Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | अप्रैल 9, 2021

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1-भीकम सिंह

1

खेत बैठे हैं

सरकार भरोसे

मन मसोसे ।

2

देखता शून्य

ओढ़ के खलिहान

बूढ़ा किसान ।

3

गल्ला मंडी में

तुला के डोरे टूटे

गड़े हैं खूँटे ।

4

फसलें सारी

खलिहानों में बैठी

गुस्से में ऐंठी ।

5

खेतों ने किया

बनके मेहमान

ओस में स्नान ।

6

चली खेतों में

मुँह फेरे पुरवा

रूठा बिरवा ।

7

बिरवा हेतु

मौन साधे हैं खेत

लपेटे रेत ।

8

कपास ने की

मुनादी, पककर

लो हुई, रूई ।

9

बाढ़ की मारी

बदले मनोभाव

खेतों की क्यारी ।

10

वर्षा के आते

बदलने लगे हैं

खेतों के खाते ।

11

टूटी लोरिया

खेतों में सोई पड़ी

दो जून ओढ़े ।

12

खेतों ने बोए

टेढ़ी पगडंडी पे

सीधे सपनें ।

13

शहर बढ़े

आगवानी में गाँव

खेत ले खड़े ।

14

ओस में न्हाई

फसलों की चमक

मंडी में खोई ।

15

खरपातों की

खेतों में घुसपैठे

छलने बैठे ।

-0-

2-नरेन्द्र श्रीवास्तव

1

झील का जल

आसमाँ के चाँद से

अक्स चुराए।

2

झील दर्पण

चाँद ताके चेहरा

नींद न आए।

3

झील- दर्पण

आसमान से चाँद

करे शृंगार।

4

झील का जल

रात भर चाँद से

नैन मटक्का।

5

नभ का चाँद

आकाश से उतरा

झील में तैरे।

6

रोज नहाता

चाँद आके झील में

रात बैचेन।

7

चाँद की मस्ती

झील के आँगन में

चकोर तन्हा।

-0-नरेन्द्र श्रीवास्तव,पलोटन गंज, गाडरवारा,जिला-नरसिंहपुर, म.प्र.-487 551

मो.9993278808


Responses

  1. देखता शून्य
    ओढ़ के खलिहान
    बूढ़ा किसान ।
    किसान के दर्द को समेटे बहुत सुंदर भावपूर्ण हाइकु। भीकम सिंह जी को हार्दिक बधाई।

    नरेंद्र श्रीवास्तव जी के झील के सौन्दर्य का मनमोहक वर्णन करते संभी हाइकु बहुत सुंदर है। बधाई

  2. बहुत सुन्दर हाइकु, हार्दिक बधाई।

  3. वर्तमान घटनाओं के साथ किसान के दर्द को बयान करते हुए मार्मिक हाइकु । सुन्दर प्रस्तुति के लिये भीकम सिंह जी को हार्दिक बधाई ।
    झील की सुन्दरता को विभिन्न बिम्बों द्वारा प्रस्तुत किया गया है । नरेन्द्र श्रीवास्तव जी को हार्दिक बधाई ।

  4. बहुत सुन्दर हाइकु…हार्दिक बधाई

  5. भीकम जी के किसान केन्द्रित सभी हाइकु बहुत ही मर्मस्पर्शी
    नरेंद्र जी के झील विषयक हाइकु भी बहुत सुन्दर
    आप दोनों को हार्दिक बधाइयाँ

  6. गल्ला मंडी में…, देखता शून्य…,फसलें सारी…एक से बढ़कर एक हाइकु!
    झील दर्पण…करे श्रृंगार!..सभी बहुत सुंदर हाइकु!
    आप दोनों को बधाई!!

  7. किसान का दर्द बयान करते बहुत ही मार्मिक हाइकु ।
    झील के रूप रंग को विभिन्न बिम्बों से दर्शाते सुन्दर हाइकु।

    आदरणीय डॉ भीकम सिंह जी और नरेंद्र श्रीवास्तव जी को हार्दिक बधाई।

    सादर-
    रश्मि विभा त्रिपाठी

  8. बहुत सुंदर हाइकु, हार्दिक बधाई

  9. सभी का हार्दिक आभार और नरेन्द्र श्रीवास्तव जी को अच्छे हाइकु रचने के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ ।

  10. बहुत सुंदर हाइकु…बहुत-बहुत बधाई।

  11. सरकार के असंवेदनशीलता की परकाष्ठा है. किसान की पीड़ा की इससे अच्छी अभिव्यक्ति कुछ हो ही नहीं सकती…
    खेत बैठे हैं
    सरकार भरोसे
    मन मसोसे ।
    एक से बढ़कर एक हाइकु, भीकम सिंह जी को बहुत बधाई.

    नरेन्द्र जी के झील के सभी हाइकु बहुत सुन्दर. बधाई आपको.


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