Posted by: हरदीप कौर संधु | अप्रैल 11, 2021

2149

1-अर्चना राय

1

झील दर्पण

मुखड़ा निहारते

विस्मित तरु.

2

ARCHANA RAIनयन– झील

अथाह गहराई

राज छिपाए.

3

पूनम रात

सितारों की बारात

झील के पार.

4

सिंधु पालना

उनींदा रवि झूले

गोधूलि बेला.

5

रवि दहका

जीव हैं हलकान

धरा चटकी.

6

बादल ओट

दिनकर ताकता

रुणी धरा.

7

पिया विदेश

रतजगीं अॅंखियाँ

बाट जोहतीं.

8

विरही रात

है ढाढ़स बँधाता

चाँद का साथ.

9

पिया विदेश

नागिन– सी डसे

बैरन रात.

-0-

Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | अप्रैल 9, 2021

2148

1-भीकम सिंह

1

खेत बैठे हैं

सरकार भरोसे

मन मसोसे ।

2

देखता शून्य

ओढ़ के खलिहान

बूढ़ा किसान ।

3

गल्ला मंडी में

तुला के डोरे टूटे

गड़े हैं खूँटे ।

4

फसलें सारी

खलिहानों में बैठी

गुस्से में ऐंठी ।

5

खेतों ने किया

बनके मेहमान

ओस में स्नान ।

6

चली खेतों में

मुँह फेरे पुरवा

रूठा बिरवा ।

7

बिरवा हेतु

मौन साधे हैं खेत

लपेटे रेत ।

8

कपास ने की

मुनादी, पककर

लो हुई, रूई ।

9

बाढ़ की मारी

बदले मनोभाव

खेतों की क्यारी ।

10

वर्षा के आते

बदलने लगे हैं

खेतों के खाते ।

11

टूटी लोरिया

खेतों में सोई पड़ी

दो जून ओढ़े ।

12

खेतों ने बोए

टेढ़ी पगडंडी पे

सीधे सपनें ।

13

शहर बढ़े

आगवानी में गाँव

खेत ले खड़े ।

14

ओस में न्हाई

फसलों की चमक

मंडी में खोई ।

15

खरपातों की

खेतों में घुसपैठे

छलने बैठे ।

-0-

2-नरेन्द्र श्रीवास्तव

1

झील का जल

आसमाँ के चाँद से

अक्स चुराए।

2

झील दर्पण

चाँद ताके चेहरा

नींद न आए।

3

झील- दर्पण

आसमान से चाँद

करे शृंगार।

4

झील का जल

रात भर चाँद से

नैन मटक्का।

5

नभ का चाँद

आकाश से उतरा

झील में तैरे।

6

रोज नहाता

चाँद आके झील में

रात बैचेन।

7

चाँद की मस्ती

झील के आँगन में

चकोर तन्हा।

-0-नरेन्द्र श्रीवास्तव,पलोटन गंज, गाडरवारा,जिला-नरसिंहपुर, म.प्र.-487 551

मो.9993278808

Posted by: हरदीप कौर संधु | अप्रैल 6, 2021

2147

आज डॉ.कविता भट्ट के नवीनतम हाइकु , ग़ढ़वाली में भावपूर्ण अनुवाद के साथ।  आज आपके जन्मदिन के अवसर पर आपको हाइकु परिवार की ओर से   सुखद और सृजनात्मक जीवन के लिए अनगिनत शुभ कामनाएँ-डॉ .हरदीप कौर सन्धु एवं हाइकु परिवार ।

06-04-21

1
चाँदनी रात
हाथ में तेरा हाथ
प्रेम की बात

जुनाली रात
हथ माँ तेरु हथ
माया की बात।
2
है तो उजाला
दुःख भी तेरे साथ
तारों की माला

छन उजाळा
खैरी बी त्वे दगड़
गैंणों की माळा
3
प्यार तू मेरा
तेरी इन आँखों ने
जाने किया क्या

तू मेरी माया
तेरी यूँ आँख्यूँन त
जणी क्य काया
क्क्क4
साँझ-सवेरे
हिचकियाँ दे रही
संदेश तेरे

संध्या-सुबेर
बडुळी देणी छन
रैबार त्यारा
5
न कोई बाँचा
केवल तू समझा
प्यार ये साँचा

कैन नी बाँची
बस त्वेन समझी
माया य साँची
6
निर्बल जीव
चढ़ाई-उतराई
मन-कल्पना

क्वाँसू पराणी
उकाळ-उँदार च
मन माँ गाणी
7
है अपना- सा
इतनी अवधि से
ओ! तू था कहाँ

अपड़ू- सी छैं
इथगा दिनू बिटी
तू कख जि रैं
8
सुकून पाया
तेरा चेहरा देखा
पहाड़ी चाँद

पाई सकून
तेरी मुखड़ी दिखे
काँठा माँ जून
9
दिवस डूबा
मेरा वो मनमीत
अभी न आया

दिन डुबी गे
मेरू वू मायादार
अबी बी नि ऐ
10
मन में तू है
दुनिया का ना डर
तू न रूठना

मन माँ तू छैं
दुन्या मि नि च डौर
गैल्या ना रुसै

Posted by: हरदीप कौर संधु | अप्रैल 5, 2021

2146

[ एक लम्बे अर्से के बाद भाषान्तर दिया जा रहा है। इस  बार रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’ के चुने हुए हाइकु का डॉ. कविता भट्ट द्वारा अनुवाद किया है। काव्य का अनुवाद कठिन काम है, जिसे डॉ.कविता भट्ट जी ने बखूबी सम्पन्न किया है।डॉ हरदीप सन्धु]

रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

 [ गढ़वाली अनुवाद:  डॉ कविता भट्टशैलपुत्री’]

1

निर्मोही जग
सदा पीर ही बाँटे
सबको काटे

 

निर्मोही दुन्या

सदनी पिड़ा देंदी

सब्बू थैं  खांदी

2-

प्राणों का पंछी
अकेला उड़ चला
साँझ हो गई

 

प्राणू प्वथली

यकुली उड़ी ग्यायी

ब्याखुन ह्वे गे
3
इन नैनों से
आज अमृत चुआ
ये कैसे छुआ ?

 

यूँ आँख्यों बटी

आज अमृत च्वीं गे

कन छुयाली

4
माथा तुम्हारा
धरा पर चाँदसा
उजाला किए

तुमारू मत्था

पिरथी माँ जून सी

उजालू कयूँ

5

मन का तम
मिटाते रहे तेरे
मन के दिए

 

मनौं अन्ध्यारू

मैठाणी राई त्यारा

मन का दिवा  
6

हमको मिले
अधूरे ही सपने
थे अपने

हमू मिल्यन

अधूरा सी ही स्वीणा

छा अपड़ा

7

धोखा दिया क्यों
हम तुम्हारे कभी
मीत नहीं थे

 

ध्वका किले द्ये

हम त्यारा छा कबी

गैल्या नि छा क्य 

8
मुझे भरोसा
तुम पर इतना
नभ जितना

मेरु भरोसू

त्वे पर इथगा

आगाश जथा

 9
तुम्हारे दर्द
अँजुरी से पी लूँगा
युगों जी लूँगा

तुमारी पिड़ा

अंजुळीन पी द्योलू

जुगु जी ल्योलू

 10

गले से लगी
सालों बाद बहिन
नदी उमगी

गौळा भेंटे गे

बरसू बाद बैण

गंगा उमड़ी

-0-

Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | अप्रैल 3, 2021

2145

1- विभा रश्मि

1

पक्षी विहार ,

झील- किनारे बसा

सुख संसार ।

2

्फ़तहसागर झील -उदयपुरमेरे ख़्वाबों  में

झील है तरंगित

लुटाती प्यार ।

3

भीगी पलकें

मूँदे सोई थी झील ,

लागे बेटी- सी  ।

4

नभ में  छाईं

घटाएँ पूछें राज़  

झील से दिली ।  

5

माँ की स्मृति- सी

उमड़ आई झील

नैन छलके ।

क्यों भरी झील ?

अँखियों में सजनी ,

पिय रुखड़ा ।

7

घटते खेत –

बढ़ती मरुभूमि ,

झील विलापी ।

8

सुहानी भोर ,

झील के आग़ोश में

हंस युगल ।

9

झरने – झील

कितने  गदगद

देख  जलद  ।

10

डोंगियाँ थकीं

झील में लगा फेरे ,

तट पे लेटीं ।

11

यादों की झील

जब से लबालब

लंबी है शब ।

12

12

झील उदास ,

उसके अंतस की

कोई न सुने !

13

झील वासिनी –

ये सुनहरी मीन

हैं स्वाभिमानी ।

  14

अतिथि  खग

कलरव लगे तेरा

झील-तराना ।

15

चाँद-तारों  की

बलैया लेती झील

है झिलमिल ।

Posted by: हरदीप कौर संधु | अप्रैल 1, 2021

2144

Haiga 001

Haiga 002

गोखुर झील

Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | मार्च 31, 2021

2143-झील के आँचल में

डॉ. कुँवर दिनेश सिंह        

1

सूर्य चमके

पूर्वी क्षितिज पर,

झील दमके।

2

झील शीतल

नाव के साथ- साथ

बत्तख दल।

3

ज्यों साँझ ढले

सूरज संग झील―

रंग बदले।

4

शाम विचित्र

झील सहेज रही―

सूर्य के चित्र।

5

सूर्य गुलाबी!

साँझ ढले झील की

बढ़ी बेताबी!

6

दिन ढलता

झील की लहरों पे―

मूड सूर्य का!

7

नीलम नील!

प्रात: धूप का स्पर्श―

दमकी झील!

8

शान्त है झील

गर्मियों की शाम में

सुख की फ़ील!

9

झील के कोने

श्वेत कमल छिपा

हरे पत्तों में!

10

सहसा मिले

झील के छोर पर

कमल खिले!

11

झील पे आए

दूर देश के पंछी

बने पाहुने!

12

पंछी चहके

इस झील को रखें

साफ़ करके!

13

पंछी दूर के

झील में आ पहुँचे

वासी तूर के!

14

ख़ुशी की फ़ील

नाचते- गाते लोग

ख़ामोश झील।

15

पुण्या की रात

झील के अँचल में

चाँद की बात!

16

छिप- छिपके

नहाती है चन्द्रिका

शान्त झील में।

17

चाँद- सितारे

आसमान― झील में

उतरे सारे।

18

कैसा अजूबा!

जादूगर चन्द्रमा―

झील में डूबा!

19

चाँद है आया

झील की नींद उड़ी,

जी भरमाया।

20

चन्द्रमा आया

झील के आग़ोश में

सुकून पाया।

-0-

डॉ. कुँवर दिनेश सिंह ,कवि, कथाकार, समीक्षक,प्राध्यापक (अँग्रेज़ी) व सम्पादक: हाइफ़न

#3, सिसिल क्वार्टर्ज़, चौड़ा मैदान, शिमला: 171004 हिमाचल प्रदेश।

ईमेल: kanwardineshsingh@gmail.com

Posted by: हरदीप कौर संधु | मार्च 30, 2021

2142

1-रचना श्रीवास्तव

1

क्षितिज पार

जीवन की सुबह
प्रतीक्षारत
2

मधुमय थी
कविता की भोर भी
उम्मीदें जगीं
3
उड़ती भोर
तितली के पंखों में
बाँधके रंग
4
बो दी है भोर
आँगन में किसने
सपने उगे!
5
सपने पौधे
मन -गमले रोपे
कुम्हलाए क्यों ?
6
तेरी हथेली
उतरी भोर चिरैया
ज्यों सूर्य खिला
7
भोर किरण
हौले से गुदगुदा
खिलाती फूल
8
सुबह हुई
ले कर अँगड़ाई
जागे सुमन
-00

Rachana Srivastava
Freelance writer and Poet,
Los Angeles, CA
http://rachana-merikavitayen.blogspot.com/
-0-

2-अनिता ललित

1

आग का गोला

झील में नहाकर

बना चँदोवा!

2

साँझ घनेरी

पलकों -तले खिलीं

यादें कनेरी!

3

साँझ जो आई

सागर की देहरी

सजी रंगोली!

4

चाँद ने खोले
कई क़िस्से पुराने
सजे वीराने।
5

फूलों पे बिछे
शबनम के आँसू
भोर ने पोंछे।
6

नदी ने किए
सागर के हवाले
आँसू वो खारे।
7

रातों को जागे
दिन में बुझा-बुझा 
चाँद उनींदा।
8

आँसू पी के भी
न कम हो उदासी
नदी है प्यासी।
9

दौड़ लगाएँ
आसमाँ में चाँद औ
धरा पे इंसाँ।

10

स्वयं को खोते

तभी तो चमकते

सूरज-चाँद।

11

साँझ की माँग

सूरज का सिन्दूर

चाँद का टीका।

~अनिता ललित ,1/16 विवेक खंड, गोमतीनगर,लखनऊ

226010

Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | मार्च 28, 2021

2141

होली

1-डॉ. जेन्नी शबनम

1.

उन्मुक्त रंग

ऋतुराज बसंत

फगुआ गाते।

2.

बंधन मुक्त

भेदभाव से मुक्त,

होली संदेश।

3.

फगुआ आया

फूलों ने खिलकर

रंग बिखेरा।

4.

घूँघट काढ़े

पी की राह अगोरे

बावरी प्रिया।

5.

कैसी ये होली

नैहर है वीरान

अम्मा न बाबा।

6.

माँ को ले गया,

वक्त बड़ा निष्ठुर

होली ले आया।

7.

झूम के गाओ

जोगिरा सा-रा रा-रा

रंग चिहुँका।

7.

रंग गुलाल

पुआ व पकवान

होली के यार।

8.

होली  का पर्व

सरहद पे पिया,

कैसे मनाऊँ?

9.

मलो गुलाल

चढ़ा प्रेम का रंग,

मिटा मलाल।

10.

भुलाके रार

खेलो होली त्योहार,

ज़िन्दगी छोटी।

11.

लेकर आईं

उत्सव की स्मृतियाँ

होली का दिन।

12.

कैसे थे दिन

नाचती थी हवाएँ

होली के संग।

13.

अबकी होली

पीर लिए है आई

नहीं है माई।

14.

द्वार पे खड़ी

मनुहार करती

रँगीली होली।

15.

आज के दिन

होली दुखहरणी

पीर हरती।

16.

नशे में धुत्त

भाँग पीके नाचती

होली नशेड़ी।

17.

होली की दुआ-

अशुभ का नाश हो

साल शुभ हो!

18.

ठिठका रंग

देख जग का रंग

आहत होली।

19.

होली का दिन

मुँह लटका, खड़ा

टेसू का फूल।

20.

होली मइया,

मन में पीर बड़ा

रीसेट करो।

-0-

2-डॉ.भीकम सिंह

1

धुआँ लपेटे

हरे पेड़ों के तन

फाग में लेटे ।

2

प्रकृति बाँधे

फागुन में घुँघरू

और छमके ।

3

कनेर- टेसू

होली में हुलसे हैं

उलझे गेसू ।

4

फाग के हाथ

रंग-पाश खोलते

पानी घोलते ।

5

खिला है फाग

पाँवों में थाप बाँधे

माघ से नाचे ।

6

कोयल बैठी

कुहू-कुहू पुकारे

ताना ज्यों मारे ।

7

कोयल को यों

पेड़, मिलके सुने

ज्यों श्रोता बनें ।

8

फाग में पाँखें

भौंरे ने खुजलाई

कली मुस्काई ।

9

होने को फ़ना

फाग का अंतःपुर

रंगों में सना ।

  -0-

3-भावना सक्सैना

 फागुनी हवा

1

कांजी पापड़

गुझिया दही-बड़ा

स्वाद होली का।

2.

फागुनी हवा

दहकता गगन

टेसू के फूल।

3

हाथ बँधे हैं

सतर्कता की दूरी

अँखियों होरी।

4

कैसी भी दूरी

न उत्साह हो थोड़ा

रंग नेह का।

5

ब्रज के गीत

पिचकारी कान्हा की

रमी मन में।

6

राधा लजाती

सखियों में जा छिपे

ढूंढ ले कान्हा।

7

भाए न मोहे

चुटकी भर रंग

हो सराबोर।

8

नेह से भीजे

प्राणी विश्व भर के

तब हो होली।

9

दूर देस में

खिलता है फगवा

मिलते मन।

10

चंदन टीका

खोए हैं पकवान

शहरी होली।

-0-

Posted by: हरदीप कौर संधु | मार्च 26, 2021

2140

रश्मि विभा त्रिपाठी ‘रिशू’
1
देख कंकर
झील का तन काँपा
डरी लहर
2jheel-6-1
रवि ओढाये
रश्मि-चूनर झील
बैठी लजाए
3
प्रेयसी झील
सिन्धु-प्रेमी बिछुड़ा
जड़ हो गई
4
झील-दर्पण
रात की वेणि गूँथे
सखी चन्द्रिका
5
रजनी आई
झील की शय्या पर
चाँद जा बैठा
6
देख तूफान
सिहर उठी झील
काँपी लहरें
7
झील-दर्पण
भोर उठ देखता
मुख सूरज
8
आलि पवन
करे अठखेलियाँ

झील के संग
9
खारा-सा नीर
कौन बाँचे झील की
दु:सह पीर
10
मौन है झील
सखी हवा आई
गूँजा संगीत
11
मलिका-झील
नभ ताने छतरी
बना प्रहरी
12
झील -सी आँखें
घनी पीड़ा का मौन
कभी वो बाँचें
13
झील- चादर
हवा चंचला नित
खींचे बिगाड़े
14
सूरज खींचे
तस्वीर झील-कन्या
आँखों को मींचे
15
एकाकी झील
स्मृति-मीन समाधि
तलहटी में
16
पवन-गीत
सुन झील-सुकन्या
थिरक उठी
17
झील रो पड़ी
देख मैली चूनर
सितारों जड़ी
18
कौन बुहारे
झील-आँगन लगा
कूड़े का ढेर
19
हवा क्या बोली!
झील के मुख पर
मुस्कान तिरी
20
प्यासे  पखेरू
झील पानी पिलाती
प्यास बुझाती
21
सैर से लौटे
पाखी को जलपान
कराती झील
22
पवन झौंके
साड़ी की सिलवटें
सँभाले झील
23
शान्तमना है
झील बेचारी भला
बोले भी तो क्या
24
दुबकी मीन
झाँकें झील-आँगन
शिकारी आँखें
25
फफ़की झील
नन्ही मीन ले उड़ी
शिकारी चील
26
खोलती हवा
झील-वधू का जूड़ा
बिखरी लटें
27
चाँद उकेरे
झील कैनवास पे
चन्द्रिका- चित्र
28
घड़ी अमा की
झील राह तकती
अंशुमाली की
29
वृक्ष निहारें
झील की हरी साड़ी
मन मुस्काए
30
तेज थपेड़े
झील कोमल तन
आँधी झिंझोड़े

-0-

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