Posted by: हरदीप कौर संधु | मई 16, 2022

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1-डॉ. गोपाल बाबू शर्मा

1

अन्धविश्वास,

अभी तक जीवित

बने विनाश ।

2

गीता-कुरान,

दोनों ही उपेक्षित,

स्वार्थी इंसान

3

उठे पत्थर,

हर और हाथों में,

सच के सर !

4

सिर्फ तन को,

बाँधा जाना सम्भव,

नहीं मन को ।

5

जय विज्ञान

करे विकास जब

नहीं ले जान ।

6

इंसाफ जब,

मिले वर्षों के बाद,

क्या मतलब ?

7

न पाएँ भाँप,

डस लेते सहसा,

आस्तीनी साँप ।

8

सात्विक क्रोध,

पानी का बुलबुला,

व्यर्थ विरोध ।

9

अगर नहीं

धन-वैभव पास,

पूछ न कहीं ।

10

नारी का तन,

हुआ ब्यूटी पार्लर,

फटें नयन !

11

नूतन वेश,

टैंटू हैं प्रदर्शित,

कटि-प्रदेश !

12

पानी के बिन

आदमी का जीवन,

कितने दिन ?

13

लड़ के कहें,

हमारे लिए डैड,

किया ही क्या है?

14

अपना घर

फिर भी बुढ़ापे में,

डर ही डर ।

15

हुए दुष्कर,

दो-चार सच्चे आँसू,

मरने पर ।

16

कैसा विकास,

होली भी कैमिकली,

टेसू उदास ।

17

आधुनिकता,

कहाँ रही वैसी ही,

रमणीयता ?

18

गर्हित टालें,

जहरीला साँप क्यों,

गले में डालें ?

19

प्रेम की प्यास  

यदि बुझ जाए तो,

प्रेम का ह्रास ।

20

भूख नोटों की

देश की चिंता किसे?

प्यास वोटों की ।

21

प्रीति-रीति में

साँप-सीढ़ी का खेले,

राजनीति में ।

21

आतंकवाद,

जिन्दगियाँ बर्बाद,

नाम जिहाद ।

22

अजब ढब,

चमन का अमन

हुआ गायब ।

23

चोर को चोर,

कहे खुल्लम खुल्ला,

किसमें ज़ोर?

24

वीणा-वादिनी,

होती अब घाघों को,

वरदायिनी ।

25

हँसी फूलों की,

पत्थर क्या समझें

खुशी झूलों की !

26

तन की प्यास,

उससे कहीं बड़ी,

मन की प्यास ।

27

बनाए धन

पिता-पुत्र तक को,

जानी दुश्मन ।

28

दूधों नहाती

आती चाँदनी रात

यादें जगाती ।

29

प्यार की चाह,

अजीब विसंगति,

मिलती आह !

30

कोमल मन,

टूट जाता सहसा,

जैसे दर्पन ।

-0-

2-रमेश कुमार सोनी

1

नदी मं डोंगा

सावन के झुलई   

पोटा काँपथे।

 2

सोनहा मया  

पूरब मं बिहाने

जाग रे पाबे।

 3

भादो रोवाथे

पूरा बोहाके लेगे

खेत ले छान्ही। 

 4

पुस के घर

कथरी ओढ़े आथे

घाम पहुना।

 5

चाय माँगथे

गोदरी मं खुसरे

पुस के जाड़।

6

रखिया फरे

बरी के तइयारी

जोरन बर।

 7

जाम पाके हे  

बारी ह ममहागे 

पींयर काया।

 8

रेती के मया

कलिंदर मीट्ठ हे

चिख करेज्जा।

 9

तुमा-कोंहड़ा

छकत ले फरथे

खिसा भरथे।

 10

कहिनी सुने

गोरसी ह बलाथे

जाड़ दउड़े।

 11

रेंगे डेर्राथें

सावन के चिखला

पनहीं  बोहे!

 12

राहेर, चना

घुनघुना बजाथें

नोनी के सांटी। 

 13

पोटारे बर

रुख-ढेखरा होगे!

कोंवर नार। 

14

 कुकुर पिला

आँखी मूँदे खोजयं

दाई के कोरा।

 15

डोमी करिया

मेचका ल ताकथे

बाँबी काखर?

 16

महुआ खाल्हे

जम्मो मताए हवैं

भालू कुदाथे।

 17

नौटप्पा के लू

आरुग हे करसी

जीव जुड़ाथे।

18

घाट-घटौंदा

गाँव घूमे ल जाथें 

पूरा लेगथे। 

19

कोन दूल्हा हे?

बादर के माँदर 

बूँद-बराती।

20

रेती तीपथे

कलिंदर-कुरिया

जुड़ बईठे।

-0-

कबीर नगर-रायपुर,छत्तीसगढ़


Responses

  1. पानी के बिन /आदमी का जीवन/कितने दिन ? , कोन दूल्हा है ? / बादर के माँदर/ बूँद-बराती ••वाह सभी हाइकु बेहतरीन, दोनों हाइकुकारों को हार्दिक शुभकामनाएँ ।

  2. बहुत सुंदर हाइकु
    आदरणीय सर डाॅ गोपाल बाबू शर्मा जी एवं रमेश कुमार सोनी जी को हार्दिक बधाई 🌹💐

  3. डॉ गोपाल बाबू शर्मा जी के हाइकु हमें एक नयी दृष्टि देते हुए प्रकट हुए हैं कि हमें किस तरह किसी दृश्य को अनुभूत करना चाहिए। आपकी लेखनी को नमन-उत्कृष्ट हाइकु के लिए बधाई।
    मेरे छत्तीसगढ़ी हाइकु संग्रह’गुरतुर मया’ से आपने इस पटल पर छत्तीसगढ़ी हाइकु को प्रकाशित किया-हार्दिक आभार। आज छत्तीसगढ़ी धन्य हुई।
    संपादक द्वय को बहुत धन्यवाद।

  4. अति उत्कृष्ट सृजन… सुंदर हाइकु भावों से परिपूर्ण…. बधाई आओ दोनों को बधाई 🌹💐🌹🙏🙏

  5. बहुत सुंदर सृजन… आप दोनों को बहुत बधाई।

  6. सूंदर रचनाएँ!


रचनाओं से सम्बन्धित आपकी सार्थक टिप्पणियों का स्वागत है । ब्लॉग के विषय में कोई जानकारी या सूचना देने या प्राप्त करने के लिए टिप्पणी के स्थान पर पोस्ट न करके इनमें से किसी भी पते पर मेल कर सकते हैं- hindihaiku@ gmail.com अथवा rdkamboj49@gmail.com.

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