Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | मई 11, 2018

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1-मैं हूँ उद्गीत

-डॉ.कविता भट्ट

1

मैं हूँ उद्गीत

भँवर -से गाते हो

मुझे ओ मीत

2

मैं हूँ पाँखुरी

तुम रंग हो मेरा

सदैव संग

3

तुम प्रणव

मैं श्वासों की लय हूँ

तुम्हें ही जपूँ

4

प्रतीक्षारत

तापसी योगिनी मैं

तू योगीश्वर

5

शैल नदी -सी

प्रत्येक शिला पर

लिखा संघर्ष

6

प्रकृति आद्या

चेताए मानव को

तोड़ती भ्रम

7

दिग-दिगन्त

कुपित मानव से

फूटा रुदन

8

संध्या व भोर

ये प्रकृति नचाए

खींचती डोर

9

मद में चूर

मानव  की पिपासा

प्रकृति दूर

10

उमड़े ज्वार

मन समंदर में

भाटा -विचार

11

बाहर तूफाँ

मन के भीतर का

उससे भारी

12

मूल कारण

प्राकृतिक कोप का

अतिक्रमण

13

जो वीर वेश

तरु जूझे आँधी से

अब भी शेष

14

पाहन हूँ मैं

तुम हीरा कहते

प्रेम तुम्हारा

15

तुम हो  शिल्पी

प्रतिमा बना डाली

मैं पत्थर थी

-०-

2-उठा तूफान

रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

1

उठा तूफान

झरे मन के पात

लगा आघात।

2

छोड़ गए वे

विजन में अकेले,

रहे जो साथ।

3

उड़ी घनेरी

घमंड- भरी धूल

आँखों में चुभी।

4

सिन्धु हो तुम

मैं तेरी ही तरंग

जाऊँगी कहाँ ?

5

छोडूँगी कैसे!

चाहे चाँद बुलाए

लिपटूँ तुझे।

6

सिन्धु उदास

सो गई हैं लहरें

कोई न पास।

7

उदास तट

खो गई है आहट

अँधेरी रात।

8

छोड़ो न हाथ

घुमड़ी हैं घटाएँ

सम्बल तुम्हीं।

9

आँधी झकोरे

डाल- पात बिखरे

तुम्हीं समेटो।

10

लिपटी लता

लाख आएँ आँधियाँ

तरु के संग।

11

टूटा जो पेड़

छोड़ गए थे पाखी

लता लिपटी।

12

तुम छा गए

मन- अम्बर पर

बन सौरभ।

13

कभी तो आओ

बाहें फैलाकरके

गले लगाओ ।

14

कभी जो मिलो

बन उर -कलिका

सदा ही खिलो।

15

एक ही रूप,

प्रभुवर हों मेरे,

या मेरा चाँद।

-0-

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Responses

  1. Sundar!

  2. बहुत सुन्दर। बधाई आपदोनों को।

  3. सभी हाइकु एक से बढ़कर एक …
    गुरुवर और कविता जी को सुन्दर हाइकु सृजन के लिए बहुत-बहुत बधाई

  4. आप दोनों के ही हाइकु मानों भावों का समुन्दर हों जो अपने साथ बहा ले जाते हैं…|
    बहुत बहुत बधाई आप दोनों को…|

  5. उत्कृष्ट हाइकु रचनाएँ । सभी हाइकु एक से बढ़ कर दूसरा । पढ़कर मन प्रफ़ुल्लित हो गया । हिमांशु भाई व कविता को बधाई ।

  6. बहुत सुन्दर , भावप्रवण हाइकु !
    आप दोनों को हार्दिक बधाई !!

  7. बहुत ही उम्दा हाइकु आदरणीय भैया जी एवं कविता जी आप दोनों के ।
    बहुत कुछ नया सिखाता है आपलोंगों का सृजन ।
    बहुत-बहुत सुंदर

  8. बहुत सुंदर भावपूर्ण हाइकु।
    आप दोनों को हार्दिक बधाई।

  9. भावों की गागर छलकाते बहुत गहरे हाइकु। बधाई।

  10. गहरे भाव लिए अतिसुन्दर हाइकु, एक से बढ़कर एक! मन को छू गए!
    हार्दिक बधाई…. कविता जी एवं आदरणीय भैया जी!

    ~सादर
    अनिता ललित

  11. सभी हाइकु बहुत सुन्दर और सारगर्भित. आप दोनों को हार्दिक बधाई.

  12. आप सभी की आत्मीयता हमेशा सृजन के नए आयामों हेतु प्रेरणा देती है। हार्दिक आभार।
    आदरणीय श्री काम्बोज जी के सारगर्भित हाइकु हेतु उन्हें हार्दिक बधाई।

  13. बहुत सुंदर सार्थक हाइकु रचने के लिए ,
    आप दोनों को हार्दिक बधाई 🙏🙏🙏🙏

  14. सभी हाइकु अच्छे हैं!!!

    डाॅ. कविता भट्ट का यह हाइकु बहुत सुन्दर है:

    उमड़े ज्वार
    मन समन्दर में
    भाटा-विचार

    श्रीकाम्बोज जी के निम्न हाइकु विशेष रूप से प्रभावित करते हैं:

    (3)
    उड़ी घनेरी
    घमंड भरी धूल
    आँखों में चुभी

    (6)
    सिन्धु उदास
    हो गई हैं लहरें
    कोई न पास

    दोनों रचनाकार बधाई के पात्र हैं!!!
    -डाॅ. कुँवर दिनेश

  15. डॉ. कविता भट्ट के हाइकु यदि सामयिक हैं तो इसी अंक में प्रकाशित वरिष्ठ कवि रामेश्वर काम्बोज हिमांशु जी के हाइकु भी सामयिक और ओजमयी हैं।दोनों रचनाकिकारों को हार्दिक बधाई

  16. हार्दिक आभार आप सभी का, स्नेह प्रत्याशित

  17. आप सभी के प्रोत्साहन भरे शब्दों के लिए आभारी हूँ . काम्बोज

  18. कविता भट्ट जी के हाइकु हृदयस्पर्शी हैं. इसा तरह के भावपूर्ण सृजन की आज नितांत आवश्यकता है . हार्दिक बधाई

  19. अच्छे हाइकु की प्रस्तुति , बधाई ।
    रमेश कुमार सोनी बसना छत्तीसगढ़


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