Posted by: हरदीप कौर संधु | दिसम्बर 17, 2020

2102


1-गंगा 

डॉ. जेन्नी शबनम

1.

चल पड़ी हूँ

सागर से मिलने

गंगा के संग।

2

जीवन गंगा

सागर यूँ ज्यों कजा़

अंतिम सत्य।

3

मुक्ति है देती

पाप पुण्य का भाव

गंगा है न्यारी।

4.

सब समाया

जीवन और मृत्यु

गंगा की गोद।

5.

हम हैं पापी

गंगा को दुख देते

कर दूषित।

6.

निश्छल प्यार

सबका बेड़ा पार

गंगा है माँ– सी।

7.

पावनी गंगा

कल-कल बहती

जीवन देती।

8.

बसा जीवन

सदियों का ये नाता

गंगा के तीरे

9.

गंगा की बाहें

सबको समेटती

भले हों पापी।

10

जीवन बाद

गंगा में प्रवाहित

अंतिम लक्ष्य।

11.

गंगा है हारी

वो जीवनदायिनी

मानव पापी।

12.

गंगा की पीर

गंदगी को पी-पीके

हो गई मैली

13.

क्रूर मानव

अनदेखा करता

गंगा का मन।

14

प्रचंड गंगा

बहुत बौखलाई

बाढ़ है लाई।

15.

गंगा से सीखो

सब सहकरके

धरना धीर।

16.

हमें बुलाती

कल-कल बहती

गंगा हमारी।

17.

गंगा प्रचंड

रौद्र रूप दिखाती

जब गुस्साती।

18.

गंगा है प्यासी

उपेक्षित होके भी

प्यास बुझाती।

19.

पावनी गंगा

जग के पाप धोके

हुई लाचार।

20.

किरणें छूतीं

पाके सूर्य का प्यार

गंगा मुस्काती।

-0-

2-सत्या शर्मा ‘ कीर्ति ‘

1

प्रेम के घाट

ठहरी शब्द -नदी

बहता मौन।

2.

गोधूली साँझ

संन्यासी ये आकाश

अनचीन्ही प्यास।।

3

झरता शीत

धरती आँचल में

बन आशीष।

4

चाँदनी रात

पग – पग उतरती

ओस की नदी।।

5

दूव नोंक पे

ढहर कर सोचती

नन्ही -सी ओस।।

-0-ईमेल – satyaranchi732@gmail.com

-0-

3-रश्मि विभा त्रिपाठी ‘रिशू’

1

ओढ़े बैठी है
धरा सर्द चूनर
शीत आ गया?
2
दुख अकेला
भार मन का झेला
पूछा किसी ने ?
3
हवा ने चूमा
सुमन- मन देखो
इतरा के झूमा
4
राघव- सम
प्रिय तुम्हें छू तरी
मैं अहल्या-सी
5
आतंकी शीत
होंठ कँपकपाएँ
बोल न पाएँ
6
कँपा देता है
दिसम्बर बेदर्द
दया न करे

7
दुख- गठरी
हारा मन- अबोध
उतार फेंको।

8
राह भटके
पथिक आशा दीप
क्यों न जलाया?
9
मन-बालक
जिद ले बैठा रोए
कैसे मनाऊँ ?
10
छोड़ क्यों गए?
अनगिन सवाल
मुझे घेरते

11
नदी की धार
सींचे नन्हा चिनार
बढ़ता प्यार
12
ताकते गाँव
शहर रास्ता देखे
कहाँ है छाँव
13
स्मृति-सुमन
हरसिंगार-मन
महक-झरा
14
नेह-दीपक
नयनों ने जलाए
वो घर आए
15
शीतल छाँव
ज़िंदगी जिला देता
प्रीत का गाँव
16
मन-अम्बर
स्मृति-मेघ, नैनों से
रोया सावन
17
रिश्तों के जाल
सुलझे नहीं कभी
मचा बवाल
18
नदी का प्यार
पतझड़ हैरान
हँसे चिनार
19
स्मृति- सम्पदा

अपार यह कोश

घटता नहीं।

20

तुम्हारा रूप
नभ में खिली हो ज्यों
स्वर्णिम धूप
21
रिश्तों के पात
झरे औ सूखे मन
ठूँठ-सा पड़ा
22
अकेलापन
घेर ले छूटे ज्यों ही
यादों का साथ
23
यादों का हाथ
थामा तन्हाई रूठी
संग न आई
-0-


Responses

  1. डॉ. जेन्नी शबनम जी ,सत्या शर्मा ‘ कीर्ति ‘जी ,एवं रश्मि विभा त्रिपाठी ‘रिशू’ जी के सुन्दर हाइकु पढने को मिले – आभार |
    आप तीनों को बधाई इसी प्रकार रचनाकर्म जारी रहे – शुभकामनाएँ |

  2. डॉ जेन्नी जी के माँ गंगा को समर्पित सुन्दर हाइकु ।सत्या जी व रश्मि जी ने विविध भावों के सुन्दर -सुन्दर हाइकु रचे हैं ।आप सभी को हार्दिक बधाई ।

  3. एक से बढ़कर एक सुंदर हाइकु ! पढ़कर मन खुश हो गया। हार्दिक बधाई सत्या जी, जेन्नी जी और रश्मि जी !

  4. बहुत सुंदर हाइकु…जेन्नी जी, सत्या जी तथा रश्मि जी हार्दिक बधाई।

  5. एक से बढ़कर एक सुंदर हाइकु …
    विशेषतः –
    सब समाया /जीवन और मृत्यु / गंगा की गोद।
    गंगा की बाहें /सबको समेटती / भले हों पापी।
    प्रेम के घाट /ठहरी शब्द -नदी / बहता मौन।
    नदी का प्यार/ पतझड़ हैरान/ हँसे चिनार

    हार्दिक शुभकामनाएँ जेन्नी जी, सत्या जी एवं रश्मि जी

  6. गंगा,नदी और विविध भावों की बौछारें मन को पूरी तरह भिगो गईं बहुत सुंदर हाइकु। जेन्नी जी सत्या जी,रश्मि जी आप तीनों को हार्दिक बधाई।

  7. सत्या जी और रश्मि जी के सभी हाइकु बहुत सुन्दर.

    चाँदनी रात
    पग – पग उतरती
    ओस की नदी।।

    आतंकी शीत
    होंठ कँपकपाएँ
    बोल न पाएँ

    कँपा देता है
    दिसम्बर बेदर्द
    दया न करे

    मौसम के अनुकूल हाइकु. बेदर्द ठंड से हाथ भी कँपकँपा रहा. आप दोनों को बहुत बधाई.
    मेरे हाइकु को पसंद करने और यहाँ स्थान देने के लिए आप सभी सम्पादक द्वय एवं आप सभी का आभार.

  8. किरणें छूतीं
    पाके सूर्य का प्यार
    गंगा मुस्काती।

    वाह।
    गंगा माँ को समर्पित अनुपम, अनूठे हाइकु।
    आदरणीया डॉ जेन्नी शबनम जी को मेरी ओर से ढेरों बधाइयाँ।

    झरता शीत
    धरती आँचल में
    बन आशीष।
    आदरणीया सत्या शर्मा जी के हाइकु बहुत ही सुन्दर भाव समेटे हुए।
    आपको हार्दिक बधाई।

    मेरे हाइकु को यहाँ स्थान देने के लिए संपादक द्वय का हार्दिक आभार और उन्हें पसंद करने हेतु आप सभी का ह्रदय तल से आभार।

    सादर ~
    रश्मि विभा त्रिपाठी ‘रिशू’

  9. सभी हाइकु बहुत सुन्दर लगे
    पुष्पा मेहरा

  10. मन को सुकून देते,एक से बढ़कर एक सुन्दर हाइकु । सत्या जी,जेन्नी जी और रश्मि जी को हार्दिक बधाई!

  11. डाॅ जेन्नी शबनम , सत्य कीर्ति व रश्मि विभा जी तीनों के सभी के हाइकु बहुत सुन्दर बन पड़े हैं । पढ़ कर उनमें निहित भावों का आनंद उठाया । खूब बधाई लें ।


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