Posted by: हरदीप कौर संधु | मार्च 18, 2019

2007


वसंत ऋतु

डॉ. पूर्वा शर्मा

1

पूर्वा शर्माकेसरी धोती

टेसू-पगड़ी बाँधे

बौर भी माथे ।

2

दबे पाँव ही

चल पड़ा जाड़ा, ज्यों

वसंत आया ।

3

वन में आज

विराजे ऋतुराज

पुष्पों का राज ।

4

फूलों से फूली

परागों से महकी

वासंती धरा ।

5

पुष्पों की माला

गेहूँ, सरसों बाली

अप्सरा- बाला ।

6

बासंती टेसू

कहीं पे शाख सूर्ख

तो कहीं नैन ।

7

हवा सुगंधी

चीखकर कहती

ऋतु बसंती ।

8

हवा में गंध

पल्लव पुष्पों-संग

ऋतु मलंग ।

9

कैसे हो बयाँ

वसंत का तार्रुफ़

चंद लफ्जों में ।

10

क्षीण हो चली

वसंत प्रतीक्षा में

माघ की शीत ।

-0-

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Responses

  1. सुंदर हाइकु, बधाई पूर्वा जी।
    भावना सक्सैना

  2. सुंदर हाइकु!
    हार्दिक बधाई पूर्वा जी!

    ~सादर
    अनिता ललित

  3. फाग माह के भीने मधुर हाइकु के लिये तुम्हें बधाई पूर्वा ।

  4. बहुत ख़ूबसूरत फाग के हाइकु पूर्वा जी हार्दिक बधाई।

  5. पूर्वा जी और सभी रचनाकारों को होली के पावन पर्व की ढेरों शुभकामनाएं | सभी हाइकु बसंत ऋतु के रंगों में नहाए हुए हैं हार्दिक बधाई |

  6. क्षीण हो चली
    वसंत प्रतीक्षा में
    माघ की शीत ।
    bahut khoob
    badhayi
    rachana

  7. वसंत ऋतु के सुन्दर हाइकु ।

  8. इन प्यारे से हाइकु के लिए खूब बधाई…|


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