Posted by: हरदीप कौर संधु | दिसम्बर 28, 2019

2068

1-भावना सक्सैना

1.
चाय की प्याली
सहेजें हथेलियाँ
सर्द मौसम।
2.
सर्दी का मेला
ये उफनती चाय
सबको लुभाए।
3.
जीवन ताप
सहकर निखरो
सिखाती चाय।
4.
निखार देते
घटक संतुलित
चाय, जिंदगी।
5.
लुकी-छिपी सी
हथेलियों के बीच
छोटी-सी प्याली।
6.
आबाद रहे
नुक्कड़ की गुमटी
जाड़ों के दिन।
-0-

2-डॉ कविता भट्ट
1
गर्म- चाय सी
मनभावन चुस्की
प्रीत तुम्हारी।
2
सर्दी- सा दुःख
दो घूँट जिंदगी की
चाय है; चखो।
3
सर्द न होना
चाय की प्याली जैसे
अधर धरो।
4
मैं चाय- प्याली
तू प्लेट हलुए की
जीवन बर्फ।
5
सर्द हैं रातें
चाय की प्याली बन
मिठास घोलो।
-0-

Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | दिसम्बर 27, 2019

2067-सर्दी के हाइकु

1-डॉ. सुरंगमा यादव

1

तुम्हारी यादें

गुनगुनाता रहा

सर्दी में मन।

2

सर्दी की धूप

मुख्य अतिथि जैसे

थोड़ा ठहर।

3

सर्दी की धूप

मुँडेर से उतरी

झाँकके भागी।

4

फ्लैट का दौर

धूप अब घर में

पाये न ठौर।

5

धूप न खिली

नम झंगोला डाले

हवा निकल।

6

प्यार का साया

धूप-ताप से परे

सदा सुहाया।

7

सर्द हवाएँ

पगली-सी फिरतीं

दस्तक देतीं ।

8

बर्फीले रिश्ते

सर्द हुआ मौसम

और मन का ।

9

कोहरा आया

सकुचाई प्रकृति

आलिंगन में ।

10

सर्द हवाएँ

मंजीरा बनाकर

दाँत बजाएँ ।

11

चाय की भाप

लहरा कर देती

सर्दी को मात ।

-0-

2-सविता अग्रवाल ‘सवि’ (कैनेडा)

1

लजाई धूप

बादलों की ओट से

धरा निहारे।

2

ठिठुरी बैठी

पौधों की फुनगी पे

धूप डरी- सी।

3

पाले की मार

रो रहे हैं किसान

रोटी की सोचें।

4

तन गई है

कोहरे की चादर

ढका अम्बर।

5

ढूँढो तो ज़रा

सर्दी से रूठी धूप

छुपी है कहाँ?

6

शीत लहरें

खूब रौब जमाएँ

हवा उड़ाए।

7

तरसे नैना

सूरज दर्शन को

आस लगाए।

8

बर्फ़ की चोटी

बूँद-बूँद टपके

नदी तरसे।

9

बर्फ़-सी ठण्ड

अलाव की गर्मी से

राहत पाए।

10

कोहरा छाया

गगन में ये धुँआ

कहाँ से आया?

11

देख सूरज

ठिठुरती धरा का

मन मुस्काया।

12

ठंडी हवाएँ

पा-सूर्य की चमक

थम-सी जाएँ।

13

सर्दी की धूप

गन्ना, तिल-रेवड़ी

जी ललचाएँ।

14

वृद्धों का दर्द

धूप समझदार

आराम लाए।

सविता अग्रवाल ‘सवि’ , कैनेडा

savita51@yahoo. com

-0-

 

Posted by: हरदीप कौर संधु | दिसम्बर 26, 2019

2066

1-ज्योत्स्ना प्रदीप

1

आने की छूट

रात की धुंध से

दोस्ती अटूट  ।

2

हाथ जो थामा

पौष के कोहरे ने

काँपी थी  यामा ।

4

धूप जो फैली

लो भाग गई धुंध

मन की मैली !

5

धूप कुमारी

खुले आम परोसे

मीठी खुमारी!

6

झेलता सदा 

कोहरे का आतंक

भोला मयंक । 

7

धुंध दीवानी 

हो गई पानी- पानी

भानु को देख ।

8

कोहरा रोता

सर्द रात में कोई 

अपना  होता !

-0-

2-सुदर्शन रत्नाकर

1

दिन है बीता

सूरज नहीं आया

ठिठुरी रात।

2

घना कोहरा

थम गया जीवन

मन उदास ।

3

लम्बी ये रातें

जाड़े के मौसम की

श्राप हों जैसे।

4

कोहरा छाया

धरा ने ओढ़ लिया

लिबास नया।

-0-

3-रमेश कुमार सोनी

1

नाक जानती

ठंड कितनी पड़ी

रोते बहती ।

2

जग सिकुड़े

झील , शीत में जमे

भूख गर्म है ।

3

सर्दी की शाम

मफलर घूमते

गप्पें हाँकते ।

4

भोर को देरी

साँझ को जल्दी मची

शीत से डरी ।

5

शीत से डरे

पसीना ना निकले

 ठिठुरे बैठे ।

6

धूप , कोहरा

खेले आँख मिचौली

शीत की सखी ।

7

अलाव तापे

पुस रातों की यादें

कहानी – किस्से ।

8

दिन ठिठुरा

शीत, धुंध, कोहरा

घूमे आवारा ।

9

सैलानी लूटें

शीत, बर्फ के मजे

किसान रोते ।

-0-

Posted by: हरदीप कौर संधु | दिसम्बर 24, 2019

2065

सर्दी -सविता अग्रवाल ‘सवि’ (कैनेडा)

1

हुईं बेकल

हिम से डरकर

हवाएँ दौड़ें।

2

बर्फ़ सिंधारा

आसमान ने भेजा

बिटिया घर।

3

जमा है पानी

नदियाँ हैं उदास

बुझे ना प्यास।

4

पाले की मार

पनघट उदास

प्यासा है घट।

5

झोपड़ी टूटी

ठिठुर रहा तन

किस्मत फूटी।

6

दादी सहमी

झेल, शीत-प्रकोप

हड्डियाँ जमीं।

7

बादल आए

सूर्य को कैदकर

कहीं छुपाए।

8

बर्फ़ के गोले

धुनकर आसमाँ

नीचे गिराए।

9

सर्दी की धूप

ओढ़ रजाई सोई

सुस्ती-सी छाई.

10

बर्फ़ डाकिया

बाँट रहा चिट्ठियाँ

छतों पर जा-के.

-0-

     सविता अग्रवाल”सवि’(कैनेडा) 

     savita51@yahoo.com 

-0-

2-पंख हैं छोटेसविता अग्रवाल ‘सवि’ (कैनेडा)

1

पंख हैं छोटे

हौसला है अटूट

भरें उड़ान।

2

यही जिज्ञासा

याचक नहीं, दाता

पूर्ण जीवन।

3

बन प्रहरी

चन्द्रमा-तम हरे

उजास भरे।

4

रही अबला

दरिंदों से घिरी थी

आए न कृष्ण।

5

रूह डरी-सी

रोटियाँ ना ले जाए

आतंकवाद।

6

प्रातः -किरण

कवि-कल्पना उडीं

कलम चली।

7

खिली जो भोर

पक्षियों की चहक

धरा विभोर।

-0-

Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | दिसम्बर 23, 2019

2064

प्रीति अग्रवाल

फोटो; प्रीति अग्रवाल

Posted by: हरदीप कौर संधु | दिसम्बर 20, 2019

2063

1-सविता अग्रवाल ‘सवि’ केनेडा

1

भ्रम में जिया

गुब्बारे-सा जीवन

पल में फटा।

2

ढूँढो न दोष

दरकिनार करो

स्वयं में झाँको।

3

भरो उजास

डर को मिटा देना

नभ है छूना।

4

ख्वाबों का घर

आसमाँ-सी धरती

टूटे हैं पंख।

5

अश्रु की धारा

लगती रहीं चोटें

शुष्क नयन।

6

गहरे घाव्

प्रेम -शब्दों से भरें

नयन झरें।

7

खुशियाँ लाती

शिखरों को छू आती

हार से जीत।

8

आसमाँ खुला

नए पंख लेकर

मन, जो उड़ा।

9

नहीं है नाता

वर्षा और दीप का

केवल स्वप्न।

-0-savita51@yahoo. com

-0-

2-रमेश कुमार सोनी , बसना , छत्तीसगढ़ 

1

मेघ मित्र हैं 

किस्सा सुनाने बैठे 

पहाड़ खुश ।

2

मीठे पानी के 

काले बादल बने 

सागर खारे।

3

घूँघट आँखें 

सपने कैसे देखे ?

भोर भी काले ।

4

राधे के लिए 

हरसिंगार बिछे 

झरे ना थके ।

5

सूर्य निकला 

भूख भी उग आई 

डाह सौतिया।

6

ठूँठ के गाँव 

फंदों में झूले लोग 

कर्ज़ के पेड़ ।

7

मेघ कहार 

बूँदों की डोली लाई 

हरी चुनरी ।

-0-

मेश कुमार सोनी (ब्याख्याता),एच पी गैस के सामने , जे पी रोड – बसना , छत्तीसगढ़ , पिन – 493554 
मो – 7049355476 

-0-

3-मनमोहन कृष्ण गोयल ‘भगत जी’

1

घना अँधेरा

तुम बनना दीप

जग रोशन।

2

गले मिलते

मन में रखे वैर

साँप आस्तीन।

-0-

4-कमला घटाऔरा

1

स्वच्छ करके

हर कोना मन का

बसा लूँ प्रेम ।

2

जले ज्योत

अहर्निश मन में

करूँ विनय ।

3

खुला है द्वार

प्रतीक्षा रत नैन

जाएँ न हार ।

-0-

 

Posted by: हरदीप कौर संधु | दिसम्बर 19, 2019

2062-हिम का बोरा

1-कृष्णा वर्मा

1

 

फोटो-काम्बोज

सर्दी का छोरा

माना नहीं लाने से

हिम का बोरा।

2

हिम उत्पात

आँगन, छत ,छज्जे

काँपे  हैं हाड़।

3

शीत- कटारी

धार करती तेज़

ये बर्फबारी।

4

शीत सताए

शरारती हवाएँ

पिन चुभाएँ।

5

शीत मरोड़े

काँप रहे मुख में

शब्द निगोड़े।

6

ठंड कमान

सन्नाटे तन बैठे

जीना हराम।

7

फोटो काम्बोज

धुंध की मारी

ढूँढे छज्जा ,अटारी

धूप बेचारी।

8

शीत के रूप

मस्त-मलंग मन

हो गया कूप।

9

मिलती नाव

धूप लिवाने जाते 

सूर्य के गाँव।

Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | दिसम्बर 18, 2019

2061

कमला निखुर्पा

1

पूस की रैन

सर्द हवा के संग

छीने है चैन ।

2

गुनगुनी सी

ये धूप सुनहली

लगे है भली ।

3

छीन ले गई

जेबकतरी घटा

धूप टुकड़ा।

4

घटा निगोड़ी

खेलती लुका छिपी

सर्दी सहेली।

 5

सर्द हैं रिश्ते

कोई आके जलाए

नेह अलाव।

 -0- 18.12.2019

Posted by: हरदीप कौर संधु | दिसम्बर 16, 2019

2060-सर्दी

सुदर्शन रत्नाकर

1

ओस की बूँदें

कोहरे की चादर

गढ़े चितेरा।

2

पूस की रात

कोई नहीं बाहर

चाँद अकेला।

3

गुलाबी धूप

सहलाती शरीर

जाड़े के दिन।

4

बिन शृंगार

धीरे से उतरती

सर्दी की धूप।

5

सहें बेचारे

सीमा पर सैनिक

हिम की मार।

6

सताए  सदा

पहाड़ों का जीवन

सर्द मौसम।

7

बादल छाए

सर्दी की बरसात

क़हर ढाए।

8

शीत ऋतु में

मौन खड़े शिकारे

जमी है झील।

-0-

Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | दिसम्बर 15, 2019

2059

डॉ.शैलेष गुप्त ‘वीर’

1

नभ चकित

माँ ने दिया आशीष

मुट्ठी में नभ।

2

दुख घटेंगे

संशय के बादल

फिर छँटेंगे।

3

बेटी नभ में

जग का बोझ धरे

उड़ान भरे।

4

स्मृति की धुन

मन- विटप  पर

नव पल्लव।

5

मिटी न प्यास

चहकीं सारी रात

वर्षा की बूँदें।

6

विस्मित जग

गगन से उतरी

 वो सोनपरी।

7

करूँ मैं नेकी

तुम चाहे जो करो

घृणा या प्रेम।

8

तितली बोली-

क्यों न उड़ूँ आज़ाद

सन्नाटा छाया।

9

पानी ही पानी

पोर-पोर उमंग

भोर सुहानी।

10

धारा अनन्त

क्षिति से व्योम तक

प्रेम की धारा।

11

तारे गिनती

सहेली को बताती

चाँद-सी बेटी.

12

छीनते हम

धरा के आभूषण

दुखी है सृष्टि।

-0-

सम्पर्क: 24 / 18, राधा नगर, फतेहपुर (उ प्र) -212601

ईमेल-doctor_shailesh@rediffmail.com

मो 9839942005

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