Posted by: डॉ. हरदीप संधु | जुलाई 8, 2017

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1-रचना श्रीवास्तव
1

शब्द रहित
भाव निहित होता
पिता का त्याग
2
पिता की बोली
अनुशासन -भरी
प्रेम- गागर
3
बादल पिता
चुपके से ढक ले
दर्द का सूर्य
-0-

2-मंजूषा मन

1

मिले ही नहीं

बिछड़े सौ- सौ बार

कैसा ये प्यार !

2

भूलें किसकी

जो मान ले अपनी,

बस उसकी।

3

छत टपकी

भीगे मन -आँगन

बरसे आँसू।

4

एक छतरी

रिमझिम फुहार

प्रेम बरसा।

-0-

3-रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

1

साँझ का गान

छूकरके अम्बर

सिन्धु में डूबा।

2

एकाकी मन

भीड़ भरा नगर

जाएँ किधर !

3

पाएँगे कैसे

हम तेरी खबर

तम है घना।

4

आ भी तो जाओ

सूने इस पथ में

दीप जलाओ।

-0-

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Responses

  1. सभी हाइकुकारों को सुन्दर – सामयिक हाइकु सृजन के लिए बधाई देता हूँ। हार्दिक शुभकामनाएँ ! – सुभाष चंद्र लखेड़ा

  2. पिता की बोली
    अनुशासन -भरी
    प्रेम- गागर

    रचना जी सभी हाइकु सुंदर हार्दिक बधाई।

  3. एक छतरी
    रिमझिम फुहार
    प्रेम बरसा।
    मंजूषा जी वाह बहुत सुंदर हाइकु..हार्दिक बधाई ।

  4. एकाकी मन
    भीड़ भरा नगर
    जाएँ किधर !
    आदरणीय भैया जी सभी हाइकु बहुत उम्दा ..आपकी लेखनी को शत -शत नमन

  5. बहुत ही सुंदर हाइकु पिता पर
    शब्द रहित
    भाव निहित होता
    पिता का त्याग
    हार्दिक बधाई रचना जी

  6. छत टपकी
    भींगे मन – आँगन
    बरसे आँसू
    सभी बेहतरीन हाइकु , हार्दिक बधाई मंजूषा जी

  7. आदरणीय भैया जी आपके सभी हाइकु बहुत ही बेहतरीन
    एकाकी मन
    भीड़ भरा नगर
    जाएँ किधर
    बहुत ही खूब

  8. अति सुंदर मन को छूते हाइकु।
    रचना जी, मंजूषा जी भाई हिमांशु जी को हार्दिक बधाई।

  9. आप सबने बहुत ह्रदयस्पर्शी हाइकु लिखे आपको बहुत बहुत शुभकामनाएँ

  10. रचना जी, मंजूषा जी और आदरणीय भैया को सुंदर दृजन के लिए बहुत-बहुत बधाई !

  11. पिता की बोली
    अनुशासन -भरी
    प्रेम- गागर ।
    रचना जी को बधाई । पिता पर सुन्दर
    एक छतरी
    रिमझिम फुहार
    प्रेम बरसा।
    मन जी के वर्षा के मधुमय हाइकु । बधाई लें मन जी ।

    आ .हिमांशु भाई के सभी हाइकु गूढ़ार्थ देते , सरस हाइकु हैं ।हार्दिक बधाई सुन्दर हाइकु रचना के लिये ।बागी देखें –
    साँझ का गान
    छूकरके अम्बर
    सिन्धु में डूबा।

  12. कितने मन भावन हाइकु आप सब के । बधाई ।

  13. अतीव सुंदर ! विशेषकर
    ” शब्द रहित …..
    ” एकाकी मन …..
    मर्म स्पर्शी !! सादर नमन !

  14. manjusha ji

    एक छतरी
    रिमझिम फुहार
    प्रेम बरसा।
    bahut sunder
    jisse haiku likhna sikha ho usko padhna sada hi bahut achchha lagta hai .aap ham sab ke guru hain .aapke sabhi haiku ek se badh kar ek hain
    badhai aapko aur anjusha ji ko
    rachana

  15. सभी रचनाकारों के शानदार हाइकु पढ़ने को मिले
    आ भी तो जाओ /सूने इस मन में /दीप जलाओ (रामेश्वर काम्बोज हिमांशु – भैया)
    छत टपकी/भीगे मन आाँगन/ बरसे आँसू(मँजूषा मन)
    बादल पिता/चुपके से ढक ले/दर्द का सूर्य (रचना श्रीवास्तव )
    ये हाइकु सीधे दिल में उतर गये —बधाई!


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