Posted by: हरदीप कौर संधु | अप्रैल 7, 2022

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1-चाँदझील और चाँद

सुदर्शन रत्नाकर

1

छिपा सूरज

रात के रथ पर

आ बैठा चाँद।

2

पहने वस्त्र

धवल चाँदनी के

निकला चाँद।

3

चाँद मुस्काया

तारे खिलखिलाये

अम्बर जागा।

4

चाँदनी खिली

श्वेत चादर बिछी

मोतियों वाली।

5

चाँद ने झाँका

बादलों की ओट से

धरा मुस्काई।

6

चाँद मुस्काया

खिली धरती- काया

बिखरी आभा

7

चाँद निकला

तारों से जब मिला

नभ मुस्काया।

8

भोर की बेला

छिप गए हैं तारे

चाँद अकेला।

9

सोती है रात

चमकता है चाँद

देता पहरा।

10

जब भी आता

सुधा है बरसाता

नभ में चाँद।

11

चाँद -किरनें

फैली आसमान में

शीतल रात।

12

बेचारा चाँद

जागता रात भर

तारों के संग ।

13

दूध कटोरा

हाथ लिये घूमती

रात चाँदनी।

14

सजा गगन

माथे पर बिंदिया

चाँद सलोना।

15

चाँदनी रात

उतरती किरणें

ज्यों हों परियाँ।

16

पूस की रात

कोई नहीं बाहर

चाँद अकेला।

17

चंदा आओ न

बादलों के झूले में

संग गाओ न।

18

चाँद सलोना

फैली मस्त चाँदनी

कहे, छू लो ना।,

19

चाँद अकेला

ढूँढ रहा है तारे

यादों का मेला।

-0-सुदर्शन रत्नाकर,ई-29, नेहरू ग्राउंड,फ़रीदाबाद 121001

-0-

2- धूप

अशोक ‘ आनन ‘

1

धूप के संग –

आ धमका सूरज ।

भिनसारे से ।

2

सुबहलॉन में बैठ –

धूप का अख़बार ।

बाँच रही लू ।

3

गाँव – शहर –

सूरज ने जलाए ।

लू के अलाव ।

4

सूरज फिर –

आग बबूला हुआ ।

धरा झुलसी ।

5

कंठ – पपीहा –

प्यासे ही रहे सदा ।

रेत – समय ।

6

रोज़ जड़ते –

गालों पर थप्पड़ ।

लू के थपेड़े ।

7

धधक रही –

दोपहर लावा – सी ।

झुलसी सृष्टि ।

8

रेत – नदियाँ –

तड़पें मछलियाँ ।

मौसम लावा ।

9

बर्फ की भाँति –

पिघल रहे तन ।

भिनसारे से ।

-0- 11/82 , जूना बाज़ार , मक्सी, जिला : शाजापुर ( म.प्र.)-पिनकोड : 465 106

Email : ashokananmaksi@gmail.com

-0-


Responses

  1. सुदर्शन रत्नाकर जी के चाँद पर एवं अशोक ‘आनन’ जी के धूप पर हाइकु, एक से बढ़कर एक बेहतरीन हाइकु हैं।दोनो को बढ़ाई।

  2. धूप की तपिश का सजीव चित्रण करते बहुत सुंदर हाइकु। अशोक ‘आनन’ जी को हार्दिक बधाई।

  3. चाँद और धूप पर सुन्दर हाइकु रचने के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ ।

  4. बहुत सुंदर हाइकु, सुदर्शन दी और अशोक जी को शुभकामनाएँ और बधाई!

  5. चाँद से संबंधित सभी हाइकु बहुत ही सुन्दर ,विशेषतः – पूस की रात / कोई नहीं बाहर /चाँद अकेला।
    अशोक जी के भी सभी हाइकु बहुत ही सुन्दर
    लॉन में बैठ – / धूप का अख़बार ।/ बाँच रही लू । एवं रोज़ जड़ते –/ गालों पर थप्पड़ । /लू के थपेड़े । ….बहुत ही सुन्दर
    सुदर्शन जी एवं अशोक जी को बधाई एवं शुभकामनाएँ

  6. बहुत सुंदर हाइकु , दोनों आदरणीय रचनाकारों को हार्दिक बधाई।

  7. वाह्ह्ह… अत्यंत सुंदर भावपूर्ण… उत्कृष्ट हाइकु हैं आप दोनों प्रबुद्ध रचनाकारों के…. असीम बधाई एवं अशेष शुभकामनाएँ 🌹🌹🌹🌹🙏🙏🙏🙏

  8. चाँद और सूर्य के दृश्यों का सुंदर तालमेल।
    बेहतरीन हाइकु।
    दोनों को बधाई।

  9. चाँद और सूरज के रंगों में सराबोर …अतिसुन्दर हाइकु!
    आदरणीया सुदर्शन दीदी जी एवं आ. अशोक आनन् जी को हार्दिक बधाई!

    ~सादर
    अनिता ललित

  10. चाँद और सूरज पर बेहतरीन हाइकु…आ. सुदर्शन दी एवं अशोक जी को हार्दिक बधाई।

  11. बहुत सुन्दर हाइकु…आप दोनों को बहुत बधाई

  12. एक साथ सूरज और चाँद पर हाइकु, बहुत सुन्दर। आप दोनों को बधाई।


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