Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | सितम्बर 26, 2021

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1-डॉ. गोपालबाबू शर्मा

1

ज़िन्दगी वही

प्यासे जनों के लिए

नदी जो रही।

2

नदी भी प्यासी

पनघट है मौन

छाई उदासी।

3

दूध की नदी

आज भी है बहती

यूरिया -घुली।

4

नदियाँ गन्दी

करें हम कर्मों से

क्या अक़्लमन्दी।

-0-

2-दिनेश चन्द्र पाण्डेय

1.

पहाड़ पर,

गडरिये की छड़ी,

हाँकती धूप

2.

मोह-लालसा,

स्वर्ण मृग की खोज,

छलावा हाथ

3.

बूँद नदी की,

बहुत ऊँची उठी,

फिर नदी में।

4.

सागर तट,

मौजों के फेन टूटे,

पुनः जीवन।

5.

रंगीले मेघ,

छबीली धरा पर

निसार हुए.

6.

बेरोजगार,

जीवन का पहाड़

चढ़े तो कैसे?

7.

यही होता है,

फसल काटे कोई,

कोई बोता है।

8.

गुड़िया ब्याह,

माँ का कलेजा काटें,

बेटी के आँसू ।

9.

साँझ उतरी,

समेट रहा रवि

धूप– पोटली।

10.

मूसलाधार,

मिट्टी चाटने लगीं

नदियाँ सारी।

11.

सत्ता चरित्र

बर्फबारी के वक़्त,

सूर्य लापता।

12.

कोरोना -काल,

मुद्दतों में जुड़ा है

घर से नाता।

13.

पूस की रातें,

चुभे चीर अस्तर

हवा नश्तर।

14.

भोर ने बाँटी,

रात पहाड़ पर

बरसी चाँदी।

 15.

वाचनालय,

स्तब्ध हुआ मौन

चिंघाड़ा फोन।

16.

शान्ति -व्यवस्था,

कपोतों पर देता

बाज पहरा।

17.

दीप ने रचा

उजालों का संसार,

तम के पार।

18.

भक्तों के दल,

बिल्व वृक्षों के तले,

सावन आया।

19.

भीगी-सी भोर,

अता-पता धरा का,

मेघों से पूछे।

20.

वक्त का फ़र्क,

भोर का अख़बार

शाम को व्यर्थ।

21.

बुरांस खिले,

घुघूती की सीटी से

गूंजा पहाड़।

 (बुराँस–अरुणिम आभा लिये पहाडी फूल, घुघूती-मीठी आवाज की धनी छोटी पहाडी चिड़िया)


Responses

  1. वाह ! सभी हाइकु एक से बढ़ कर एक लेकिन इस बात ने विशेष रूप से मन मोह लिया
    गडरिये की छड़ी / हाँकती धूप … अद्भुत !!

    सादर
    मंजु मिश्रा

  2. बहुत सुन्दर-सुन्दर और भावपूर्ण हाइकु। डॉ. गोपाल बाबू जी एवं श्री दिनेश चन्द्र जी को हार्दिक बधाई।

  3. 1
    दूध की नदी

    आज भी है बहती

    यूरिया -घुली।

    2
    बुरांस खिले,

    घुघूती की सीटी से

    गूंजा पहाड़।
    आप दोनों के हाइकु मनमोहक हैं, नए प्रयोग ने इसे ज्यादा सुंदर बनाया है- बधाई।

  4. आदरणीय संपादक गण को रचना प्रकाशन हेतु आभार। रचना मर्मज्ञ सुधीजनों को उत्साहवर्धक प्रतिक्रियाओं हेतु आभार । डॉ गोपाल बाबू शर्मा को उत्कृष्ट रचनाओं हेतु बधाई व शुभकामनाएं।

  5. हवा नश्तर 🌹🌹🙏

  6. एक से बढ़कर एक बहुत ही सुन्दर व भावपूर्ण हाइकु।
    आदरणीय डॉ गोपाल बाबू शर्मा जी व आदरणीय दिनेश चंद्र पाण्डेय जी को हार्दिक बधाई 🌷💐

    सादर 🙏🏻

  7. गोपाल बाबू शर्मा जी तथा दिनेश चन्द्र पाण्डेय जी सुंदर हाइकु रचने के लिए बहुत-बहुत बधाई।

  8. गोपाल जी और दिनेश जी दोनो के सुंदर सृजन ने मन मोहित कर दिया।हार्दिक बधाई स्वीकारें।

  9. ज़िन्दगी वही
    प्यासे जनों के लिए
    नदी जो रही।

    इस हाइकु के उदात्त भाव ने बहुत प्रभावित किया। अन्य हाइकु भी सुंदर। बधाई डॉ गोपाल !

    दिनेश चंद्र पांडेय जी ने भी सुंदर बिम्बों का प्रयोग कर बहुत सुंदर हाइकु रचे हैं। इस हाइकु ने मन मोह लिया –

    भोर ने बाँटी,
    रात पहाड़ पर
    बरसी चाँदी।

    वाह ! बधाई

  10. एक से बढ़कर एक सुंदर हाइकु!

  11. बहुत अच्छे हाइकु हैं सभी, मेरी बधाई |

  12. एक से बढ़ कर एक अच्छे हाइकु…बहुत-बहुत बधाई।


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