Posted by: हरदीप कौर संधु | जून 10, 2020

2045


 शशि पाधा

1

नेह बौछार

न भीगे, न ही सोखे  

पत्थर  दिल ।

2

धरा से मिली 

आसमान से कूदी

बाँवरी धूप ।

3

ओ री तितली !

सतरंग चुनरी

किसकी भेंट ।

4

संयम मेरा  

हार न समझना

संस्कारी हूँ मैं ।

5

सच्चे औ सुच्चे

पारदर्शी हैं शब्द

तोल के बोल ।

-0-

 


Responses

  1. बहुत ही प्यारे हाइकु , बहुत सुंदर

  2. संयम मेरा
    हार न समझना
    संस्कारी हूँ मैं ।
    … हाइकु के माध्यम से भावपूर्ण अभिव्यक्ति।

  3. बहुत प्यारे हाइकु…बधाई…|

  4. बहुत ख़ूबसूरत हाइकु…बहुत -बहुत बधाई आदरणीय दीदी !

  5. सभी हाइकु मनभावन
    हार्दिक शुभकामनाएँ शशि जी

  6. सभी हाइकु एक से बढ़कर एक सुन्दर. बधाई शशि पाधा जी.


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