Posted by: डॉ. हरदीप संधु | अगस्त 27, 2017

1792

1-बाल हाइकु-डॉ.जेन्नी शबनम

1.

आम है आया

सूरज की पार्टी में

जश्न मनाया। 

2.

फलों का राजा

शान से मुस्कुराता

रंग बिरंगा। 

3.

चुभती गर्मी

तरबूज़ का रस

हरता गर्मी। 

4.

खीरा-ककड़ी

लत्तर पे लटके

गर्मी के दोस्त। 

5.

आम व लीची

कौन हैं ज़्यादा मीठे

करते रार। 

6.

मुस्कुराता है

कँटीला अनानास

बहुत ख़ास। 

7.

पानी से भरा

कठोर नारियल 

बुझाता प्यास। 

8.

पेड़ से गिरा

जामुन तरो ताज़ा

गर्मी का दोस्त। 

9.

मानो हो गेंद

पीला-सा ख़रबूज़ 

लुढ़का जाता। 

10.

धम्म से कूदा

अँखियाँ मटकाता

आम का जोड़ा। 

11.

आम की टोली

झुरमुट में छुपी

गप्पें हाँकती। 

-0-
http://lamhon-ka-safar.blogspot.in/

http://saajha-sansaar.blogspot.in/

-0-

2- सत्या शर्मा ‘ कीर्ति ‘

1

टूटा छप्पर

घनघोर घटाएँ

डूबता मन

2

दरकी छतें

आत्मसम्मान बहा

बारिश संग ।

3

मन द्रवित

फूँस के कच्चे घर

है जलमग्न

4

कर रहम

डूब गई धरती

बारिश-संग

5

टपकी बूँदें

हर प्यासी आँख से

वर्षा तू कहाँ !

6

बूँद- बूँद- सा

फिसलता विश्वास

जल अभाव

7

सूखी ये आँखें

धरती है उदास

इंद्र नाराज

8

चिलचिलाती

जीवन की ये धूप

वर्षा है कहाँ ?

9

बहें नदियाँ

बस कागजों पर

प्यासा है मन

10

नदी- तलैया

प्यासी अनवरत

बरसो मेघ

-0-

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Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | अगस्त 27, 2017

1791

1- डा. सुरेन्द्र वर्मा   

1

आँखों के तारे 

अंक में साथ लिये 

तैरता चाँद 

2

उड़ती फिरें 

चहकती चिड़ियाँ 

मन आकाश 

3

चूनर काली 

टाँक लिये हैं तारे 

रात निहाल 

4

छिटक गिरीं 

टूटा जो मेघ माल 

नन्ही सी बूँदें 

5

झूला सावन 

जगा गया फिर से 

याद साजन 

6

दादुर, मोर 

झींगुर झनकार 

पपीहा राग 

7

रुक न पाई 

पत्र  पर ठहरी 

बूँद लुढ़की 

8

सह न सका 

देख धरा की पीर 

बादल रोया 

-0-डा. सुरेन्द्र वर्मा (मो ९६२१२२२७७८),१०, एच आई जी / १, सर्कुलर रोड 
इलाहाबाद २११००१ 

-0-

 2-बादल राजा-डॉ जेन्नी शबन

1.

ओ मेघ राजा

अब तो बरस जा

भगा दे गर्मी। 

2.

बदली रानी

झूम-झूम बरसी

नाचती गाती। 

 3.

हे वर्षा रानी

क्यों करे मनमानी

बरसा पानी। 

 4.

नहीं बरसा

दहाड़ता गरजा,

बादल शेर। 

 5.

काला बदरा 

मारा-मारा फिरता

ठौर न पाता। 

 6.

मेघ गरजा

रवि भाग के छुपा,

डर जो गया। 

 7.

खिली धरती,

रिमझिम बरसी

बदरी काली। 

 8.

ली अँगड़ाई 

सावन घटा छाई

धरा मुस्काई। 

 9.

बरसा नहीं

मेघ को ग़ुस्सा आया,

क्रूर प्रकृति। 

 10.

सुन्दर छवि

आकाश पे उभरा

मेघों ने रचा। 

-0-

3-नारी- डॉ0 सुरंगमा यादव

मानवी हम

है मान की आकांक्षा

हक हमारा

सृष्टि हैं हम

धीरज धरा सा है

परीक्षा बस

दुखिया नारी

घर समृद्धि शून्य

साक्षी दीवारें

आधुनिक स्त्री

श्रद्धा-इड़ा का रूप

प्रगतिशील

 साथी स्वीकारो

प्रतिद्वन्द्वी न मानो

जियो-जीने दो

-0-

Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | अगस्त 15, 2017

1790

डॉ0 सुरंगमा यादव

1

गौरव गाथा

सहस्र मुख गाता

देश महान

2

आजादी आई

झूमे धरा गगन

रखो सँभाल

3

वीरों की जान

लहराये तिरंगा

सदा सर्वदा

4

श्रद्धा सुमन

अर्पित उन्हें, जो मिटे

देश के लिए ।

.0. डॉ0 सुरंगमा यादव ,असि0 प्रो0 हिन्दी,महामाया राजकीय महाविद्यालय

महोना, लखनऊ

Posted by: डॉ. हरदीप संधु | अगस्त 15, 2017

1789

1- डॉ.जेन्नी शबनम

1

मन है क़ैदी,

कैसी आज़ादी पाई?

नहीं है भायी!

2

मन ग़ुलाम

सर्वत्र कोहराम,

देश आज़ाद!

3

मरता बच्चा

मज़दूर किसान,

कैसी आज़ादी?

4

हूक उठती,

अपने ही देश में

हम ग़ुलाम!

-0-

2- डॉ.पूर्णिमा राय

1

वक्त ने कहा

मिल गई आज़ादी

गुलाम मन!!

2

दे पे झूले

भारत के जवान 

मुक्त परिन्दे!!

3

आज़ादी पँख

कुतरते गद्दार

चढ़ाओ फाँसी!!

-0-

Posted by: डॉ. हरदीप संधु | अगस्त 7, 2017

1788

सभी भाई बहनों को हिन्दी हाइकु की तर से अनगिन शुभकामनाएँ!

डॉ हरदीप सन्धु और रामेश्वर काम्बोज

-0-

राखी

राखी के हाइकु

1-डॉ  जेन्नी शबनम

1

हो गए दूर

संबंध अनमोल

बिके जो मोल। 

2

रक्षा का वादा

याद दिलाए राखी

बहन-भाई। 

3

नाता पक्का सा

भाई की कलाई में

सूत कच्चा सा। 

4

पवित्र धागा

सिखाता है मर्यादा

जोड़ता नाता। 

5

अपनापन

अब भी है दिखता

राखी का दिन। 

6

रिश्तों की डोर

खोलती दरवाज़ा

नेह का नाता। 

7

भाई-बहन

भरोसे का बंधन 

अभिनंदन। 

8

खूब खिलती

चमचमाती राखी

रक्षाबंधन। 

9

त्योहार आया

भइया परदेशी

बहना रोती। 

10

रक्षक भाई

बहना है पराई

राखी बुलाई। 

-0-

2-डॉ.सरस्वती माथुर
1
भाई मिलता
बहिन से राखी पे
 मन खिलता ।
2
राखी है तार
रसपगा त्योहार
भाव पावन
3
जोड़ेंगे दिल
 भाई बहनों के ये
 रेशमी धागे ।
4
हाथ में थाल
बहिन ले  बलैया
 निरखे भैया ।
5
जरी के तार
राखी से  बाँध दिया
रिश्तों में प्यार ।
-0-

3-विभा रश्मि

 1    

भाई है दूर 

बस गया सुदूर

त्योहार राखी ।

2

सावन लाया 

स्नेहिल -सी  बारिश 

राखी के संग । 

3

बहना आ जा 

नैहर है  बुलाए  

याद रुलाए । 

4

भाई -मस्तक 

तिलक रोली लगा  

माँगती दुआ ।

5

रक्षा का जंत्र

श्रावण-पूर्णिमा में

पढ़ती  मंत्र ।

6

नेहिल हाथ 

सहोदर ने रखा 

भावविभोर ।

7

भावों का भूखा

होता निश्छल प्रेम 

स्वार्थ न धोख़ा ।

-0-

4-प्रियंका गुप्ता

1

कभी न देखे

अपना या पराया

नेह-बन्धन ।

2

रक्षा का धागा

जग भर का नेह

भैया को बाँधा ।

3

राखी जो आई

परदेसी है भैया

फूटे रुलाई ।

4

कब आओगे?

थाल सजा के बैठी

राह तकती ।

5

चिट्ठी में भेजी

बहना ने ममता

तौली न जाए।

6

प्यारा -सा वादा

भाई की कलाई पे

मैंने था बाँधा ।

7

टूट जो गया

बन्धन ये प्यार का

जिऊँगी कैसे?

8

मोल न देना

इस नेह धागे का

बिकाऊ नहीं ।

-0-

5-रेणु चन्द्रा

1

रंग रंगीली

राखी लाई बहना

स्नेह अपार ।

2

भाई के हाथ

बाँधा रेशमी धागा

अनोखा रिश्ता ।

3

स्नेह- सिंचित

भाई बहन का है

निराला रिश्ता ।

-0-

Posted by: डॉ. हरदीप संधु | जुलाई 31, 2017

1787

स्वर्गीय राधेश्याम  का वर्षा विषयक लेख

वर्षा के द्वारे

स्वर्गीय राधेश्याम  के अंग्रेज़ी हाइकु की समीक्षा

ताजमहल की समीक्षा

 

 

Posted by: डॉ. हरदीप संधु | जुलाई 30, 2017

1786

शशि पाधा

1

निर्मल मन

पावन प्रतिबिम्ब

स्फटिक शिला |

2

भ्रम में रखें

पर्वत श्रृंखलाएँ

शिखर दूर |

3

मोह जंजाल

सुलझाए सद्गुरू

हो चिरानन्द |

4

ज्ञान पिटारी

अनछुई निधियाँ

खोलो, तो पाओ |

5

मन की गुहा

सुख दुःख बसेरा

जो माँगो, तेरा |

6

रखी ओसारे

सुधियों की ओढ़नी

ओढूँ, सहेजूँ |

7

जीवन पथ

पगडंडी ढलान

दूर मंजिल |

8

हस्त रेखाएँ

नियति की तूलिका

जो चाहे, लिखे |

9

संकल्प लक्ष्य  

संयम सदाचार

जीवन मंत्र |

10 
परिस्थितियाँ

मौसम सी बदलें

आस न भूलें |

-0-

 

Posted by: डॉ. हरदीप संधु | जुलाई 27, 2017

1785

1-डॉ.सुरंगमा यादव

1      

फिर ना मिले

अनमोल जीवन

गिरी बूँद- सा ।

2      

विजय -गाथा

भुजबल के बल

रचते वीर ।

3

सत्य का पथ

मंजिल सुनिश्चित

चल निशंक!

हठीला तम

छिपा दीपक तले

षड्यन्त्रकारी

उदर भरा

पर भूख अशांत

लोलुप मन

-0-

डॉ.सुरंगमा यादव

असि0 प्रो0 हिन्दी,महामाया राजकीय महाविद्यालय महोना,लखनऊ  – उ0प्र0

    -0-dr.surangmayadav@gmail.com

2- अशोक बाबू माहौर 

1

धूप सुबह 

चढ़ती छत पर 

आँगन सुस्त । 

2

वह सड़क 

फैले अनेक काँटे 

चलना अब । 

3

जीना सीखा है 

थपथपाती पीठ 

माँ मिठबोली।

-0-

अशोक बाबू माहौर 

जन्म-10/01 /1985  

प्रकाशित साहित्य-साहित्य शिल्पी,साहित्य कुञ्ज,हिंदी कुञ्ज,रचनाकार,पुरवाई,स्वर्गविभा, अनहदकृति,जखीरा,अम्स्टेल गंगा,अद्भुत इण्डिया,वेबदुनिया,पूर्वाभास,साहित्यसुधा इण्डिया,वेबदुनिया,पूर्वाभास,साहित्यसुधा, जयविजय,संवाद 24 ,पुष्पवाटिका,करंट क्राइम ,वर्तमान अंकुर, आदि  विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित ।

संपर्क-ग्राम-कदमन का पुरा,तहसील-अम्बाह,जिला-मुरैना(म.प्र.)476111 

ईमेल-ashokbabu.mahour@gmail.com 

मो-8802706980

Posted by: डॉ. हरदीप संधु | जुलाई 8, 2017

1784

1-रचना श्रीवास्तव
1

शब्द रहित
भाव निहित होता
पिता का त्याग
2
पिता की बोली
अनुशासन -भरी
प्रेम- गागर
3
बादल पिता
चुपके से ढक ले
दर्द का सूर्य
-0-

2-मंजूषा मन

1

मिले ही नहीं

बिछड़े सौ- सौ बार

कैसा ये प्यार !

2

भूलें किसकी

जो मान ले अपनी,

बस उसकी।

3

छत टपकी

भीगे मन -आँगन

बरसे आँसू।

4

एक छतरी

रिमझिम फुहार

प्रेम बरसा।

-0-

3-रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

1

साँझ का गान

छूकरके अम्बर

सिन्धु में डूबा।

2

एकाकी मन

भीड़ भरा नगर

जाएँ किधर !

3

पाएँगे कैसे

हम तेरी खबर

तम है घना।

4

आ भी तो जाओ

सूने इस पथ में

दीप जलाओ।

-0-

Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | जुलाई 2, 2017

1783

1-कृष्णा वर्मा

1

वर्षा का ज़ोर

भिगोया हवाओं का

लो पोर-पोर।

2

मेघों की अदा

मनवा की बिजुरी

देते चमका।

3

किसने बोई

प्रेम धुन भीतर

दीखे ना कोई।

4

सावन रस

झरती जब बूँदें

मन बेबस।

5

बाँकी है रुत

बाँचे प्रेम कथाएं

भीगी बेसुध।

6

छिटके मेह

खिल-खिल महके

फूलों की देह।

7

छेड़ें ,चिढ़ाएँ

छितराए बौछार

तेज़ हवाएँ।

8

बूँदें क्या झड़ीं

कर गईं गीली आ

नैनों की गली।

9

देती धमकी

सावन पुरवैया

बूँदें बरसीं।

10

मेघ की चाल

सूरज को गुम कर

रुलाए ताल।

11

नए-पुराने

छप्पर का सच तो

सावन जाने।

12

लिखें धरा के

उर्वर आँचल पे

बूँदें उल्लास।

13

बूँदें क्या झरीं

बंधन तोड़ बौरी

नदिया बही।

14

हिया निहाल

सुन खपरैल पे

बूँदों की ताल।

15

शैतान मेह

सुनहरी धूप की

भिगोए देह।

16

बदली घिरी

जियरा में सलेटी

उदासी तिरी।

17

कहे किसान-

‘बरस जा बादल

बाकी लगान।’

18

मेघ बेदर्दी

करता मनमर्ज़ी

माने ना अर्ज़ी।

19

मेघा बरस

नदी के होंठ सूखे

खा रे तरस।

20

हठ का मारा

सूर्य को घेरे खड़ा

मेघ आवारा।

-0-

2-पुष्पा मेहरा

1

आई बरखा

हवा के ढोल बजे            

ताल दें पत्ते ।

2

दूर गगन

सतरंगी धनुक

धरा से मिला ।

3

ताप से जले

शीतल जल ओढ़े

आये बादल ।

4

साँस न लेते

टूटे बाँध से रोते

नभ के नैना ।

5

घिरी बदरी

जंगल में मंगल

मनाते पाखी।

6 ।

अँकवे फूटे ।

देखके बादल का

प्यार अनूठा ।

7

सोंधी सुगंध

कण-कण मुखर

प्रेम की पाती ।

8

आई है वर्षा

हँस रहे महल

रोते छप्पर ।

9

धुआँ विषैला

फैला है चारों ओर

नभ रुआँसा ।

10

सूखी नदियाँ

सीना धरा का चाक

पक्षी भी रूठे ।

11

वर्षा से भीगी

सोंधी गंध लपेटे

जागी धरती ।    

12

करें किलोल

डाल-डाल पखेरू

टूटी खुमारी ।

  13

नन्ही बुँदियाँ

बेला के तन पर

टैटू बनातीं ।

 14

पीकर जल

अघाई माँ धरती

हवा जुड़ाती ।

15

झुण्ड बनाके

गरजे जो बादल

दुबका सूर्य ।

16

घटाओं बीच     

मूक चाँद बाँचता

बंदी की पीड़ा ।

17

शीतल तट

तालाब से निकल

मेंढक मस्त ।

 18

आई पावस

रंगीन एलबम

धरा ने खोली ।

19

मस्ती में घन

पट-खोल-दिखाते

स्वर्ण-हँसुली ।

20

आया सावन

पेड़ों पे झूले पड़े   

झूले पे गोरी ।

-0-

Pushpa .mehra @gmail .com        

-0-

3- सुभाष चंद्र लखेड़ा

 

1

फटना नहीं 

बरसना प्यार से 

बादल पिया। 

2

तू बरसना 

जरूरत जितनी 

यही विनती।  

3

मन हरषे 

जब भी तुम आओ 

प्यास मिटाओ। 

4

खेती हो खूब 

फलें फूलें किसान 

रखना ध्यान। 

-0-

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