Posted by: हरदीप कौर संधु | अगस्त 31, 2020

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1-भूल न पाऊँ  / डॉ. कुँवर दिनेश सिंह

1
आ जाओ यादों!
प्यार का मौसम है-
सावन-भादों!
2
भूल न पाऊँ,
बुरे दिनों के साथी
तुझे बुलाऊँ।
3
आँखें हमारी
झपकें न पलकें,
यादें तुम्हारी!
4
राह भूली है
टंगा हूँ चौराहे पे-
याद सूली है।
5
आया सावन-
यादों का उमगाव,
बरसे घन!
6
बस गई हैं-
दिल में यादें तेरी-
रच गई हैं!
7
रात सावनी!
दिल में तेरी याद!
बदली घनी!
8
पड़े हैं झूले-
सावन में साजन
राह क्यों भूले!
9
झरती बूँदें
बैठी रात अकेली
आँखों को मूँदे।
10
उम्मीद जगे-
मौसम आए- जाए
हमेशा ठगे!

-0-डॉ. कुँवर दिनेश सिंह ,कवि. कथाकार. समीक्षक. अनुवादक.
प्राध्यापक  (अँग्रेज़ी) व संपादक: हाइफ़न,पत्राचार:#3, सिसिल क्वार्टर्स, चौड़ा मैदान, शिमला: 171004 हिमाचल प्रदेश।
ईमेल: kanwardineshsingh@gmail.com
मोबाइल: +919418626090

-0-

2-हाइकु—सुदर्शन रत्नाकर

1

भूल भुलैयाँ

ये जो यादों के घेरे

बाँधे रखते।

2

जहाँ भी जाऊँ

साथ-साथ रहतीं

यादें देश की।

3

पीपल छाँव

मेरा अपना गाँव

बसा यादों में।

4

गिरते पत्ते

करने लगे याद

जब थे साथ।

5

इन्द्रधुनष

छाया है मन पर

तेरी स्मृति का।

6

नैनों के कोर

भीगते रात भर

तेरी याद में।

7

देता है पीड़ा

पर छूटता नहीं

स्मृति का जाल।

8

मीठी सी यादें

भरती हैं उमंग

बचपन की।

9       

बीते वे पल

बिताए तेरे संग

बनी स्मृतियाँ।

10

उड़ा ले गए

सुधियों के बादल

अपने संग।

11

बावरा मन

ढूँढता है रहता

बीता जो कल।

12

दुख की बेला

देती हैं थपकियाँ

माँ की स्मृतियाँ।

13

पुकारती है

बेटी जब माँ मुझे

माँ, याद आती।

14

बोझ यादों का

कब तक उठाऊँ

भारी लगता।

15

बिन यादों के

नीरस- सा जीवन

बीतता कैसे!

16

चाँद लाया था

स्मृतियों की चाँदनी

सहला गई।

17

बरसती हैं

बादल बन यादें

सूने मन में।

18

यादें पतंग

उड़ाकर ले जाएँ

बीते दिनों में।

-0-सुदर्शन रत्नाकर-मोबाइल-9811251135

-0-

 3-स्मृतियाँ -सुवासित कलियाँ

-अनिता ललित

1.

आँसू से सींचे
स्मृति के उपवन –
लहलहाएँ!
2.

कभी हँसाएँ
लग के गले कभी –
यादें रुलाएँ।
3.

ताके दीवाना –
चाँद का यादों से है
नाता पुराना।
4.

वर्षा सुहानी
छम-छम नाचें
यादें पुरानी।
5.

रात चाँदनी
पलक-अलगनी
यादें हैं टँगी।
6.

दुखते बड़े
तन्हाई की धूप में
यादों के छाले।
7.

छूटे ये देह 
मन के दर्पण में
स्मृति ही शेष।
8.

कहाँ अकेले?
वीराने में भी सजें
यादों के मेले।
9.

पल जो बीते 
स्मृति की सीपियों में –
मोती बनते।
10.

माता-पिता की 
स्मृतियों से महकी

मन की गली!

-0-

4-डॉ. पूर्वा शर्मा

1

दौड़ता वक्त

पर अटकी वहीं

स्मृति की सुई ।

2

आदि न अंत

जीवन से भी लम्बी

स्मृति की पंक्ति ।

3

कान्हा की याद,

राधा ही छेड़े अब

बाँसुरी तान ।

4

चूल्हे का स्वाद ?

यादों पे ही पकता

केसरी भात ।

5

वाह ! स्वादिष्ट !

खट्टे-मीठे टुकड़े

स्मृति-व्यंजन ।

6

ऋतु बदली

सिगड़ी सुलगती

स्मृतियों वाली ।

7

मुँह चिढ़ाती

कोने पड़ी बत्तीसी,

अम्माँ की माला ।

8

काँधे पे बस्ता

कक्षा में शरारतें

क्या था ज़माना ।

9

भटकता है,

याद-कारवाँ लिए

बंजारा मन ।

10

फिर से बसी,

पुरानी याद-बस्ती

नये साल में ।

11

यादों में बसा

ये जिद्दी बचपन

शैतानी करें ।

12

आँधी थी आई

यादों की धूल बिछा

हवा हो गई ।

13

यादों के गुच्छे

हरे-भरे भीगे से

इस वर्षा में ।

14

आँसू पाहुने

पलकों पे आ बैठे

यादों को ऐंठे ।

15

यादों में पले

बीते दिनों के पन्ने

खुलते चले ।

16

गोते लगाती

जीवन-सागर में

यादों की कश्ती ।

17

अस्थि कलश

बहा आया गंगा में,

उसकी यादें ?

18

भाड़ा ना वीज़ा

यादें करती यात्रा

देश-विदेश ।

19

सुलग रहा

यादों के अलाव पे

इश्क़ बेचारा ।

20

बंद या खुली ?

इन आँखों में बस

तुम्हारी स्मृति ।

-0-


Responses

  1. डॉ कुंवर दिनेश सिंह जी, सुदर्शन रत्नाकर जी, अनिता ललित जी एवं डॉ पूर्वा शर्माजी के बेहतरीन हाइकु के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ ।

  2. इस अंक के हाइकु तो यादगार हैं। सभी रचनाकारों को हार्दिक बधाई। डांट पूर्वा शर्मा की रचना ” मुँह चिढ़ाती/ कोने पड़ी बत्तीसी/ अम्मा की माला/ में छिपा मीठा मीठा दर्द दिल को छू गया। साधुवाद।

    कमल जैसवाल

  3. डॉ पूर्वा शर्मा, डांट नहीं। क्षमा करें।

  4. झरती बूँदें
    बैठी रात अकेली
    आँखों को मूँदे।
    जैसे यादों के झरने बह रहे हों दिनेश सिंह जी बहुत सुंदर हाइकु ।

    दुखते बड़े
    तन्हाई की धूप में
    यादों के छाले।
    अनिता सभी हाइकु बहुत सुंदर भावपूर्ण।

    भाड़ा ना वीज़ा
    यादें करती यात्रा
    देश-विदेश ।

    वाह!यादों के विभिन्न रूप लिए सुंदर हाइकु।
    आप तीनों को बहुत बहुत बधाई ।

  5. इतने इतने रंगों में यादों के इंद्रधनुष बने हैं कि क्या कहने। पढ़ती रह गई। अद्भुत हैं।

  6. बहुत ही सुंदर, भावपूर्ण एवं मनभावन हाइकु | यादों की बारिश ने एक से बढ़कर एक हाइकु प्रस्तुत किए | सभी हाइकु बेहद सुंदर |
    मेरे हाइकु को स्थान देने के लिए धन्यवाद |
    सुंदर सृजन के लिए दिनेश जी, सुदर्शन जी एवं अनिता जी को हार्दिक शुभकामनाएँ |

  7. यादों की कोई सीमा नहीं, कोई रंग नहीं … जहाँ चाहे वहाँ पहुँच जाती हैं; जहाँ पहुँचती हैं, उसी रंग में ढल जाती हैं!
    डॉ. कुँवर दिनेश जी, आ. सुदर्शन दीदी जी एवं डॉ. पूर्वा जी …आप सभी के हाइकु बहुत ख़ूबसूरत एवं भावपूर्ण हैं! हार्दिक बधाई आप सभी को!
    मेरे हाइकु को यहाँ स्थान देने हेतु आ. भैया जी एवं हरदीप बहन जी का हार्दिक आभार!
    उनकी सराहना एवं मुझे प्रोत्साहन देने के लिए आप सभी गुणीजनों का बहुत-बहुत आभार !

    ~सादर
    अनिता ललित

  8. बहुत बढ़िया हाइकु…. सचमुच प्यारी वर्षा हो गई….आदरणीय डॉ कुंवर दिनेश सिंह जी, आदरणीय सुदर्शन रत्नाकर दीदी , आदरणीय अनिता ललित जी एवं डॉ पूर्वा शर्माजी को हृदय -तल से शुभकामनाएँ !!

  9. सुंदर शब्दों का संगम … मनभावन हाइकु, स्मृति विशेष पर एक बेहतरीन संकलन सम्पादक द्वय द्वारा प्रस्तुत किया गया। जिसके लिए… आदरणीय डॉ कुंवर दिनेश सिंह जी, सुदर्शन रत्नाकर जी, अनिता ललित जी एवं डॉ पूर्वा शर्माजी को बहुत बहुत बधाई एवम अनंत शुभकामनाएं…

  10. सभी हाइकुकारों की हाइकु एक से बढ़कर एक । डॉक्टर पूर्वा शर्मा की लेखनी और मज़बूत और धार दार हो गई है । अति सुंदर ।

  11. Dr Purva ke haiku gagar mein sagar samaan hote hai. Jaise bin kahe bhi bola jata hai waise hi inke haiku hai. Shabd kam magar 1 haiku per ek kitaab likhi ja sake itne gehraai hoti hai.

  12. बरसती हैं
    बादल बन यादें
    सूने मन में।
    (सुदर्शन रत्नाकर जी)

    कहाँ अकेले?
    वीराने में भी सजें
    यादों के मेले।
    (अनिता ललित जी)

    भटकता है,
    याद-कारवाँ लिए
    बंजारा मन ।
    (डाॅ. पूर्वा शर्मा जी)

    सुन्दर हाइकु रचनाओं के लिए सभी को हार्दिक बधाई और साधुवाद!

  13. बेहतरीन हाइकु। इन यादों की फुहारों ने जमकर भिगोया मन को।
    डॉ कुँवर दिनेश जी, आ० सुदर्शन दी, अनिता जी डॉ पूर्वा जी आप सभी को हार्दिक बधाई।

  14. आज तो ऐसा लगा मानो बेहतरीन हाइकु की दावत हो, होनी ही थी, एक से बढ़कर एक रचनाकार जो थे, बहुत आनंद आया, आदरणीय कुँवर दिनेश जी, पूर्वा जी, अनिता जी, और सुदर्शन दी, आप सभी का धन्यवाद!!

  15. डॉ कुंवर दिनेश जी ,सुदर्शन जी अनिता जी और पूर्वा जी आप सभी के यादों की बारिश में भीगे मन में मीठी यादों का संचार करते हाइकु से मन प्रफुल्लित हो गया | सभी रचनाकारों को हार्दिक बधाई |

  16. यादों की बारात निकली है आज हाइकु के रुप में ,
    आप सभी को बधाई , शुभकामनाएं ।

  17. बेहद खूबसूरत एवं ह्रदय को स्पर्श करते अत्यंत भावपूर्ण हाइकु !
    सुंदर सृजन के लिए आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं आदरणीय !
    सादर !

  18. बेहद खूबसूरत एवं ह्रदय को स्पर्श करते अत्यंत भावपूर्ण हाइकु !
    सुंदर सृजन के लिए आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं आदरणीय !
    सादर !

  19. भावपूर्ण हाइकु सृजन के लिए कुँवर दिनेश जी, सुदर्शन रत्नाकर जी, अनिता ललित जी एवं पूर्वा जी को हार्दिक बधाई.


रचनाओं से सम्बन्धित आपकी सार्थक टिप्पणियों का स्वागत है । ब्लॉग के विषय में कोई जानकारी या सूचना देने या प्राप्त करने के लिए टिप्पणी के स्थान पर पोस्ट न करके इनमें से किसी भी पते पर मेल कर सकते हैं- hindihaiku@ gmail.com अथवा rdkamboj49@gmail.com.

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