Posted by: हरदीप कौर संधु | जून 6, 2019

2024-जेठ महीना


डॉ. हृदय नारायण उपाध्याय

1

जेठ महीना

आग बना सूरज

कौन बचाए !

2

जलती धरा

सूखे ताल-तलैया

सब हैरान।

3

बढ़ता ताप

पछुआ की लुआर

तन जलाए ।

4

पंथी लाचार

सब ओर वीरान

पथ अपार।

5

जल-विहीन

हरियाली गायब

उजड़ा सुख ।

6

दिशाएँ सूनी

पशु-पक्षी हैरान

दुखी इंसान ।

7

दुख की छाया

जिदयायी पसरी

कौन हटाए।

8

तपिश बढ़ी

धरती पथराई

आग बरसे।

9

झुलसा तन

किरणों के बाण से

आहत मन ।

10

मन से लोग

अब तो यही चाहें-

विदा हो जेठ।

-0-

डॉ.हृदय नारायण उपाध्याय

स्नातकोत्तर शिक्षक-हिन्दी,केन्द्रीय विद्यालय 9 बी. आर.डी.,पुणे – महाराष्ट्र

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Responses

  1. गर्मी की भीषणता को बहुत अच्छी तरह प्रस्तुत किया है इन हाइकु में…मेरी बधाई…|

  2. बहुत ही अच्छे और सच्चे हाइकु …हार्दिक बधाई आपको !


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