Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | फ़रवरी 12, 2019

2002


1-कृष्णा वर्मा

1

पत्तियाँ स्पंदी

चाँदनी का कम्पन

हरता मन।

2

अमर होती

मर के घास बुने

चिड़िया नीड़।

3

साहसी घास

डाले न हथियार

जमाए जड़ें।

4

कितना मरे

हरी हो मुसकाए

जीवट घास।

5

आँधीतूफान

ज़प्त न कर पाएँ

दूब मुस्कान।

6

चर रहा है

पलपल मुझे क्यों

अंजाना डर।

7

न ’मैं’ ही रहे

न ’हम’ बन पाए

धुँधले साए।

8

तुम जो मिले

जगी हैं बेचैनियाँ

कहो क्या करें!

9

मचली चाह

कल्पना में पगी है

प्यार की राह।

10

भीग गई मैं

सावन की झड़ी-सी

नेह तुम्हारा

11

बातें तुम्हारी

घोल गईं  साँसों में

ललिता छंद।

12

जलाए मन

सुधियों के अंगारे

सिराए कौन।

13

अपनापन

तनिक न खुशबू

निरा छलावा

-0-

2-प्रियंका गुप्ता

1

कागज़ी नाव

गहरा समुंदर

हुई न पार ।

2

चुभती रही

कहीं बड़े गहरे

चुप्पी तुम्हारी ।

3

मौन मुखर

जब लब खामोश

सुनो तो सही ।

4

ओढ़ी थी खुशी

सिर्फ़ तेरी ख़ातिर

झूठी ही सही ।

5

भीगी रात में

चुपके से बरसा

अकेलापन ।

-0-

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Responses

  1. बहुत सुंदर मन को स्पर्श करते हाइकु…बधाई प्रियंका जी।

  2. मौन मुखर,जब लब खामोश,सुनो तो सही ।
    वाह! एक से बढ़ कर एक हायकू… दोनों रचनाकारों को हार्दिक बधाई💐💐

  3. बहुत सुन्दर और भावपूर्ण हाइकु. कृष्णा जी एवं प्रियंका जी को बधाई.

  4. साहसी घास
    डाले न हथियार
    जमाए जड़ें।
    sunder haiku
    भीगी रात में
    चुपके से बरसा
    अकेलापन ।
    ati sunder
    rachana

  5. कृष्णा जी और प्रियंका जी दोनों ने उम्दा हाइकु सृजन किया है हार्दिक बधाई |

  6. आप सभी का बहुत बहुत शुक्रिया…|
    आदरणीय कृष्णा जी को उनके बेहतरीन हाइकु के लिए बहुत बधाई…|

  7. भीग गई मैं
    सावन की झंडी सी
    नेह तुम्हारा।
    कृष्णा वर्मा जी सभी हाइकु बहुत सुंदर हैं । बधाई।
    भीगी रात में
    चुपके से बरसा
    अकेलापन ।
    ओढ़ी थी ख़ुशी
    सिर्फ़ तेरी ख़ातिर
    झूठी ही सही ।वाह! बहुत सुंदर । प्रियंका जी बधाई।
    सुदर्शन रत्नाकर


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