Posted by: हरदीप कौर संधु | अक्टूबर 6, 2020

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1-शशि बंसल गोयल

1
शापित चंदा
टूक-टूक झरता
व्याधित तन।
2
गिरा मावठा
माघ सिसक रहा
आशा धूमिल।
3
किनारे छोड़
लहरें बह रहीं
एकाकी मन ।
4
अँधेरी रात
टिमटिमाता तारा
आशा -किरण ।
5
पनाह पाती
निशा के आँचल में
डरी सड़क ।
6
फ़िसल गई
रफ़्ता -रफ़्ता ज़िंदगी
वक़्त की रेत ।
7
सघन मेघ
आच्छन्न पुनः रवि
शाश्वत बैर ।
8
गिरा कलश
रोली पग उकेरे
श्री आगमन ।
9
पौष की भोर
तुहिन -कण फैले
अलाव बुझे ।
10
छितरे बीज
वसुधा मुस्कुराई
गोद है भरी
-0-

2- साधना श्रीवास्तव

1
बूढ़े माँ-बाप
वृद्धाश्रम के द्वार
करें संताप
2
भीषण ताप।
मजदूर बेचारा
करे विलाप।
3
प्यासी धरती
चिलचिलाती धूप
धरा सहती।
4
तपती धरा
सूखे -सूखे दरख़्त
मानव डरा
5
दीपक- बाती
संग -साथ रहते
सबको भाए।
-0-
s.shrivastava1959@gmail.com

3- अशोक शर्मा भारती

1
चंचल हँसी
जैसे चटकी कली
फैली सुगंध ।
2
ओस की बूँदे
जहाँ- तहाँ बिखरी
चमके मोती ।
3
झरते पत्ते
माटी से मिल गले
हो गए माटी ।
4
महानगर
कांक्रीट का जंगल
नरपिशाच ।
ashoksharmabharti@gmail.com
-0-

4-सारिका भूषण

1
मन मछली
छटपटाता जीव
नारी जीवन।
2
बेजान तन
परदेश में लाडो
सिसकती माँ।
3
नया सूरज
खिल गईं कलियाँ
आत्मविश्वास।
4
सूखे लत्तर
गाए मेघ मल्हार
रोता किसान।
5
छूटती साँसें
पहाड़-सा जीवन
वृद्धाश्रम में।
6
जलती धूप
मंदिरों की घंटियाँ
आस्था अपार।
7
जलती चिता
शुरू हुई कहानी
टूटता घर।
-0- bhushan.sarika@gmail.com

5-संतोष कुमार सिंह

1
जाएँ किधर
चिड़ियाँ-सी बेटियाँ
बाजों का डर ।
2
मधु चुराके
बता रहा भँवरा
फूलों को गा के ।
3
उलझा सूत
सँम्हाले न सँम्हले
बिगड़ा पूत ।
4
माँग रही है
ये जहरीली हवा
खुद को दवा ।
5
छोटी को झूला
खरीद लाया बाप
बड़ी को दूल्हा ।
ksantoshb45@gmai।.com
-0-


Responses

  1. शशि जी, साधना जी, अशोक जी, सारिका जी एवं संतोष जी को सुंदर हाइकु सृजन के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ

  2. विविध विषयों पर अच्छे हाइकु रचना के लिए आप सभी को बधाई । ये संकेत है कि आपमें हाइकु की अपार सम्भावनाएँ हैं ।
    आप सभी की और हाइकु की प्रतीक्षा में ।
    शुभकामनाएँ ।

  3. सुंदर हाइकु-सृजन के लिए सभी रचनाकारों को हार्दिक बधाई ।

  4. बहुत बढ़िया सभी हाइकु…आप सभी हाइकुकारों को हार्दिक बधाई।

  5. भावपूर्ण अभिव्यक्ति के लिए सभी रचनाकारों को हार्दिक बधाई

  6. एक से बढ़कर एक सुंदर हाइकु का गुलदस्ता! शशि जी, साधना जी, अशोक जी, सारिका जी और संतोष जी को बहुत बहुत बधाई!

  7. सम्पादकद्वय आद0 हरदीप कौर सन्धु जी एवम आद0 रामेश्वर काम्बोज ‘ हिमांशु ‘ जी का हार्दिक आभार मेरी हाइकु को स्थान देने के लिए … सादर …

  8. एक से बढ़कर एक सुंदर हाइकु सभी के!
    छोटी को धूला / बड़ी को दूल्हा ….. मर्मस्पर्शी

    शशि जी, साधना जी, अशोक जी, सारिका जी और संतोष जी को बहुत बहुत बधाई!

    सादर,
    भावना सक्सैना

  9. एक से बढ़कर एक हाइकु…मन प्रसन्न हो गया पढ़कर !
    शशि जी, साधना जी, अशोक जी, सारिका जी एवँ संतोष जी को इतने सुन्दर और मनभावन हाइकु के लिए हार्दिक बधाई !!
    सादर
    ज्योत्स्ना प्रदीप

  10. सभी साथियों के हाइकु बहुत बेहतरीन हैं, सबको बधाई…|
    शशि जी के हाइकु में एक दो नए शब्द भी पढ़ने को मिले, अच्छा लगा |


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