Posted by: हरदीप कौर संधु | जुलाई 20, 2019

2030


डॉ.पूर्वा शर्मा

1.

एक न सुनी

धरा पे गिर पड़ी

बूँदों की लड़ी ।

2.

आस की डोर

देख मेघों की ओर

टहुके मोर ।

3.

छलक पड़ी

शुष्क धरा तन पे

मेघ-गगरी ।

4.

धूम-धड़ाका

पावस है बजाता

मेघ नगाड़ा ।

5.

बैंड बजाए

मेघों की महफ़िल

रॉक भी गाए ।

6.

बन के नदी

सड़कों पर बही

सावन झड़ी ।

7.

बूँदें हैं बोली-

रवि को घेरे खड़ी

मेघो की टोली ।

8.

धरा अंक में

सजने को आतुर

बूँदें चतुर ।

9.

रास रचाए

बूँदों संग पत्तियाँ

गुनगुनाए ।

10.

बूँदों के बाण

कुम्हलाते पत्तों में

भरते प्राण ।

11.

लापता रवि

ढूँढें नहीं मिलती

किसी की छवि ।

12.

वर्षा नहाया

हरित कांति लिये

नग मुस्काया ।

-0-

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Responses

  1. अति सुन्दर……वर्षा में स्नान करते मनमोहक,गीले – सजीले हाइकु पूर्वा जी ,
    इसी तरह लिखती रहेंआप !!!

  2. बहुत सुंदर सृजन, हार्दिक बधाई।

  3. Wow

  4. वर्षा ऋतु के बहुत सुंदर हाइकु। बधाई

  5. सुन्दर हाइकु!

  6. वर्षा में भीगे सुंदर हाइकु |हार्दिक बधाई पूर्वा जी |

  7. बहुत सुन्दर हाइकु, बधाई पूर्वा जी.

  8. बहुत ख़ूबसूरत हाइकु…हार्दिक बधाई पूर्वा जी।

  9. बेहतरीन हाइकु…बहुत बधाई पूर्वा जी…|


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