Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | नवम्बर 24, 2018

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1-रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

1

नेह से भरे

गंगा नहाके आए

मृदु वचन।

2

भोर  मुस्काई
मुकुलित  कमल
नैन तुम्हारे ।
3
जन्मों की माया
कैसे है बाँधे जीव
मन व्याकुल।

-0-

2-कृष्णा वर्मा

1

अर्थहीन हैं

जीवन की साँझ में

मुहैया सुख।

2

क्या वे संबंध ?

दुख में हो आलोप

सुख में संग।

3

आएँ त्योहार

मन हो सतरंगी

उत्सवी द्वार।

4

कैसे अजूबे

विकास की नैया में

बैठ के डूबे।

5

ईर्ष्या का मारा

पाली हैं उदासियाँ

इंसाँ बेचारा।

6

शत्रु जो ऐंठे

तरकश के तीर

चुप क्यों बैठें।

7

दूर देश से

जोड़े  जीवन -नाते,

उलझे खाते।

8

उल्टा व्यापार

छपके न बिकते

बिकके छपें।

9

बड़े क्या हुए

हँसी कहकहे तो

सब खो गए।

-0-

 


Responses

  1. नेह से भरे
    गंगा नहाके आए
    मृदु वचन।

    बहुत ख़ूबसूरत हाइकु। हार्दिक बधाई भाईसाहब।

  2. बहुत ही सारगर्भित एवं उम्दा हाइकु

  3. vividh bhaav bhare sundar haiku , haardik badhaii

  4. एक से बढ़कर एक हाइकु सृजन के लिए हार्दिक बधाइयाँ
    विशेषतः – नेह से भरे….,बड़े क्या हुए..

  5. सभी हाइकु बेहद भावपूर्ण. बधाई भैया एवं कृष्णा जी.

  6. Bahut khub likha aap dono ne bahut bahut badhai aap dono rachnakaron ko….

  7. बहुत उम्दा हाइकु। बधाई।

  8. रचनाकारद्वय को सादर बधाई, इतने सारगर्भित हाइकु हेतु।

  9. आदरणीय भैया जी…प्रेमभाव से महकते हाइकु, आदरणीया कृष्णा दीदी जी…जीवन की कटु सच्चाई दर्शाते हाइकु -बहुत सुंदर सभी!
    हार्दिक बधाई आप दोनों को!

    ~सादर
    अनिता ललित

  10. भाई काम्बोज जी और कृष्णा जी बढ़िया हाइकु सृजन है हार्दिक बधाई |


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