Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | जुलाई 18, 2019

2029-पहाड़ी (कुमाउँनी बोली) हाइकु


कमला निखुर्पा

1

दैणा होया रे                 

खोली का गणेशा हो        

सेवा करूंल ।  

( 1-  अर्थ=- दैणा होया= (कृपा करना),  खोली =(मुख्य द्वार पर स्थापित)

2

दैणा होया रे

पंचनाम देवता

असीक दिया ।    

( 2- असीक =आशीष)

3

मेरो पहाड़

हरयूँ  छ भरयूँ

आंख्यों मां  बस्युं ।  

( 3- अर्थ -हरयूँ  छ भरयूँ =हराभरा है)

4

बुरांशी फूली

डांडा कांठा सजी गे

के भल लागी ।     

( 4- बुरांश =एक पहाड़ी पुष्प, डांडा कांठा =पहाड़ का कोना कोना, भल =सुन्दर )

5

पाक्यो हिसालू

बेरू काफल पाक्यो

घुघूती बास्यो ।    

 (5-हिसालू, बेरू ,काफल = पहाड़ी जंगली फल ,घुघूती =पहाड़ी कबूतर,  बास्यो=गाता है  )

6

मुरूली बाजी

हुड़का ढमाढम

आयो बसंत ।       

6- हुड़का = पहाड़ी वाद्ययंत्र (जो शिवजी के डमरू की तरह दिखता है)

7

गाओ झुमैलो

चाचरी की तान माँ

ताल मिलैलो ।   

 (7-झुमैलो ,चाचरी =पहाडी गीत जिसमें कदम से कदम मिलाकर समूह में नृत्य करते हैं।)

8

पीली आँङरी

घाघरी फूलों वाली

लागे आँचरी।   

 ( 8- आँङरी = अँगिया(कुर्ती),   आँचरी= परी  )

9

ओ री आँचरी

घर, खेत, जंगल

त्वीले सँवारी।    

 (9- त्वीले = तुमने )

10-

मेरी बौराण

लोहा की मनख तू

हौंसिया पराण ।          

(10- बौराण= बहुरिया(बहू), मनख =मनुष्य, हौंसिया पराण = जिंदादिल,हँसमुख)

11

छम छमकी

घुँघराली दाथुली

डाणा कांठा मां ।     

[ 11- घुंघराली = घुंघरू लगे हुए , दाथुली= हँसिया(घास काटने का औजार)]

12

ओ री घसेरी

गाए तू जब न्योली

भीजी रे प्योंली ।   

(12-घसेरी = घसियारिन,  न्योली= विरहगीत/एक पक्षी,   प्योंली=पीला पहाडी पुष्प }

13

पीठ पे बोझ

आँखें हेरे हैं बाट 

सिपाही स्वामी ।

14

धन्य हो तुम

धन्य हिम्मत तेरी

प्यारी घुघूती ।

15

तू शक्तिरूपा

इजा, बेटी, ब्वारी तू

तू वसुंधरा ।        

 (15 इजा=माँ , ब्वारी=बहू )

16

ऊँचा हिमाल

ऊँचो सुपन्यू तेरो

पूर्ण ह्वे जाल ।      

 ( 16- सुपन्यू =सपना )

-0-

30-12-2013

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Responses

  1. वाह,वाह,सचमुच अनमोल हीरों की तरह है समस्त हाइकु,कुमाउँनी भाषा का लालित्य लिये प्रकृति और लोक जीवन के रंगों की छटा बिखेरने वाले हाइकु मन्त्र मुग्ध कर लेते हैं।आपको एवम कमला निखुर्पा जी को बधाई।

  2. भल हाइकु

  3. वाह ! वाह ! ये तो सचमुच हीरे-मोती ही हैं

  4. वाह ! सच्ची के हीरे-मोती…| कई बार तो बिना शब्दों के अर्थ देखे ही सारी भावना संप्रेषित हो गई…| बहुत आनंद आया | कमला जी को बहुत बधाई और संपादक द्वय का भी आभार हम सबको इसका रस्वादन कराने के लिए

  5. सचमुच मन को जगमगाते हाइकु…… बहुत बधाई कमला जी !

  6. सच मे इस भाषा का ज्ञान न होते हुए भी ये हाइकु दिल को छू गए।

  7. बढ़िया! बहुत बधाई आ. कमला जी!

    ~सादर
    अनिता ललित

  8. बहुत खूबसूरत लगे सभी हाइकु. बोली कोई भी हो काव्य का रस अलग ही मज़ा देता है. बहुत बधाई कमला जी.


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