Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | अक्टूबर 20, 2018

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डॉ पूर्वा शर्मा

1

रोज़ दहन

फिर भी न मरता

अहं-रावण

2  

रावण घूमे

समस्त अयोध्या में

कहाँ हो राम?

3

नर में बसी

दशानन-वासना

सीता को नोंचे

4

नैवेद्य नहीं

 सम्मान -क्षुधा मात्र

 हर उमा को।  

-०-

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Responses

  1. वआआह,
    वआआह,
    वआआह।
    पूर्वा जी हार्दिक बधाई एवम अनंत शुभेच्छा।

  2. डा. पूर्वा जी की ये बहुत ही सामयिक और भारतीय समाज की सच्ची आलोचना है | पढने के बाद चिन्तन के लिए एक समस्या मिलती है | बहुत समय के बाद ऎसी ठोस बात किसी ने कही | मेरे मन को छू गयी | श्याम त्रिपाठी हिन्दी चेतना

  3. वाह! बहुत बढ़िया हाइकु…हार्दिक बधाई पूर्वा जी।

  4. कविता जी, त्रिपाठी जी एवं कृष्णा जी …. बहुत-बहुत धन्यवाद |

  5. बहुत बढ़िया हाइकु पूर्वा जी…… हृदय -तल से बधाई आपको !!

  6. सभी हाइकु सुंहर,
    विशेष –
    नैवेद्य नहीं
    सम्मान -क्षुधा मात्र
    हर उमा को। …. बहुत ही अच्छा।

  7. Bahut achchha likha purva ji aapko hardik badhai…


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