी की भेंट
पूरी पॉकेट मनी
छोटी ले ऐंठ ।
7.
कैसे बाँधती ?
परदेस में भाई
सूनी कलाई ।
8.
आज भी करे
राखी का इंतज़ार
बूढ़ी कलाई ।
9.
रौब जमाती
कोमल कलाई पे
बड़ी-सी राखी ।
10.
अमूल्य भेंट
राखी के बदले में
दो चॉकलेट ।

Posted by: हरदीप कौर संधु | अगस्त 12, 2019

2035

1-कमला निखुर्पा 

1

भाई विदेश 

नभ के चाँद ले जा 

मेरा संदेश । 

2

न हो उदास 

कहना तू उनसे-

बहना साथ ।

3

लूँ मैं बलैया 

वारी-वारी जाऊँ रे 

चंदा -सा भैया । 

4

राखी-2

गूगल से साभार

नभ के चाँद

निहारता होगा ना

तुम्हें वो चाँद।

5

नेहचाँदनी  

विदेश में बरसे

भाई हरसे।

-0-

2-पुष्पा मेहरा

1
दूधिया चाँद
चाँदनी में दमके
भैया की राखी !
2
ढूँढू भैया ! मैं
राखी के धागों बीच
अटूट नेह !
3
सावनी पूनो
बंधन में बाँधती
भाई का प्यार |
4
हारो न मन
सीमा पे राखी भेज
कहे बहना |
-0-pushpa.mehra@gmail.com

Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | अगस्त 9, 2019

2034-गाँव

1-डॉ. कुँवर दिनेश

1

3-PREETI-5AUG-19 (3) - Copy

चित्र; प्रीति अग्रवाल

शान्ति आपूर,

अच्छा है शहर से

गाँव है दूर।

2

हाई-वे बना,

गाँव के हृत्तल में

भय-सा तना।

3

ठण्डी पवन,

गाँव की पहचान

चीड़ों का वन।

4

खुला जीवन,

खुली हवा गाँव में

खुला आँगन।

5

खड्ड का पानी –

कल-कल कहता

गाँव की बानी।

6

सबसे न्यारी

गाँव वाले घर में

फूलों की क्यारी।

7

घनी छाँव में

फुदकती  चिरैया

मेरे गाँव में।

8

आ जाते तोते,

जब जब गाँव में

काफल होते।

9

गिद्धा व नाटी 

सहज थिरकती

गाँव की माटी।

10

फ़ार्म-हाऊस:

शहर के लोगों का

तख़्ते-ताऊस!

-0-

Posted by: हरदीप कौर संधु | अगस्त 3, 2019

2033-बेटी की बिदाई

  प्रीति अग्रवाल

1

बेटी हमारी 

सुशिक्षित संस्कारी

बाबा हर्षाए।

2

वर ढूँढो जी

बीते न उमरिया

बेटी सयानी।

3

दोनों विचारें

लक्ष्मी, पर श्यामली

कौन ब्याहवे!?

4

मन अधीर

कौन-सा घर, वर,

भाग्य लिखाए!

5

रिश्ता है आया

अम्मा बाबा बधाई!

उमंगें लौटीं।

6

बंदनवार!

दरवाज़ा देखे बाट

आए बारात!

7

बेटी के बापू

पगड़ी को सँभाल!

आई बारात।

8

ऐंठे बाराती

अशर्फियाँ लुटाओ

तो हो विदाई!

9

सहमा बाप

अशर्फियों में तोला

दूल्हा बिकाऊ।

10

बेटी बेबस

शोक, असमंजस,

कैसी बिदाई?!

11

बेटी संस्कारी

सिसकियाँ दबाए

लाज निभाए!!

Posted by: हरदीप कौर संधु | जुलाई 31, 2019

2033

1-धर्मपाल महेंद्र जैन

1

अक्षांश भिन्न

फिर भी धरती है

हर कहीं माँ।

2

बौर आ गए

घोल रे पपीहरा

रंग केसरी।

3

तेरे नाम पे

रोज़ दौड़ आती है 

मुस्कुराहट।

4

खड़ा हूँ यहीं

ऋतु बदले मन 

आ जाना तब।

5

भूले-भटके

किस्मत खुल गई

बात हो गई।

6

सूर्य, प्रेम में

परिक्रमा रत है

योगिनी धरा।

-0-

सम्पर्क : 1512-17 Anndale Drive, Toronto M2N2W7, Canada,

ईमेल : dharmtoronto@gmail.com                   

फ़ोन : + 416 225 2415

-0-

2-रमेश कुमार सोनी

सावन -भादो 

बस्ते का बोझ ज़्यादा 

मेघ ramesh kumar soniबरसे

पाखी चीरते 

मेघ का चौड़ा सीना 

हौसला बड़ा ।

नदी सावनी 

चंचल कुँवारी है , 

बहे मायावी ।

धरा का मंच 

घनश्याम नचाते 

पावस बूँदें ।

विदा लो बूँदों ! 

हरी छंद लिखने 

मेघ रोया है ।

सूर्य, बादल 

रंग भरने दौड़े 

नील गगन ।

बेख़ौफ़ बूँदें 

छमाछम नाचतीं 

धरा हर्षाने ।। 

-0-

रमेश कुमार सोनी , बसना , छत्तीसगढ़ 

         (7049355476 )

Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | जुलाई 27, 2019

2032

कृष्णा वर्मा

1

ऋतुगीत गा

बदरा-बिजुरी ने

ढाया ग़ज़ब।

2

मेघ साँवरे

बरसे जमकर

हँसें फुहारें।

3

मिटी तपन

ओर -छोर डूबके

धरा नहाए ।

4

ठंडी औ भीगी

फर्र-फर्र हवाएँ

प्रीत जगाएँ।

5

गिरीं बौछारें

झुलसी दिशाओं की

देह सँवारें।

6

चहक फिरे

चिरैया आँगन में

पंख भिगोए।

7

बदल गए

रंग आबो-हवा के

स्वप्न हमारे।

8

घटा के पाँव

बजी पाजेब बूँदें

छनछनाईं।

9

भीगी फुहारें,

संग लाया सावन

सोंधे त्योहार।

10

सावन फूले

रक्षाबंधन तीज

मेहँदी झूले।

11

उठे हिलोर

छिड़े पुराने तार

याद झंकार।

12

सावन लाए

पीहर की स्मृतियाँ

जी महकाए।

13

वर्षा संदेसा

‘बिटिया लिवा लाओ

भैया को भेजो।’

-0-

Posted by: हरदीप कौर संधु | जुलाई 24, 2019

2031

डॉ.सुरंगमा यादव

1

नन्हीं-सी बूँद

मेघ की दहलीज

छोड़ के चल।

2

प्यार से पली

जाएगी किस गली

वर्षा की बूँद ।

3

बहुत प्यास

पूरा ही समन्दर

पीने को पास ।

4

बंजर धरा

उगेगा उसमें क्या!

काँटों के सिवा ।

5

खुश थे बड़े

सपनों में थे खोए

जागे तो रोए ।

6

वंशी की तान

तुमसे मिलकर

छेड़ते प्राण ।

7

घायल पाँव

तुम तक पहुँचे

राहत देते।

8

दूर आकाश

उड़ गया पखेरू

नीड़ उदास ।

9

दुःख की आँधी

उखड़ने लगता

धैर्य का पौध।

10

झील में चाँद

पकड़ने की जिद

हठीला मन ।

11

मन भटका

क्षितिज को ढूँढता

पाएगा कहाँ !

12

यादें थीं सोयी

सावनी  फुहारों ने

आ के जगाया।

-0-

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