Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | फ़रवरी 26, 2018

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दिनांक 23 फरवरी को आपका पोस्ट किया हुआ शब्दों का उजाला में भगवतशरण अग्रवाल के निधन समाचार को पड़कर स्तब्ध रह गया । जिस बगैर-आडम्बर के वह काम करते थे, उसी तरह चुपचाप वे चले गए, किसी को कानों कान खबर तक नहीं हुई । आपको आभार प्रकट करना चाहूँगा की आपने उनकी खोज-खबर लेकर उनके निधन को और उनकी 88वीं जन्म तिथि को सार्वजनिक किया । यदि वे कुछ दिन और जीवित रह पाते तो वे निश्चित ही 88 वर्ष के हो गए होते ।

    सच पूछा जाए तो मेरा हाइकुलेखन उन्हीं के द्वारा प्रकाशित हाइकु-भारती पत्रिका से आरम्भ हुआ जिसमें वे मेरी रचनाओं को बहुत सम्मान पूर्वक स्थान देते थे । मैंने हाइकु लेखन 1998-99 से आरम्भ किया था और तभी “हाइकु पत्रिका” का प्रकाशन भी आरम्भ हुआ था । मैंने जब ‘हाइकु पहेलियाँ’ और ‘सुखन हाइकु’ लिखे तो उन्होंने इन रचनाओं को रेखांकित करते हुए अपने अद्वितीय ‘हाइकु काव्य विश्वकोश’ तक में इस प्रयोग का  उल्लेख किया । हाइकु के प्रति उनका उत्साह देखते ही बनता था । आज हिन्दी में जितने भी प्रतिष्ठित हाइकु रचनाकार हैं उनमें से अधिकतर की प्रतिष्ठा का बहुत कुछ श्रेय भगवतशरण अग्रवाल के प्रोत्साहन को जाता है जो उन सबको “हाइकु-भारती” पत्रिका के माध्यम से प्राप्त हुआ । यह मेरा सौभाग्य रहा कि मैं इस पत्रिका से आरम्भ से अंत तक जुदा रहा । 

     डा. अग्रवाल ने अपनी उच्च शिक्षा लखनऊ से प्राप्त की थी, लेकिन उन्होंने अपनी शैक्षणिक सेवाएं अहमदाबाद, गुजरात के एक महाविद्यालय को दीं जहाँ वे हिन्दी विभाग के विभागाध्यक्ष रहे । उन्हें प्रसिद्धि मुख्यत: हाइकु लेखन और हिन्दी में हाइकु विधा के प्रचार-प्रसार से मिली लेकिन उन्होंने हिन्दी साहित्य की अन्य विधाओं पर भी काफी-कुछ काम किया है । मुझे पूरी उम्मीद है की उनके कुछ शिष्य उनके साहित्य के, हाइकु से इतर, अन्य पहलुओं पर भी शोध कार्य करके उसे प्रकाश में लावेंगे । अंत में उनको अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनकी कुछ रचनाओं को प्रस्तुत करने का मैं लोभ संवरण नहीं कर पा रहा हूँ जो मुझे बेहद पसंद हैं–

1

धन्य है वर्षा

खेतों में कविताएँ

बोते किसान।

2

लू से झुलसी

जेठ की दुपहरी

कराहे पंखे

3

फूला पलाश

यादों के दीप सजा

आया बसंत

4

पसर गई

सरसों फूली शय्या

माघ की धूप

5

कभी न जीती

मौत से जिंदगानी

हार न मानी।

-0-डा. सुरेन्द्र वर्मा (मो.9621222778)

10, एच आई जी / 1, सर्कुलर रोड,इलाहाबाद -211001

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Responses

  1. बहुत ही सुन्दर हाइकू…

  2. पात्र प्रकाशित करने हेतु बहुत बहुत धन्यवाद |सु. व. |

  3. हार्दिक आभार आ. सुरेन्द्र सर जी! आपने आ. स्वर्गीय भगवत शरण जी के हाइकु यहाँ पर साझा किए! सच में उनका जाना दुख दे गया! नमन उन्हें ! नमन आप दोनों की लेखनी को!

    ~सादर
    अनिता ललित

  4. विनम्र श्रद्धांजलि

  5. श्रद्धेय डॉ. भगवतशरण अग्रवाल साहब के साथ एक युग का अंत हो गया…अपूर्णीय क्षति!

  6. श्रद्धेय डाॅ.भागवत शरण अग्रवाल जी के जाने से हाइकुजगत को अपूर्णीय क्षति हुई है । उनका योगदान अस्मरणीय है । उनके जन्मदिन पर उन्हें भावभीनी स्मरणांजलि अपने एक हाइकु से —

    अथवा योद्धा
    लड़ा कलम उठा
    विजय दर्ज ।

    विभा रश्मि

  7. सुंदर अविस्मरणीय संदेशात्मक श्रद्धांजलि देते हाइकु, सादर नमन।

  8. आदरणीय सुरेन्द्र जी आपके भावों को नमन करती हूँ । आदरणीय भगवत शरण अग्रवाल जी का जाना साहित्य जगत के लिए बहुत बड़ी क्षति ।

  9. बहुत दुखद समाचार काम्बोज भाई! स्नेही भगवत शरण अग्रवाल जी के योगदान को हमेशा याद रखा जायेगा।उनकी जगह कोई नहीं ले सकता । ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे।
    विनम्र श्रद्धांजलि !

  10. आदरणीय भगवत शरण अग्रवाल जी को भावभीनी श्रधांजलि. उनके हाइकु बहुत भावपूर्ण हैं. आदरणीय सुरेन्द्र जी का आभार.

  11. श्रद्धेय डॉ. साहब के पुण्यस्मरण के साथ उनके अनुपम हाइकु साझा करने के लिए आ. सुरेन्द्र जी के प्रति ह्रदय से आभार !

  12. सादर नमन उनकी याद को


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