Posted by: हरदीप कौर संधु | जून 17, 2021

2169-प्राण-पखेरू


रामेश्वर काम्बोज हिमांशु’

 1

प्राण -वर्तिका

निशदिन जलती

याद में तेरी।

2

प्राणहीन मैं

जब से छूटा हाथ

तुम्हारा साथ।

3

प्राण की रज्जु

मैंने बाँधी तुमसे

तुम जीवन !

4

नदी -किनारे

चक्रवाक युगल

प्राण विकल।

5

ब्रह्मरंध्र में

अनुनादित नाम

तुम्हीं हो प्राण !

6

द्रवित जल

उतरा शिखरों से

तुम्हीं तो हो न?

7

रक्त- शिराएँ

उद्वेलित हो उठीं

तुझे छू प्राण!

8

तुझमें डूबूँ

जब इस जग से

प्राण उड़ें ये।

9

तुम क्या जानों

जी लिया जो जीवन

प्राण तुम्हीं थे!

10

प्राण विकल

कब होगा तुमसे

महामिलन!

11

भारी अंधड़

तपता मरुथल

प्राण रुदन।

12

प्राण-पखेरू

उड़ा चीर अम्बर

काँपीं दिशाएँ


Responses

  1. तुझमें डूबूँ
    जब इस जग से
    प्राण उड़ें ये … भक्ति, प्रेम, समर्पण की पराकाष्ठा अभिव्यक्त करता अद्भुत हाइकु

  2. नदी -किनारे
    चक्रवाक युगल
    प्राण विकल।

    – सुंदर, भावपूर्ण हाइकु! हार्दिक बधाई!

  3. बहुत ही सुंदर हाइकु।
    बारम्बार पठनीय।

  4. भावपूर्ण सुंदर रचनाएँ, धन्यवाद आदरणीय!

  5. भावपूर्ण अभिव्यक्ति।सभी हाइकु बहुत सुंदर।

  6. प्राण-पखेरू
    उड़ा चीर अम्बर
    काँपीं दिशाएँ

    अच्छे हाइकु-बधाई।

  7. भाई साहब बहुत ही ख़ूबसूरत भावाभिव्यक्ति है सभी हाइकु सुंदर रचना हैं।

  8. सभी हाइकु बहुत सुंदर ,भावपूर्ण अभिव्यक्ति

  9. सभी हाइकु बेहद उम्दा और सुंदर भाव लिए हुए 💐
    बहुत -बहुत बधाई सर 🙏

  10. सभी हाइकु बेहद उम्दा और सुंदर भाव लिए हुए 💐
    बधाई सर 🙏

  11. बहुत बेहतरीन और भावपूर्ण हाइकु हैं , मेरी हार्दिक बधाई स्वीकारें |

  12. बेहतरीन हाइकु, हार्दिक शुभकामनाएँ ।

  13. भावप्रणव हाइकु रचना ।बधाई हिमांशु भाई ।

  14. उत्तम और भावपूर्ण हाइकु. बधाई काम्बोज भाई.

  15. बहुत सुंदर भावपूर्ण हाइकु । हार्दिक बधाई भाई साहब ।

  16. बहुत सुन्दर बिम्ब, अद्भुत सृजन। हार्दिक बधाई।

  17. ब्रह्मरंध्र में
    अनुनादित नाम
    तुम्हीं हो प्राण !
    . …….अध्यात्म की भाव भूमि के सशक्त हाइकु,परमात्मा के प्रेम में विकल प्राणों की वेदना को इतने सहज रूप से हाइकु में व्यक्त करना बहुत कठिन है।आपकी लेखनी को नमन भाई साहब।

  18. आपने मेरे हाइकु की सराहना करके मेरा मनोबल बढ़ाया, उसके लिए आप सभी का हृदय से आभारी हूँ

  19. एक से बढ़कर एक भावपूर्ण एवं अद्भुत हाइकु

    सुन्दर सृजन के लिए बधाइयाँ एवं नमन

  20. तुम क्या जानों
    जी लिया जो जीवन
    प्राण तुम्हीं थे!

    सभी हाइकु एक से एक बढ़कर। उपरोक्त हाइकु मन में बहुत गहरे पैठ गया। संवेदना, समर्पण, निश्छल प्रेम आदि पावन मनोभाव अप्रतिम हाइकु में ढल कर मन को सहज ही बाँध लेते हैं।
    श्रेष्ठ सृजन हेतु बधाई आदरणीय भैया !

  21. अहा ! एक से बढ़कर एक बहुत ही हृदयस्पर्शी भावपूर्ण हाइकु
    नमन एवं हार्दिक बधाइयाँ

  22. वाह! एक से बढ़कर एक सुन्दर, भावपूर्ण हाइकु।
    हार्दिक बधाई आदरणीय।

    सादर
    रश्मि विभा त्रिपाठी ‘रिशू’

  23. सभी हाइकु बहुत सुंदर एवम भावमय ..सादर वंदन 🙏🏼🙏🏼

  24. बहुत ही सुन्दर व भावपूर्ण हाइकु… हार्दिक बधाई भैयाजी।


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