Posted by: हरदीप कौर संधु | जनवरी 26, 2019

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‘स्वप्न शृंखला’ भावमुक्ताओं की मनमोहक माला

डॉ.आशा पाण्डेय

 ‘स्वप्न शृंखला’ रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’ तथा डॉ. कविता भट्ट के सम्पादन में निकला हाइकु संग्रह है। इसमें कुल 30 हाइकुकारों के 1050 हाइकु संगृहीत हैं।
          हाइकु कविता की सबसे छोटी विधा है ,जो एक निश्चित पैमाने में लिखी जाती है । देखने में छोटी दिखने वाली इस रचना को लिखना बिल्कुल भी सहज नहीं है ,क्योंकि कम शब्दों में किसी भाव को मुकम्मल व्यक्त कर लेना या फिर घटना या चरित्र को प्रतिबिंबित कर देना सहज नहीं होता । जैसा कि इस पुस्तक की भूमिका में संपादक द्वय ने स्वीकार किया है “सूक्ष्म अति सूक्ष्म भाव को यदि तदनुरुप भाषा में बाँधना है ,तो यह तभी सम्भव है जब हाइकुकार के पास रचनात्मक तन्मयता हो,पूरी तरह भाव में डूब जाना और भाषा की मुखर शब्दावली हो, संवाद करता भाषा-सौंदर्य हो,ताश के पत्तों को फेटने वाली भाषा हाइकु को पदावनत ही कर सकती है, उसे सही काव्य नहीं बना सकती।”
         कभी-कभी देखने को मिलता है कि पंक्तियों के अंत में तुकांत मिलाया जाता है। यह गीत कविता आदि में तो ठीक है; किंतु हाइकु में यह उसके सौंदर्य को बाधित  करता है। नपे तुले शब्दों में गहन भाव को दर्शाना या चित्र खींचना ही इसका असली मकसद होता है।
        इस दृष्टि से संग्रह के सभी हाइकु खरे उतरते हैं।
         डॉ. सुधा गुप्ता का एक हाइकु देखिए, सुख राई-सा/ दुखों के परबत/ढोए जीवन। अब यहाँ शब्दों के अर्थ से तो ये अच्छा हाइकु है ही ,अपितु अनेक बिम्बों को भी समेटे हुए है।
      काम्बोज जी का पहला ही हाइकु- उठा तूफान/झरे मन के पात/लगा आघात । गहन भाव जगत् को समेटे है। इसमें केवल वर्णन भर नहीं है अपितु गहरे बिम्ब हैं, जो शब्दविन्यास से स्पष्ट हो रहे हैं। इन्हीं का दूसरा हाइकु, लिपटी लता/लाख आएँ आँधियाँ/तरु के संग। ये हाइकु एक गहरी और कोमल बात को व्यक्त कर रहा है। ये वह सुरक्षा भाव है जो वर्णनातीत है और इस हाइकु में बड़े सुंदर ढंग से व्यक्त हो रहा है।
     डॉ. भावना कुँअर का एक हाइकु, गिराओ मत/माँ के खुशबू वाले /पुराने आले
    डॉ.ज्योत्स्ना शर्मा का हाइकु, यूँ तो वीरानी/फैली है चारो ओर /भीतर शोर। ये दोनों हाइकु रिश्तों की मिठास और कड़वाहट को  व्यक्त कर रहे हैं। एक ओर जहाँ माँ की खुशबू है वहीं दूसरी ओर किसी गहरे आघात की वीरानी छाई है।
         डॉ. कविता भट्ट के हाइकु प्रकृति का खूबसूरत चित्रण कर रहे हैं ,जहाँ सरसता है, कोमलता है, लजाई धूप/पलके न उठाये/नव वधू-सी।
      अपने कई हाइकु में कमला निखुर्पा ने राखी के त्योहार को बड़े सुंदर ढंग से व्यक्त किया है, राखी को चूमें/बचपन में झूमें /सिपाही भइया।
    सुदर्शन रत्नाकर के हाइकु प्रकृति की सुंदर बानगी प्रस्तुत करते हैं, धरा ने ओढ़ी/कोहरे की चादर/छुपा सूरज ।
      इसी प्रकार  प्रकृति और मानव मन का सुंदर चित्रण  डॉ. जेन्नी शबनम ने भी किया है, दुआ माँगता/थका हारा किसान/नभ ताकता।
    हाइकु विधा में सिद्धहस्त डॉ. शिवजी श्रीवास्तव  के सभी हाइकु बड़े सुंदर हैं । इनके हाइकु में भी प्रकृति और भौतिक जगत का सुंदर समन्वय दिखता है -1- जागा संसार /गंध बांट सो गया/हर सिंगार । 2-मोल न जाना/जब थे साथ पिता/अब आँसू है।

      भावना सक्सैना का ये हाइकु अपने सूक्ष्म रूप में प्रकृति के बहाने दर्द को खोलता है , पात पुराने/कहे एक कहानी/बीती जवानी ।
    प्रियंका गुप्ता,शशि पाधा , कृष्णा वर्मा,अनिता ललित, पुष्पा मेहरा,ज्योत्स्ना प्रदीप,अनिता मंडा,मंजूषा मन,सत्या शर्मा कीर्ति,     डॉ. सुषमा गुप्ता,  डॉ. शैलजा सक्सेना,  डॉ. पूर्वा शर्मा,रश्मि शर्मा,मंजू मिश्रा,  डॉ.  सुरंगमा यादव,चंद्रबली शर्मा, पूनम सैनी,  डॉ. हरदीप कौर सन्धु ,सभी के हाइकु विचार की गहनता एवं प्रकृति के सौंदर्य को समाये हुए प्रशंसनीय हैं।

     डॉ. हरदीप सन्धु का यह हाइकु , गहरी शाम/चहकती चिड़िया/ टूटी है चुप्पी।  प्रकृति के सहारे जीवन के संघर्ष और उदासी को व्यक्त किया है।
   स्वप्न शृंखला  संग्रह बड़ा ही सुंदर बन पड़ा है । प्रबुद्ध पाठकों में इसका समादर होगा, ऐसी आशा है ।

स्वप्न- शृंखला’ (हाइकु संग्रह): सम्पादक – रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’, डॉ. कविता भट्ट, अयन प्रकाशन, दिल्ली, 2019, पृष्ठ :144, मूल्य:300 रुपये

 

सम्पर्क : डॉ. आशा पाण्डेय,  5 ,योगिराज शिल्प ,स्पेशल आई . जी . बंगला के सामने ,कैम्प

     अमरावती –444602 (महाराष्ट्र ),     दूरभाष – 0721 –2660396  , मो. -09422917252   ,    9112813033

 Email -ashapandey286@gmail.com

 

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Responses

  1. Bahut khub

  2. बहुत ही स्पष्ट और सुन्दर शब्दों में आपने इस पुस्तक की समीक्षा की है।सही में “स्वप्न श्रृंखला” सभी हाइकुकारों की लेखनी के सहयोग से एक उत्तम प्रयास है।

  3. आशा जी ने अपनी लेखनी से पाठक और लेखक के बीच एक सेतु का काम किया है | हंस के छीर -नीर के सिद्धांत का पूरी तरह रोचकता से पालन किया है | स्वप्न श्रंखला को भली -भाँति सुंदर शब्दों से इस पुस्तक की सुंदर और रचनात्मक समीक्षा की है | श्याम -हिंदी चेतना

  4. बहुत सटीक और सार्थक समीक्षा है | मेरी हार्दिक बधाई…|

  5. आशा जी ने स्वप्न-शृंखला की बहुत सुन्दर समीक्षा की है. हार्दिक बधाई.


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