Posted by: हरदीप कौर संधु | दिसम्बर 20, 2021

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सरसों-रश्मि विभा त्रिपाठी

सरसों

1

सरसों बेटी

खेतों के काँधे झूली

खुशी से फूली।

2

सरसों आए

पहने पीली साड़ी

खेत मुस्काए।

3

सरसों झूमे

खेतों ने ली बलैया

चरण चूमे।

4

सरसों आई

करते अगुआई

खेत खुशी से।

5

सरसों आई

बटोरता बधाई

पीला लहँगा।

6

खेतों से मिली

भेंट पीली साड़ी

सरसों खिली।

7

सरसों बाला

पीतवर्ण चूनर

रूप निराला।

8

पहने खड़ी

सरसों पीली साड़ी

बाबा की बाड़ी।

9

बीच बागान

खुशबू की दुकान

खुली हुई है!

10

सरसों बाला

बैठी मुँह उघाड़े

कंचन झाड़े।

11

बाबा के खेत

स्वर्ण-शय्या पे लेटी

सरसों बेटी!

12

तपाती तन

तपसिनी सरसों

तभी कंचन।

13

दे बलिदान

सरसों सिखाती है

परार्थ ज्ञान।

14

सरसों खेले

कोल्हू के संग खेल

बहाए तेल।

15

सौंधी रसोई

सरसों बैठी डाले

स्वाद निराले।

16

रूप सलोना

भू का पीला पिछौरा

बिखरा सोना।

17

लेकर चली

सरसों रंग-घड़ा

छलक पड़ा!

18

धन-धान्य से

खेतों की भरी गोद

मनाएँ मोद।

19

हुई विदाई

खेतों से सरसों की

शुरू मड़ाई!

20

लगे सुघड़

चले, जाए लुढ़क

नन्ही सरसों!

21

रही उछल

खेतों में लहराती

चुन्नी-पिंगल!

22

सरसों रानी!

दास्य-भाव से खेत

ढो रहे पानी।

23

पीताभ-दरी!

खेतों में बैठी खेले

नन्हीं—सी परी।

24

खेतों की गैल

कनिका की सवारी

कोल्हू के बैल!

25

खेतों में खोली

सरसों ने गठरी

सोने से भरी!

26

दौड़े खेतों में

बन स्वर्ण-हिरण

भू परायण!
-0-

2-सुबह-शाम- नरेन्द्र श्रीवास्तव

1

भोर ने कहा-

सुबहअँधेरा अब नहीं

जुटो काम पे।

2

रवि रश्मियाँ

उतरीं धरा पर

मिली सुबह।

3

भोर हुई तो

सपनों की चिड़ियाँ

उड़ीं फुर्र से।

4

पूर्व दिशा से

आ गए सूर्य देव

हुआ उजाला।

5

सूर्य ने सौंपा

उजाला धरती पे

भागा अँधेरा।

6

भोर होते ही

आँखे मलते हुए

जागा चूल्हा।

7

भोर हुई तो

खेतों से बतियाने

आईं चिड़ियाँ।

8

शामशाम समेटे

उजाले की चादर

शेष अँधेरा।

9

सूरज विदा

धरा के भाल पर

सिंदूरी शाम।

-0-नरेन्द्र श्रीवास्तव,पलोटनगंज, गाडरवारा, जिला-नरसिंहपुर,म.प्र.-487 551

मो.9993278808


Responses

  1. बहुत उम्दा कल्पनाओं का प्रयोग।

  2. रश्मि विभा जी,नरेंद्र श्रीवास्तव जी बहुत सुंदर सृजन ।आप दोनो रचनाकारों को बधाई।

  3. सुंदर लेखन। दोनों रचनाकारों को हार्दिक बधाई शुभकामनाएं

  4. रश्मि विभा त्रिपाठी जी के धान केन्द्रित हाइकु बहुत सुंदर एवं वैविध्य लिए हैं,वहीं नरेंड श्रीवास्तव जी के हाइकु भोर और संध्या के सुंदर चित्र उपस्थित कर रहे हैं।दोनो हाइकुकारों को बधाई।

  5. क्षमा चाहता हूँ, रश्मि विभा जी के हाइकु की टिप्पणी में सरसों केंद्रित के स्थान पर धान टाइप हो गया…धान केंद्रित के स्थान पर सरसों केंद्रित पढ़ा जाए।

  6. सरसों के विविध रूपों का सुंदर चित्रण।
    भोर की बेला का वर्णन करते उम्दा हाइकु। दोनों रचनाकारों को हार्दिक बधाई।

  7. सुंदर हाइकु! दोनों हाइकुकारों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ!

  8. एक से बढ़कर एक सुंदर हाइकु, दोनों रचनाकारो को बधाई!

  9. बहुत सुंदर मनहोहक हाइकु…दोनों रचनाकारों को हार्दिक बधाई।

  10. वाह!
    रश्मि जी एवं नरेंद्र जी को सुन्दर हाइकु सृजन के लिए शुभकामनाएँ

  11. आदरणीय नरेन्द्र जी के भोर विषयक सुन्दर हाइकु।
    हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ।

    सादर

  12. हाइकु प्रकाशन हेतु आदरणीय सम्पादक द्वय का हार्दिक आभार।
    मुझे नव ऊर्जा देती आप सभी आत्मीय जनों की टिप्पणी की हृदय तल से आभारी हूँ।

    सादर

  13. प्रिय रश्मि के हाइकु आँखों के सामने सरसों के फूले फूले खेतों को जैसे साकार कर देते हैं, हार्दिक बधाई |
    नरेंद्र जी के भोर विषयक हाइकु बहुत मनभावन हैं, बहुत बधाई |


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