Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | जुलाई 27, 2018

1846-डॉ रमाकान्त श्रीवास्तव-पुण्य -स्मरण


डॉ. रमाकांत श्रीवास्तव संपादकाचार्य 24 जुलाई को यह भौतिक जगत छोड़ गए ।पिछले लगभग 30 वर्षों से मैं उनके संपर्क में था . सानुबंध । गरिमा भारती  आदि पत्रिकाओं  के सम्पादन के माध्यम से बहुत सी प्रतिभाओं  को आगे आगे बढ़ाया। विगत 15 जुलाई को वे 97 वर्ष के हो गए थे. निर्मल सात्त्विक  जीवन उनकी इस लम्बी उम्र का रहस्य था । चन्दनमन , भावकलश और यादों के पाखी संग्रहों  में इनकी रचनाएँ लेने का सौभाग्य मिला। भावकलाश  संग्रह से इतने प्रभावित हुए कि अपना ताँका -संग्रह तैयार किया और मेरे मना करने पर भी वह संग्रह मुझे समर्पित किया। रचना श्रीवास्तव के अवधी में  अनूदित हाइकु -संग्रह ‘मन के द्वार हज़ार’ की भूमिका लिखी। अनिता ललित के आग्रह पर ‘उनके संग्रह ‘बूँद-बूँद लम्हें’ के विमोचन -कार्य के अवसर पर अपनी पुत्रवधू  और पुत्र विनय श्रीवास्तव के साथ उपस्थित रहे ।सकारात्मक ऊर्जा वाले आदरणीय रमाकांत श्रीवास्तव अजातशत्रु थे। वे सबके और सब उनके ।श्रद्धांजलि स्वरूप अप्रैल 2014 की  यादों के साथ उनके कुछ हाइकु प्रस्तुत हैं –

 

रमाकांत श्रीवास्तव

1

कटे बिरिछ

गाँव की दुपहर

खोजती छाया।

2

गाँव मुझको

मैं ढूँढ़ता गाँव को

खो गए दोनों ।

3

खुल गए हैं

पी कहाँ पुकारके

पिछले पृष्ठ ।

4

मिल न सके

ज्यों रात और दिन

शापित हम

5

चांदनी छाई

प्रेम पाती -सी भाई

तुम न आई ।

 

रमाकान्त जी का आवास , साथ में उनकी पुत्रवधू भी

6

सूनी

वीथी में

शेफाली बन झरी

हँसी वन की ।

-0-

 

 

डा. सुरेन्द्र वर्मा 

  डा. रमाकांत श्रीवास्तव का दो रोज़ पहले  निधन हाइकु साहित्य के लिए एक बड़ी क्षति है । वे सक्रिय  रचनाकारों में वरिष्ठ साहित्यकार थे। वे 97 वर्ष के थे । हाइकु और सम्बंधित विधाओं में उनके कई संकलन प्रकाशित हुए ।उनमे से एकाधिक संकलनों की पुस्तक-समीक्षा करने का मुझे सौभाग्य मिला । उनके  रचित कुछ निम्न लिख हाइकु मैं  उन्हें श्रद्धांजलि के रूप में प्रस्तुत कर रहा हूँ  ।

1

सूरज डूबा 

पंछी वापस लौटे 

नीड़ ध्वस्त है 

2

लुप्त हो रहे 

बरगद पीपल 

धरा विकल 

3

पिता का ऋण 

होता नही उऋण 

बंधुआ बच्चा  

4

नही बुझाता 

झरना निज तृष्णा 

झरता जाता   

-0-

-डा. सुरेन्द्र वर्मा ,दस एच आई जी / एक सर्कुलर रोड , इलाहाबाद ।

-0-[सभी फोटो अनिता ललित के सौजन्य से]


Responses

  1. डा. रमाकांत श्रीवास्तव अपने भाव और आखरों में सदा अमर रहेंगे । श्रेष्ठ सृजन के लिए उन्हें नमन, हार्दिक श्रद्धांजलि

  2. बहुत भावपूर्ण हाइकु !
    आदरणीय डॅा.रमाकान्त श्रीवास्तव जी का परलोकगमन हाइकु जगत की अपूरणीय क्षति है,विनम्र श्रद्धांजलि 💐🙏

  3. विनम्र श्रद्धांजलि।

  4. विनम्र श्रद्धांजलि।

  5. डॉ. रमाकांत श्रीवास्तव जी को हिन्दी हाइकु के द्वारा ही जानने और पढने का अवसर मिला. उनका जाना अपूर्णीय क्षति है. हार्दिक श्रधांजलि.

  6. डॉ.रमाकांत जी की दिवगत आत्मा को मेरी विनम्र श्रद्धांजलि
    पुष्पा मेहरा

  7. बहुत दुःखद है ये…उनको सादर नमन और श्रद्धांजलि

  8. दुःखद, भावभीनी श्रद्धांजलि।

  9. Bahut dukhad vinamr shrdhanjali

  10. भावभीनी श्रद्धांजलि

  11. श्री रमाकांत जी का जाना हाइकु जगत के लिए बहुत बड़ी क्षति है| हमारी और से उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि |

  12. डॉ०रमाकांत श्रीवास्तव का जाना निःसन्देह हाइकु जगत की एक अपूरणीय क्षति है।उनके हाइकु नई पीढ़ी को मार्गदर्शन देते रहेंगे।विनम्र श्रद्धांजलि

  13. डा.रमाकांत जी की दिवंगत आत्मा को मेरी विनम्र श्रद्धांजलि!!


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