Posted by: हरदीप कौर संधु | जून 16, 2022

2265


कमला निखुर्पा

(आज बहुत तेज हवाएँ चलीं। लगता था पेड़ उखड़ जाएँगे। गर्जन के साथ  बारिश हुई और माटी की  सोंधी महक के साथ मौसम सुहावना हो ग़या। ऐसे में  भाई का गुरुमंत्र याद आ  गया-कोई विचार आए,तो तुरंत लिख  डालो …। बस आज इस तरह ये हाइकु बनें।)मेघमाला

1

जिद्दी पवन 

धकेलती तरु को 

खेलन चलो

2

घमंडी तरु 

हो टस से न मस 

हवा बेबस

3

छुपके हँसी 

खिल-खिल बिजुरी 

डपटे घन

4

गर्जन सुन 

रोई नन्ही बदरी 

बूँदों की झड़ी

5

शीतल हुई 

जो तपन धरा की 

हवा महकी


Responses

  1. ताज़गी लिए सुंदर हाइकु। बधाई कमला जी।

  2. बहुत ही सुंदर हाइकु।
    आदरणीया कमला निखुर्पा जी को हार्दिक बधाई।

    सादर

  3. घमंडी तरू / हो टस से ना मस / हवा बेबस ••वाह बेहतरीन हाइकु, हार्दिक शुभकामनाएँ ।

  4. घमंडी तरू / हो टस से ना मस / हवा बेबस ••वाह बेहतरीन हाइकु, हार्दिक शुभकामनाएँ ।

  5. बहुत ही सुंदर हाइकु…कमला जी को हार्दिक बधाई।

  6. प्रकृति के मोहक रूप पर सुंदर हाइकु। बधाई कमला जी।

  7. सुंदर हाइकु
    बधाई


रचनाओं से सम्बन्धित आपकी सार्थक टिप्पणियों का स्वागत है । ब्लॉग के विषय में कोई जानकारी या सूचना देने या प्राप्त करने के लिए टिप्पणी के स्थान पर पोस्ट न करके इनमें से किसी भी पते पर मेल कर सकते हैं- hindihaiku@ gmail.com अथवा rdkamboj49@gmail.com.

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  बदले )

Connecting to %s

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

श्रेणी

%d bloggers like this: