Posted by: हरदीप कौर संधु | नवम्बर 11, 2022

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डॉ.कविता भट्ट

डॉ कविता भट्ट (1)

1

उन्मुक्त रहो
जीवन- पहाड़ी पर
समीर बहो।
2
तेरी ये दृष्टि
रचती प्रतिपल
नवीन सृष्टि।
3
हँसता गाता
आया ज्यों मधुमास
मुख ये पास।
 -0-

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Responses

  1. गहन अर्थ व्यंजक उत्कृष्ट हाइकु।

  2. बहुत ही गहरी भावाभिव्यक्ति।
    बहुत ही उत्कृष्ट हाइकु।

    हार्दिक बधाई आदरणीया दीदी।

    सादर

  3. बहुत भावपूर्ण व गहन हाइकु सृजन के लिये प्रिय कविता भट्ट जी को दिली बधाई ।

  4. बहुत सुंदर हाइकु!

    ~सादर
    अनिता ललित

  5. उत्कृष्ट हाइकु। बधाई

  6. वाह ! सुंदर सृजन
    बधाई कविता जी

  7. प्यारे से हाइकु के लिए बहुत बधाई

  8. बहुत सुंदर सृजन, धन्यवाद कविता जी!


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