Posted by: डॉ. हरदीप संधु | नवम्बर 23, 2017

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[ हिन्दी हाइकु ने विगत वर्षों में अपना परिवार बनाया है। यह संयुक्त परिवार आपसे में बहुत आत्मीयता से सबको अपनाता चला है। कुछ साथी केवल छपने के लिए आए, कुछ समय बीता फिर बिदा हो गए।कुछ ऐसे भी आए ,जिन्होंने कुछ सीखने का प्रयास नहीं किया। वे अल्पकाल के लिए ठहरे, फिर अपना अलग कोना चुन लिया। हाइकु से जुड़ा एक ऐसा भी समूह है, जो शुरू से आज तक जुड़ा है। सिर्फ़ हाइकु से नहीं , बल्कि रचनाकारों से भी, उनके सुख -दु;ख से भी; सदैव कल्याण की कामना के साथ। आज के अंक में कमला निखुर्पा से मंजूषा मन तक, स्नेह की डोर में बँधे। मंजूषा जी ने साँझ का सूरज भेजा, तो जो उद्गार मन में उठे , यहाँ उकेर दिए । समयाभाव के कारण कुछ साथी   उपस्थित नहीं हो सके। अगले अंकों में उनका इन्तज़ार रहेगा।]

साँझ का सूरज

19 नवम्बर 2017

 

 

 

 

1- कमला निखुर्पा ( प्राचार्या, केन्द्रीय विद्यालय,  पिथौरागढ़)

1

साँवली साँझ

को स्वर्णिम सौगात

भेंटता रवि ।

2

सजा विहान

दिवस अवसान

नयनाभिराम।

3

नाचते मेघ

पहन के पगड़ी

किरणों -जड़ी।

4

छुप के खड़ी

साँझ की सौतन

रात निगोड़ी।

5

रात चोरनी

समेट स्वर्ण सारा

भागती चली ।

-0-

2-रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

1

सांध्य गगन

कर गया उदास

एकाकी मन।

2

स्वर्णिम मेघ

लुभाते गगन को

कुंचित केश।

3

घटा में धूप

मोह गया मन को

तेरा ये रूप।

4

फैला गगन

उमड़ते ये घन

मेरा ही मन।

-0-

3-अनिता मण्डा

1

बेफ़िक्र रंग

बिखेरता सूरज

साँझ-बेला में।

2

अँधेरे लिखें

रात की पाण्डुलिपि

गुनाहों-भरी।

3

स्वर्ण-रश्मियाँ

पीताभ गगन में

जाल बिछाएँ।

-0-

4-भावना सक्सैना

1

साँझ के रंग

कैनवस आसमाँ

नयन रँगे।

2

बादल-फाहे

दमक स्वर्णाभा से

करें शृंगार।

-0-

5-मंजूषा मन

1

जाता सूरज

कल फिर आऊँगा

कहके चला।

2

बुझते हुए

न रोया ये सूरज

मन क्यों रोए।

3

तुम्हारी छवि

बादल या सूरज

सब तरफ।

4

उगे या ढले

कुछ सिखाता चले

देखो ये सूर्य।

5

ढलती बेला

न चले साथ कोई

पंछी अकेला।

-0-

6-ज्योत्स्ना शर्मा

1

सुघड़ बाला

ले हाथों में दीपक

बाला , सँभाला ।

2

संध्या डुबोए

सागर के जल में

स्वर्ण कटोरा ।

-0-

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Responses

  1. शुभ प्रभात ! हाइकु परिवार के मेरे प्रिय हाइकुकारों की मनभावन , बेमिसाल हाइकु रचनाएँ पढ़ कर बहुत आनंदित हूँ।आ.हिमांशु भाई , प्रिय कमला जी , ज्योत्स्ना जी , अनिता मंडा जी ,भावना जी व मंजूषा मन जी को सार्थक , मधुर हाइकुओं के लिये बधाई ।
    सनेह -विभा रश्मि

  2. सचमुच बहुत ही बेहतरीन हाइकु । सुबह – सुबह इतनी अच्छी शुरुआत । मन आनन्दित हो गया । हार्दिक बधाई आदरणीय काम्बोज भाई , आद. कमला निखुर्पा जी , आद . अनीता माण्डा जी , आद. भावना सक्सेना जी आद . मंजूषा जी , आद . ज्योत्स्ना शर्मा जी ।

  3. आप सब के मनभावन हाइकु पढ़ कर बहुत प्रसन्न हुआ| बहुत बहुत बधाई|

  4. बहुत ही सुंदर हाइकु, सभी को बधाई |
    पुष्पा मेहरा

  5. वाह ! क्या बात है…मज़ा आ गया | सबको खूब बधाई…|

  6. आ कम्बोज भाई जी , कमला जी ,भावना जी , मंजूषा जी , प्रिय अनिता आप सभी के बहुत सुन्दर हाइकु ..हार्दिक बधाई स्वीकार कीजिए |
    उत्कृष्ट रचनाकारों के साथ मुझे भी स्थान देने के लिए सम्पादक द्वय के प्रति हृदय से आभार !

  7. एक से बढ़कर एक अनुपम उत्कृष्टतम हाइकू स्वर्णिम आभा लिए हृदय को तरंगित करते हुए। सभी रचनाकारों का हार्दिक अभिनंदन…

  8. अद्भुत विविध रंग, साँझ के।
    आभारी हूँ प्रियजनों के बीच रहकर।

  9. हम सभी के भावों को यहां पिरो देने के लिए आपका बहुत आभार भैया। आपकी आत्मीयता ही हम सब को जोड़े है। सभी हाइकु एक से बढ़कर एक हैं।
    मंजूषा जी का भी आभार जिन्होंने यह चित्र साझा कर सभी के भावों को जागृत किया।

  10. विभिन्न रूपों में रचे सांझ के बहुत ख़ूबसूरत हाइकु।
    आप सभी रचनाकारों को बहुत-बहुत बधाई।

  11. आदरणीय भैया जी ,अनिता जी,भावना जी, मंजूषा जी, ज्योत्स्ना जी आप सबके हाइकु पढ़ बहुत आनंद आया,उत्कृष्ट सृजन के लिर सभी को हार्दिक बधाई ।

  12. जुड़ा ही रहा
    इक दूजे के संग
    अभिन्न अंग।

    हिंदी हाइकु
    अनूठा परिवार

  13. हिंदी हाइकु
    अनूठा परिवार
    मौक्तिक हार ।

    सभी रचनाकारों को बधाई

    कमला

  14. हाइकुयों की भव्य प्रस्तुति अति उत्तम लगी ।मंजी हुई कलम की रचनायें मन को तृप्ति से भर गई ।
    सब रचनाकारों को बधाई ।
    कमला घटाऔरा

  15. आप सभी के सुंदर हाइकु पढ़ने मिले, साँझ का चित्र चलते हुए सड़क के किनारे गाड़ी रोक कर लिया था… पर इस पर इतने अच्छे हाइकु लिखे जाएंगे ये नहीं सोचा था

    आप सभी का हार्दिक आभार चित्र को सार्थक करने के लिए

  16. आप सभी को उत्कृष्ट हाइकु रचना के लिए बधाई , सांझ के इतने सारे रंग देखना अद्भुत अनुभव रहा । ऐसी कोशिशों को और आगे ले जाना चाहिए ताकि सक्रियता के साथ हम सब हाइकु लिखते हुए मिल सकें ।

    रमेश कुमार सोनी – बसना

  17. बहुत सुंदर मनभावन प्रस्तुति | आपसभी को हार्दिक बधाई |

  18. कमाल के हाइकु …एक से बढ़कर एक ,आज भोर में और भी ताज़गी भर गई। आप सभी की लेखनी को सादर नमन !


रचनाओं से सम्बन्धित आपकी सार्थक टिप्पणियों का स्वागत है । ब्लॉग के विषय में कोई जानकारी या सूचना देने या प्राप्त करने के लिए टिप्पणी के स्थान पर पोस्ट न करके इनमें से किसी भी पते पर मेल कर सकते हैं- hindihaiku@ gmail.com अथवा rdkamboj49@gmail.com.

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