Posted by: हरदीप कौर संधु | मार्च 1, 2020

स्मृति- कलियाँ


डॉ.सुरंगमा यादव

1

धानी चुनरी

सरसों की उतरी

सकुचा ग

2

स्मृति– कलियाँ

सुरभित हो गईं

मन– गलियाँ

3

कितना सींचे

पत्थरों पर  कब

उगे बगीचे

4

टूटा दर्पण

तोड़ता नहीं कभी

सत्य का प्रण

5

रात अँधेरी

यादों के संग रहा

सफर जारी

6

सहेंगे नहीं

भौरों की मनमानी

फूलों ने ठानी

7

घूमे अनंग

करता ध्यान भंग

वसंत संग

8

मिला  सत्संग

फूलों– संग महका

हवा का अंग

9

था व्यग्र सिन्धु

लहरों का नर्तन

समझा जग

10

आँखें बरसीं

धुल गए सपने

हुए बैरंग


Responses

  1. सारे ही हाइकु बहुत सुन्दर सुरंगमा जी… हार्दिक बधाई !

  2. सुंदर सृजन सुरंगमा जी।

  3. सभी हाइकु सुंदर
    विशेषतः धानी चुनरी…,कितना सींचे….,सहेंगे नहीं…, घूमे अनंग…
    हार्दिक शुभकामनाएँ सुरंगमा जी

  4. बहुत मनभावन हाइकु…ढेरों बधाई…|

  5. सुरंगमां जी के सभी हाइकु मनहरण बन पड़े हैं ।बधाई ।


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