Posted by: हरदीप कौर संधु | जून 29, 2020

2053-सुनो आकाश !

डॉ. सुरंगमा यादव

1

अधीर मन

द्वार पर नयन

डाले हैं डेरा।

2

पत्र -विहीन

सहमीं -सी डालियाँ

लगतीं दीन।

3

मौन क्रन्दन

सुनता प्रतिध्वनि

व्याकुल मन।

4

दुःख- पहाड़

अभिव्यक्तियाँ मौन

झरते नैन।

5

रेत में पाँव

वेगवती लहरें

ठोकर मारें।

6

लिखो तो सही

संवेदना के गीत

गाएगी सदी।

7

रखते वीर

तरकश में तीर

सोचके साधें।

8

अधिक मीठा

कड़वा-सा लगता

थोड़ा हो तीखा।

9

झरी पत्तियाँ

अनमनी डालियाँ

सूनी है गोद।

10

स्वर्णिम धूप

लहरों पे बिखरी

दोनों निखरीं।

11

कलियाँ खिलीं

माली के हृदय में

ममता बढ़ी।

  चित्रःसन्दीप काम्बोज
चित्रःसन्दीप काम्बोज

12

सुनो आकाश !

एक छोटा-सा कोना

मुझे भी दो न!

-0-

Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | जून 27, 2020

2052

1-रमेश कुमार सोनी 

1

लावण्य झरा 

धूप , चाँद  हर्षाए 

बच्चा बनके । 

रश्मियाँ हँसी 

मेघों के पीछे खड़ा 

इंद्रधनुष । 

3

कर्फ्यू की कोख 

दर्द , बैर पलते 

जन्मती लाशें ।

4

बेटी चिड़िया 

फुर्र से उड़ जाती 

सखी मायका ।  

5

मजूरी भूखी 

किराया चूल्हा ठंडा 

जवानी बिकी । 

6
नोट खरीदे
चाबी, हूनर , जिस्म
इश्क़ से डरे ।

7
चीखती नारी-
मर्द का पशु जिंदा
खबरे  नंगी ।

8
चूल्हे ठंडे थे
श्मशान में जलती
सर्दी की लाश ।

9
भूखा सोया था
स्वप्न में रोटी खाई
भोर डकारे !!

10
हक माँगते
भूत , भविष्य लड़े
आज तमाशा ।

11
कोख में नीड़
अल्ट्रासाउंड बाज़
कन्या ले उड़ी ।

12
मेघ पिलाते
घास मुस्काते जन्मे
नभ के दूध ।
-0-एच पी गैस के सामने , जे पी रोड – बसना,जिला – महासमुंद ( छत्तीसगढ़ ) पिन – 
493554
संपर्क – 
7049355476

 -0-

2- मेरे पिता-प्रीति अग्रवाल

1

आधारशिला

तन ,मन आत्मा की

तुम ही पापा!

2

ऋणी रहूँगी

उपहार प्रभु का

पिता का प्यार।

3

समाज नींव

तुम सच कहते

नारी सम्मान!

4

मनमौजी से

हर पल तुम थे

तुम जैसी मैं!

5

सैकड़ों रोए

जब पापा तुम्हारी

हुई विदाई।

6

गया कहाँ हूँ-

दिल  में झाँक ज़रा

यहीं बसा हूँ!!

-0-

Posted by: हरदीप कौर संधु | जून 23, 2020

2051-पिता

 

1-सुदर्शन रत्नाकर

1  

धैर्य-सागर

ऊपर दिखे शांत

भीतर आग।

2

देता है छाया

बरगद का पेड़

पिता का साया।

3

आस्था-विश्वास

भरा मेरे भीतर

जन्म के साथ।

4

स्वेद बहाते

धूप में तपे पिता

बच्चों के लिए।

5

पिता का साथ

खुशियों की गुल्लक

टूटी -बिखरीं ।

6

पिता के बिना

बेसहारा सन्तान

सूनी दुनिया।

 7

मेरी जीवन

पिता के प्रताप से

आँचल भरा।

-0-

सुदर्शन रत्नाकर ,ई-२९,नेहरू ग्राउण्ड , फरीदाबाद
मोबाइल 9811251135
-0-

2-ॠताशेखर मधु

1

सूरजमुखी

पिता की ओर देखे

नन्हा बालक।

2

पिता की सीख

नारियल में बंद

मीठा शर्बत।

3

दूर्वा की नोक

पिता के काँधे पर

ओस की बूँद।

4

मरु की रेत

पिता ने पग धरे

केरे चिह्न।

5

पिता की खुशी

लहरों ने छुपा

सिंधु के दुःख।

6

फूले गुलाब

पिता ने समझाया

जग की रीत।

7

पिताजी मूल

शाखाओं पर सजे

पत्तियाँ– फूल।

8

पिता की छाया

बेफ़िक्री से खेलते

खग– शावक।

9

नभ सिन्दूरी

देखे नन्ही मुनिया

पिता की राह।

10

टूटी है नौका

पितृहीन बालक

ढूँढे सहारा।

11

जग अम्बर

पिता लगते सूर्य

माता चन्द्रमा।

-0-

Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | जून 22, 2020

2050-भाषान्तर

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

Posted by: हरदीप कौर संधु | जून 18, 2020

2049

 

 

Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | जून 17, 2020

2048

 

Posted by: हरदीप कौर संधु | जून 14, 2020

2047

1-पुष्पा मेहरा

1.

फूलों की ओट

जेठ सताई धूप

ढूँढती ठौर।

2.

धूप के गाँव

छाया को तरसता

हिरना-मन।

3.

नेहाप्लावित

गूँज रहा, झूमता

हरा चमन।

4.

कोरोना -काल

घुट रहा मनुज

हँसे प्रकृति।

5.

धधके वन

काँप रही धरती

जाऊँ किधर।

6.

दुख सहेजे

गूँज रहे कमरे

वृद्धाश्रम है।

7.

मौत की घाटी

फूल औ मोमबत्ती

करे शृंगार।

8.

जीवन-नद

आग से घिरी कश्ती

खुद ही खेनी।

9.

कोरोना -काल

खिड़की से मिलता

सूरज मेरा।

10.

पूनो की रात

झरा हरसिंगार

महकी गली।

11.

पल दो पल

टूटते ना मन से

मोह के धागे।

12.

दिन की पीर

सूरज की रुखाई

जाने ना जेठ।

13.

धूप से तपी

स्वेद सुखाती छाया

बरामदे में।

-0-pushpa.mehra@gmail.com

-0-

 2-डॉ.भीकम सिंह

1

लगे बरसों

मन की कहने में

कल– परसों।

2

झूठ-रँगीले

अपेक्षा कर ग

रुमाल-गीले।

3

पहली बात

नदी में झिलमिल

चाँदनी रात।

4

कसम खाएँ

नदी तट के वृक्ष

बाँह फैलाए।

5

मन-भावन

बौराए जो पवन,

लगे-सावन।

6

फूटी  कोंपल

पतझड़ से छीने

सोने के पल।

 7

इस तीर से

बहते रहे दीये

उस तीर से।

0

पथ भूला-सा

पतझड बना

मुँह फूला-सा।

-0- एसोसिएट प्रोफेसर,मिहिर भोज पी.जी.कालेज,

दादरी, गौतमबुद्धनगर, (उ.प्र.)203207

-0-bheekam02@gmail.com

Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | जून 13, 2020

2046

 

Posted by: हरदीप कौर संधु | जून 10, 2020

2045

 शशि पाधा

1

नेह बौछार

न भीगे, न ही सोखे  

पत्थर  दिल ।

2

धरा से मिली 

आसमान से कूदी

बाँवरी धूप ।

3

ओ री तितली !

सतरंग चुनरी

किसकी भेंट ।

4

संयम मेरा  

हार न समझना

संस्कारी हूँ मैं ।

5

सच्चे औ सुच्चे

पारदर्शी हैं शब्द

तोल के बोल ।

-0-

 

Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | जून 8, 2020

2044

Ila Kulkarni

1-Butterfly

1

Fluttering its wings

Soaring high up in the sky

Its colors shine bright

2

Joining the others

Leaving a beautiful glow

People look around

3

Traveling back home

Flashing colors like the sun

Flying up above

 

-0-

भाषान्तर

तितलियाँ-इला कुलकर्णी

(अनुवाद: मंजु मिश्रा)

1

पंख हिलाती

ऊँची- ऊँची उड़ती

चमकें रंग

2

मिलके साथ

बिखेरतीं हैं रंग

लोग मोहित

3

घर को चलीं

सूर्य सी चमकतीं

नभ में उड़ें

-0-

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