Posted by: हरदीप कौर संधु | फ़रवरी 3, 2018

1823


 1सुशील शर्मा

1

आया बसंत 

पतझड़ का अंत 

मधु से कंत 

2

ऋतु वसंत 

नवल भू यौवन

खिले आकंठ 

3

 शाल पलाश

रसवंती कामिनी 

महुआ गंध। 

4

केसरी धूप 

जीवन की गंध में 

है मकरंद 

5

कुहू के स्वर 

उन्मत्त  कोयलिया 

गीत अनंग। 

6

प्रीत पावनी 

पिया हैं परदेसी 

रूठा बसंत। 

7

प्रिय बसंत

केसरिया धरती

पीले गुलाबी।

0- Sushil Sharma [mailto:archanasharma891@gmail।com

 

2-ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’

1
उम्र बढी। है
लौटा है बचपन
बूढ़ा है तन ॥
2
खोई मस्तियाँ
बङप्पन में मेरी
डूबी कश्तियाँ ॥
3
हूँ पचपन
हरकत ऐसी है
ज्यों बचपन ॥
4
मैँ भी हूँ जवाँ
उम्र घटती जाती
बढ़ती कहाँ ?
5

डूबता सूर्य
स्वागत करे चाँद
आ जा तू वर्ष
6
मत्त फसलें
रच दें इतिहास
यादों के दिन
7
​​​नई सौंगाते
बाँटता चला गया
नया था वर्ष।
8
क्षण ने बोई
दिन की जो फसलें
वर्ष ने काटी।
9
क्षण की आँधी
निगल गई वर्ष
यादों के साथ।
10
नहाए दिन
बन ठनके लाएँ
नया उत्कर्ष ।
11

वर्ष के पृष्ठ
लिखेगा इतिहास
यादों का पेन।
12
बुढ़ा गया है
सोलह का यौवन
आ जा सत्रह।
13
यादों के बीज
समय की भूमि पे
रचे साहित्य।
14
आओ  लिख दो!
मन की अभिलाषा
बोले ये वर्ष।
15
हाथों से रेत
फिसल गए दिन
यादों के बिन।
16

वधू लगाए
हाथों पर मेहंदी
वर मुस्काए।
17
मेहंदी रचे
मन की हथेली पे
खिले चेहरा।
-0-

ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’

पोस्ट ऑफिस के पास,रतनगढ़-४५८२२६ (नीमच) मप्र

opkshatriya@gmail।com

9424079675

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Responses

  1. आदरणीय सम्पादक महोदय,
    आप ने बहुत ही सुंदर ढंग से हाइकू का संपादन कर के इन्हें प्रकाशित किया है. आप की मेहनत काबिले तारीफ है. बधाई व शुभकामनाएं .
    आप का साथी

  2. आ सुशील जी एवं आ ओमप्रकाश जी आपने बहुत खूबसूरत सृजन किया है। एक तरफ बसंत की अठखेलियां और दूसरी ओर बीती जा रही जिंदगी के अलग अलग पहलुओं को सार्थक अभिव्यक्ति दी है। नमन…

  3. केसरी धूप
    जीवन की गंध में
    है मकरंद ।
    बसंत ऋतु के बासंती से सुन्दर हाइकु के लिये बधाई लें सुशील जी ।

    ​मत्त फसलें
    रच दें इतिहास
    यादों के दिन ।
    ओमप्रकाश जी को बसंत- ऋतु के मनभावन हाइकु के लिये बहुत बधाई ।

  4. सुन्दर वासंती हाइकु ..
    दोनों रचनाकारों को हार्दिक बधाई !!

  5. सुशील जी वसन्त के अच्छे हाइकु।
    ओमप्रकाश जी बेहतरीन हाइकु।

    वधू लगाए
    हाथों पर मेहंदी
    वर मुस्काए।

  6. मधुऋतु के माधुर्य से रचे बसे सुशील शर्मा जी के सुन्दर बसंत हाइकु तथा परिवर्तनशील कालचक्र में मनुष्य मन के भावों की सुंदर अभिव्यक्ति के ओमप्रकाश क्षत्रिय प्रकाश जी के हाइकु प्रभावित करते हैं। दोनों ही रचनाकारों को सुन्दर सृजन हेतु बधाई।

  7. सुशील जी और प्रकाश जी को खूबसूरत सृजन के लिए हार्दिक बधाई !

  8. सुशील जी वसंत ऋतु के महकते एवं कुहू के स्वर में गुन गुनाते हाइकुयों का वर्णन प्रभाव पूर्ण है ओमप्रकाश जी आपने बढ़ती उम्र की भावनायों का अति सुन्दर वर्णन किया है ।दोनो को हार्दिक बधाई ।

  9. सुंदर सृजन

  10. ख़ूबसूरत सृजन के लिए सुशील जी तथा ओमप्रकाश जी को बहुत बधाई।

  11. आदरणीय ओमप्रकाश जी और सुशील जी को अपने बेहतरीन सृजन के लिए मेरी ओर से बहुत बहुत बधाई…|

  12. आदरणीय ओमप्रकाश जी ,सुशील जी आप दोनों को प्रभावशाली सृजन के लिए हार्दिक बधाई ।

  13. rachnakaar dway ko badhayi

  14. आ. ओमप्रकाश जी एवं सुशील जी… आप दोनों के हाइकु बहुत अच्छे हैं! इस सुंदर सृजन हेतु आप दोनों को हार्दिक बधाई!!!

    ~सादर
    अनिता ललित


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