Posted by: डॉ. हरदीप संधु | नवम्बर 5, 2017

1807


1-सुदर्शन रत्नाकर

1

कौन सुनता

दिल स्वयं सहता

दर्द की घातें।

2

घायल मन

मरहम न पट्टी

रिसता खून।

3

आज के रिश्ते

रेतीले घर हों जैसे

भुरभराते।

4

अजनबी से

रह रहें हैं लोग

ऊँचे मकान।

5

बहुत सहा

ये तन्हाई का गम

भरा है प्याला।

-0-

2- डॉ.ज्योत्स्ना शर्मा

1

सुनो तो ज़रा

दिल ही तो सुनता

दिल का कहा ।

2

हैं अनमोल

ज़ख़्मों को भर देते

दो मीठे बोल ।

3

उधड़ी मिली

रिश्तों की तुरपन

गई न सिली ।

4

फाँस थी चुभी

मुट्ठी में अँगुलियाँ

बँधी न कभी ।

5

अरी तन्हाई !

शुक्रिया संग मेरे

तू चली आई ।

-0-

3-अनिता मण्डा
1
उठाके थका
वेदनाओं का भार
बैचेन मन।
2
ठिठके तारे
रातरानी महकी
चाँद से मिल।
3
अपने लगें
विरह- भरे गीत
पीर एक -सी।
4
छल-बल की
हो रही बरक़त
पाप का घड़ा।
5
दंग चौराहे
गुमराह भीड़ में
ट्रैफ़िक जाम।
6
धूप-छाँह की
चादर पेड़ तले
हवा से हिले।
7
एक तमाचा-
समाज के मुँह पे
भिखारी बच्चे।
8
मेरे सुर में
उदासी का संगीत
तुमने चीन्हा।
9
छिपे ना राज़
पढ़ती सब कुछ
मन की आँखें।
10
पेड़ बदलें
ऋतुओं की पोशाक
चुपचाप से।
11
अनुभूतियाँ
सिलवटों में लिखी
मुख पे सजी।
12
मटमैला- सा
मन का कैनवस
खिले न रंग।
-0-

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Responses

  1. आदरणीया सुदर्शन रत्नाकर जी, डॉ. ज्योत्स्ना जी के परिपक्व हाइकु रचनाओं के मध्य मुझे स्थान दिए जाने पर आभारी हूँ।

  2. घायल मन
    मरहम न पट्टी
    रिसता खून।
    सुदर्शन जी के रिश्तों पर पीड़ा से पूरित हाइकु ।

  3. फाँस थी चुभी
    मुट्ठी में अँगुलियाँ
    बँधी न कभी ।
    ज्योत्सना जी के संजीदा हाइकु बहुत सुन्दर ।

  4. छिपे ना राज़
    पढ़ती सब कुछ
    मन की आँखें।
    अनिता मंडा के भावप्रणव हाइकु ।
    तीनों हाइकुकारों को भावमय हाइकु के लिये बधाई ।

  5. मेरा नाम ग़लत चला गया है ।

  6. एक से बढ़ कर एक ।
    बहुत सहा तनहाई … रत्नाकर दीदी , अद्भुत लेखन आपका।
    ज्योत्सना जी… उधड़ी … हायकु बेहद कमाल।
    अनीता जी .. मटमैला सा मन का कैनवस… सच जितनी तारीफ करूँ उतनी कम।

    👌👏👏👏👏👏👏

  7. उत्कृष्ट सृजन आदरणीया रत्नाकर दीदी , अनिता मंडा जी
    बहुत-बहुत बधाई 👌🙏
    मुझे भी स्थान देने के लिए संपादक द्वय का हृदय से आभार 🙏🙏

    सहृदय प्रतिक्रिया के लिए भी आपका आभार 💐🙏💐

  8. सभी हाइकु में कहीं न कहीं दिल के अलग अलग दर्द और जज़्बात बयान किए गए है…। इन सभी बेहतरीन और दिल को छूने वाले हाइकु के लिए आप सभी को बहुत बधाई ।

  9. आज के रिश्ते–
    रेतीले घर हों जैसे
    भुरभराते।
    रत्नाकर जी के हाइकु अति सुन्दर

  10. सुंदर हाइकु अनीता जी बधाई

  11. सुनो तो ज़रा ज्योत्सना जी बहुत ही सुन्दर लिखा है बधाई

  12. Bhut khoob likha..aap Sabine.. Congratulations

  13. आज के रिश्ते/रेतीले घर हों जैसे/भुरभराते।
    सभी हाइकु बहुत शानदार आदरणीया सुदर्शन जी

    सुनो तो ज़रा/दिल ही तो सुनता/दिल का कहा ।
    ह्रदयस्पर्शी हाइकु डॉ. ज्योत्स्ना जी

    एक तमाचा-/समाज के मुँह पे/भिखारी बच्चे।
    अनिता जी मनभावन हाइकु

    आप सबको हार्दिक बधाई ।

  14. आद. रत्नाकर जी , सखी ज्योत्स्ना जी एवँ प्रिय अनिता… कमाल के हाइकु हैं आप सभी के ….हृदय तल से बधाई !!

  15. बहुत सुन्दर एक से बढ़कर एक हाइकु ।सभी रचनाकार बधाई के पात्र हैं ।
    सुदर्शन रत्नाकर जी आज के रिश्तों की सच्चाई – आज के रिश्ते / रेतीले घर हों जैसे / भुरभुराते ।
    ज्योत्स्ना जी बहुत ही सुन्दर लगे ये शब्द – है अनमोल / जख़्मों को भर देते / दो मीठे बोल ।
    अनिता मण्डा जा बहुत सही कहा है – एक तमाचा / समाज के मुँह पर / भिखारी बच्चे ।

  16. बेहतरीन सृजन…सुदर्शन रत्नाकर जी, ज्योत्स्ना जी और अनीता मण्डा जी हार्दिक बधाई।

  17. सभी रचनाकारों को सुंदर – सार्थक सृजन हेतु बधाई iपुष्पा मेहरा

  18. बेहतरीन, दिल को छूने वाले हाइकु। सभी रचनाकारों को बहुत बधाई ।

  19. वाह बहुत मन भावन और दिल को छू जाने वाले हाइकु हैं तीनों रचनाकारों को हार्दिक बधाई |

  20. उधड़ी मिली
    रिश्तों की तुरपन
    गई न सिली ।
    ..

    पेड़ बदलें
    ऋतुओं की पोशाक
    चुपचाप से।
    सभी हाइकु एक से बढ़कर एक …. बधाई सभी रचनाकारों को

  21. बहुत सुंदर अतुल्य, हाइकु , आप तीनों को हार्दिक बधाई ।

    रमेश कुमार सोनी – बसना


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