Posted by: हरदीप कौर संधु | फ़रवरी 10, 2021

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1-रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

1

गुँथा साँसों में

मधुरिम आशीष

मेरी शारदा!

2

अँजुरी भरे

अर्पित करूँ तुझे

स्नेह -कमल।

3

बरसा सोना
पाखी भर उड़ान
गा रहे गान।

4
ओ मेरे मीत!
हरे मन का शीत
नेह की धूप।
5
दे दूँ मुस्कान
जब, जहाँ तुमको
होए थकान।
6
स्वप्न में मोद
शिशु बन दुबकी
स्नेहिल गोद।
7
स्वप्न ऊर्जित
आलिंगनबद्ध हो
भाव चहकें।
8
सृष्टि- प्रलय
शाश्वत है प्रणय
तुझी में लय।
9
जन्मों का चक्र
तोड़के हर बार
आ जाऊँ द्वार।
10
भाव-सरिता
करें अवगाहन
निखरे मन। 

11
एक याचना
बस एक कामना
संग तुम्हारा।
12
थके जो पाँव
हाथ तुम थामना
सफ़र आसाँ।
13
नियति-खेल
भले दुःख उठाएँ
छली गुर्राएँ।
14
बदले रूप
जीवन छाँव-धूप
चलते चलें।
15
अश्रु पोंछ लो
कड़ी धूप बाहर
छाया  मैं बनूँ। 

-0-

2-  गुंजन अग्रवाल

1

पात के पीछे

ताक रहे दुनिया

शिशु चिड़ी के l

2

न छोड़ी जिद

परदेश में पत्ते

माटी की जद l

3

तेज थी घाम

निर्वस्त्र तरु तपा

भागी है छाँव।

4

पत्तों का मेला

स्वार्थ में थी जवानी

ठूँठ अकेला l 

5

मेड़ का ठूँठ

उपवन से दूर

जिया था झूठ l

6

उजला रूप

पत्तों पै आ ठहरी

हठीली धूप।

7

ठूँठ उदास

बीत गया बसंत

फूटे न पात।

8

शीतित प्राची

बुलबुले पत्तों पै

स्वप्न हिंडोले।

9

कान के रास्ते

अफवाह-से उड़े

पेड़ से पत्ते।

10

जो छोड़ा गेह

सड़क पै पत्ता था

कुचला नेह।

11

भक्त अधीर

चिरकुट पहुँचा

पर्ण-कुटीर।

12

पत्तो का मेला

स्वार्थ में थी जवानी

ठूँठ अकेला।

13

 गेह जो छोड़ा

सड़क पै पत्ता था

दबा कुचल।


Responses

  1. सभी हाइकु बहुत सुंदर

  2. खूबसूरत बिम्ब , भावपूर्ण हाइकु
    सभी हाइकु बहुत ही अच्छे

  3. आपके सुंदर एवं भावपूर्ण हाइकु ने मुग्ध किया वहीं गुंजन अग्रवाल के भी विविध भावों के सुंदर हाइकु भी प्रभातवित कर रहे हैं।गुंजन जी को बधाई।आपकी लेखनी को नमन।

  4. भाई कम्बोज जी को गहन और भावों से पूर्ण हाइकु सृजन के लिए बधाई। साथ ही गुंजन जी के भिन्न विषयों और भावों को समेटे हाइकु हैं उन्हें भी हार्दिक बधाई।

  5. आदरणीय काम्बोजजी के हाइकु प्रभावित करते हैं। गुंजन जी के हाइकु भी नव्यता लिए हुए हैं।
    बहुत बहुत बधाई

  6. आदरणीय आपकी लेखनी हमेशा की तरह सरल भी और गहन भी, हार्दिक बधाई एवम नमन!
    गुंजन जी को भी सुंदर सर्जन हेतु बधाई!

  7. सुन्दर हाइकु हेतु आप दोनों को हार्दिक बधाई।

  8. आदरणीय काम्बोज भैया के हाइकु हमेशा की तरह बहुत भावपूर्ण है।गुंजन जी को सुंदर सृजन के लिए बहुत बहुत बधाई।

  9. अँजुरी भरे
    अर्पित करूँ तुझे
    स्नेह -कमल।
    अनुपम भाव लिए सुंदर हाइकु … शानदार सृजन के लिए बहुत बहुत बधाई

  10. स्नेह के स्पर्श लिए भावपूर्ण हाइकु कम्बोज सर।

  11. गहन और सुंदर भाव लिए हमेशा की तरह उत्कृष्ट हाइकु। हार्दिक बधाई भैया।
    बेहतरीन सृजन के लिए गुँजन जी को बहुत बहुत बधाई।

  12. दे दूँ मुस्कान/ जब,जहां तुमको/ होए थकान ।
    पत्तों का मेला/ स्वार्थ में थी जवानी/ ठूंठ अकेला ।
    सभी हाइकु बेहतरीन, हार्दिक शुभकामनायें ।

  13. आपके इस असीम प्रोत्साहन के लिए आप सबका हृदयतल से अनुगृहीत हूं

  14. एक से बढ़कर एक सुन्दर हाइकु
    अँजुरी भरे…, सृष्टि- प्रलय…, तेज थी घाम… बहुत ही सुन्दर
    भावपूर्ण सुन्दर हाइकु के लिए काम्बोज सर एवं गुंजन जी को हार्दिक शुभकामनाएँ , बधाइयाँ

  15. बहुत सुंदर गहन भाव लिए अनुपम हाइकु। हार्दिक बधाई भाईसाहब।
    ख़ूबसूरत सृजन गुँजन जी, बहुत बहुत बधाई।

  16. सभी हाइकु मनभावन रंगों के । आ. हिमांशु भाई और गुंजन जी को को बधाई । 👏👏

  17. बहुत मनभावन हाइकु हैं सभी…| आदरणीय कम्बोज जी और गुंजन जी को बहुत बधाई


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