Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | सितम्बर 2, 2019

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1-डॉ.जेन्नी शबनम

साँझ पसरी

‘लौट आ मेरे चिड़े !’

अम्मा कहती।

2

साँझ की वेला

अपनों का संगम

रौशन नीड़।

3

क्षितिज पर

सूरज आँखें मींचे

साँझ निहारे।

4

साँझ उतरी

बेदम होके दौड़ी

रात के पास।

5

चाँद व तारे

साँझ की राह ताके

चमकने को।

6.

धुँधली साँझ

डूबता हुआ सूर्य

तप से जागा।

7

घर को चली

साँझ होने को आई

धूप बावरी।

8

नभ से आई

उतरकर साँझ

दीए जलाती।

9

गगन हँसा

बेपरवाह धूप

साँझ से हारी।

10

संध्या उदास

क्या करे दीया बाती

साथ न कोई।

-0-

2-परमजीतकौर ‘रीत’ (श्रीगंगानगर)

1

 नन्हे-से हाथ

सपनीली दुनिया

रँगती कूची

2

हरा सूरज

गुलाबी मोर-पंख

नन्ही कल्पन

3

नन्हे कुबेर

तृण-तृण आनंद

अमूल्य निधि

4

सभी परियाँ

सभी बाल गोपाल

मा-पिता हेतु

5

जंगली फूल

अभावों का आँगन

पलें बेफिक्र

-0-

मेल-kaurparamjeet611@gmail.com

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