Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | मई 10, 2019

2017-मायका सूना


ज्योत्स्ना प्रदीप
1
बिन माँ-पिता
जलती रही मन
दबी-सी चिता!
2
बिटिया रोई
मैके में नहीं कोई
बिन माँ-बाप ।
3
बेटी मैके में
अब हुई पराई
पिता न माई॥
4
तेरे बिन माँ ,
क्यों अपने ही छलें
सब बदले!
5
माँ आज होती
मैके में नहीं रोती
तन्हा बिटिया!
6
स्नेह तेरा था
मुस्कानों ने सर्वदा
मुझे घेरा था ।
7
पड़ा है मौन
पूछता तानपूरा
छेड़े रे कौन?
8
बोलती धीरे
तेरी कुछ तस्वीरें
मन को चीरे!
9
इक तस्वीर
अब तक अधूरी
तुझसे दूरी!
10
कूची अकेली
सूख गए हैं रंग
तेरा न संग!
11
माँ की दी हुई
वह अन्तिम साड़ी
प्रीत है गाढ़ी!
12
तेरा बनाया
पिता का वह चित्र
बिखेरे इत्र
13
तुझ बिन माँ
दालान की तुलसी
सूखी, झुलसी
14
नैना की धार
तेरा वह अन्तिम बार
सूना शृंगार!
15
सूना आवास
तू जो चली गई माँ
पिता के पास!
16
नैन हमारे
नभ के वह दो तारे
सदा निहारें ।

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Responses

  1. बेटी, माँ और पिता विषयक भावपूर्ण एवम प्रभावी हाइकु।
    तुझ बिन माँ
    दालान की तुलसी
    सूखी,झुलसी।
    बहुत सुंदर।बधाई ज्योत्स्ना प्रदीप जी

  2. गर्मी की छुट्टी हो तो बच्चों को नानी की याद आती है ऐसे समय मे अभिभावक उनके लिए समय निकाल ही लेते हैं लेकिन मायके की याद हर महिला के साथ उसके साये की तरह चिपकी होती है।
    इस भावना से निकले हाइकु सुंदर बन पड़े है , बधाई , शुभकामनाएं।
    रमेश कुमार सोनी , बसना , छत्तीसगढ़

  3. मार्मिक हाइकु ज्योत्सना जी

  4. हृदयस्पर्शी हाइकु … एक से बढ़कर एक
    माता पिता के प्यार दर्शाते बहुत हाइकु देखे, पर ये हाइकु अनूठे हैं | मन की गहराइयों से निकले… भावविभोर कर देने वाले हाइकु….
    हार्दिक बधाइयाँ ज्योत्स्ना जी |

  5. मेरे हाइकु को यहाँ स्थान देने के लिए सम्पादक द्वय का हार्दिक आभार करती हूँl
    आद. शिवजी, मन जी ,पूर्वा जी तथा आद. रमेशजी का भी दिल से धन्यवाद !

  6. हृदयस्पर्शी, मनभावन हाइकु ।बधाई ज्योत्सना जी।

  7. मर्मस्पर्शी भावपूर्ण सृजन…बधाई ज्योत्स्ना प्रदीप जी।

  8. मर्म को भेदती बहुत ही भावपूर्ण दिल की आवाज है ,ज्योत्स्ना जी सुंदर सृजन बधाई |
    पुष्पा मेहरा

  9. ओह ! कितना सजीव चित्रण । माँ पिता के बिना सचमुच पीहर सूना सा लगता है ।

  10. आद. पुष्पा जी, सुरंगमा जी, कृष्णा जी तथा शशि पाधा जी का हृदय से आभार !

  11. हार्दिक बधाई , सुन्दर सृजन।

  12. बहुत मार्मिक हाइकु हैं…| एक बेटी की पीड़ा हर पाठक तक पहुँच जाती है जैसे…| बहुत बधाई…|

  13. ज्योत्स्ना जी इतने मार्मिक हाइकु पढने को मिले | माँ और पिता का साया सर से उठ जाने का दर्द बहुत सजीव है रचनाओं में |हार्दिक बधाई स्वीकारें |


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