Posted by: हरदीप कौर संधु | अप्रैल 11, 2019

2010


 डॉ.पूर्वा शर्मा
1.
फुदके फाँदें
चाह गिलहरियाँ
तमाम उम्र।
2.
नेह तुम्हारा
शहरी ट्रैफिक-सा
थमता नहीं।
3.
कैसे लाँघती?
दिल-आँगन चुनी
याद चौखट।
4.
कंजूस लब,
नैनों के किये खर्च
भीगे से हर्फ़।
5.
तन्हाई में भी
तन्हा ना रह सकूँ
रूह में तू ही।
6.
तुम ठहरे
मेरी परछाई-से
हाथ न आते।
7.
चुरा के रखी
जीवन की ज़ेब में
तेरी वह हँसी।
8.
उठाए मैंने
ज़िंदगी के नखरे
बड़े खतरे।
9.
कुछ ही लम्हें
उधार दे ज़िंदगी
मुस्कुरा भी लूँ।
10.
यह ज़िंदगी
करतब दिखाती
बाज़ीगर-सी।
11.
प्रत्येक बार
ज़िंदगी के पते पे
तुम ही मिले।
-0-

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Responses

  1. बहुत ख़ूबसूरत हाइकु..पूर्वा जी बहुत बधाई।

  2. वाह वाह!एक से बढ़कर एक हाइकु ।पूर्वा जी बधाई आपको ।

  3. सभी हाइकु अच्छे लगे , बधाई ।
    रमेश कुमार सोनी, बसना , छत्तीसगढ़

  4. नेह तुम्हारा
    शहरी ट्रैफिक-सा
    थमता नहीं।
    snder upma badhayi
    rachana

  5. पूर्वा जी सभी हाइकू बहुत उम्दा लगे हार्दिक बधाई | विशेषकर तन्हाई में भी …..|

  6. बहुत सु दर हाइकु पूर्वा जी

    बधाई

  7. बहुत अच्छे हाइकु हैं, बहुत बधाई…|

  8. बहुत ख़ूबसूरत हाइकु………बहुत–बहुत बधाई पूर्वा जी !


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