Posted by: हरदीप कौर संधु | अगस्त 15, 2019

2036

डॉ. पूर्वा शर्मा
1.
रेशमी धागा
बचपन की यादें
करता ताज़ा ।
2.

पूरब भाई

बहन भेजे
ऑनलाइन राखी
भाई को पाती ।
3.
नेट निभाता
बचपन का प्यार
राखी -त्योहार ।
4.
पल में उड़े
विदेश जा पहुँचे
मन की राखी ।
5.
रिक्त ही रही
बचपन में जेब
आज कलाई ।
6.
राखी की भेंट
पूरी पॉकेट मनी
छोटी ले ऐंठ ।
7.
कैसे बाँधती ?
परदेस में भाई
सूनी कलाई ।
8.
आज भी करे
राखी का इंतज़ार
बूढ़ी कलाई ।
9.
रौब जमाती
कोमल कलाई पे
बड़ी-सी राखी ।
10.
अमूल्य भेंट
राखी के बदले में
दो चॉकलेट ।

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Posted by: हरदीप कौर संधु | अगस्त 12, 2019

2035

1-कमला निखुर्पा 

1

भाई विदेश 

नभ के चाँद ले जा 

मेरा संदेश । 

2

न हो उदास 

कहना तू उनसे-

बहना साथ ।

3

लूँ मैं बलैया 

वारी-वारी जाऊँ रे 

चंदा -सा भैया । 

4

राखी-2

गूगल से साभार

नभ के चाँद

निहारता होगा ना

तुम्हें वो चाँद।

5

नेहचाँदनी  

विदेश में बरसे

भाई हरसे।

-0-

2-पुष्पा मेहरा

1
दूधिया चाँद
चाँदनी में दमके
भैया की राखी !
2
ढूँढू भैया ! मैं
राखी के धागों बीच
अटूट नेह !
3
सावनी पूनो
बंधन में बाँधती
भाई का प्यार |
4
हारो न मन
सीमा पे राखी भेज
कहे बहना |
-0-pushpa.mehra@gmail.com

Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | अगस्त 9, 2019

2034-गाँव

1-डॉ. कुँवर दिनेश

1

3-PREETI-5AUG-19 (3) - Copy

चित्र; प्रीति अग्रवाल

शान्ति आपूर,

अच्छा है शहर से

गाँव है दूर।

2

हाई-वे बना,

गाँव के हृत्तल में

भय-सा तना।

3

ठण्डी पवन,

गाँव की पहचान

चीड़ों का वन।

4

खुला जीवन,

खुली हवा गाँव में

खुला आँगन।

5

खड्ड का पानी –

कल-कल कहता

गाँव की बानी।

6

सबसे न्यारी

गाँव वाले घर में

फूलों की क्यारी।

7

घनी छाँव में

फुदकती  चिरैया

मेरे गाँव में।

8

आ जाते तोते,

जब जब गाँव में

काफल होते।

9

गिद्धा व नाटी 

सहज थिरकती

गाँव की माटी।

10

फ़ार्म-हाऊस:

शहर के लोगों का

तख़्ते-ताऊस!

-0-

Posted by: हरदीप कौर संधु | अगस्त 3, 2019

2033-बेटी की बिदाई

  प्रीति अग्रवाल

1

बेटी हमारी 

सुशिक्षित संस्कारी

बाबा हर्षाए।

2

वर ढूँढो जी

बीते न उमरिया

बेटी सयानी।

3

दोनों विचारें

लक्ष्मी, पर श्यामली

कौन ब्याहवे!?

4

मन अधीर

कौन-सा घर, वर,

भाग्य लिखाए!

5

रिश्ता है आया

अम्मा बाबा बधाई!

उमंगें लौटीं।

6

बंदनवार!

दरवाज़ा देखे बाट

आए बारात!

7

बेटी के बापू

पगड़ी को सँभाल!

आई बारात।

8

ऐंठे बाराती

अशर्फियाँ लुटाओ

तो हो विदाई!

9

सहमा बाप

अशर्फियों में तोला

दूल्हा बिकाऊ।

10

बेटी बेबस

शोक, असमंजस,

कैसी बिदाई?!

11

बेटी संस्कारी

सिसकियाँ दबाए

लाज निभाए!!

Posted by: हरदीप कौर संधु | जुलाई 31, 2019

2033

1-धर्मपाल महेंद्र जैन

1

अक्षांश भिन्न

फिर भी धरती है

हर कहीं माँ।

2

बौर आ गए

घोल रे पपीहरा

रंग केसरी।

3

तेरे नाम पे

रोज़ दौड़ आती है 

मुस्कुराहट।

4

खड़ा हूँ यहीं

ऋतु बदले मन 

आ जाना तब।

5

भूले-भटके

किस्मत खुल गई

बात हो गई।

6

सूर्य, प्रेम में

परिक्रमा रत है

योगिनी धरा।

-0-

सम्पर्क : 1512-17 Anndale Drive, Toronto M2N2W7, Canada,

ईमेल : dharmtoronto@gmail.com                   

फ़ोन : + 416 225 2415

-0-

2-रमेश कुमार सोनी

सावन -भादो 

बस्ते का बोझ ज़्यादा 

मेघ ramesh kumar soniबरसे

पाखी चीरते 

मेघ का चौड़ा सीना 

हौसला बड़ा ।

नदी सावनी 

चंचल कुँवारी है , 

बहे मायावी ।

धरा का मंच 

घनश्याम नचाते 

पावस बूँदें ।

विदा लो बूँदों ! 

हरी छंद लिखने 

मेघ रोया है ।

सूर्य, बादल 

रंग भरने दौड़े 

नील गगन ।

बेख़ौफ़ बूँदें 

छमाछम नाचतीं 

धरा हर्षाने ।। 

-0-

रमेश कुमार सोनी , बसना , छत्तीसगढ़ 

         (7049355476 )

Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | जुलाई 27, 2019

2032

कृष्णा वर्मा

1

ऋतुगीत गा

बदरा-बिजुरी ने

ढाया ग़ज़ब।

2

मेघ साँवरे

बरसे जमकर

हँसें फुहारें।

3

मिटी तपन

ओर -छोर डूबके

धरा नहाए ।

4

ठंडी औ भीगी

फर्र-फर्र हवाएँ

प्रीत जगाएँ।

5

गिरीं बौछारें

झुलसी दिशाओं की

देह सँवारें।

6

चहक फिरे

चिरैया आँगन में

पंख भिगोए।

7

बदल गए

रंग आबो-हवा के

स्वप्न हमारे।

8

घटा के पाँव

बजी पाजेब बूँदें

छनछनाईं।

9

भीगी फुहारें,

संग लाया सावन

सोंधे त्योहार।

10

सावन फूले

रक्षाबंधन तीज

मेहँदी झूले।

11

उठे हिलोर

छिड़े पुराने तार

याद झंकार।

12

सावन लाए

पीहर की स्मृतियाँ

जी महकाए।

13

वर्षा संदेसा

‘बिटिया लिवा लाओ

भैया को भेजो।’

-0-

Posted by: हरदीप कौर संधु | जुलाई 24, 2019

2031

डॉ.सुरंगमा यादव

1

नन्हीं-सी बूँद

मेघ की दहलीज

छोड़ के चल।

2

प्यार से पली

जाएगी किस गली

वर्षा की बूँद ।

3

बहुत प्यास

पूरा ही समन्दर

पीने को पास ।

4

बंजर धरा

उगेगा उसमें क्या!

काँटों के सिवा ।

5

खुश थे बड़े

सपनों में थे खोए

जागे तो रोए ।

6

वंशी की तान

तुमसे मिलकर

छेड़ते प्राण ।

7

घायल पाँव

तुम तक पहुँचे

राहत देते।

8

दूर आकाश

उड़ गया पखेरू

नीड़ उदास ।

9

दुःख की आँधी

उखड़ने लगता

धैर्य का पौध।

10

झील में चाँद

पकड़ने की जिद

हठीला मन ।

11

मन भटका

क्षितिज को ढूँढता

पाएगा कहाँ !

12

यादें थीं सोयी

सावनी  फुहारों ने

आ के जगाया।

-0-

Posted by: हरदीप कौर संधु | जुलाई 20, 2019

2030

डॉ.पूर्वा शर्मा

1.

एक न सुनी

धरा पे गिर पड़ी

बूँदों की लड़ी ।

2.

आस की डोर

देख मेघों की ओर

टहुके मोर ।

3.

छलक पड़ी

शुष्क धरा तन पे

मेघ-गगरी ।

4.

धूम-धड़ाका

पावस है बजाता

मेघ नगाड़ा ।

5.

बैंड बजाए

मेघों की महफ़िल

रॉक भी गाए ।

6.

बन के नदी

सड़कों पर बही

सावन झड़ी ।

7.

बूँदें हैं बोली-

रवि को घेरे खड़ी

मेघो की टोली ।

8.

धरा अंक में

सजने को आतुर

बूँदें चतुर ।

9.

रास रचाए

बूँदों संग पत्तियाँ

गुनगुनाए ।

10.

बूँदों के बाण

कुम्हलाते पत्तों में

भरते प्राण ।

11.

लापता रवि

ढूँढें नहीं मिलती

किसी की छवि ।

12.

वर्षा नहाया

हरित कांति लिये

नग मुस्काया ।

-0-

Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | जुलाई 18, 2019

2029-पहाड़ी (कुमाउँनी बोली) हाइकु

कमला निखुर्पा

1

दैणा होया रे                 

खोली का गणेशा हो        

सेवा करूंल ।  

( 1-  अर्थ=- दैणा होया= (कृपा करना),  खोली =(मुख्य द्वार पर स्थापित)

2

दैणा होया रे

पंचनाम देवता

असीक दिया ।    

( 2- असीक =आशीष)

3

मेरो पहाड़

हरयूँ  छ भरयूँ

आंख्यों मां  बस्युं ।  

( 3- अर्थ -हरयूँ  छ भरयूँ =हराभरा है)

4

बुरांशी फूली

डांडा कांठा सजी गे

के भल लागी ।     

( 4- बुरांश =एक पहाड़ी पुष्प, डांडा कांठा =पहाड़ का कोना कोना, भल =सुन्दर )

5

पाक्यो हिसालू

बेरू काफल पाक्यो

घुघूती बास्यो ।    

 (5-हिसालू, बेरू ,काफल = पहाड़ी जंगली फल ,घुघूती =पहाड़ी कबूतर,  बास्यो=गाता है  )

6

मुरूली बाजी

हुड़का ढमाढम

आयो बसंत ।       

6- हुड़का = पहाड़ी वाद्ययंत्र (जो शिवजी के डमरू की तरह दिखता है)

7

गाओ झुमैलो

चाचरी की तान माँ

ताल मिलैलो ।   

 (7-झुमैलो ,चाचरी =पहाडी गीत जिसमें कदम से कदम मिलाकर समूह में नृत्य करते हैं।)

8

पीली आँङरी

घाघरी फूलों वाली

लागे आँचरी।   

 ( 8- आँङरी = अँगिया(कुर्ती),   आँचरी= परी  )

9

ओ री आँचरी

घर, खेत, जंगल

त्वीले सँवारी।    

 (9- त्वीले = तुमने )

10-

मेरी बौराण

लोहा की मनख तू

हौंसिया पराण ।          

(10- बौराण= बहुरिया(बहू), मनख =मनुष्य, हौंसिया पराण = जिंदादिल,हँसमुख)

11

छम छमकी

घुँघराली दाथुली

डाणा कांठा मां ।     

[ 11- घुंघराली = घुंघरू लगे हुए , दाथुली= हँसिया(घास काटने का औजार)]

12

ओ री घसेरी

गाए तू जब न्योली

भीजी रे प्योंली ।   

(12-घसेरी = घसियारिन,  न्योली= विरहगीत/एक पक्षी,   प्योंली=पीला पहाडी पुष्प }

13

पीठ पे बोझ

आँखें हेरे हैं बाट 

सिपाही स्वामी ।

14

धन्य हो तुम

धन्य हिम्मत तेरी

प्यारी घुघूती ।

15

तू शक्तिरूपा

इजा, बेटी, ब्वारी तू

तू वसुंधरा ।        

 (15 इजा=माँ , ब्वारी=बहू )

16

ऊँचा हिमाल

ऊँचो सुपन्यू तेरो

पूर्ण ह्वे जाल ।      

 ( 16- सुपन्यू =सपना )

-0-

30-12-2013

Posted by: हरदीप कौर संधु | जुलाई 11, 2019

2028

1. प्रियंका गुप्ता

1

मुस्कुरा उठे

तरलित नयन

तुम मिले तो ।

-0-

2-अनिता मंडा

1.

खुली उदासी

साँझ के आँचल से

धूसर रंग।

2.

लिख दे चुप्पी

साँझ के होठों पर

चाँद का ताला ।

3.

पंख समेटे

साँझ को घर चला

दिवस-पंछी।

4.

लिखी साँझ ने

उदास इबारतें

बिरही मन।

5.

साँझ की आँखें

सम्मोहन से भरी

देतीं पुकार।

-0-

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