Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | अक्टूबर 16, 2021

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डॉ. सुरंगमा यादव 
1
सत्य छिपाएँ
करके उपक्रम
SURANGAM YADAVभ्रम फैलाएँ।
2
रिश्ते हैं कम
उनमें भी तनाव
घटा लगाव।
3
स्वार्थ  सैलाब
संबंधों का बहाव
विवश व्यथा।
4
चलो मनाएँ
‘मानवता बचाएँ ‘
दिवस कभी।
5
बिखरा पड़ा
आनॅलाइन प्रेम
सच्चा या झूठा?
6
प्रेम सिंचित
सूखते न किंचित
रिश्तों के खेत।
7
तप्त तवे पे
जल-बिन्दु-सी स्वाहा
क्रोध में मति।
8
मस्ती की शाला
लगती मधुशाला
है विष कन्या।
9
मुश्किल तो है
असंभव नहीं है
लीक तोड़ना।

-0-


Responses

  1. सभी हाइकु बहुत ही सुन्दर, भावपूर्ण ।
    हार्दिक बधाई आदरणीया ।

    सादर 🙏🏻

  2. सुंदर, भावपूर्ण हाइकु रचनाओं के सृजन हेतु बधाई।

  3. बिखरा पड़ा
    आनॅलाइन प्रेम
    सच्चा या झूठा?
    अच्छे हाइकु-बधाई।

  4. सभी हाइकु उत्कृष्ट,हार्दिक बधाई डॉ. सुरंगमा जी।

  5. बहुत सुन्दर हाइकु हैं, बहुत बधाई |

  6. बहुत सुन्दर हाइकु सृजन सुरंगमा जी । बधाई ।

  7. वाह! एक से बढ़कर एक सुंदर हाइकु! बधाई सुरँगमा जी!

  8. बहुत सुन्दर हाइकु सृजन… हार्दिक बधाई सुरंगमा जी ।

  9. चलो मनाएँ
    ‘मानवता बचाएँ ‘
    दिवस कभी।

    हम भी यही दुआ करते हैं। सुंदर, सार्थक सृजन हेतु बधाई डॉ सुरँगमा।


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