Posted by: डॉ. हरदीप संधु | सितम्बर 17, 2017

1798

डॉ.भावना कुँअर

भावना कुँअर-घर

 

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Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | सितम्बर 13, 2017

1797

डा. सुरेन्द्र वर्मा 

1

वक़्त  का साया 

मुश्किल है छूटना 

भूत का साथ 

2

नदी है वक़्त  

डूबती उतराती 

यादें तुम्हारी 

3

साथ तुम्हारे 

जो भी गुज़रा वक़्त  

यादों में बसा 

4

पता ही नहीं 

कब छोड़ दे साथ 

वक़्त  बेवफ़ा 

5

कब से खड़ा

वक़्त  था द्वार पर 

देखा ही नहीं 

6

आपकी ज़िद 

पर थामे बैठे हैं 

हम भी वक़्त  

7

वक़्त  बदला 

धरे के धरे रह गए 

सारे उसूल

8

कौन सही था 

वक़्त  ही बताएगा 

कौन ग़लत 

9

मेरी तबाही 

हँसता रहा वक्र 

मनाता जश्न 

10

टिकता नहीं 

आदत आदमी सी 

वक़्त  की भी है 

-0-डा. सुरेन्द्र वर्मा, १०, एच आई जी , , सर्कुलर रोड, इलाहाबाद -२११००१ 

Posted by: डॉ. हरदीप संधु | सितम्बर 8, 2017

1796

1-डॉ ज्योत्स्ना शर्मा

 

 

 

2-विभा रश्मि

1

नव वधू- सी

छाई है अरुणाई

जलद – ओट ।

2

सूर्य सारथी 

अरुणाभ रथ में 

दौड़ाए  अश्व  ।

3

किरण- रज 

पहुँची झुग्गी  कोने 

स्मित के दोने ।

4

रुकी न कभी 

लेखनी काग़ज़ पे 

उकेरे भाव ।

5

साँस की डोर –

सूखते सुख टँगे ,

दुःख की  वाष्प ।

-0-

Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | सितम्बर 7, 2017

1795

1-प्रियंका गुप्ता

 1

रातें अधूरी

दिन भी कुतरा-सा

ख़त्म कहानी ।

 2

सूरजमुखी-

कुम्हलाया सूरज

उदास फूल ।

 3

लुढ़क रही

बेचैन हो लहरें-

सूनी रात में ।

 4

पीले पत्तों को

ओढ़े सोई चाँदनी

सुबह तक ।

 5

पूस की रात

पेड़ के काँधे लग

सोया था बूढ़ा ।

 6

काँपती हवा

सूरज की आस में

शाल में घुसी ।

7

गिलहरियाँ

एक-दूजे से करें

ढेरों चुगली ।

 -0-

2-डॉ  सुरंगमा  यादव

1

नशा  कुल्हाड़ी

कर  में लेके , काटी

जीवन  डाल ।

2

डूब  नशे  में

बढ़ा मृत्यु की ओर

मृत्यु  से  पूर्व ।

3

मादक द्रव्य

गहरा  दलदल

धँसते  पॉंव ।

 4

 विष  कन्या -सी

मदिरा है नाशक

छोड़  दे पीछा ।

5

पत्नी  बिलखे

रोएँ   माँ  और बच्चे

अंत    नशे  में ।

-0-

डॉ  सुरंगमा  यादव
असिस्टेंट  प्रो ०  हिंदी,महामाया   राजकीय  महाविद्यालय , महोना ,लखनऊ  – उ0 प्र 0
surangma yadav <dr.surangmayadav@gmail.com>
Posted by: डॉ. हरदीप संधु | सितम्बर 2, 2017

1794

Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | सितम्बर 2, 2017

1793

1-(स्वर्गीय ) राधेश्याम 

1

तेरे ही नग़्में

कोयल की कूक में

मेरी हूक में।

2

मेरे स्वरों में

लिये तेरे ही नग़्में

आत्मा को चूमें

3

तुम्हारी बात

याद आ गई रात

कटी न रात

4

सो गया हूँ  मैं

तेरे ही नज़ारों में

तेरी ही यादों में

5

तेरे सपने

बने मेरे अपने

प्रेम के संग

6

तेरी आँखों में

गहराई तक में

डूब गया में

7

तुम आँखों में

स्वप्न -सी निगाहों में

मेरी चाहों में

8

मुझे नाज़ है

तू मेरी आवाज़ है

मेरा साज़ है

9

मेरी सांसों में

तेरे प्यारे वो नग़्में

प्राण को चूमे

10

हर अदाएँ

नज़ाकत की रस्में

गाती हैं नग्में

11

खोल नयन

जो देखा दर्पण

चुभते मन ।

12

केश सुखाती

कस बूँदें चुआती

दिल हिलाती ।

13

बन्धन खुले

केश हवा में हिले

मन मचले।

-0-

2-प्रदीप कुमार दाश ‘दीपक’
1

जूही की कली
मधुकर के प्रति
चाह निराली ।

2

बाढ़ की बेला
अश्रु कपोलों पर
काँपती लता ।

3

व्योम से पानी
समष्टि हेतु सदा
वो बलिदानी ।

4

धानी वसुधा
ओढ़ ली चुनरिया
दुकूल हरा ।

5

ऊषा मुस्काई
कमल खिल उठे
ग्लानियाँ धुली ।

6

नभ की कली
धरा पर कड़की
गिरी बिजली ।

-0-

Posted by: डॉ. हरदीप संधु | अगस्त 27, 2017

1792

1-बाल हाइकु-डॉ.जेन्नी शबनम

1.

आम है आया

सूरज की पार्टी में

जश्न मनाया। 

2.

फलों का राजा

शान से मुस्कुराता

रंग बिरंगा। 

3.

चुभती गर्मी

तरबूज़ का रस

हरता गर्मी। 

4.

खीरा-ककड़ी

लत्तर पे लटके

गर्मी के दोस्त। 

5.

आम व लीची

कौन हैं ज़्यादा मीठे

करते रार। 

6.

मुस्कुराता है

कँटीला अनानास

बहुत ख़ास। 

7.

पानी से भरा

कठोर नारियल 

बुझाता प्यास। 

8.

पेड़ से गिरा

जामुन तरो ताज़ा

गर्मी का दोस्त। 

9.

मानो हो गेंद

पीला-सा ख़रबूज़ 

लुढ़का जाता। 

10.

धम्म से कूदा

अँखियाँ मटकाता

आम का जोड़ा। 

11.

आम की टोली

झुरमुट में छुपी

गप्पें हाँकती। 

-0-
http://lamhon-ka-safar.blogspot.in/

http://saajha-sansaar.blogspot.in/

-0-

2- सत्या शर्मा ‘ कीर्ति ‘

1

टूटा छप्पर

घनघोर घटाएँ

डूबता मन

2

दरकी छतें

आत्मसम्मान बहा

बारिश संग ।

3

मन द्रवित

फूँस के कच्चे घर

है जलमग्न

4

कर रहम

डूब गई धरती

बारिश-संग

5

टपकी बूँदें

हर प्यासी आँख से

वर्षा तू कहाँ !

6

बूँद- बूँद- सा

फिसलता विश्वास

जल अभाव

7

सूखी ये आँखें

धरती है उदास

इंद्र नाराज

8

चिलचिलाती

जीवन की ये धूप

वर्षा है कहाँ ?

9

बहें नदियाँ

बस कागजों पर

प्यासा है मन

10

नदी- तलैया

प्यासी अनवरत

बरसो मेघ

-0-

Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | अगस्त 27, 2017

1791

1- डा. सुरेन्द्र वर्मा   

1

आँखों के तारे 

अंक में साथ लिये 

तैरता चाँद 

2

उड़ती फिरें 

चहकती चिड़ियाँ 

मन आकाश 

3

चूनर काली 

टाँक लिये हैं तारे 

रात निहाल 

4

छिटक गिरीं 

टूटा जो मेघ माल 

नन्ही सी बूँदें 

5

झूला सावन 

जगा गया फिर से 

याद साजन 

6

दादुर, मोर 

झींगुर झनकार 

पपीहा राग 

7

रुक न पाई 

पत्र  पर ठहरी 

बूँद लुढ़की 

8

सह न सका 

देख धरा की पीर 

बादल रोया 

-0-डा. सुरेन्द्र वर्मा (मो ९६२१२२२७७८),१०, एच आई जी / १, सर्कुलर रोड 
इलाहाबाद २११००१ 

-0-

 2-बादल राजा-डॉ जेन्नी शबन

1.

ओ मेघ राजा

अब तो बरस जा

भगा दे गर्मी। 

2.

बदली रानी

झूम-झूम बरसी

नाचती गाती। 

 3.

हे वर्षा रानी

क्यों करे मनमानी

बरसा पानी। 

 4.

नहीं बरसा

दहाड़ता गरजा,

बादल शेर। 

 5.

काला बदरा 

मारा-मारा फिरता

ठौर न पाता। 

 6.

मेघ गरजा

रवि भाग के छुपा,

डर जो गया। 

 7.

खिली धरती,

रिमझिम बरसी

बदरी काली। 

 8.

ली अँगड़ाई 

सावन घटा छाई

धरा मुस्काई। 

 9.

बरसा नहीं

मेघ को ग़ुस्सा आया,

क्रूर प्रकृति। 

 10.

सुन्दर छवि

आकाश पे उभरा

मेघों ने रचा। 

-0-

3-नारी- डॉ0 सुरंगमा यादव

मानवी हम

है मान की आकांक्षा

हक हमारा

सृष्टि हैं हम

धीरज धरा सा है

परीक्षा बस

दुखिया नारी

घर समृद्धि शून्य

साक्षी दीवारें

आधुनिक स्त्री

श्रद्धा-इड़ा का रूप

प्रगतिशील

 साथी स्वीकारो

प्रतिद्वन्द्वी न मानो

जियो-जीने दो

-0-

Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | अगस्त 15, 2017

1790

डॉ0 सुरंगमा यादव

1

गौरव गाथा

सहस्र मुख गाता

देश महान

2

आजादी आई

झूमे धरा गगन

रखो सँभाल

3

वीरों की जान

लहराये तिरंगा

सदा सर्वदा

4

श्रद्धा सुमन

अर्पित उन्हें, जो मिटे

देश के लिए ।

.0. डॉ0 सुरंगमा यादव ,असि0 प्रो0 हिन्दी,महामाया राजकीय महाविद्यालय

महोना, लखनऊ

Posted by: डॉ. हरदीप संधु | अगस्त 15, 2017

1789

1- डॉ.जेन्नी शबनम

1

मन है क़ैदी,

कैसी आज़ादी पाई?

नहीं है भायी!

2

मन ग़ुलाम

सर्वत्र कोहराम,

देश आज़ाद!

3

मरता बच्चा

मज़दूर किसान,

कैसी आज़ादी?

4

हूक उठती,

अपने ही देश में

हम ग़ुलाम!

-0-

2- डॉ.पूर्णिमा राय

1

वक्त ने कहा

मिल गई आज़ादी

गुलाम मन!!

2

दे पे झूले

भारत के जवान 

मुक्त परिन्दे!!

3

आज़ादी पँख

कुतरते गद्दार

चढ़ाओ फाँसी!!

-0-

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