Posted by: हरदीप कौर संधु | मई 7, 2019

2016


1-रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

1

घिरा आग में

व्याकुल हिरना सा

खोजूँ तुमको।

2

चारों तर

है घनेरा जंगल

कहाँ हो तुम!

3

प्यास बुझेगी

मरुथल में कैसे

साथ न तुम!

4

अँजुरी भर

पिलादो प्रेमजल

प्राण कण्ठ में।

5

शब्दों से परे

सारे ही सम्बोधन 

पुकारूँ कैसे!

6

भूलूँ कैसे मैं

तेरा वो सम्मोहन

कसे बन्धन।

7

तन माटी का

मन का क्या उपाय

मन में तुम।

8

तरसे नैन

अरसा हुआ देखे

छिना है चैन।

9

देह नश्वर

देही, प्रेम अमर

मिलेंगे दोनों।

-0-

2-डॉ.सुरंगमा यादव

1

पीड़ा के गीत

बन गए अब तो

साँसों के मीत

2

प्रेम के किस्से

दर्द की जागीर है

हमारे हिस्से

3

प्रेम की कमी

मन की धरा पर

दरारें पड़ीं

4

मन की कश्ती

आँसू के सैलाब में

बह निकली

5

जीवन– व्यथा

लिखने जब बैठी

बनी कविता

6

आँचल हरा

ढूँढती वसुंधरा

कहीं खो गया

7

सुनो कहानी

धरा और आँख में

घटता पानी

8

झूठी कसमें

सत्य का उपहास

न्याय की आस

9

परम्पराएँ

पाँव जो उलझाएँ

हमें न भाएँ

10

अल्ट्रासाउण्ड

सुनते ही सहमी

नन्ही अजन्मी

-0-

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Responses

  1. आदरणीय भाई काम्बोज जी के हाइकु अतिशय कोमल और भावुकता पूर्ण हैं ।इस सुन्दर सृजन के लिए आपको बहुत-बहुत बधाई ।

  2. गुरुवर नमन – एक से बढ़कर एक….बहुत ही सुन्दर नेह भीगे हाइकु…..
    सुन्दर सृजन ….. सुरंगमा जी
    आप दोनों को हार्दिक बधाइयाँ |

  3. रामेश्वर काम्बोज जी एवम सुरंगमा जी के सुंदर हाइकु पढ़ने को मिला । सभी हाइकु काफी गहरे अर्थ समेटे हैं।
    शुभकामनाएं ।
    रमेश कुमार सोनी , बसना

  4. शब्दों से परे
    सारे ही सम्बोधन
    पुकारूँ कैसे!
    सच में…कुछ रिश्ते अपने में इतना कुछ समेटे होते हैं कि किसी एक संबोधन में उनको बाँध पाना नामुमकिन लगने लगता है |

    सुनो कहानी–
    धरा और आँख में
    घटता पानी ।
    एकदम सामयिक और सटीक बात…|

    इतने सुन्दर हाइकु के लिए आप दोनों को बहुत बधाई…|

  5. एक से बढ़ कर एक सुंदर भावपूर्ण हाइकु सृजन के लिए भाई काम्बोज जी, सुरंगमा जी बहुत-बहुत बधाई।

  6. आदरणीय काम्बोज के के समस्त हाइकु विरही मन के उदात्त मनोभावों की अभिव्यक्ति के हाइकु हैं,जो हृदय की गहराइयों से निःसृत हैं,वहीं सुरंगमा जी के हाइकु ,प्रेम-विरह के साथ सामाजिक विषमताओं पर भी प्रहार कर रहे हैं।आप दोनों को बधाई

  7. आदरणीय काम्बोज भी और सुरंगमाजी ने भावों की सरिता बहा दी ।शुभकामना है कि हिंदी हाइकु को शिखर तक ले जाएंगे आप । सीमित शब्दों में असीमित भाव ।

  8. अलग अलग भावभूमि पर बहुत सघन व गहरे हाइकु। बधाई।

  9. आदरणीय रामेश्वर सर के प्रेम और विरह रस में सराबोर हाइकु हृदयस्पर्शी हैं

    सुरंगमा जी के भावपूर्ण हाइकु भावुक कर रहे हैं।

    आप दोनों हाइकुकारों को हार्दिक बधाई

  10. एक से बढ़कर एक हाइकु !

    शब्दों से परे
    सारे ही सम्बोधन
    पुकारूँ कैसे!

    सुनो कहानी–
    धरा और आँख में
    घटता पानी ।
    अति सुन्दर !
    आद. हिमांशु जी तथा सुरंगमा जी को हार्दिक बधाई!!


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