Posted by: डॉ. हरदीप संधु | जून 26, 2017

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ईद का चाँद

रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

1

मटक लिया

खुशबू से सिंचित।

पूरा वसन्त।                       

 2

आँखों से पिया

रुपहला वसन्त

मन न भरा।                       

3

ले लूँ बलाएँ

सारी की सारी जो भी

द्वारे पे आएँ।

4

ठिठका चाँद

झाँका जो खिड़की से

दूजा भी चाँद।

5

होगी जो भोर

और भी निखरेगा

मेरा ये चाँद।

6

नभ का चन्दा

भोर में लगे फीका

मेरा ये नीका।                                                

 7

सात पर्दों में

तुम को यों छिपालूँ

देखूँ मैं तुम्हें।

8

माथा तुम्हारा

मन में झिलमिल

ईद का चाँद ।

-0-

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Responses

  1. सात पर्दों में
    तुम को यों छिपालूँ
    देखूँ मैं तुम्हें।
    Ek se badhkar eak haiku likha hai aapne, chaand men bhi 4 chand laga diye aapko bahut bahut badhai.

  2. सभी हाइकु बहुत भाव पूर्ण

    पर ये हाइकु तो मन मोहक
    नभ के चाँद का खिड़की के चाँद को देख ठिठकना , क्या बात , अनूठी अभिव्यक्ति

    बधाई भैया

    ठिठका चाँद
    झाँका जो खिड़की से
    दूजा भी चाँद।

  3. नमन आदरणीय…बहुत खूब लिखा….

    दिखा है चाँद
    कलम की दीद से
    ईद मुबारक
    डॉ.पूर्णिमा राय….

  4. sabhi haiku bahut sundar hain bhai ji badhai .

    pushpa mehra

  5. माथा तुम्हारा
    मन में झिलमिल
    ईद का चाँद ।
    खूबसूरत चाँद पर सुन्दर हाइकु । बधाई हिमांशु भाई । सबको ईद मुबारक ।

  6. बहुत अच्छे उपमानों से सजे हाइकु, प्रेरक।

  7. सादर नमन भैया जी ..सभी हाइकु अति उत्तम भावपूर्ण ।
    माथा तुम्हारा
    मन में झिलमिल
    ईद का चाँद ।

    हार्दिक बधाई आदरणीय भैया जी ।

  8. सादर नमन भैया जी बेहद सुंदर हाइकु।
    सभी एक से एक ।
    हार्दिक बधाई ।

  9. सुंदर भावपूर्ण हाइकु। नमन।

  10. बहुत उम्दा हाइकु।
    हार्दिक बधाई आ० भाईसाहब।

  11. सभी हाइकु उत्कृष्ट….भाव और शिल्प सौंदर्य के अनुपम उदाहरण।

    आँखों से पिया
    रुपहला वसन्त
    मन न भरा।
    यह हाइकु तो सीधा मन में उतर गया।

  12. सभी हाइकु उत्कृष्ट….भाव और शिल्प सौंदर्य के अनुपम उदाहरण।

    आँखों से पिया
    रुपहला वसन्त
    मन न भरा।
    यह हाइकु तो सीधा मन में उतर गया।

  13. सभी हाइकु एक से बढ़कर एक सुन्दर. पर ये वाला कुछ ज्यादा ही प्यारा लगा…

    ठिठका चाँद
    झाँका जो खिड़की से
    दूजा भी चाँद।

    बहुत बधाई काम्बोज भैया.

  14. बेहतरीन हाइकु सृजन की बधाई ।
    रमेश कुमार सोनी , बसना , छत्तीसगढ़

  15. ठिठका चाँद
    झाँका जो खिड़की से
    दूजा भी चाँद।
    क्या बात है ! हाइकु तो सभी एक से बढ़ कर एक लगे, पर यह सबसे ज़्यादा भाया…|
    हार्दिक बधाई…|


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