Posted by: हरदीप कौर संधु | अगस्त 26, 2020

2073

निता मण्डा

पुष्पा मेहरा

Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | अगस्त 21, 2020

2072

1- डॉ.सुधा गुप्ता

-0-

2-जीवन –दर्शन 

कमल कान्त जैसवाल 

    1
राह न सूझे
बन- बन भटके
जीवन यात्री
   2
अपने तक
पहुँचा दे राही को
राह तो वही
   3
सूनी डगर
बिछुड़े सहचर
यादों का बोझ
   4
तय हो चला
सफ़र ज़िन्दगी का
जहाँ थे वहीं
   5
जीना न हुआ
उम्र तमाम हुई
इन्तज़ार में
   6
जीवन -दीप
स्नेह पर निर्भर
जले या बुझे
   7
घटिका यंत्र
बूँद -बूँद जीवन
चुकता जाए
   8
सुनते रहे
अंदर न उतरीं
बातें ज्ञान की
   9
सुख न साधे
सुखाभास को साधे
आकुल मन
   10

सुख- दुःख की
चलती आजीवन
आँखमिचौनी
   11
धन- यौवन
संग संबंध सारे
क्षणभंगुर
  12
क्या रोना धोना
मिलना- बिछुड़ना
क्रम सदा से
   13
देह है रथ
रथी आत्मा हमारा
सँवारें किसे !
  14 
देह का रथ
देही के जाने पर
हुआ विरथी

-0-

Posted by: हरदीप कौर संधु | अगस्त 11, 2020

2071-त्रिदल

1-नीलमेन्दु सागर

1

कंठ में प्यास

होठ चाटती नानी

2-Neelmendu Sagar_photo - Copyआँखों में पानी

2

बौराया मेघ

उपट कर बही

झील आँखों की

3

तूफानी वर्षा

रोता काँपता घर

डर ही डर

4

झूठा दर्पण

बाएँ गाल का तिल

दाएँ दिखाता

5

काली बदली

छिटकाती बिजली

हँसी भीलनी

6

कैसी आहट

कुमुदिनी लजाई

हँसा कमल

7

नाचती वर्षा

तालियाँ बजा रहीं

टिनही छतें

8

घूँघट हटा

नाचती -गाती घाटी

भोर ले आती

9

चुभी पंखुड़ी

दिल का जख़्म देख

रो पड़े काँटे

10

आलसी पूस

नौ बजे दिन तक

खर्राटे लेता

11

शाल लपेटे

चल दी शीत बन्नो

बासंती घर

12

कैसा मिलन

मुस्काते कह चले

फिर मिलेंगे

-0-

नीलमेन्दु सागर,नीलम निकुंज,चाकपुनर्वास, पत्रा० छितरौर-851129,बेगूसराय( बिहार )भारत।
मो०-9471456399; 9931948714

-0-

2-मल्लिका तोषा

1

निर्मल नदी

हुई विषाक्त काली

जीव व्याकुल

2

तूफानी लटें

सुलझा रहा चाँद

सिंधु चकित

3

घायल घाटी

चीखते हुए पेड़

लहूलुहान

4

खुली हथेली

पढ़ती है रेखाएँ

मेरा भविष्य

5

हिलते पत्ते

काँपता है सूरज

छिपा सहमा

6

शर्माया चाँद

बनजारा बादल

पीछा करता

7

हरी घास को

जूते खाते देखती

सन्न तितली

-0-मल्लिका तोषा, बी.पी.-48,मौर्या एनक्लेव,पीतमपुरा, दिल्ली-110034 
mallikanatyam@gmail.com
मो०-8588929770
Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | अगस्त 9, 2020

2070

1-डॉ.अमिता कौण्डल

1

चिंता न कर

Amita_0004चिंतन कर बस

प्रभु नाम का ।

2
कर्म न टलें

पर कष्ट मिटेंगे 

हरि जाप से I

3
प्रकृति दुखी 

मानव बना दैत्य 

कोरोना आया ।

4

दुखी धरती

पुकारती गोबिंद 

अब आ जाओ ।

 0- a75_kaundal@yahoo.com

 

2-कृष्णा वर्मा

1

यादें न होतीं

रूह तड़पड़ाती

न आँखें रोतीं।

2

काजल सजी

निगाहें याद आएँ

मेघ जो छाएँ।

3

सावन-रुत

सुलगे दिल रोए

याद सताए।

4

तू याद आए

जले बिरही मन

भुला न पाए।

5

सावन झड़ी

दिल भरता हौंके

अखियाँ खारी।

6

गरजे मेघ

सौदामिनी थर्राई

तू याद आई।

7

यादें रुलाएँ

बेबस सिसकियाँ

थम न पाएँ।

8

यादों ने मारा

उतरी अविरल

आँखों में धारा।

9

यादें संताप

बूँदों की पैंजन जो

अलापे राग।

10

यादें दें हूक

घास के समंदर

कूंजों की कूक।

11

याद सताए

सूनी मुँडेर सुन

काग -दुहाई।

12

धूप क्या ढली

चला मन बावरा

यादों की गली।

13

यादों के खाते

मखमली शामें वो

शीरी-सी बातें।

14

याद खुमारी

पछुआ हवाओं सी

बातें तुम्हारी।

15

यादों पर तारी

मोतियों-सी मुस्कान

प्रिय तुम्हारी।

16

हुई जुदाई

यादों से मिल नहीं

पाई रिहाई।

 -0-

3-भीकम सिंह

1

नदी की बालू

कछारों में संचित

ठेके हैं लम्बित ।

2

नदी बेबस

पानी से ढ़क दिये

खेतों के शव ।

3

चढ़ती नदी

टूट रहे कगार

झूठें करार ।

4

नदी की देह

कसमसाके कहे

रोको, ये मेह ।

5

फैला है पाट

नदी निर्मम हुई

डूबें हैं घाट ।           

-0-

4-कैलाश बाजपेयी

1

प्रात: करती

है चहचहाहट

गौरैया लौटी ।

2

शान्त गलियाँ

परिन्दे भी सोचते

मानव कहाँ ।

3

गाँव-शहर

सम्पूर्ण जगत में

छाया कहर ।

4

चेहरों पर

हर तरफ दिखे

अंजाना भय ।

Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | अगस्त 8, 2020

2069

डॉ. गोपालबाबू शर्मा

कोमल बाँह

बन जाती है कभी

फूलों की छाँह ।

राजमहल ?

झोंपड़ी कहीं अच्छी

सीधी-सरल ।

हाँ आजकल,

हुआ तीखा-कड़ुआ,

सब्र का फल ।

हो रही रेड,

विकास की आँधी मे,

ढह रहे पेड़ ।

क्या जिंदगानी ,

हवा हुई ख़राब,

पानी-बे-मानी ।

बहुमूल्य वो,

साहित्य की मण्डी में ,

तिकड़मी जो ।

पैसे की माया

यत्र-तत्र-सर्वत्र

पैसा ही छाया ।

ईंट-पत्थर,

मकान हीं मकान,

कहाँ है घर?

कुछ भरम

देते हैं जीवन में

सुख परम ।

बात अजीब

सम्पन्न बुढ़ापा भी

अति ग़रीब ।

प्रश्न उलझे,

पहले से अधिक,

कहाँ सुलझे ?

कण भर लें

जीवन में किसी से,

मन भर दें ।

हर ग़ुरूर

किसी न किसी दिन,

टूटे ज़रूर ।

जो नहीं झुकें,

तूफानों के सामने,

वे कब रूकें ?

होश ना आए

जोड़-जोड़ धरे जो,

साथ न जाए ।

माटी में माटी

मिलेगी एक दिन

है परिपाटी ।

हम भी पात

छूटेगा किसी दिन

डाल के साथ ।

हँसना-रोना

जीवन की नियति,

पाना व खोना।

-0-

डॉ. गोपालबाबू शर्मा,46,गोपाल विहार कॉलोनी,देवरी रोड, आगरा-282001 (उ.प्र.)

मो. –  09259267929

Posted by: हरदीप कौर संधु | अगस्त 7, 2020

2068

1- राखी के हाइकु

रमेश कुमार सोनी , बसना

1
मन के रिश्ते
बिखरे चहुँ ओर
राखी भाई है ।

2
चाँद पूनो सी
बहना इठलाई
राखी जो आई ।

3
राखी के स्टॉल
बहनें फुदकती
बाँधे मुस्काती ।

4
रूठी बहना
राखी की थाली ताके
कान खींचूंगी !

5
भाई लड़ते
किसकी राखी अच्छी
जज बहनें ।

6
भाई – बहनें
रिश्तों में नोंक – झोंक
राखी में माने ।

7
स्नेह बरसे
राखी पावन रिश्ता
भाई जो आता ।

8
भाई – बहन
सुख – दुःख की कश्ती
राखी की शक्ति ।

9
राखी बुलाती
मिश्री डली बहनें
बलैयाँ लेने ।

10
राखी जो देखे
बुरी नज़रें डरीं
भाई बनातीं ।

11
राखी का न्यौता
मायके की महक
भाई से भेंट ।

-0-एच पी गैस के सामने , जे पी रोड – बसना
जिला – महासमुंद , छत्तीसगढ़ , पिन – 493554 ,मो – 7049355476
 -0-

2-समंदर किनारे

कमल कान्त जैसवाल

1

तूफ़ानी हवा
उफनता सागर
खोल दी नाव 
2
ऊँची लहरें
बचकाने घरोंदे
बचाता कैसे
3
ज्वार औ’ भाटा
तटवर्ती दुनिया
बिगड़े बने

4

अनवरत

चढ़ना -उतरना

चलता रहे

-0-

Posted by: हरदीप कौर संधु | अगस्त 6, 2020

2067-अनुवाद

 

 

Posted by: हरदीप कौर संधु | अगस्त 5, 2020

2066

1-रश्मि विभा त्रिपाठी ‘रिशू’

 1

व्यथा मन की

तुम्हारे बिन प्रिय

सुनेगा कौन ?

2

सिर्फ तुमने

पढ़ा है अधरों पे

पसरा मौन

2

याद न आई

प्रियतम ने सुधि

क्यों बिसराई ।

3

सूखे शज़र

किस छाँव में बैठे

वो मुसाफ़िर ।

4

कटी जो डाल

तो गौरैया बेचारी

कहाँ जाएगी

5

कोई धूप में

साया नहीं पाओगे

जल जाओगे ।

6

जला ही दिया

तुमने हृदय में

प्रेम का दीया ।

7

हुआ सवेरा

जीवन जगमग

मिटा अँधेरा ।

8

स्वप्न -गगन

उड़ता मन- पंछी

मस्त मगन ।

9

मन बेचैन

तुमको निहार लें

तो पाएँ चैन।

10

बसे आँखों में

तुम्हारे ख़्वाब तुम

घुले साँसों में।

11

तुम समाए

ह्रदय में ज्यों साँस

आए व  जाए

12

हमसफ़र

यादें, साथ निभाएँ

उमर भर ।

13

कैसा ये साथ

जुड़े न मन बँधे

हाथों में हाथ ।

14

नेह -बन्धन

अटूट बाँध लेता

मन से मन ।

-0-

Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | अगस्त 4, 2020

2065

डॉ. गोपालबाबू शर्मा

1

नहीं फूलों की

आज की ज़िंदगी,

सेज शूलों की ।

2

नहीं सहारा,

भटकती लहर,

दूर किनारा ।

3

आँखों का पानी,

मन के भीतर की,

कहे कहानी ।

4

दाग़ी चरित्र

राजनीति में घुसे,

बनें पवित्र ।

5

जाँच क्या जाँच

हो टायँ-टायँ-फिस्स,

आए न आँच ।

6

हालात खस्ता,

रोटी बड़ी महँगी,

ईमान सस्ता ।

7

मूसलाधार,

वर्षा भ्रष्टाचार की,

आर न पार ।

8

बात है साफ़ ,

सत्ता यदि अपनी,

सौ ख़ून माफ़ ।

9

हुई निगोड़ी ,

नेताओं की ज़ुबान,

रेस की घोड़ी ।

10

उठो कबीर,

पनपते पाखण्ड,

चलाओ तीर ।

11

दिन-ब-दिन,

दुश्मनी तो आसान,

दोस्ती कठिन ।

12

अब  इंसान,

मेले में भी एकाकी

मन हैरान ।

13

14

फूलों की आशा

काँटों के जंगल में,

मात्र दुराशा ।

15

कितनी आए

स्नेहिल मुस्कान,

दीप जलाए ।

16

मधुर यादें,

सूने मरुथल में,

जीवन लादें ।

17

प्यार के फूल

महके चमन में

नष्ट हो शूल ।

18

प्रेम का स्थान

ले लिया रोमांस ने,

कैसा अज्ञान !

19

वही कविता

अँधेरे जीवन में

बने सविता ।

20

नया ज़माना,

हो गया हँसी-खेल

बात निभाना।

21

वाह सादगी,

अलंकार से ज्यादा

सुंदर लगी ।

22

धन, बल से ?

मन तो बँधे बस,

स्नेहांचल से ।

23

किसी की दृष्टि

बंज़र में करती

हीरों की सृष्टि ।

24

रिश्ते न रहें,

झूठ की नींव पर,

कभी भी ढहें ।

-0-

Posted by: हरदीप कौर संधु | अगस्त 2, 2020

2064

1-मंजूषा मन

1

रो, हुआ हल्का

सारा दर्द छलका

बादल, गया।

2

धूम्र मेघ छाकर

तड़पाकर।

3

नम पलकें

कहें, गाथा पीर की

बहे, नीर की।

4

हाथों में हाथ,

रह गया सपना

तू है अपना।

5

अधूरा रहा

ये प्रेम तेरा मेरा 

हुआ अँधेरा।

-0-

2-भावना सक्सैना

1

हवा का बोल

न पहचाने कोई

सब ही मौन।

2

बरसात में

उग आई उम्मीद

फिर जी उठी।

3

मेघों का स्वर

सुन धरा आकुल

छोड़ो फुहार।

4

कंटक-वन

बरसात की धूप

बींध डालती।

5

नवयौवन

बदले व्यवहार

राह कठिन।

माँ आतंकित

भटकें न शावक

इस कानन।

7

वन सघन

राह ढूँढे जीवन

कांपता मन

8

बाहें फैलाए

राह तकें नयन

माँ को न पाएँ।

9

संयम धर

चाहतें हैं अनन्त

जो हो सो भला।

10

रेत के कण

चहूँ दिस बिखरा

वक्त का चूर्ण।

-0-

3-डॉ.भीकम सिंह

1

चाँद के साथ

अनहुई थी बात

छत पे रात ।

2

देकर नारा

मेघों के बीच चली

विद्युत– धारा ।

3

हिम की देह

बिखेर दिया सारा

पवित्र स्नेह ।

4

कौन से पथ

मेघयान चले हैं

लेके शपथ ।

5

खुमार– भरा

करवट लेता है

सावन हरा ।

-0-

एसोसिएट प्रोफेसर, मिहिरभोज कालेज दादरी,गौतम बुद्ध नगर,  उ.प्र .

bheekam02@gmail.com

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