Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | जनवरी 28, 2018

1822


1-सुदर्शन रत्नाकर

1

महके फूल

जीवन- बगिया में

बेटी मुस्काई।

2

कोहरा छाया

सूरज अलसाया

ओट से झाँके ।

3

सर्द मौसम

शर्माती हुई आई

घर में धूप।

4

दुबकी बैठी

घर के आँगन में

साँझ की धूप।

5

थकी सी धूप

मुँडेर से उतरी

आँगन फैली ।

6

ओस के मोती

कोहरे की चादर

गढ़े चितेरा।

7

पथ वही है

पथिक बदलते

जीवन यात्रा।

8

जीवन साँझ

छूटे हैं सब साथी

मन अकेला ।

9

जल विहीन

मीन सम जीवन

तुम्हारे बिन।

10                  

 खिला है मन

पाकर तेरा संग

विजय पथ।

-0-

2-कृष्णा  वर्मा

1

जपें हवाएँ 

जाने क्या फागुन में 

जी धड़काएँ।

2

अनूठे पल 

भोले से परिचय 

होठो के दर।

3

प्रेम -व्यापार 

सींच रही रौनकें 

सोंधी बयार।

4

फूलों का काम 

रात भर छकना 

ओस का जाम।

5

ओ कलाकार 

अद्भुत की रचना 

भ्रांत संसार।

6

अन्न भंडार

फिर पेट भूखे हैं

ग़रीब मार।

7

कौन प्रभाव

देश भर नदियाँ

जल अभाव।

-0-

3-अनिता मण्डा

1
भटकी कश्ती
धुंध के भँवर में
दूर मंजिल।
2
चढ़ता भेंट
इतवार का दिन
अधूरे काम।
3
विद्युत-बल्ब
इर्द-गिर्द पतंगे
शवों का ढेर।
4
अभी है खाली
फिर सुनेगी डाली
पत्तों की ताली
5
पीली पत्ती से
हवा ने कुछ कहा
साथ चल दी!
6
फ़ुर्र से उड़ी
ले चिड़िया का रूप
जाड़े की धूप।
7
सजी है वेणी
महके रातरानी
देखे चाँदनी।
8
नहीं डरते
मिट्टी में मिलने से
झरते पत्ते।
9
खनक गये
फिर प्रश्नों के सिक्के
स्त्री के लिए।

-0-

4-वंशस्थ गौतम , ग़ाज़ियाबाद 

1

ज़िंदगी बीती

सपनों के जाल में 

नींद न टूटी। 

 

2

विस्तृत नभ 

सिमटा कतरे में 

मेरे आँगन। 

 

3

घर है सीला

बाहर खिली धूप

विचित्र लीला। 

4

स्वच्छंद मन 

कहना कब माने

उड़ना जाने। 

5

लो, फूँका घर

ले ली लुकाठी हाथ

चलेंगे साथ। 

-0-

 

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Responses

  1. घर है सीला
    बाहर खिली धूप
    विचित्र लीला।

    क्या सुंदर चित्र उकेरा है
    वाह वंशस्थ गौतम जी
    शेष हाइकु भी अच्छे।

  2. सुदर्शन दीदी दर्शन पगे हाइकु बहुत अच्छे लगे।
    जल विहीन
    मीन सम जीवन
    तुम्हारे बिन।

  3. कृष्णा जी विविधरंगी हाइकु बहुत उम्दा लगे।
    जपें हवाएँ
    जाने क्या फागुन में
    जी धड़काएँ।

  4. विद्वजनों के बीच मुझे स्थान देने के लिए आभारी हूँ।

  5. आ.सुदर्शन दीदी, आ.कृष्णा जी, आ.वंशस्थ गौतम जी, प्रिय अनिता जी, आप सबको प्रभावशाली सृजन के लिए हार्दिक बधाई ।

  6. आप सभी के बहुत – बहुत बेहतरीन हाइकु के लिए हार्दिक बधाई ।
    सभी हाइकु बहुत सुंदर

  7. वाह!मन खुश हो गया।बेहद उत्तम अभिव्यक्ति !नमन आप सभी को !!

  8. महके फूल \जीवन -बगिया में \बेटी मुस्काई| |अन्न भंडार\फिर पेट भूखे हैं \ ग़रीब मार | , अभी है खाली\फिर सुनेगी डाली\ पत्तों की ताली , घर है सीला\बाहर खिली धूप \विचित्र लीला| सुंदर हाइकुओं हेतु सुदर्शन रत्नाकर जी, कृष्णा,अनीता वा वंशस्थ गौतम जी को भी बधाई |
    पुष्पा मेहरा

  9. सभी हाइकु अप्रतिम. आप सभी को बधाई.

  10. उम्दा हाइकुओं के लिए सुदर्शन रत्नाकर जी, अनिता जी, वंशस्थ गौतम जी को हार्दिक बधाई।

  11. ओस के मोती
    कोहरे की चादर
    गढ़े चितेरा।
    सुदर्शन जी को कोहरे , धूप के मनभावन हाइकु के लिये बधाई ।

    अनूठे पल
    भोले से परिचय
    होठो के दर।
    कृष्णा जी के फागुन और जीवन से जुड़े सुन्दर हाइकु । खूब बधाई ।

    अनूठे पल
    भोले से परिचय
    होठो के दर।
    अनिता जी के बहुत नाज़ुक, बेहतरीन हाइकु । बहुत बधाई लें ।

    लो, फूँका घर
    ले ली लुकाठी हाथ
    चलेंगे साथ।
    गौतम जी के सुन्दर हाइकु के लिये बधाई ।

  12. बहुत ही सुन्दर हाइकु ….एक से बढ़कर एक !
    आ. सुदर्शन दीदी , आ.कृष्णा दीदी , आ.वंशस्थ गौतम जी एवं प्रिय अनिता मंडा को हार्दिक बधाई !!

  13. हौसला बढ़ाने के लिए आप सब का हार्दिक आभार 🙏🏼

  14. आप सभी आदरणीय के हाइकु बेहतरीन हैं । बधाई , शुभकामनाएं ।
    रमेश कुमार सोनी बसना

  15. अलग अलग भावों से भरे इन खट्टे-मीठे-प्यारे से हाइकु के लिए आप सभी को बहुत बधाई…|


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