Posted by: हरदीप कौर संधु | फ़रवरी 6, 2019

2000- यादें, केवल यादें


अनिता ललित

1

नहीं मिलेगी

सर्द लम्हों में अब

माँ -सी रज़ाई।

2

माँ को जो खोया

यूँ लगता है जैसे

जीवन खोया।

3

असीम कष्ट

माँ! तुमने जो सहे

मुझे कचोटें।

4

छूट गई माँ

अब सभी दुखों से

मिली है मुक्ति।

5

लाड़-दुलार

माँ-पापा संग गए

नाज़-नख़रे।

6

मन है भारी

खो गया बचपन

दूध-कटोरी।

7

न रहा साया

गहरा ख़ालीपन

माँ-पापा बिन।

8

थी इतराती

माँ-पापा के साए में! –

बीती कहानी!

9

चुप हूँ खड़ी

अब हुई मैं बड़ी,

खोजे आँगन।

10

भूली नादानी

मायके की गलियाँ

अब बेगानी।

11

जहाँ भी रहें

माँ-पापा की दुआएँ

संग हैं मेरे।

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Responses

  1. भावुकता पूर्ण सुंदर हाइकु ।
    हिन्दी हाइकु के 2000 अंक पूर्ण होने पर संपादक द्वय को पुनः पुनः बधाई ।

  2. सच, माँ बाप जैसा कोई साया नहीं होता। क्या कहूँ इस मार्मिक अनुभूति पर, शब्द नहीं। आप इन क्षणों को गहन अनुभूति को शब्द दे पाई साधुवाद है।

  3. नहीं मिलेगी
    सर्द लम्हों में अब
    माँ -सी रज़ाई।
    bahut hi sunder mata pita se bada koi bhi nahi bahan
    bhaiya 2000 ank pure hone ki badhayi
    rachana

  4. बहुत सुंदर हाइकु अनिता जी बधाई

  5. 2000 अंक होने की बधाई आप दोनों संपादकों को । इस अंक में सुंदर हाइकु हैं , यादें है इसमें मायके की , जो किसी नारी की धरोहर होती है , शुभकामनाएं ।
    रमेश कुमार सोनी , बसना

  6. नहीं मिलेगी
    सर्द लम्हों में अब
    माँ -सी रज़ाई।
    कितने विवश हो जाते हैं हम !
    दिल के तरल भावों को सादर नमन प्रिय सखी !!

  7. बहुत भावपूर्ण मार्मिक सृजन।
    आप दोनों संपादकों को २००० अंक पूरे होने पर बहुत बधाई।

  8. इन दुख भरे पलों में आप सबका साथ मिला, आप सभी का तहे दिल आभार। 🙏
    आदरणीय भैया जी एवं प्रिय हरदीप बहन जी, आप दोनों की अथक मेहनत तथा लगन का परिणाम हमारे ‘हिन्दी हाइकु’ की 2000वीं पोस्ट के रूप में सामने है। आप दोनों को बहुत-बहुत बधाई एवं शुभकामनाएँ! साथ ही हम सभी हिन्दी-हाइकु के परिवारजनों को भी! हम सबके लिए ये गौरव की बात है! 🙏💐

    ~सादर
    अनिता ललित

  9. हिंदी हाइकु के 2000 अंक पूरे होने की सम्पादक द्वय को बहुत -बहुत बधाई स्वीकार हो |कोई भी पल दुर्भाग्य पूर्ण हो या सौभाग्य पूर्ण दोनों ही मन या बे मन से हर किसी को स्वीकारने ही पड़ते हैं ,स्नेहमयी माँ के वियोग में धैर्य और माँ की यादों का साया अनिता ललित के सुखमय भविष्य का साथी रहेगा ऐसा मेरा विश्वास है |
    पुष्पा मेहरा

  10. हिंदी हाइकु के २००० अंक पूरे हुए इस शुभावसर पर सम्पादक द्वय को अनेकानेक शुभकामनाएं और बधाई |प्रिय अनिता जी के माँ की याद में रचे बहुत मार्मिक हाइकु हैं उन्हें भी अनेक बधाई |

  11. काम्बोज जी एवं हरदीप जी के अथक प्रयास से हिन्दी हाइकु के २००० अंक पूर्ण हुए है, इस शुभ अवसर पर ढ़ेरों बधाइयाँ एवं शुभकामनाएँ …….

    अनिता जी बहुत ही भावपूर्ण सृजन ..हार्दिक अभिनन्दन

  12. हिन्दी हाइकु के २००० अंक पूरे होने पर काम्बोज भाई, हरदीप जी एवं पूरे हाइकु परिवार को बधाई.

    अनिता जी के सभी हाइकु बेहद मर्मस्पर्शी हैं, आँखें नम हो गई. सच है माता पिता से अपना कोई नहीं होता. उनका चला जाना एक बहुत बड़ा खालीपन दे जाता है.

    थी इतराती
    माँ-पापा के साए में! –
    बीती कहानी!

  13. हिंदी हाइकु परिवार और आदरणीय कम्बोज जी और हरदीप जी को बहुत बधाई…|

    अनीता जी, माता-पिता का जीवन में साक्षात मौजूद न होना जो खालीपन देता है, उसकी बहुत मार्मिक अभिव्यक्ति की है आपने…| नमन…|

  14. हिंदी हाइकु के 2000 अंक पूरे होने की, सम्पूर्ण समूह को बहुत बहुत बधाई ! अादरणीय कम्बोज जी तथा हरदीप जी का हार्दिक अाभार, इतने वर्षों से पूरी लगन और निष्ठा से इस समूह का संचालन करते अा रहे हैं। हाइकू विधा सीखने का एवं अच्छे हाइकू पढऩे का अवसर प्रदान करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद

    अनीता ललित जी के सभी हाइकू हृदयस्पर्शी हैं
    सादर
    मंजु मिश्रा


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