Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | जनवरी 23, 2023

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सुरभि डागर 

सुरभि डागर -मेन

1

कोयल कूक

लगाए हो बसंत

झूमके आए।

2

सँभलो नर

प्रकृति की गुहार 

डालो संस्कार ।

3

प्रकृति पति

शिव तारणहारा

सबसे प्यारा।

4

जल अमोल

एक बूँद भी अब 

न हो बेकार ।

स्लेटी साँज्ह

5

स्लेटी  शाम  में

अम्बर से ताकता

मुझको चाँद ।

 6

स्वर्णिम साँझ 

किरणे धरा पर

करें शृंगार ।

7

इन्द्रधनुष

सतरगी सपने

हिंडो़ला झूलें ।

8

प्रदूषण में

साँसों का अभाव है 

जीना दूभर

9

बगुला बना 

मन हंस को काहे

आस लगाए।

10.

रंगबिरंगी

ओढ़ चूनर धरा 

मन्द मुस्काए।

-0-

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Responses

  1. हिंदी हाइकु परिवार में आपका स्वागत है!
    बहुत ही सुंदर हाइकु!

  2. सुन्दर सृजन.. 🌹🙏

  3. सुरभि डागर के हाइकु भावपूर्ण हैं।कुछ हाइकु बहुत अच्छे हैं यथा-स्वर्णिम साँझ /
    किरणे धरा पर/करें शृंगार ।…स्वागत एवं शुभकामनाएँ।

  4. हिंदी हाइकु की दुनिया में स्वागत, आपसे भविष्य स्वर्णिम होगा ऐसी उम्मीदें की जा सकती हैं।
    अच्छे हाइकु-बधाई।

  5. बहुत सुंदर हाइकु। स्वागत है।

  6. हिंदी हाइकु परिवार में आपका स्वागत है…सुन्दर हाइकु के लिए बहुत बधाई

  7. स्वागत है आपका, बहुत सुंदर हाइकु…बहुत-बहुतबधाई।

  8. स्वागत है आपका, बहुत सुंदर हाइकु…बहुत-बहुत बधाई।


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