Posted by: हरदीप कौर संधु | फ़रवरी 7, 2019

2001-आँसू  ।


सविता अग्रवाल सवि’ (कैनेडा )

1

बिजली गिरी

कर्कश स्वर सुन

छलके आँसू  ।

2

बूढ़ा शरीर

दर्द से है पीड़ित

आँसू  बहाए ।

3

बेटी विदाई

आँसू  लेते बलाएँ

हुई पराई ।

4  

साथ है छूटा

मन हुआ उदास

थमे ना आँसू  ।

5

झरते आँसू

हुए तुम पखेरू

नभ निहारूँ

6

संदूक खुला

प्रेम पत्र जो मिले

टपके आँसू  ।

7

जवान बेटी

ज़िम्मेदारी है पूरी

कहते आँसू  ।

8

आँसू  की धार

सींचती रही मन

जीवन भर ।

9

टूटा खिलौना

ढुलक आये आँसू

कैसे मनाऊँ ?

10

निर्जीव तन

देखकर बेटे का

जमें हैं आँसू  ।

  -0- email : savita51@yahoo.com 

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Responses

  1. खूबसूरत हाइकु के लिए बहुत बधाई…|

  2. वाह बहुत सुंदर हाइकु ।
    झरते आँसू
    तुम हुए पखेरू……..

    बहुत अच्छा है ।
    सविता जी बधाई आपको ।

  3. सुंदर भावपूर्ण हाइकु।बधाई सविता जी।

  4. बहुत सुंदर भावपूर्ण हाइकु …सविता जी को बहुत बधाई।

  5. झरते आँसू
    हुए तुम पखेरू
    नभ निहारूँ ।
    sunder bhav
    rachana

  6. सर्व प्रथम सम्पादक द्वय को मेरे हाइकु को यहाँ स्थान देने के लिए आभार | सभी हाइकुकारों का ह्रदय से धन्यवाद करती हूँ जिन्होंने प्रशंसा कर आगे लिखने के लिए मुझे और प्रेरित किया है |

  7. संदूक खुला …….
    सुंदर ।
    अच्छे हाइकु , बधाई ।

    रमेश कुमार सोनी , बसना

  8. बेहद भावपूर्ण एवं मार्मिक हाइकु, बधाई सविता जी.

  9. आँसुओं में डूबे, पीड़ा में लिपटे… बहुत ही भावपूर्ण हाइकु हैं सवि जी !


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