Posted by: हरदीप कौर संधु | फ़रवरी 23, 2018

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बूँद में समा /सागर और सूर्य/ हवा ले उड़ी।

हाइकु के पुरोधा डॉ भगवत शरण अग्रवाल नहीं रहे। आज 23 फ़रवरी को 88 वर्ष के हो जाते। जनवरी की एक शाम को जब फोन किया तो

सन् 1989

उनकी ठहाके भरी आवाज़ नहीं आई। बहुत ही क्षीण स्वर में बोले –“काम्बोज जी, अभी अस्पताल  से लौटा हूँ तबियत ठीक नहीं है। फिर बात करूँगा।’’ उनका वह फिर नहीं लौट पाया।  मैं और दीदी डॉ सुधा जी फोन करते तो कोई फोन नहीं उठाता। हारकर दो दिन पहले  मैंने हाइकु की शोध छात्रा से कहा कि सूरत में आपका कोई परिचित हो ,तो  उनके घर पर किसी को भेजकर पता करा दीजिए। वह इस प्रयास में लगी थी कि कल पता चला -6 फ़रवरी को हाइकु से विश्वभर को जोड़ने वाले  उदारमना चुपचाप चले गए। हिन्दी हाइकु नियमित रूप से पढ़ते थे । किसी की अच्छी रचना होती तो मुझे फोन करके बताते और आग्रह करते कि मैं रचना कार को बता दूँ। मैं कभी किसी की बात से दुखी होता तो कहते-काम्बोज जी दो फ़ाइल रखो-एक फूलों की , एक पत्थरों की। फूलों की फ़ाइल अपने सामने रखो, उसे रोज़ देखो। कोई पत्थर भेजता है तो उसी दूसरी आइल में अलग रखो। उसको खोलकर न देखो।’’

 आज ऐसे कृपण विद्वान् बहुत हैं जो अपने से छोटों की प्रशंसा करने से परहेज़ करते हैं । डॉ अग्रवाल अच्छा लिखने वाले नए से नए रचनाकार की मुक्तकण्ठ से प्रशंसा करते थे। ‘शाश्वत क्षितिज’ ( 1985)हिन्दी जगत क प्रथम हाइकु-संग्रह है ।‘ हाइकु भारती’ के माध्यम से आपने हाइकु को विस्तार दिया। ‘हिन्दी कवयित्रियों की हाइकु साधना’ के माध्यम से कुल 51 कवयित्रियों को प्रस्तुत किया जिनमें से छह कवयित्रियों के रचनाकर्म पर विस्तृत चर्चा की। ‘हाइकु-काव्य विश्वकोश’’विश्व का हाइकु साहित्य का प्रथम कोश है।

 आज के अंक में श्रद्धांजलि स्वरूप आपके कुछ हाइकु दिए जा रहे हैं। हिन्दी हाइकु से जुड़े साथी  हाइकु के इस अभियान को आगे बढ़ाएँगे ऐसी आशा है।

-0-

1

जब तक मैं

पहचानूँ ज़िन्दगी

मौत आ गई।

2

करना पड़ा

जो जीवन का सौदा-

तुम्हें माँगूँगा।

3

वर्षा में नहा

तुम ऐसे मुस्काए

फूल लजाए।

4

बौराए आम

स्वप्नों तक पहुँची

स्मृति-सुवास।

5

तुम्हारे बिना

दीवारें हैं, छत है

घर कहाँ है ?

6

मेरे घर में

छ: जने, चार दिशा

नभ और मैं ।

7

स्वप्न में जाग

जीत लिया संसार

फिर सो गए ।

8

शीतल लगे

जेठ की दुपहरी

प्रिया के संग।

9

कौन– सा राग

टीन की  छत पर

बजाती बर्षा।

10

वर्षा की रात

बतियाते मेंढक

चाय पकौड़ी।

11

सावन भादों

दिन देखें न रात

यादों के मेघ।

12

बूँद में समा

सागर और सूर्य

हवा ले  उड़ी।

13

अनादि  है जो

साथ में अनंत भी

वही तो हूँ  मैं।

-0-

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Responses

  1. नमन दिव्य आत्मा को। बहुत बढ़िया हाइकु।
    जीवन सार
    बतलाते कुछ तो
    जीवट वाले।

  2. आ.डाॅ भगवत शरण अग्रवाल भाई को शत् – शत् नमन । उनके जन्मदिवस पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि । उन्होंने हमेशा नये रचनाकारों का मार्गदर्शन किया ।
    बेहतरीन रचनाकार व पूजनीय शख्सियत ।उनके जाने से हाइकु जगत में एक महति स्थान रिक्त हो गया ।

    वर्षा में नहा
    तुम ऐसे मुस्काए
    फूल लजाए।
    बेहतरीन हाइकुकार को नमन ।

  3. जब तक मैं
    पहचानूँ ज़िन्दगी
    मौत आ गई।

    साहित्य जगत के लिए बड़ी क्षति , आदरणीय भगवतशरण अग्रवाल जी की दिव्य आत्मा को शत शत नमन । विनम्र श्रद्धांजलि । ऐसी महान आत्मा बार -बार धरा कहाँ अवतरित होती हैं ? धन्य है वह जिन्हें उनका सानिध्य प्राप्त हुआ । ओम शान्ति

  4. आदरणीय भगवतशरण अग्रवाल जी की दिव्य आत्मा को शत शत नमन । विनम्र श्रद्धांजलि ।

  5. निःशब्द हैं! अत्यंत दुखद! हमें भी कुछ बार आपने हमारे लिखे हाइकु पर उनकी प्रतिक्रिया भेजी थी, भैया जी! कोई ऐसे ख़ामोशी से चला जाता है कि विश्वास ही नहीं होता! ईश्वर आदरणीय भगवतशरण जी की दिव्य आत्मा को शान्ति प्रदान करे! नमन उन्हें एवं उनकी अमर लेखनी को ! विनम्र श्रद्धांजलि!!!

    ~सादर
    अनिता ललित

  6. साहित्य के महान पुरोधा की दिव्य- आत्मा को शत – शत नमन !
    साहित्य जगत के लिए ये सच में एक बहुत बड़ी क्षति है …
    विनम्र द्धांजली !!

  7. सुंदर हाइकु. नमन यह बेहद दुखद समाचार है.

  8. बहुत दुखद ,अपूरणीय क्षति है !दिवंगत आत्मा को विनम्र श्रद्धांजलि ! आदरणीय डॉ. साहब अपनी उत्कृष्ट रचनाओं के माध्यम से हमारे बीच सदैव उपस्थित रहेंगे | २ फरवरी को सूरत जाकर भी उनसे भेंट न कर सकी यह बात मुझे हमेशा कचोटती रहेगी | उनके आशीर्वचन अब कभी फोन पर भी नहीं सुन पाऊँगी ,यह तो बहुत बड़ी सजा हो गई मेरे लिए ! क्या करें ..गया वक्त फिर नहीं लौटता ….ईश्वर दिव्य आत्मा को शान्ति प्रदान करें !

  9. हाइकु के पुरोधा डॉ भागवत शरण अग्रवाल जी की अब स्मृति ही शेष रहेगी । विनम्र श्रद्धांजलि , आपका आशीर्वाद मुझे मिलता रहा है । ईश्वर उनकी आत्मा को मोक्ष प्रदान करें ।
    रमेश कुमार सोनी , बसना

  10. बहुत दुखद। आदरणीय डा० भगवत शरण जी की पुण्य आत्मा को विनम्र श्रद्धाजलि।

  11. बहुत दुखद..सादर श्रद्धांजलि!

  12. हाइकु परिवार से एक प्रेरक मार्गदर्शक का चुपचाप चले जाना साहित्य जगत के लिए अपूरणीय क्षति तो है ही साथ में उनके घनिष्ठ मित्रों व पारिवारिक सदस्यों के लिए भी ।
    इतने गंभीर हाइकुकार को उनके जन्मतिथि पर श्रद्धांजलि देना अजीब लग रहा है । ईश्वर से उनकी दिव्य आत्मा के मोक्ष प्राप्ति हेतु प्रार्थना करती हूँ ।

  13. बहुत दुखद… सादर श्रद्धांजलि!

  14. डॉ .भगवत शरण अग्रवाल जी की पुण्य आत्मा को मेरी विनम्र श्रद्धांजलि
    पुष्पा मेहरा

  15. विनम्र श्रद्धांजलि!

  16. डॉ.भगवत शरण अग्रवाल जी के निधन का समाचार अत्यन्त दुखद समाचार है ।हिन्दी हाइकु जगत ने एक महारथी खो दिया ।किसी भी इन्सान की क्षतिपूर्ति नहीं हो सकती ।उन्हे हमारी विनम्र श्राद्धांजलि ।भगवान उनकी आत्मा को अपने चरणों में निवास प्रदान करें ।

  17. बहुत दुखद खबर है. आदरणीय भगवत शरण अग्रवाल जी को भावभीनी श्रधांजलि. उनके हाइकु बहुत भावपूर्ण हैं और जीवन के बहुत करीब हैं. सच है …

    जब तक मैं
    पहचानूँ ज़िन्दगी
    मौत आ गई।

  18. जब यह ख़बर पता चली थी, तभी एक सदमा सा लगा था…| किसी बड़े का यूँ चला जाना भी बहुत खलता है…| आज फिर बरबस आँखें नम हो गईं…| उनकी यादों को नमन…|


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