Posted by: हरदीप कौर संधु | अगस्त 10, 2018

1852-साँझ से भोर तक


रामेश्वर काम्बोज हिमांशु

1

कँटीली राहें

पथरीली चढ़ाई

हाथ  थामना !

2

खड़े हैं लाखों

रक्तपायी  पथ  में

बचके चलो !

3

शंकित  दृष्टि

बींधती तनमन

दग्ध जीवन !

4

भाग्य का लेखा-

भला करके भी तो

सुख न देखा !

5

तुम्हारी आँखें

आँसू का समन्दर

पीना मैं चाहूँ।

6

पोंछ लो आँखें

सीने में छुप जाओ

क्रूर हैं घेरे ।

7

यज्ञ रचाया

मन्त्र भी पढ़े सभी

शाप न छूटा।

8

जलती रही

समिधा बन नारी

राख ही बची ।

9

छूटे तो छूटे

चाहे प्राण अपने !

हाथ न छूटे।

10

सिन्धु तरेंगें

विश्वास की है नैया

पार करेंगे।

11

मुस्कानें मरी

हँसी गले में फँसी

बधिक -पाश

12

कटे न पाश

खुशियाँ हुई कैद

पंख भी कटे।

13

प्राण हुए  हैं

अब बोझ भारी

चले भी आओ।

14

कैसा मौसम!

झुलसी हैं ऋचाएँ

असुर हँसें।

15

उर पाँखुरी

झेले पाषाण वर्षा

अस्तित्व मिटे।

16

ईर्ष्या सर्पिणी

फुत्कारे अहर्निश

झुलसे मन।

17

कहाँ से लाएँ

चन्दनवन मन !

लपटें घेरे।

18

अश्रु से सींचे

महाकाव्य के पन्ने

रच दी नारी ।

19

मन न बाँचा

अन्धे असुर बने

रक्तपिपासु ।

20

दर्द जो पीते

व्यथित के मन का

सुधा न माँगे।

21

मर जाऊँगा,

तुम्हारे लिए  जग में

फिर आऊँगा !

22

पूजा न  जानूँ

न देखा ईश्वर को

तुमको देखा !

23

प्रतिमा रोई

कलुष न धो पाई,

भक्तों ने बाँटे ।

24

व्यथा के घन

फट जाएँ जो कभी

पर्वत डूबें ।

25

नागनागिन

लिपटे तनमन

जकड़ा कण्ठ ।

26

पाषाण थे वे

 न पिंघले ,न जुड़े

टूटे न छूटे ।

-0-

 [सभी  रेखांकन ; रमेश गौतम]


Responses

  1. Dard se saranor nari ki pida ko bahut hi karen se mahdus kartr haiku bahut manoyog se likhe kamboj ji mei or hardik badhai aapno.

  2. सभी हाइकु बहुत ही भावपूर्ण …पाषाण थे वे,प्रतिमा रोई, मर जाऊँगा,अश्रु से सींचे, तुम्हारी आँखें,पोंछ लो आँखें,जलती रही, छूटे तो छूटे….. बहुत ही सुन्दर

  3. नारी मन की गहन पीड़ा के बहुत भावपूर्ण हाइकु….हार्दिक बधाई आपको।

  4. गहराई युक्त हाइकु।

  5. सुन्दर हाइकु सुन्दर सटीक चित्र |

  6. प्रभावी हाइकु, सुन्दर रेखांकन सहित! साधुवाद!

  7. नारी मन और जीवन के संघर्षों को चित्रित करते सभी हाइकु व उनसे संबंधित रेखाचित्र बेहतरीन हैं । बधाई हिमांशु भाई ।

  8. मन को छू लेने वाले बहुत भावपूर्ण हाइकु ! सुन्दर सृजन की हार्दिक बधाई !
    रेखांकन भी बहुत सुन्दर !

  9. आप सभी के प्रोत्साहन ने मेरा मनोबल बढ़ाया, इसके लिए आभारी हूँ!

  10. अत्यंत भावपूर्ण, दिल को छू लेने वाले हाइकु! सुंदर यादों का पिटारा भैया जी!

    हार्दिक शुभकामनाओं सहित
    ~सादर
    अनिता ललित

  11. बहुत अच्छे… भावपूर्ण… सार्थक हाइकू सर

  12. एक एक हाइकु अपने कलेवर में पूरी कहानी संजोये है ,जैसे कोई लघु उपन्यास हो ।कोई भाव नहीं छूटा ,दुख का, दर्द का ,मिलन का ,विछोह का ,प्रेम का ,समाज के व्यवहार का ।
    बेइन्तहा दुख की इस तस्वीर में देखिये -पीड़ा अन्तर में छुपी है ,बाहर निकल आई तो समझो प्रलय हो जाये – व्यथा के घन /फट जायें जो कभी / पर्वत डूबे ।
    इन हाइकुयों को पढ़ने पर हाइकु विधा समझने में आसानी आई ।बहुत बहुत बधाई इतनी सुन्दर भाव सृष्टि के लिये काम्बोज जी ।

  13. बहुत मर्मस्पर्शी हाइकु…| अंतर्मन को चीर-चीर जाएँ, कुछ ऐसा असर हुआ है इनको पढ़ते हुए…| हार्दिक बधाई…|


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