Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | जून 27, 2021

2171-प्रतीक्षा


डॉ. कविता भट्ट

1-प्रतीक्षा

1

Dr.Kavita Bhattयही प्रतीक्षा-

हो जीवन वसन्त

दिग्-दिगन्त।

2

तुमसे मिलूँ

युगों से है प्रतीक्षा

पूर्ण हो इच्छा।

3

मौन प्रतीक्षा

यही है परिभाषा

मिलन आशा।

4

नैन सूखे हैं

प्रतीक्षा है मुखर

मूक अधर।

5

गंगाजल है

पावन है प्रतीक्षा

प्रेम समीक्षा।

6

मिलन- राग

प्रतीक्षा तुम गाओ

पी को सुनाओ।

7

अनुगुंजन

प्रतीक्षा के सुरों का

प्रिय सुनो ना!

8

सेज सजाई

प्रतीक्षा ने सजन

हो तो मिलन।

9

मेरे आँगन

प्रतीक्षा गीत गाए-

‘प्रिय आ जाए।’

10

दुःख जीवन

सुख की है प्रतीक्षा

करो समीक्षा।

11

प्रतीक्षारत

मैं योगिनी-सी ही हूँ

तुम महेश।

12

प्रिय! प्रतीक्षा

शीत -सी है चुभती

कब आओगे!

-0-


Responses

  1. दुःख जीवन/ सुख की है प्रतीक्षा/करो समीक्षा ••सभी हाइकु बेहतरीन, हार्दिक शुभकामनाएँ ।

  2. यही प्रतीक्षा-
    हो जीवन वसन्त
    दिग्-दिगन्त।

    अति सुंदर

    प्रतीक्षारत
    मैं योगिनी-सी ही हूँ
    तुम महेश।

    आध्यात्मिक, सुंदर सृजन ।
    बधाई डॉ कविता भट्ट

  3. बहुत मनभावन हाइकु हैं, हार्दिक बधाई कविता जी

  4. बहुत ही भावपूर्ण हाइकु👌
    दिली बधाई कविता जी को💐💐💐

  5. यही प्रतीक्षा-
    हो जीवन वसन्त
    दिग्-दिगन्त।
    सभी हाइकु बहुत ही सुंदर। हार्दिक बधाई

  6. गंगाजल है
    पावन है प्रतीक्षा
    प्रेम समीक्षा।
    ……अद्भुत,गागर में सागर भर दिया।लौकिक से अलौकिक की ओर चलते प्रतीक्षा हाइकु।प्रत्येक हाइकु महत्त्वपूर्ण।बधाई कविता जी।

  7. प्रतीक्षारत ,,,, बहुत सुंदर भावपूर्ण हाइकु,, हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।

  8. वाह।
    बहुत ही सुन्दर और मनभावन हाइकु।
    अनुमप सृजन की हार्दिक बधाई आदरणीया।

    सादर
    रश्मि विभा त्रिपाठी ‘रिशू’

  9. बहुत खूबसूरत हाइकु…

    प्रतीक्षारत
    मैं योगिनी-सी ही हूँ
    तुम महेश।

    सभी हाइकु बहुत सुन्दर, बधाई कविता जी.

  10. बहुत ही सुंदर एवं भावपूर्ण हाइकु
    हार्दिक बधाई कविता जी

  11. 11
    *प्रतीक्षारत
    मैं योगिनी-सी ही हूँ
    तुम महेश।*
    12
    *प्रिय! प्रतीक्षा
    शीत -सी है चुभती
    कब आओगे*
    ्प्रयोग से पहले शब्द के अर्थ की सम्भावनाएँ सीमित होती हैं। शब्द जब किसी विशेष सन्दर्भ में प्रयुक्त किया जाता है, तब अर्थ-छटा के अनेक द्वार खुलते हैं। शब्द के अर्थ का यह प्रस्फुटन ही सृजक और अध्येता की शक्ति है। यह शक्ति उपर्युक्त हाइकु से पूरी तरह स्पष्ट है। योगिनी की प्रतीक्षा वह भी महेश के लिए; तो चर्चित पौराणिक सन्दर्भ स्वत; आ जाएगा। जिसने कालिदास के कुमारसम्भव का या दुष्यन्त कुमार ( जिनको अज्ञानता के कारण ग़ज़ल तक सीमित कर दिया गया) के एक कण्ठ विषपायी मेंअनुस्यूत व्याकुलता को समझा हो,वे प्रतीक्षा की अनुभूति को ग्रहण कर पाएँगे। प्रतीक्षा भी उसी तरह की चुभन से भरी है, जैसे शीत । शीत -शीतल से ऊपर की श्रेणी का शब्द है। शीतल का स्पर्श सुखद हो सकता है; किन्तु शीत कष्टकारी ही होता है। शब्दों ्की गहराई में उतरे बिना इन हाइकु के भाव-सौन्दर्य तक नहीं पहुँचा जा सकता। भाषा की नब्ज़ पर हाथ रखे बिना न अच्छे हाइकु लिखे जा सकते हैं, न समझे जा सकते हैं। डॉ कविता भट्ट को गुणात्मक हाइकु रचना के हार्दिक बधाई!

  12. प्रिय! प्रतीक्षा
    शीत -सी है चुभती
    कब आओगे!
    बेहतरीन हाइकु। हार्दिक बधाई कविता जी।

  13. इतने सुंदर हाइकु रचने पर हार्दिक बधाई कविता जी।

  14. बहुत सुंदर , सरस व भावपूर्ण सृजन …हार्दिक बधाई प्रिय कविता जी ।


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