Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | सितम्बर 19, 2020

2081

मीनू खरे

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

Posted by: हरदीप कौर संधु | सितम्बर 15, 2020

2080-यादें, न आओ

1-डॉ.जेन्नी शबनम

1.

मीठी-सी बात

पहली मुलाक़ात

आई है याद।

2.

दुखों का सर्प

यादों में जाके बैठा

डंक मारता।

3.

गहरे खुदे

यादों की दीवार पे

जख्मों के निशाँ।

4.

तुम भी भूलो,

मत लौटना यादें,

हमें जो भूले।

5.

पराए रिश्ते

रोज याद दिलाते

देते हैं टीस

6.

रोज कहती

यादें बचपन की –

फिर से जी ले!

7.

दिल दुखाते

छोड़ गए जो नाते,

आती हैं याद।

8.

पीछा करता,

भोर-साँझ-सा चक्र

यादों का चक्र।

9.

यादों का पंछी

दाना चुगने आता

आवाजें देता।

10.

दुख की बातें,

यादें, न आओ रोज,

जीने दो मुझे।

-0-

2-डॉ. सुरंगमा यादव

1

घिरी घटाएँ

नयन गगन में

बरसीं यादें।

2

सोई थीं यादें

सावन की फुहारें

जगा ही गईं।

3

बूढ़ा संदूक

यादों की विरासत

सहेजे बैठा।

4

मन-मकान

यादों ने कर लिया

अपने नाम।

5

यादों के घन

बरसे जब-जब

भिगोया मन।

6

मन में सोई

जाग उठी स्वप्न में

याद पुरानी।

7

स्मृति- झरोखा

दूर तक दिखते

दृश्य अनेक।

8

यादों में खोई

बिन बोले सुन लूँ

कागा की बोली।

9

यादों के संग

मन का अनुबंध

नित नवीन।

10

उजली यादें

मानस-मंदिर में

जला दीप-सा

11

मन-बगिया

कलरव करते

यादों के पंछी।

12

याद-कोकिला

मन-पतझर में

लाई वसंत।

13

याद तुम्हारी

पावस बनकर

छाई नैनों में।

14

जोडूँ कड़ियाँ

यादों की तो बनतीं

लम्बी लड़ियाँ।

15

जलता रहा

आँधियों में दीपक

तेरी यादों का।

16

विचर रही

मानस-सागर में

याद-हंसिनी।

      -0-

Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | सितम्बर 10, 2020

2079-यादें

1-रमेश कुमार सोनी

1

यादें गिन्नियाँ 

बच्चों से किलकते
मन रईस ।

2
कौआ पुकारे
यादें लौट आई हैं
कोई आएगा ।

3
उनके गाँव
स्मृति के  बेर मीठे
अश्रु खारे क्यों ?

4
यादें सखी हैं
बतियाने जगाती
रातें भी छोटी ।

5
दिल जो रोके
यादों के घन झूमे
आँखें सावन ।

6
पहचाना क्या ?
यादें जिंदा हो गईं
खुशी रो पड़ी ।

7
सदा रुदाली
अच्छी – बुरी स्मृतियाँ
हाल जो पूछा।

8
प्यार की यादें
युवा वक्त ने लिखा
शब्द गुलाबी ।

9
संधि टूटती
होंठों और आँखों में
स्मृति अँगना।

10
यादें बैसाखी
बुढ़ापे का सहारा
साथ निभाता ।।

11
यादों की बूँदें
आँखों को भिगो गईं
धत सावन ।
0-
रमेश कुमार सोनी ,जे पी रोड – बसना , जिला – महासमुन्द ,छत्तीसगढ़ , पिन – 493554
संपर्क – 7049355476 

-0-

2-पुष्पा मेहरा

1.

सावन–रात

ढूँढता मन, चंदा

यादचकोर

2.

यादें शैवाल

मन के सरोवर

फैली घनेरी।

3.

भोरचिरैया

उड़ मुँडेर आई

चहकीं यादें।

4.

सूनी गलियाँ

गुर्राती बिजुरिया

बरसीं यादें।

5.

थकी है अम्मा

यादें सहेलियाँ आ

हरती पीड़ा।

6.

महके बौर

यादों की झोली भरे

झरे टिकोरे।

7.

वर्षा सौगात

यादों में इंद्रधनु

मन के छोर।

8.

डूबा जहाज

रोती रहीं सुधियाँ

छाया सन्नाटा।

9.

खोली किताब

मुरझाया गुलाब

ताज़ा हो झरा।

10

यादपरिंदे

नित नई डाल पे

नीड़ बनाते।

11.

यादों में बसी

संस्कारों की केंचुली

मन ने छोड़ी।

12.

काँटों से ढकी

ताज़ा ही मिली सदा

यादों की झाड़ी।

-0-

3-मंजूषा मन

1

यादों के पंछी

पलकों की सीप से

मनके चुनें।

2

स्मृति के द्वारे

महकी रात रानी

आँखों में पानी।

3

आँखें बरसीं

जब भी आईं यादें

बीती वो बातें।

4

धो दिया सारा

स्मृति का कैनवास

रंग- बेरंग।

5.

फूटी जब से

याद वाली गगरी

बहें नयन।

6

मुस्कान लाएँ

मधुर यादें तेरी

जब भी आएं।

7

झरे सावन

यादों में हरदम

भीगे ये मन।

-0-

4- डॉ.विभा रजंन   

  1     

ऐ चाँद सुन

ये अंतर व्यथा

तुझसे कहूँ

2

प्रीतम मेरा

मुझसे है बिछड़ा

मन बेचैन

3

बेकल रहें

सुख- चैन हमारे

नहीं है  चैन

4

पागल मन

देखे राह उनकी

बाहें फैला

5

मेरे नयना

राह देखे हैं तेरी

कब आओगे

6

उसके बिना

मेरा जिया ना लगे

जाऊँ हाँ मैं

7

अँधेरी रात

पल जो आते याद

के मन

8

बीते वो दिन

ये चाँद ये सितारे

लगते शूल

9

नीला आसमाँ

मुझपर हँसता

चाँदनी रोती

10

मन उदास

तुम नहीं हो पास

कुछ नहीं

11

संदेशा भेजूँ

मिलन हो जाये

मन हर्षित

12

एक बार ही

मिलने तो आओ

बात तो मानो

13

दरस दे दो

कुछ तो चैन मिले

प्यास बुझे

14

आओगे जब

नयनों में रखूँगी

छोड़ूँगी नहीं

15

साक्षी बनेगी

शुभ्र चाँदनी रात

शुभ मिलन

-0-

डॉ.विभा रजंन (कनक),Dr.Bibha Ranjan, B/37 Around floor ,Soami nager,South Delhi 110017,New Delhi
9911809003
-0-bibha.g3@gmail.com

 -0-

5-अनिता मण्डा

1.

यादें बनैली

आँसुओं की सहेली

रही पहेली

2.

स्मृति-पखेरू

चुग चैन के दाने

छिपे सयाने।

-0-

6-भावना सक्सैना

1

याद नूपुर

रुनझुन बजते

मन बगिया।

2

याद बूँद है

टिकी पात के आगे

हौले से काँपे।

3

स्मृति मधुर

कभी करे विकल

हर्षाए कभी।

4

याद की बूँदे

नयनों की सहेली

बसें कोर पर।

5

बैरन यादें

दौड़ी आएँ आँगन

देख अकेली।

6

यादें जो खिलें

हो मन सुरभित 

फैले सुवास।

7

याद डाकिन

दबे पाँव आती हैं

छीने सुकून।

8

मन आँगन

रोपा एक बिरवा

यादों के फूल।

9

कटी पतंग

लहरा आएँ यादें

डोर के बिन।

10

वृक्ष सघन

यादों के गाँव में

लदे सुमन

-0-

Posted by: हरदीप कौर संधु | सितम्बर 7, 2020

2078-यादें

1-डॉ. कविता भट्ट शैलपुत्री

1

मनपटल

स्मृति के चलचित्र

तन विकल

2

यादों की बूँदें

मनआँगन पड़ी

सुगन्ध उड़ी

3

तरसी आँखें

दिखे नहीं सजन

केवल यादें।

4

महकी यादें

बन रात की रानी

नैनों में पानी

5

आओ सजन

यादों के झूले पर

झूलेंगे संग

6

मन ने बीनी

मकई की कतारें

समय भुट्टा

7

जब बरसी

यादों की बदरिया

मन पपीहा

8

नील गगन

मन उड़ता रहता

यादें उड़ान

9

यादें व तुम

विपरीत ध्रुव से

कभी न संग

10

प्रणव यादें

विरह के मनके

जपता मन

11

मन की वीणा

यादें तेरी झंकार

साँसें वन्दन

12

उर्वरा भूमि

ढेरों फूल-काँटे भी

यादें उगातीं ।

-0-

2-रश्मि विभा त्रिपाठी रिशू

1

यादों का दीप

जला रौशनी छुए

आके समीप

2

तुम्हारी याद

ज्यों आई मुँह छिपा

भागा विषाद

3

तुम्हारे बाद

कैसे कहूँ कितना

सताती याद !

4

प्रिय की बोली

आह! कानों में मानों

मिस्रीसी घोली

5

तरसे कान

कुछ बोलो कर लें

ये मधुपान

6

कड़वी याद

जख़्म भर न पाती,

पुन: दे जाती

7

सुन री याद !

क्यों ठहरी है यहाँ

उसके बाद

8

कड़वी-मीठी

पकी स्मृति सुलगी

हिय-अँगीठी

9

बारह मास

बाट जोहती याद

दूभर साँस

10

स्मृति बगिया

महका दिया मन

खिले पुष्पों ने

11

ज्यों उड़ चला

याद का पंछी हुआ

मन बावरा!

12

हो मतवाला

मन खोले नित ही

यादों का ताला

13

न तरसाओ

याद आते हो ज्यों

रू-ब-रू आओ!

14

यादों के मोती

झर-झर झरते

ज्यों रात होती

15

अकेलापन

घेरे फिर पुकारे

स्मृति का वन

16

यादों का घट

फूटा मन सागर

में नेह घुला

17

मन के द्वार

बैठी निहारूँ प्रिय

मैं बारम्बार

18

सन्ध्या की बेला

सज गया मन में

यादों का मेला

19

यादों की गली

पुकारे प्रिय मुझे

मैं दौड़ चली

20

दिनावसान

आए प्रिय ले साथ

स्मृति-सामान

-0-

3-सत्या शर्मा कीर्ति

1

यादों की वर्षा

सूखा है तन पर

गीला-सा मन।

2

उदास साँझ

बुढ़ापे की चौखट

यादों का दिया।

3

तुम्हारी यादें

मन किवाड़ पर

देती दस्तक

4

बाँध आई थी

मायके चौखट पे

मासूम यादें।

5

यादों की बाती

जलती रात भर

बन के दिया।

6

तुम्हारी यादें

जैसे गोकुल धाम

कृष्ण की बातें।

7

प्यारी-सी यादें

नटखट बच्चों-सी

छेड़ती मुझे।

8

यादों का दिया

विरहिणी जलाती

लम्बी रातों में।

9

गाँव की याद

बन जीवन साथी

रहती साथ।

10

बुढ़िया नानी

बाँचती हरपल

यादों की पाती।

11

यादें खूँटी पे

उम्र भर की बातें

टँगी रहती।

13

सुखद यादें

अनमोल खजाना

जीवन-पूँजी।

-0-सत्या शर्मा कीर्ति‘ , रांची, झारखण्ड

ईमेल-satyaranchi732@gmail.cm

Posted by: हरदीप कौर संधु | सितम्बर 5, 2020

2077

1-कमला निखुर्पा

1

बरस गईं

सुधियों की बदरी

पावस-नैन।

2

बिसरी यादें

ढूँढे चातक मन

रोए गगन।

3

मन का कोना

कब से सूना-सूना

आ बैठी याद।

4

मन में छुपी

यादों की गठरिया

बोझिल हुई।

5

बाँचती रही

मैं यादों की किताबें

सुने तो कोई।

6

तुम्हारी याद

ज्यों बदली से झाँके

पूनो का चाँद।

-0-

2-कृष्णा वर्मा

1

पलकों पर

कतरों-सी ठहरीं

यादें तुम्हारी।

2

डूबी तिरती

नयनों की झील में

यादों की कश्ती

3

स्मृतिडगर

मन का मुसाफिर

करे सफ़र।

4

किसने लिखी

मन के पन्नों पर

यादों की लिपि।

5

चाँद उतरे

यादों का सिलसिला

मन कुतरे।

6

करें बेताब

स्मृतियाँ रुलाती हैं

जाने के बाद।

7

जाने वाले तो

छोड़ जाते हैं यादें

आँसू अभागे।

8

यादें कमाल

होंठ मुसकाके  दें

आँखों को आब।

9

दिल चरखा

यादों का ताना-बाना

बुने निमाना।

10

दर्द हों पुख़्ता

नींद के सिराहने

यादों का दस्ता।

11

आँखें जो मूँदें

डोरों का बाँध तोड़े

यादों की बूँदें।

12

होंठों पर चुप्पी

भीतर घनघोर

यादों का शोर।

13

दिन क्या ढले

स्मृतियों का पुलिन्दा

थमाता चले।

13

चाँद नायाब

दमके, रुलाए दे

स्मृति अज़ाब।

14

कैसे मिटाएँ

यादें दिल से फटे

दिल का पन्ना।

-0-

3-नंदा पाण्डेय

1

पूरे वेग से

बह गई आँधी में

जीवन थाती

2.

कानों में मेरे

बजी वंशी की धु

यादें पुरानी

3.

चौक पूरती

गाती है विरहन

यादों के गीत

4.

याद तुम्हारी

प्रतिपल नूतन

स्पंदनरत

5.

यादों की रेखा

खींच गई मन में

अंग-रागसी

6.

नाप लिया है

चातक की प्यास को

स्वाति बूँद ने

7.

शून्य का मौन

अभिसार अथक

बातें यादों की

8.

मन की टीस

यादों के क्रंदन में

गीत प्रीत के

9.

स्नेह अश्रु के

मन गठबंधन

लहूलुहान

-0-

Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | सितम्बर 2, 2020

2076

1-प्रीति अग्रवाल

1.
मीठी थी यादें
फिर भी न जाने क्यों
अश्रु थे खारे!
2.
याद-पतंगा
नैनन पड़ गया
खूब रुलाया।
3.
याद तुम्हारी
जल बिन मीन-सी

तड़पा गईं
4.
ओस की बूँदें
स्मृतियों का सैलाब
प्यासा ही छोड़ें!
5.
गुल्लक फोड़ी
चहु ओर यादें
मीठी बटोरीं।
6.
याद- चिरैया
मन व्याकुल कर
फुर्र से उड़ी।
7.
यादों के पंख
फिर उड़ चली मैं
साजन संग!
8.
याद पखेरू
उड़ गए देकर
कई सौगातें।
9.
पायलिया सी
छन छन छनकी
स्नेहिल यादें।
10.
याद कटारी
जियरा में उतरी
करें
लनी
11.
संजोईं यादें
ज्यों सागर तल में
सीप में मोती।

-0-

2-सविता अग्रवाल सविकैनेडा

1.

अन्तर्मन में

घुँघरू-सी बजती

स्मृति की धुन।

2.

नाचती स्मृति

झाँझ बजाती आईं

मन के द्वारे।

3.

यादों के शूल

दिन-रैन चुभते

करें बेहाल।

4.

पगली स्मृति

इत-उत डोलती

पकड़े हाथ।

5.

काली घटाएँ

स्मृतियों संग छाएँ

नैन रुलाएँ

6.

यादों की नमी

सीलन सी-बसती

हिय की बस्ती

7.

यादों का साया

छाया जैसा रहता

हाथ ना आता।

8.

स्मृति के दीप

ह्रदय में जलते

आभा भरते।

9.

स्मृति की बूँदें

देख, चाँद झरतीं

नेत्रों से बहतीं।

10.

स्मृति के शूल

टीस भरें तन में

करें अधीर।

11.

यादें सतातीं

अधमुँदे नयन

नींदें उड़ातीं।

12.

साँसों में बसी

घरौंदे बना रही

अनंत यादें।

-0-सविता अग्रवाल सविकैनेडा,दूरभाष: (905) 671 8707

-0-

3-ज्योत्स्ना प्रदीप 

 1

यादें मीरा-सी 

मनमोहन  तुम 

तुम  में  ग़ुम  !

2

प्रभु की  याद 

ऊषा बन भगाती 

दुख-विषाद |

 3

माँ की स्मृतियाँ 

मन-संग्रहालय 

कलाकृतियाँ !

4

सुनों सजनी 

बनी मादक रात 

तेरी वो बात !

5

निशा-घनेरी   

पूनम की रात -सी, 

आहट तेरी !

6

हृदय-धारी 

बातें  तेरी  चिंगारी 

जलाती मन !

 7

वो याद भोली

प्रथम-परिचय 

जब  तू बोली |

8

हिय में हूक 

उठाती तेरी चुप्पी 

आँसू भी  मूक |

9

सैनिक पिया !

मेरे नैनों की सीमा 

आशा-प्रहरी !

10

बदला वेश 

समय ने जग का

यादें  रे  शेष !

11

रिश्ता पावन 

जेठ-मौसम में भी

हरा सावन !

 

-0-

 

Posted by: हरदीप कौर संधु | अगस्त 31, 2020

2075

1-भूल न पाऊँ  / डॉ. कुँवर दिनेश सिंह

1
आ जाओ यादों!
प्यार का मौसम है-
सावन-भादों!
2
भूल न पाऊँ,
बुरे दिनों के साथी
तुझे बुलाऊँ।
3
आँखें हमारी
झपकें न पलकें,
यादें तुम्हारी!
4
राह भूली है
टंगा हूँ चौराहे पे-
याद सूली है।
5
आया सावन-
यादों का उमगाव,
बरसे घन!
6
बस गई हैं-
दिल में यादें तेरी-
रच गई हैं!
7
रात सावनी!
दिल में तेरी याद!
बदली घनी!
8
पड़े हैं झूले-
सावन में साजन
राह क्यों भूले!
9
झरती बूँदें
बैठी रात अकेली
आँखों को मूँदे।
10
उम्मीद जगे-
मौसम आए- जाए
हमेशा ठगे!

-0-डॉ. कुँवर दिनेश सिंह ,कवि. कथाकार. समीक्षक. अनुवादक.
प्राध्यापक  (अँग्रेज़ी) व संपादक: हाइफ़न,पत्राचार:#3, सिसिल क्वार्टर्स, चौड़ा मैदान, शिमला: 171004 हिमाचल प्रदेश।
ईमेल: kanwardineshsingh@gmail.com
मोबाइल: +919418626090

-0-

2-हाइकु—सुदर्शन रत्नाकर

1

भूल भुलैयाँ

ये जो यादों के घेरे

बाँधे रखते।

2

जहाँ भी जाऊँ

साथ-साथ रहतीं

यादें देश की।

3

पीपल छाँव

मेरा अपना गाँव

बसा यादों में।

4

गिरते पत्ते

करने लगे याद

जब थे साथ।

5

इन्द्रधुनष

छाया है मन पर

तेरी स्मृति का।

6

नैनों के कोर

भीगते रात भर

तेरी याद में।

7

देता है पीड़ा

पर छूटता नहीं

स्मृति का जाल।

8

मीठी सी यादें

भरती हैं उमंग

बचपन की।

9       

बीते वे पल

बिताए तेरे संग

बनी स्मृतियाँ।

10

उड़ा ले गए

सुधियों के बादल

अपने संग।

11

बावरा मन

ढूँढता है रहता

बीता जो कल।

12

दुख की बेला

देती हैं थपकियाँ

माँ की स्मृतियाँ।

13

पुकारती है

बेटी जब माँ मुझे

माँ, याद आती।

14

बोझ यादों का

कब तक उठाऊँ

भारी लगता।

15

बिन यादों के

नीरस- सा जीवन

बीतता कैसे!

16

चाँद लाया था

स्मृतियों की चाँदनी

सहला गई।

17

बरसती हैं

बादल बन यादें

सूने मन में।

18

यादें पतंग

उड़ाकर ले जाएँ

बीते दिनों में।

-0-सुदर्शन रत्नाकर-मोबाइल-9811251135

-0-

 3-स्मृतियाँ -सुवासित कलियाँ

-अनिता ललित

1.

आँसू से सींचे
स्मृति के उपवन –
लहलहाएँ!
2.

कभी हँसाएँ
लग के गले कभी –
यादें रुलाएँ।
3.

ताके दीवाना –
चाँद का यादों से है
नाता पुराना।
4.

वर्षा सुहानी
छम-छम नाचें
यादें पुरानी।
5.

रात चाँदनी
पलक-अलगनी
यादें हैं टँगी।
6.

दुखते बड़े
तन्हाई की धूप में
यादों के छाले।
7.

छूटे ये देह 
मन के दर्पण में
स्मृति ही शेष।
8.

कहाँ अकेले?
वीराने में भी सजें
यादों के मेले।
9.

पल जो बीते 
स्मृति की सीपियों में –
मोती बनते।
10.

माता-पिता की 
स्मृतियों से महकी

मन की गली!

-0-

4-डॉ. पूर्वा शर्मा

1

दौड़ता वक्त

पर अटकी वहीं

स्मृति की सुई ।

2

आदि न अंत

जीवन से भी लम्बी

स्मृति की पंक्ति ।

3

कान्हा की याद,

राधा ही छेड़े अब

बाँसुरी तान ।

4

चूल्हे का स्वाद ?

यादों पे ही पकता

केसरी भात ।

5

वाह ! स्वादिष्ट !

खट्टे-मीठे टुकड़े

स्मृति-व्यंजन ।

6

ऋतु बदली

सिगड़ी सुलगती

स्मृतियों वाली ।

7

मुँह चिढ़ाती

कोने पड़ी बत्तीसी,

अम्माँ की माला ।

8

काँधे पे बस्ता

कक्षा में शरारतें

क्या था ज़माना ।

9

भटकता है,

याद-कारवाँ लिए

बंजारा मन ।

10

फिर से बसी,

पुरानी याद-बस्ती

नये साल में ।

11

यादों में बसा

ये जिद्दी बचपन

शैतानी करें ।

12

आँधी थी आई

यादों की धूल बिछा

हवा हो गई ।

13

यादों के गुच्छे

हरे-भरे भीगे से

इस वर्षा में ।

14

आँसू पाहुने

पलकों पे आ बैठे

यादों को ऐंठे ।

15

यादों में पले

बीते दिनों के पन्ने

खुलते चले ।

16

गोते लगाती

जीवन-सागर में

यादों की कश्ती ।

17

अस्थि कलश

बहा आया गंगा में,

उसकी यादें ?

18

भाड़ा ना वीज़ा

यादें करती यात्रा

देश-विदेश ।

19

सुलग रहा

यादों के अलाव पे

इश्क़ बेचारा ।

20

बंद या खुली ?

इन आँखों में बस

तुम्हारी स्मृति ।

-0-

Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | अगस्त 28, 2020

2074-यादें

 1-लिपटी यादें- मीनू खरे

1

लिपटी यादें

तेरे रेनकोट से

भीग गई मैं!

2

यादों के पन्ने

बहुत गीले हुए

इस बारिश।

3

बेटी विदा की

तो याद आई माँ भी

सच्ची जाने क्यों!

4

चाँदनी रात

चाँदनी के पेड़ से

लिपटी यादें।

5

मेरी विदाई

कोछा भर चावल

अँजुरी भर यादें।

6

बड़ी विशेष

पापा कि हर सीख

स्मृतियाँ शेष!

7

आलू-भुजिया

गरम दाल– भात

माँ याद आई।

8

अकेलापन

तेरी यादों के संग

पिकनिक है।

9

अकेलापन

याद आ रही तेरी

आख़िरी बात।

10

छल के रंग

स्मृतियों पर बिखरे

छलके नैन ।

11

तेरी याद ने

श्वेत श्याम सपने

किए रँगीले.

12

याद व दया

जाते -जाते मुझको

वो क्या दे गया!

-0-

-मीनू खरे, केन्द्र प्रमुख,आकाशवाणी बरेली ,
meenukhare@gmail. com

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2- मीठी-सी यादें – सीमा सिंघल ‘सदा’

1

ये सुधियाँ भी

देखो हुई बावरी

चंचल मन।

2

मीठी-सी यादें

कड़वी जिंदगी का

टॉनिक जैसे।

3

सूनी मुँडेर

यादों का कागा बोले,

मन चहके।

4

मन की नदी,

यादों के सागर से

मिली खो गई।

5

यादों की डोर

बाँधे मन– पतंग

उड़ती जाए।

6

यादों के मोती

चुगता जाए मन

फिर भी भूखा।

 -0-

 3- यादें अधूरी- प्रियंका गुप्ता

1

यादों के पाखी

कुछ देर ठहरे

बाँध लूँ उन्हें ?

2

यादें अधूरी

तुम मिल जाते तो

पूरी हो जाती ।

3

पाप हो गया

तुमसे यूँ मिलना

बस यादों में ।

4

उठाए फिरूँ

यादों भरी गठरी

बोझ-सी लगे ।

5

मुक्त होना है

गंधाने-सी लगी हैं

तुम्हारी यादें ।

6

अकेलापन

भागता; बस देख

तेरी यादों को ।

 -0-

 4- दृग सजल-डॉ पूर्णिमा राय, पंजाब

1

रात्रि-पहर

शांत है मन मोर

धुँधली स्मृति !!

2

उड़ते कण

सिमट रही यादें

बेकल मन

3

दर्द-उफान

लगी अश्कों की झड़ी 

फिल्म यादों की !!

4

दृग सजल

साजन तेरी यादें 

मोती ओस के!!

5

फूलों-सी यादें

सुगंधित जीवन

ताज़गी भरे!!

 6

यादें सदा ही

सुझाती रही राह

उँगली थामे!!

7

ये मीठी यादें

दें चैन ओ सुकून 

मिला माँ-स्पर्श !!

8

यादों का सूर्य

लाया स्वर्ण किरण

जगी उम्मीद!!

9

चंचल यादें

इत-उत डोलतीं

मन– हिरण !

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drpurnima01.dpr@gmail.com
www.achintsahitya.com

 

-0-

Posted by: हरदीप कौर संधु | अगस्त 26, 2020

2073

निता मण्डा

पुष्पा मेहरा

Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | अगस्त 21, 2020

2072

1- डॉ.सुधा गुप्ता

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2-जीवन –दर्शन 

कमल कान्त जैसवाल 

    1
राह न सूझे
बन- बन भटके
जीवन यात्री
   2
अपने तक
पहुँचा दे राही को
राह तो वही
   3
सूनी डगर
बिछुड़े सहचर
यादों का बोझ
   4
तय हो चला
सफ़र ज़िन्दगी का
जहाँ थे वहीं
   5
जीना न हुआ
उम्र तमाम हुई
इन्तज़ार में
   6
जीवन -दीप
स्नेह पर निर्भर
जले या बुझे
   7
घटिका यंत्र
बूँद -बूँद जीवन
चुकता जाए
   8
सुनते रहे
अंदर न उतरीं
बातें ज्ञान की
   9
सुख न साधे
सुखाभास को साधे
आकुल मन
   10

सुख- दुःख की
चलती आजीवन
आँखमिचौनी
   11
धन- यौवन
संग संबंध सारे
क्षणभंगुर
  12
क्या रोना धोना
मिलना- बिछुड़ना
क्रम सदा से
   13
देह है रथ
रथी आत्मा हमारा
सँवारें किसे !
  14 
देह का रथ
देही के जाने पर
हुआ विरथी

-0-

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