Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | मई 21, 2020

2033

1-चन्द्रमा- गौरव वाजपेयी ‘स्वप्निल’

1

झीना-सा पर्दा

रूप-राग झरता

मन हरता

2

नभ की बस्ती

यामिनी का छज्जा है

चंदा की हस्ती

3

रूप की राशि

मुक्तहस्त बाँट दे

तम छाँट दे

4

शशि का मुख

देख रही धरती

मर मिटती

5

विलक्षण है

सौन्दर्य अनुपम

क्षण-क्षण है

6

तुम हो कथा

प्रियतम की आस

नभ के पास

7

नभ के फूल

धरा पर सुगन्ध

मानो हो छंद

8

नभ की छन्नी

छानती उजियास

भेजती आस

9

चाँद हो तुम

हृदय में निकले

तम पिघले

10

दिखी हो तुम

टिमटिमाया चाँद

अब मैं गुम

11

रूप की छटा

विस्मित हो तकता

नहीं थकता

-0-

परिचय-
गौरव वाजपेयी ‘स्वप्निल’
जन्म:15 अगस्त 1977, शाहजहाँपुर (उत्तर प्रदेश)
शिक्षा-एम बी ए (मार्केटिंग इकोनॉमिक्स) (लखनऊ विश्वविद्यालय)
सम्पर्क-गौरव वाजपेयी ‘स्वप्निल’,(कर अधिकारी),जिला पंचायत परिसर
निकट-सन्तोषी माता मन्दिर,गोंडा रोड,बलरामपुर (उत्तर प्रदेश)
पिन कोड-271201
ई मेल-swapnil.gaurav@gmail.com

-0-

2-गिर्राज प्रसाद गौतम ‘कथित’

1

सीधी-सी बात

चाहता बदलाव

स्वयं से कर.

2

क्यों परेशान?

अभी भी जीवित है

दूर्वा की जिद.

 3

किया अंतर

कथनी करनी में

मनमुटाव.

4

बीता है कल

आने वाला है कल

हाथ में पल.

5

 अंत लड़ाई

लड़नी है अकेले

समझ भाई.

6

जितने फन

उतनी फुफकारें

किसे पुकारें?

— 0 —

2-जी पी गौतम ‘कथित’

hello@gpgautam.com

-0-

Posted by: हरदीप कौर संधु | मई 20, 2020

2032

मोहनलाल जाँगिड़

Posted by: हरदीप कौर संधु | मई 19, 2020

2031

1-माँ

डॉ. सुरंगमा यादव

1

माँ मानस -सी

माँ पूजा की थाली -सी

मंगलकारी।

2

संस्कार देती

भविष्य सँवारती

पूजनीय माँ।

3

माँ,महाकाव्य

वात्सल्य के इसमें

सर्ग अनेक।

4

बेटी सयानी

माँ ने सहेज रखी

छठी की फ्राक।

5

बेटे की याद

फोन की घण्टी पर

माँ रखे कान।

6

बच्चों ने खाई

माँ तो देख अघाई

रोटी थी कम।

7

हुई विदाई

वृद्धाश्रम में जाती

बुढ़िया माई।

8

माँ का डिठौना

ढाल बन लड़ता

बुरी बला से।

9

माँ के हाथ की

घी- चुपड़ी पनेथी

यादों में शेष।

10

वीडियो कॉल

फेरे कैसे ममता

बेटे पे हाथ।

-0-

2-

सविता अग्रवाल ‘सवि’ (कैनेडा)

email savita51@yahoo.co

1

माँ की ममता

गर्दिशों में धूप -सी

आस किरण ।

2

माँ का जीवन

लिख ना पाते शब्द

मैं हूँ निस्तब्ध ।

3

खिले अँगना

माँ के ही दुलार से

घर सजता ।

4

माँ अनमोल

ममत्व से सम्पूर्ण

तोल ना पाई ।

5

माँ की ममता

ढूँढती मैं रहती

यादें सतातीं ।

6

माँ की दुआएँ

कवच पहनातीं

हौसला लातीं ।

7

खिलाती रोटी

गूँथ प्यार का आटा

पेट भरती ।

8

माँ का आँचल

समेटे सब दुःख

पोंछता आँसू ।

9

ममतामयी

करती न्योछावर

सारा जीवन ।

10

मन दर्पण

करे स्व समर्पण

माँ सा ना कोई ।

11

करती चिंता

बच्चों के सुख की ही

आस लगाती ।

12

माँ अनमोल

कहे ना कभी व्यथा

करे सृजन ।

   email savita51@yahoo.co

-0-

3-अंजु गुप्ता

1

माथे बिंदिया,

बँधी पग पायल,

मुरीद पिया !

 2

बजे घुँघरू,

फिर सारी रतिया,

ढला यौवन !

-0-

4- राजेश कुमार कौशल

1

rajesh phtकोरोना काल             

अदृश्य वायरस 

प्राण घातक    

2

लक्ष्मण-रेखा 

ऐ ! मत कर पार

ड्रैगन बम .

3

कोरोना -पथ

जन-तन दूरियाँ

अवरोधक

4

लॉकडाउन

रामबाण औषधि

घर में  रहो

5

अभिनन्दन

चिकित्सक पुलिस                

कोरोना योद्धा ।

6

सब्र रखिए                

पटरी  पे जिंदगी

लौट आएगी।

-0-

 राजेश कुमार कौशल,ढोह कन्जयाण , जिला  हमीरपुर , हिमाचल प्रदेश !
email : rajesh9kaushal@gmail.com

Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | मई 11, 2020

2030

 डॉ. शैलजा सक्सेना [ कैनेडा ]

1

सूरज आजा

हिम को भगाने को,

रश्मि-दंड ला !

2

कूका बसंत

क्यारियाँ मुस्कुराईं

महकी हवा।

3

रोने भी दो न !

क्यों चिपकाऊँ व्यर्थ,

मुस्कान झूठी!

4

पहाड़ खड़ा

धरा- आकाश बीच

जैसे ठहाका!

5

भरी झील ज्यों

धरा की नम आँखें

ताकें आकाश!

6

भँवरे सुनाए

मधु-पत्र पिया का

हवा मुस्काए !

7

तुम्हारा प्यार

खोलता अनदिखे

ज्योति के द्वार!

8

याद- बारिश

भीगता मन हुआ

मन भर का।

9

झरने बच्चे,

पहाडों के कंधों से

उतर भागे।

10.

भाग्य- रेखा से

धरा की हथेली पे

पेड़ की जडें।

11

हज़ारों डर,

खँरोंचते मन को

घायल तन।

12

गोरी लजाए

फूलों का रंग तक

लाल हो जाए।

13

शब्द- मीनारें

छिपाती हैं चेहरे

है प्यार कहाँ?

14

क्षणिक मृत्यु

रोज़ चली आती है

नींद बनके!

-0-

Posted by: हरदीप कौर संधु | मई 9, 2020

2029-कृष्णा वर्मा

 

 

 

 

 

 

 

Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | मई 8, 2020

2028

Posted by: हरदीप कौर संधु | मई 6, 2020

2027

 डॉ.सुधा गुप्ता

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | मई 4, 2020

2026

      डॉ.कुँवर दिनेश सिंह जी लम्बे अर्से से हिन्दी और अंग्रेज़ी में उत्कृष्ट हाइकु लिखने में संलग्न हैं। अंग्रेज़ी से हिन्दी में जापानी हाइकु कारों का अनुवाद भी किया है। ‘फ़्लेम ऑफ़ द फ़ॉरेस्ट’ के नाम से हिन्दी के 5 देशों के चुने हुए 32 हाइकुकारों  की रचनाओं का अंग्रेज़ी में अनुवाद आपका नया एवं महत्त्वपूर्ण कार्य । हिन्दी हाइकु का अंग्रेज़ी हाइकु में अनुवाद करना बहुत कठिन कार्य है; क्योंकि हिन्दी में हाइकु का आधार वर्णिक है, तो अंगेज़ी में आक्षरिक( सिलेबिक) है। डॉ.कुँवर दिनेश सिंह जी ने इस कार्य को सफलतापूर्वक सम्पन्न किया है। इस संग्रह से बानगी के तौर पर डॉ.डॉ भगवतशरण अग्रवाल और श्री नीलमेन्दु सागर के हिन्दी हाइकु के साथ अंग्रेज़ी अनुवाद दिया जा रहा है। आवरण -पृष्ठ का फोटो रश्मि शर्मा का है

सम्पादक द्वय

 

Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | मई 1, 2020

2025

डॉ0 सुरंगमा यादव

1

तम सघन

उजाले का किया है

दीप ने प्रण ।

2

दिये की शक्ति

परख रही हवा

मनाओ दुआ।

3

कितना सींचे

पत्थरों पर कब

उगे बगीचे।

4

स्वप्नों की नींव

भविष्य का भवन

गढ़ता पंछी।

5

कुहू कहती

चहुँओर उदासी

कैसी है साथी।

6

कंक्रीट वन

व्याकुल घूमें पंछी

सहें तपन।

7

कैसी त्रासदी

पापनाशिनी नदी

कचरा ढोती।

8

राही सुस्ताते

वृक्ष खड़े मुस्काते

छतरी ताने।

9

बुढ़ापा आया

कितने समझौते

संग में लाया।

10

आँधी का वार

वृक्षों ने झुककर

बनायी ढाल।

11

धरा महकी

मेघों ने उड़ेल दी

इत्र की शीशी।

12

प्रेम- नगीना

मन की अँगूठी में

सजा रखना।

13

नींद सजाए

नयनों में आकर

स्वप्न रंगोली।

14

जन्म-मरण

विपरीत दिशा में

चले दो राही।

-0-

Posted by: हरदीप कौर संधु | अप्रैल 30, 2020

2024

नन्दा पाण्डेय

1

एक सवाल

दूर तक बिखरी

प्रेम की भाषा।

2

दिखाती रास्ता

भटकें जब लोग

सजग  आँखें।

3

हवा में शोर

बादल- सा उड़ना

बच्चों की साँसें

4

एक सवाल-

अपनी दुनिया से

हतप्रभ मैं।

5             

बात-बेबात

हवा बजाती गाल

आया वसंत।

 6          

गेहूँ की बाली

रस से भींगी ईख

मुघ्ध वसंत।

 7              

शीतल रात

कुहरे डूबी भोर

वसंत जागा।

8                  

उमड़े झोंके

मन के आँगन में

मुदित पल।

9                     

अटारी धूप

आँगन सूखे बड़ी

ठिठका दिन।

 10                  

ओस जल- सी

काँपती है कल्पना

मौन वेदना।

11                      

शून्य जीवन

सिसकते हैं शब्द

अमृत- आशा।

 12                  

गर्व का घोष

चंद्रमा की ज्योति में

वंचित प्रेम

13                  

सजल आँखें

उमंग लावण्य की

स्मृति मधुर

14                   

रात अँधेरी

तिमिर आँचल में

दुबका प्रेम।

 15                    

बाट जोहती

गिनी जाती तारीखें

सुबकती माँ।

 16                    

भीतर आशा

रँगते कैलेंडर

पापा की आँखें।             

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