Posted by: हरदीप कौर संधु | नवम्बर 26, 2020

अरण्य की लौ!


(“फ़्लेम ऑफ़ द फ़ॉरेस्ट”: एक पाठकीय प्रतिभाव)

डॉ. सुधा गुप्ता

डॉ. कुँवर दिनेश  (मूलतः शिमला, हिमाचल प्रदेश निवासी,) द्विभाषी ― हिन्दी, इंग्लिश रचनाकार/हाइकुकार के रूप में ख्याति प्राप्त, समान रूप से दोनों भाषाओं पर पूर्ण अधिकार। मौलिक हाइकु-सृजन के साथ-साथ अनुवाद करना भी उन्हें प्रिय है।

सन् 2015 में “जापान के चार हाइकु सिद्ध” (बाशो, बुसोन, इस्सा, शिकि) शीर्षक से कुँवर दिनेश ने प्रत्येक के चयनित पचास हाइकु का अनुवाद हिन्दी में पुस्तकाकार प्रकाशित किया। प्रकाशन इतना मनोरम, कलात्मक, सुरुचिपूर्ण बन पड़ा कि हाइकु-प्रेमी जगत् (हिन्दी) ने हाथोंहाथ लिया; उक्त प्रकाशित पुस्तक ने अपार लोकप्रियता प्राप्त की।

नवीन प्रयोग से चमत्कृत करने वाले कुँवर दिनेश ने इसी वर्ष सन् 2020 में हिंदी भाषा के बत्तीस हाइकुकार के चयनित हाइकु (लगभग 150) का इंग्लिश भाषा में अनुवाद पुस्तक के रूप में प्रकाशित किया, शीर्षक है “फ़्लेम ऑफ़ द फ़ॉरेस्ट” (“Flame of the Forest”)। शीर्षक ही आकृष्ट करता है ― ‘अरण्य की लौ’! आवरण पृष्ठ में प्रदीप्त लौ से अन्तरंग में छिपी लौ से परिचय पाने को हाइकु-प्रेमी उतावला हो उठता है…

आरम्भ में कुँवर दिनेश ने संक्षिप्त परिचय  (Introduction) में हिन्दी हाइकु का इंग्लिश भाषा में अनुवाद करने में आई कठिनाई,  समस्या और चुनौतियों का, तर्कपूर्ण ― भाषा की दृष्टि से दोनों के मूल अन्तर ― हिन्दी भाषा में वर्ण क्रम और इंग्लिश भाषा में syllabic meter में हाइकु रचना (जो सबसे बड़ी चुनौती है) जन्य असुविधा का स्पष्ट विश्लेषण किया है। मेरा विनम्र सुझाव है कि पाठक पहले इस आलेख को एकाग्रचित्त होकर पढ़े ― एक बार ― दो बार ― अच्छी तरह पूरी बात समझ लेने पर ही अनुवाद का वास्तविक आस्वाद-आनन्द उठा पाएगा!

कुँवर दिनेश का अनुवाद करते समय एक महत्त्वपूर्ण सूत्र: किसी भी हाइकु का अनुवाद करते समय इस बिन्दु पर ध्यान एकाग्र करना है कि हाइकु की मूल भावना संरक्षित रहे ― वह आहत न हो! यह सूत्र अनमोल है और यही है अनुवाद की सफलता की एकमात्र कसौटी।

प्रस्तुत पुस्तक में बाँए पृष्ठ पर हिन्दी हाइकु और दाँए पृष्ठ पर ठीक उसके सामने इंग्लिश अनुवाद दिया गया है जिससे तारतम्य बनाए रखने में सहज सुविधा हुई है। मेरे ज्ञान और निजी राय के अनुसार अनुवाद मूल हाइकु रचना के अधिकतम समीप बन पड़े हैं।

. . . हिन्दी के चयनित हाइकुकार, दिनेश के चिर ऋणी रहेंगे ― आभारी रहेंगे कि उनके हाइकु विश्व की प्रथम भाषा  (प्रसार की दृष्टि से) इंग्लिश (English) में अनूदित हो कर अन्तरराष्ट्रीय / वैश्विक साहित्यिक झरोखे में जा बैठे हैं!

मैंने Flame of the Forest के मूल हाइकु तथा इंग्लिश भाषा में अनुवाद दोनों को अपनी शक्ति और सामर्थ्य भर पढ़ा, शीर्षक स्वयं में कई अर्थ, कई संकेत समेटे है, पाठक अपनी रुचि और मनोजगत् की ‘पकड़’ से उन संकेतों को समझने के लिए पूर्ण स्वतंत्र है।

मेरे मन में एक विचार ने हाइकु का रूप लिया जिसे मैं दिनेश को अर्पित करती हूँ –

 जगाने आया
किरणपाँखी हंस
अरण्य की लौ!

( सूर्य, दिनेश)

इस अमर्त्य ‘लौ’ को खोज निकालने वाले अनथक साधक, ज्ञान-योग में सतत ज्ञान-रत योगी दिनेश को शत-शत बधाई, हार्दिक शुभकामना!

डॉ. सुधा गुप्ता
साकेत, मेरठ

रमा एकादशी, 11. 11. 2020

पुस्तक: Flame of the Forest: A Bilingual Anthology of Hindi Haiku in English Translation (फ़्लेम ऑफ़ द फ़ॉरेस्ट: हिन्दी हाइकु के इंग्लिश अनुवाद का द्विभाषिक संकलन); चयनकर्त्ता, अनुवादक एवं संपादक: डॉ. कुँवर दिनेश सिंह; प्रकाशक: गीतिका प्रकाशन, उत्तर प्रदेश; वर्ष: 2020; पृष्ठ: 108; मूल्य: ₹300 $10


Responses

  1. सर्वप्रथम डॉ. कुँवर दिनेश जी को पुस्तक के लिए हार्दिक बधाई. बहुत ही अनूठा कार्य किया है आपने.
    इसमें सम्मिलित सभी हाइकुकारों को भी बधाई जिनके हाइकु इसमें सम्मिलित होकर अनुवादित हुए हैं.
    सुधा जी ने पुस्तक की बहुत सुन्दर समीक्षा की है. ‘फ़्लेम ऑफ़ द फ़ॉरेस्ट’ (अरण्य की लौ) बहुत खूबसूरत शीर्षक है जो सहज ही आकर्षित करती है.
    बहुत शुभकामनाएँ!

  2. कुँवर दिनेश जी को बहुत बहुत बधाई। आदरणीय सुधा गुप्ता जी की लेखनी से पुस्तक के लिए आशीष स्वरूप इतनी सुंदर समीक्षा, हार्दिक आभार🙏
    सादर
    मंजु मिश्रा

  3. डॉ कुँवर दिनेश जी को पुस्तक के लिए बहुत-बहुत बधाई।
    आदरणीया सुधा गुप्ता जी को इस पुस्तक की शानदार समीक्षा कए लिए हार्दिक बधाई।

  4. आदरणीय सुधा गुप्ता जी का आशीष इस समीक्षा के रूप में जिस पुस्तक और रचनाकार को मिल गया उसका अपना कार्य कितना बड़ा होगा ये सोचने की बात है ।
    सुंदर समीक्षा और उतना ही सुंदर कार्य , सुधा जी एवं दिनेश जी आप दोनों को नमन ।

  5. फ़्लेम ऑफ़ द फ़ॉरेस्ट पुस्तक के लिए डॉ.दिनेश कुँवर जी को हार्दिक बधाई। डॉ.सुधा गुप्ता जी ने इस पुस्तक की बहुत ही सुंदर समीक्षा की है। उनकी शुभकामनाएँ मिलना बड़ी बात है।

    सभी रचनाकारों को बधाई।

  6. इस श्रम साध्य कार्य के लिए कुँवर दिनेश जी की जितनी भी प्रशंसा की जाये, कम होगी।आदरणीय सुधा गुप्ता जी की लेखनी से निकले आशीष वचनों ने इस कार्य और भी गरिमामयी बना दिया है । बहुत-बहुत बधाई ।

  7. आदरणीय कुँवर दिनेश जी को इस ऐतिहासिक कार्य के लिए अनेकों बधाई, आपकी जितनी भी प्रशंसा की जाए कम है….!
    आदरणीया सुधा गुप्ता जी की शानदार समीक्षा ने चार चांद लगा दिए, बहुत आनन्द आया!
    मेरा परम् सौभाग्य कि मेरे हाइकु भी इसमें सम्मिलित किए गए, बहुत बहुत आभार और धन्यवाद….कभी न भूलने वाला क्षण!!

  8. सर्वप्रथम दिनेश जी को इस उत्कृष्ट अनुवाद कार्य के लिए बहुत-बहुत शुभकामनाएँ एवं बधाइयाँ। प्रस्तुत पुस्तक की प्रतिक्रिया के लिए सुधा जी को नमन एवं धन्यवाद ।

    सुधा जी ने पुस्तक के शीर्षक का हिन्दी अनुवाद ‘अरण्य की लौ’! – हृदय छू लेने वाला बना दिया। सुधा जी का बचपन में अनुवादक के रूप में कुछ बड़ा काम करने का स्वप्न यहाँ दिखाई दिया, इसे पढ़कर उनका बचपन वाला अनुवाद – ‘सूर्य प्रकाश’ एवं ‘जीवन बालक’ (Life Boy/Sun Light का हिन्दी अनुवाद) याद आते ही चहेरे पर मुस्कान आ गई।

    जितना सुंदर संग्रह उतनी ही सुन्दर प्रतिक्रिया, अंत में लिखा हाइकु भी बहुत ही सुन्दर ।
    हार्दिक शुभकामनाएँ

  9. सभी का बहुत बहुत धन्यवाद!
    आदरणीया डाॅ सुधा गुप्ता जी का हृदय से आभारी हूँ।

  10. लगभग 150 हाइकु का अंग्रेज़ी में अनुवाद करके, उसे इतने ख़ूबसूरत शीर्षक के साथ प्रस्तुत करने हेतु आ. कुँवर दिनेश जी को ढेरों बधाई! आ. सुधा दीदी जी की समीक्षा ने इसमें चार चाँद लगा दिए! आ. दीदी जी ने सत्य ही कहा है कि हिन्दी से अंग्रेज़ी में अनुवाद करने में जो syllabic meter का ध्यान रखना पड़ता है, वह एक अत्यंत ही कठिन काम है! इसके लिए जितनी प्रशंसा की जाये, उतनी कम है! इसमें सम्मिलित सभी रचनाकारों को बहुत बधाई!
    हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाओं सहित
    ~सादर
    अनिता ललित


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