Posted by: हरदीप कौर संधु | अगस्त 11, 2020

2071-त्रिदल


1-नीलमेन्दु सागर

1

कंठ में प्यास

होठ चाटती नानी

2-Neelmendu Sagar_photo - Copyआँखों में पानी

2

बौराया मेघ

उपट कर बही

झील आँखों की

3

तूफानी वर्षा

रोता काँपता घर

डर ही डर

4

झूठा दर्पण

बाएँ गाल का तिल

दाएँ दिखाता

5

काली बदली

छिटकाती बिजली

हँसी भीलनी

6

कैसी आहट

कुमुदिनी लजाई

हँसा कमल

7

नाचती वर्षा

तालियाँ बजा रहीं

टिनही छतें

8

घूँघट हटा

नाचती -गाती घाटी

भोर ले आती

9

चुभी पंखुड़ी

दिल का जख़्म देख

रो पड़े काँटे

10

आलसी पूस

नौ बजे दिन तक

खर्राटे लेता

11

शाल लपेटे

चल दी शीत बन्नो

बासंती घर

12

कैसा मिलन

मुस्काते कह चले

फिर मिलेंगे

-0-

नीलमेन्दु सागर,नीलम निकुंज,चाकपुनर्वास, पत्रा० छितरौर-851129,बेगूसराय( बिहार )भारत।
मो०-9471456399; 9931948714

-0-

2-मल्लिका तोषा

1

निर्मल नदी

हुई विषाक्त काली

जीव व्याकुल

2

तूफानी लटें

सुलझा रहा चाँद

सिंधु चकित

3

घायल घाटी

चीखते हुए पेड़

लहूलुहान

4

खुली हथेली

पढ़ती है रेखाएँ

मेरा भविष्य

5

हिलते पत्ते

काँपता है सूरज

छिपा सहमा

6

शर्माया चाँद

बनजारा बादल

पीछा करता

7

हरी घास को

जूते खाते देखती

सन्न तितली

-0-मल्लिका तोषा, बी.पी.-48,मौर्या एनक्लेव,पीतमपुरा, दिल्ली-110034 
mallikanatyam@gmail.com
मो०-8588929770

Responses

  1. नीलमेन्दु सागर जी और मल्लिका तोषा जी के अच्छे हाइकु, बधाई ।

  2. वाह ! एक साथ पहली और तीसरी पीढ़़ी के हाइकु पढ़ना अपने आप मे एक रोमांचक अनुभव है । मल्लिका के हाइकु किसी भी तरह से अपने नाना से कम नही हैं ..

    घायल घाटी
    चीखते हुए पेड़
    लहूलुहान

    यह हाइकु तो अद्भुत है … इन चंद शब्दों की व्याख्या मे कई पृष्ठ भरे जा सकते हैं । बहुत बहुत बधाई !

  3. अतिसुन्दर! तीसरी पीढ़ी के हाइकु पहली पीढ़ी से कम कहीं से नहीं! विशेषकर

    ‘हरी घास को
    जूते खाते देखती
    सन्न तितली’ — अद्भुत कल्पना!

    आ. नीलमेन्दु सर के हाइकु भी बहुत सुंदर! उन्हें प्रणाम!

    हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ!

    ~सादर
    अनिता ललित

  4. बहुत ही गहरे एवं भावपूर्ण हाइकु। अद्भुत बिम्बों का प्रयोग।
    हार्दिक बधाई आदरणीय निलमेंदु सर एवं मल्लिका जी
    💐💐

  5. सुन्दर! पहली और तीसरी पीढ़ी के हाइकु एक साथ पढ़कर सुखद अनुभूति हुई । आप दोनों के एक से बढ़कर एक हाइकु ।बहुत-बहुत बधाई ।

  6. बहुत सुंदर भावपूर्ण हाइकु…नीलमेंदु जी तथा मल्लिका जी को बहुत-बहुत बधाई।

  7. तीसरी पीढ़ी पहली से कहीं कम नहीं।एक साथ दोनों को पढ़ना आनन्ददायक रहा। सुंदर सृजन के लिए हार्दिक बधाई।

  8. तीसरी पीढ़ी पहली से कहीं कम नहीं।एक साथ दोनों को पढ़ना आनन्ददायक रहा। सुंदर भावपूर्ण सृजन के लिए हार्दिक बधाई।

  9. एक साथ पहली और तीसरी पीढ़ी के रचनाएँ देख कर मन रोमांचित भी हुआ और आश्वस्त भी | धरोहर को सम्भालना और आगे बढ़ाना आज की युवा पीढ़ी के लिए बहुत आवश्यक है |आप दोनों को ह्रदय तल से बधाई |

    शशि पाधा

  10. आदरणीय नीलमेन्दु जी के हाइकु हम सभी के लिए एक मिसाल हैं , पढ़ने को मिला , आभार आपका । उसी प्रकार के तेवर मल्लिका जी की हाइकु में भी दिख रहे हैं , उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं ।
    बधाई ।

  11. आप दोनों रचनाकारों को सुंदर सृजन हेतु बहुत बहुत बधाई!

  12. वाह ! एक से बढ़कर एक हाइकु …..
    नीलमेंदु जी के हाइकु हमेशा की तरह बहुत सुंदर और तोषा जी के हाइकु भी बहुत सुंदर …. नई पीढ़ी का भविष्य उज्जवल नज़र आ रहा ।
    दोनों का हार्दिक शुभकामनाएँ

  13. मन को बहुत सुकून मिला आप दोनों रचनाकारों के उत्कृष्ट हाइकु पढ़कर… आपको सादर नमन आद.नीलमेन्दु जी
    और प्रिय मल्लिका को स्नेह से भरा बहुत सारा आशीर्वाद !!!

  14. उत्कृष्ट हाइकु।


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