Posted by: हरदीप कौर संधु | मई 31, 2019

2022-बचाना गाँव


कमला निखुर्पा

1

गाँव की भोर

शरमाई सी झाँके

खेतों की ओर ।

2

02-village-200

नभ मंडप

सेहरा बाँध आया

सूरज दूल्हा ।

3

सरसों संग

अरहर भी झूमीं

हवा भी दंग ।

4

बागों में झूले 

लकदक अमियाँ

रस टपके ।

5

बजी घंटियाँ

चले मस्ती में ढोर

वन  की ओर ।

6

कूदे  बछिया

हरियाया  गोचर

गैया रँभाई ।

7

फूस की छत 

खींचे धुएँ की रेख

नभ तलक ।

8

मीठी -सी लगे  

चूल्हे में सिंकी रोटी

सोंधी महक ।

9

पावन हुआ  

माटी-गोबर – लिपा

कच्चा अँगना ।

10

नीम की छाँव

वट-पीपल- तले

जुड़ते मन ।

11

कच्चे घर

इरादे पक्के लिये

कब से खड़े ।

12

बचे हैं गाँव

बागों की चहक औ 

सोंधी महक ।

13

 थका शहर

ढूँढ़ रहा कब से

छोटा सा गाँव

14

हर प्रहर

प्रदूषित नगर  

गाँव को खोजे ।

15

हवा शहरी
बदलने लगी है
 गाँवों  की गली।
16

कटे जंगल
 गँवार बेदखल
 उगे महल ।
17

ऊँचे महल
 चरणों में पड़ी है
 टूटी झोपड़ी।
18

रोई कुदाल

हल-बैल चिल्लाए
 खेत गँवाए।

19

रखियो बचा

माटी थाती गाँव की

चाह छाँव की ।

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Responses

  1. गाँव को जीवंत कर दिया आपने, बहुत सुंदर।

  2. गाँव की विशेषता बताते और गाँवों का ह्रास दिखाते सुंदर हाइकु के लिए निखुर्पा जी को बधाई
    पुष्पा मेहरा

  3. गाँव का यथार्थ चित्रण ।हार्दिक बधाई आपको

  4. गाँवों का सुन्दर चित्रण करते एक से बढ़कर एक बेहतरीन हाइकु
    हार्दिक बधाइयाँ कमला जी

  5. गाँव का बहुत सुंदर चित्रण, उम्दा हाइकु …बधाई कमला जी।

  6. कमला जी ,
    मुझे लगता है कि आप ग्राम्य जीवन से पूर्ण रूप से परिचित हैं | तभी तो आपने इतनी कुशलता और सुन्दरता से ग्राम्य जीवन का इतना सुंदर सजीव चित्रण किया है | हर शब्द में गाँव की महक है | पता नहीं कि अपने देश के गाँवों में वही रम्यता है, जो मैंने अपनी आँखों से देखी थी | आपने कविता के माध्यम से स्वर्ग के दर्शन करवा दिए | अति सुदर और बहुत सारी बधाई | श्याम त्रिपाठी -हिंदी चेतना


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