Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | जुलाई 14, 2020

2056:झरने फूटे


डॉ. कुँवर दिनेश सिंह

1
झरने फूटे
सावन में नगों के
हौसले टूटे।

2
श्याम या श्वेत
सावन के बादल
हैं अनिकेत।

3
जाएँ किधर?
आकाश में कहाँ है
मेघों का घर?

4
ढूँढते नैन
धुँध में गुम हुआ
मन का चैन।

5
कुहेलिका- सी
सावन में तुम हो
प्रहेलिका- सी!

6
बादल गाँव
आया चाँद बटोही
उड़ते पाँव!

7
सावन आया
बूढ़ा बांज का पेड़
ख़ूब नहाया।

8
झरती बूँदें
बैठी रात अकेली
आँखों को मूँदे।

9
पूनम रात
अकेला पड़ा चाँद
मेघों की घात!

10
घास है घना
कानन कहे यहाँ
आना है मना।

डॉ. कुँवर दिनेश सिंह
कवि-कथाकार-समीक्षक
#3, सिसिल क्वार्टर्ज़, चौड़ा मैदान, शिमला: 171004, हिमाचल प्रदेश।
ईमेल: kanwardineshsingh@gmail.com
मो: 9418626090AA


Responses

  1. जाएँ किधर?
    आकाश में कहाँ है
    मेघों का घर?
    Sunder
    Bahut bahut badhayi
    Rachana

  2. झरती बूँदें
    बैठी रात अकेली
    आँखों को मूँदे।
    सावन ऋतु में बादलों और वर्षा की बूँदों का सटीक चित्रण।सभी हाइकु और हाइगा बहुत सुंदर ।

  3. सभी हाइकु सुंदर विशेषतः –

    जाएँ किधर?/आकाश में कहाँ है/मेघों का घर?
    झरती बूँदें/बैठी रात अकेली/आँखों को मूँदे।
    पूनम रात/अकेला पड़ा चाँद/मेघों की घात!

    हाइगा भी बहुत सुंदर
    हार्दिक शुभकामनाएँ दिनेश जी

  4. कुहेलिका- सी
    सावन में तुम हो
    प्रहेलिका- सी!
    ….वाह ,बहुत खूब; सावन की दृश्यावलियों को अंकित करते मोहक हाइकु.प्रत्येक हाइकु अनुपम।बधाई डॉ. कुँवर दिनेश सिंह जी।

  5. वाह!बहुत सुन्दर ।एक से बढ़कर एक हाइकु । हार्दिक बधाई डॉ दिनेश कुँवर जी।

  6. सावन की फुहारों से मनमोहक हाइकु। हार्दिक बधाई डॉ कुँअर दिनेश जी।

  7. सावन की हरियाली से हरे – भरे हाइकु सुंदर हैं , बधाई ।

  8. सभी का हृदय से आभार!!! 🙏🙏
    कुँवर दिनेश

  9. एक से बढ़कर एक उत्तम हाइकु हैं दिनेश कुँवर जी हार्दिक बधाई।

  10. एक से बढ़कर एक मनभावन हाइकु, ….सावन आया, बूढ़ा बांज का पेड़, खूब नहाया….!.हाइगा भी सुंदर, आपको बधाई आदरणीय।

  11. सभी का धन्यवाद! 🙏

  12. अति सुन्दर… एक से बढ़कर एक हाइकु !

    झरने फूटे
    सावन में नगों के
    हौसले टूटे।

    श्याम या श्वेत
    सावन के बादल
    हैं अनिकेत।

    हार्दिक बधाई आद.डॉ कुँअर दिनेश जी !

  13. सभी हाइकु बहुत सुन्दर और मनभावन. डॉ कुँवर दिनेश जी को हार्दिक बधाई.

  14. धन्यवाद! 🙏🙏

  15. जाएँ किधर?
    आकाश में कहाँ है
    मेघों का घर?
    ये तो कभी सोचा ही नहीं था…| सभी हाइकु बहुत सुन्दर लगे पर यह वाला बड़ा भाया…| कुंवर जी को ढेरों बधाई…|


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