Posted by: रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' | अक्टूबर 26, 2017

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    जापानी विधाओं की रचना का ऐतिहासिक शिलालेख

: रमेश कुमार सोनी

            डॉ. सुधा गुप्ता जी द्वारा रचित उक्त शोध ग्रन्थ को पढ़ने का सौभाग्य प्राप्त हुआ , इस अद्भुत शोध ग्रन्थ में 1995 से लेकर अब तक की जापानी विधा के हाइकु , ताँका , सेदोका की भूमिकाएँ , समीक्षा , आलेख तथा उनके  पसंद की रचनाएँ समाहित हैं,जो उनकी  रचना संसार में संवेदनाओं के सूक्ष्मावलोकनों का जीवित संसार है ।

    इस संग्रह के द्वारा मुझे हाइकु की  विकास यात्रा की सम्पूर्ण जानकारी मिली , यह नए पाठकों तथा शोधार्थियों के लिए भी एक अनमोल साहित्यिक धरोहर है ; इसे सभी हाइकु लेखकों को अनिवार्यतः पढना चाहिए । बार – बार पढने का आमंत्रण देते इस पुस्तक को पढ़ते हुए ऐसा लगा जैसे मैं स्वयं उन पुस्तकों को पढ़ रहा हूँ ,जिनकी इसमें समीक्षाएँ, भूमिकाएँ और आलेख प्रकाशित हैं।  डॉ. सुधा गुप्ता जी की अपनी यह विशेषता है कि वे अपने शब्दों को बहकने नहीं देती , आश्चर्य होता है कि इतने लम्बे वक्त पर लेखन के दौरान वाक्यों का कोई दोहराव नहीं है ,वरना एक लेखक के साथ ऐसा संभव है । एक साथ इतने सारे जापानी विधा के हस्ताक्षरों को पढ़ना एक अद्भुत रोमांच रहा तथा उत्सुकता बनाए रखा ।

              डॉ. सुधा गुप्ता जी की हाइकु के लिए समर्पण इस ग्रन्थ के द्वारा प्रकट होती है कि वे बड़ी उदारता से नव लेखकों को प्रोत्साहित करने उनकी कृतियों को पूरा आशीर्वाद प्रदान करती रही हैं । इसमें मेरी पहली हाइकु संग्रह –रोली अक्षत का भी उल्लेख है।  इसके अलावा इसमें दी गई कुछ पुस्तकों को मैंने पढ़ा भी है । आपने पूर्ण सौम्यता से समीक्षा में  सभी को मातृवत् निर्देश दिया है ।यहाँ उनके शब्दों की शालीनता स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुई है ; शब्दों का ऐसा अप्रतिम सौन्दर्य तथा अनुशासन युक्त संतुलन सदियों में कभी- कभार ही मिल पाता है ।

              इस विकास यात्रा को पाठकों तक लाने का श्रेय सुधा जी ने रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’ जी को दिया है ,जो सर्वथा उपयुक्त है ; वाकई हाइकु की ऐसी निःस्वार्थ सेवा का एक दूसरा नाम आपने चरितार्थ किया है । हिन्दी हाइकु एवं त्रिवेणी ब्लॉग के माध्यम से सम्पूर्ण विश्व को दिशा देते हुए नव लेखकों को प्रोत्साहित करना आसान कार्य नहीं है । बिखरे हुए ग्रंथों को समेटना , सम्पादित करना , प्रकाशित करना यह आपके श्रम की पराकाष्ठा का एक नायाब नमूना है ; सबसे बड़ी बात यह है  कि इस ग्रन्थ में संपादक का अपना कोई पृष्ठ नहीं है । इसमें आप  द्वय के योगदान एवं परिश्रम को नमन इस ग्रन्थ को कोई हाइकुकार पढ़े बिना सर्वथा अधूरा ही रहेगा ऐसा मेरा मानना है । एक अच्छे ग्रन्थ को पाठकों तक लाने के लिए – बधाई एवं साधुवाद स्वीकारिए ।

    हिन्दी हाइकु ,ताँका , सेदोका की विकास यात्रा एक परिशीलन: डॉ. सुधा गुप्ता; संयोजन:रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’ ;अयन प्रकाशन,1/20 महरौली , नई दिल्ली-110030;  संस्करण:2017; पृष्ठ:232 , मूल्य: 500रुपये.

-0- रमेश कुमार सोनी, बसना , छत्तीसगढ़-493554 ,मोबा.9424220209  

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Responses

  1. बहुत ही सारगर्भित है ये शोध ग्रन्थ; मुझे भी पढ़ने का अवसर मिला/ बधाई /

  2. Bahut sundar sudha didi wa aapko hardik badhai.
    Shashipurwar

  3. बहुत सुंदर समीक्षा। आ० सुधा दीदी, रमेश कुमार सोनी जी, भाई काम्बोज जी आप सभी को हार्दिक बधाई।

  4. निश्चित ही बहुत उपयोगी व बेहतरीन पुस्तक है। मैं भी इसे पढ़ रही हूँ। धन्यवाद।

  5. हाइकु ,ताँका ,सेदोका ,चोका रचनाओं के लोक में संचरण कराती विशिष्ट पुस्तक पर बहुत सुन्दर समीक्षा …हार्दिक बधाई ..सादर नमन !

  6. बहुत सुन्दर पुस्तक ,सारगर्भित समीक्षा …आ० सुधा जी ,रमेश कुमार सोनी जी ,काम्बोज जी आप सभी को हार्दिक बधाई!!

  7. बहुत सार्थक और सारगर्भित समीक्षात्मक आलेख है आपका…| आदरणीय सुधा जी और काम्बोज जी के साथ साथ आपको भी बहुत बधाई…|

  8. बहुत सुन्दर विधागत जानकारियों से अवगत कराता लेख । बधाई आदरणीया सुधा दी एवं रमेश सोनी जी बधाई ।


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